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चीनी ₹55 किलो से ऊपर: 1 साल में 19% महंगी, गुड़ ₹600-700 टूटा — किसान गन्ना मिल को दें या कोल्हू को?

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 10, 2026 • 7 min read
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चीनी ₹55 किलो से ऊपर: 1 साल में 19% महंगी, गुड़ ₹600-700 टूटा — किसान गन्ना मिल को दें या कोल्हू को?
अंतिम अपडेट: October 10, 2026 2:41 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

देश के खुदरा बाजार में चीनी की कीमत ₹55.21 प्रति किलो तक पहुंच गई है — एक साल पहले अक्टूबर 2025 में यही चीनी ₹46.49 किलो बिक रही थी, यानी सिर्फ 12 महीने में 19 प्रतिशत की तेजी। सरकारी आंकड़े खुद यह कहानी सुना रहे हैं। त्योहारी सीजन की मांग, घटा हुआ उत्पादन और कड़ी स्टॉक स्थिति ने चीनी के भाव को उस मुकाम पर ला खड़ा किया है जो पहले कभी नहीं देखा गया। वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मंडियों में गुड़ के भाव एक ही झटके में ₹600-700 प्रति क्विंटल टूट गए हैं। चीनी टिकी और गुड़ टूटा — ऐसे में गन्ना किसान के सामने बड़ा सवाल है: गन्ना मिल को दें या कोल्हू को?

कितनी महंगी हुई चीनी: सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 8 अक्टूबर 2026 को खुदरा चीनी का भाव ₹55.21 प्रति किलो रहा, जो 8 अक्टूबर 2025 के ₹46.49 की तुलना में 18.8 प्रतिशत ज्यादा है। 8 अक्टूबर 2021 को चीनी ₹42.18 प्रति किलो थी, उसके बाद पांच साल तक भाव अपेक्षाकृत स्थिर रहे और फिर पिछले एक साल में तेज उछाल आया।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की 9 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार खुदरा चीनी ₹55.34 प्रति किलो पर पहुंची, जो एक साल पहले की तुलना में 19 प्रतिशत ज्यादा है। अगस्त में चीनी की कीमतों में तेज उछाल 2025-26 सीजन में उत्पादन में गिरावट की वजह से आया था।

दिल्ली क्षेत्र में मिल-स्तर और स्पॉट चीनी की कीमतों में 7 अक्टूबर के आसपास लगभग ₹25-50 प्रति क्विंटल की मजबूती देखी गई, क्योंकि त्योहारी मांग बेहतर हुई और मिलों ने भाव बढ़ाए। इसके उलट, नई पेराई शुरू होने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मंडियों में भारी आवक से गुड़ के भाव लगभग ₹600-700 प्रति क्विंटल टूट गए।

भाव क्यों बढ़ रहे हैं: पांच वजहें सरकार ने खुद मानीं

खाद्य मंत्रालय ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे पांच कारकों को जिम्मेदार ठहराया है — प्रतिकूल मौसम से उत्पादन में अपेक्षित से बड़ी गिरावट, त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग, कसे हुए वैश्विक स्टॉक और व्यापार के कुछ वर्गों की सट्टेबाजी व जमाखोरी।

उत्पादन का आंकड़ा चिंता की जड़ है। बिजनेस स्टैंडर्ड की 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 सीजन का चीनी उत्पादन अब 30.6 मिलियन टन आंका जा रहा है, जबकि पहले का अनुमान 34.3 मिलियन टन था — कीट-रोग और जलभराव ने उत्पादन काटा है। मिलें अक्टूबर में लगभग 3 से 3.5 मिलियन टन के स्टॉक के साथ प्रवेश कर रही हैं, जबकि मासिक खपत करीब 2.2 मिलियन टन है — स्थिति कसी हुई है, हालांकि कमी का संकट नहीं है।

महाराष्ट्र में सूखे का संकट भी चीनी बाजार को तंग कर रहा है। मराठवाड़ा में 35 प्रतिशत बारिश की कमी से फसल नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र सरकार की टीम मौके पर है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में उत्पादन घटने की खबर के बीच बिजनौर की चीनी मिलों ने घरेलू बाजार के लिए चीनी उत्पादन पर ही ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है।

सरकार ने क्या कदम उठाए: आयात, स्टॉक सीमा और जल्दी पेराई

भावों को काबू करने के लिए केंद्र सरकार ने कई उपाय किए हैं — 31 अक्टूबर तक 1 मिलियन टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात, डीलरों और बड़े उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक सीमा, 15 अक्टूबर के आसपास जल्दी पेराई और सितंