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छत्तीसगढ़ में गन्ना ₹425/क्विंटल: 70 रुपये बढ़ा भाव, यूपी के किसानों की नजर अब 2026-27 SAP घोषणा पर — जानिए असर

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 10, 2026 • 6 min read
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छत्तीसगढ़ में गन्ना ₹425/क्विंटल: 70 रुपये बढ़ा भाव, यूपी के किसानों की नजर अब 2026-27 SAP घोषणा पर — जानिए असर
अंतिम अपडेट: October 10, 2026 1:15 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

छत्तीसगढ़ के गन्ना उत्पादक किसानों के लिए शनिवार 10 अक्टूबर को बड़ी खबर आई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने शक्कर कारखानों में गन्ने का खरीद मूल्य 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया है। यानी किसानों को अब प्रति क्विंटल 70 रुपये ज्यादा मिलेंगे। नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय किसान संघ (छत्तीसगढ़ प्रदेश) के प्रतिनिधिमंडल के साथ गहन चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है, और खास बात यह है कि पेराई सत्र 2025-26 में खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी बढ़ी हुई दर से ही किया जाएगा।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में गन्ने की नई कीमत (एसएपी 2026-27) की घोषणा का इंतजार हो रहा है और किसान संगठन 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल भाव की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी में हैं। छत्तीसगढ़ में एक बार में 70 रुपये की बढ़ोतरी ने यूपी के किसानों की उम्मीदें भी बढ़ा दी हैं।

क्या हुआ: छत्तीसगढ़ का फैसला

नई दुनिया की रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर को भारतीय किसान संघ छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में संगठन मंत्री मनीष शर्मा, महामंत्री नवीन शेष सहित अन्य पदाधिकारी और सदस्य शामिल थे। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा भी उपस्थित थे। भेंट के बाद सरकार ने गन्ने की खरीद दर 425 रुपये प्रति क्विंटल तय करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की खुशहाली ही समृद्ध छत्तीसगढ़ का आधार है। अब तक छत्तीसगढ़ में किसानों को 355 रुपये प्रति क्विंटल मिलते थे, यानी नई दर से 70 रुपये की सीधी बढ़ोतरी हुई है।

इस फैसले का एक और पहलू अहम है — 2025-26 के पेराई सत्र में खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी बढ़ी हुई दर पर होगा, यानी पुराने सीजन का बकाया भी नई दर से मिलेगा।

आंदोलन का दबाव काम कर गया

विस्तार न्यूज की रिपोर्ट बताती है कि यह फैसला यूं ही नहीं आया — इसके पीछे किसान आंदोलन का सीधा दबाव था। 8 अक्टूबर को भारतीय किसान संघ के आह्वान पर छत्तीसगढ़ में प्रदेशभर में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। कबीरधाम जिले में किसान ट्रैक्टर रैली निकालकर सड़कों पर उतरे और कई प्रमुख मार्गों पर चक्काजाम भी किया, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी।

किसानों की प्रमुख मांगों में गन्ने के मूल्य में बढ़ोतरी, बकाया भुगतान और कृषि से जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल थीं। आंदोलन के ठीक दो दिन बाद फैसला — इस क्रम से स्पष्ट है कि संगठित दबाव ने काम किया। किसान संघ का इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, इसलिए देखना बाकी है कि संगठन इस बढ़ोतरी को कितना पर्याप्त मानता है।

अब देश में गन्ना भाव कहां कितना

नई दुनिया की तुलना के मुताबिक, छत्तीसगढ़ की इस बढ़ोतरी के बाद देश में गन्ने का सबसे ज्यादा भाव देने वालों की सूची बदल गई है:

  • पंजाब: 485 रुपये प्रति क्विंटल (देश में सबसे ज्यादा)
  • छत्तीसगढ़: 425 रुपये प्रति क्विंटल (अब दूसरे नंबर पर)
  • हरियाणा: 415 रुपये प्रति क्विंटल
  • उत्तराखंड: 405 रुपये प्रति क्विंटल
  • उत्तर प्रदेश: 400 रुपये प्रति क्विंटल (SAP 2025-26, अगेती)
  • मध्य प्रदेश: लगभग 350 रुपये प्रति क्विंटल

ध्यान रहे कि छत्तीसगढ़ के 425 रुपये और पंजाब के 485 रुपये के आंकड़े संबंधित राज्य सरकारों की घोषणाओं के मुताबिक हैं, जबकि उत्तर प्रदेश का 400 रुपये का भाव एसएपी 2025-26 (अगेती किस्म) का है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए एफआरपी (FRP) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर आधारित है और 1 अक्टूबर 2026 से लागू है। यूपी में 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

उत्तर प्रदेश में स्थिति यह है कि मिलें 20 अक्टूबर के आसपास नया पेराई सत्र शुरू करने जा रही हैं, लेकिन 2026-27 सीजन का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है और 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना भवन पर विशाल पंचायत का ऐलान कर चुकी है। अमरोहा, हापुड़, बागपत और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में भी 600 रुपये की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए हैं।

ऐसे में छत्तीसगढ़ का उदाहरण दो बातें साफ करता है। पहला, जब किसान संगठन एकजुट होकर दबाव बनाता है तो सरकारें भाव बढ़ाने पर मजबूर होती हैं — छत्तीसगढ़ में 8 अक्टूबर के प्रदर्शन और 10 अक्टूबर के फैसले के बीच सिर्फ दो दिन का फासला था। दूसरा, भाव बढ़ाने के साथ पुराने बकाए पर भी नई दर लागू करने की मिसाल बनी है, जो यूपी के उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जिनका भुगतान महीनों से अटका है।

हालांकि एक फर्क समझना जरूरी है — छत्तीसगढ़ में गन्ना खेती का पैमाना यूपी से बहुत छोटा है और वहां कारखाने सीमित हैं, इसलिए एकमुश्त बढ़ोतरी का राजकोषीय बोझ यूपी जैसा नहीं होता। फिर भी, किसान नेताओं का तर्क है कि जब पंजाब 485 रुपये दे सकता है, तो देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य यूपी में भी सम्मानजनक बढ़ोतरी संभव है।

गन्ना भाव कैसे तय होता है: संक्षिप्त समझ

कई किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि गन्ने का भाव दो स्तरों पर तय होता है। केंद्र सरकार एफआरपी (फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस) तय करती है — 2026-27 के लिए यह 365 रुपये प्रति क्विंटल है और यह चीनी मिलों के लिए न्यूनतम कीमत है, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू है। इसके ऊपर राज्य सरकारें एसएपी (राज्य सलाहकारी मूल्य) घोषित करती हैं, जो एफआरपी से ज्यादा होता है। यूपी में एसएपी 2025-26 अगेती किस्म के लिए 400 रुपये था। 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है, और इसी घोषणा का किसानों को इंतजार है।

आपके सवाल

क्या छत्तीसगढ़ का बढ़ा हुआ भाव 425 रुपये सिर्फ इस सीजन के लिए है?

रिपोर्टों के मुताबिक, नई दर पर 2025-26 के पेराई सत्र में खरीदे गए गन्ने का भुगतान भी होगा। यानी फैसला पिछले सीजन के बकाए पर भी लागू होगा।

यूपी में एसएपी 2026-27 कब घोषित होगा?

अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पेराई सत्र 20 अक्टूबर के आसपास शुरू होने वाला है, और किसान संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल की है। 23 अक्टूबर को लखनऊ में प्रस्तावित पंचायत से पहले घोषणा की उम्मीद की जा रही है।

क्या आंदोलन से भाव बढ़ता है?

छत्तीसगढ़ का ताजा उदाहरण कहता है कि हां। 8 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन हुआ और 10 अक्टूबर को 70 रुपये की बढ़ोतरी घोषित हो गई। लेकिन हर राज्य की आर्थिक स्थिति और राजनीतिक समीकरण अलग होता है।

एफआरपी और एसएपी में क्या अंतर है?

एफआरपी केंद्र सरकार का तय न्यूनतम भाव है (2026-27 में 365 रुपये), जिसे मिलों को चुकाना ही होगा। एसएपी राज्य सरकार द्वारा तय अतिरिक्त सलाहकारी मूल्य है, जो आमतौर पर एफआरपी से ज्यादा होता है। यूपी में एसएपी ही किसानों के लिए वास्तविक भाव होता है।

स्रोत: नई दुनिया (रायपुर, 10 अक्टूबर 2026) और विस्तार न्यूज (10 अक्टूबर 2026) की रिपोर्टें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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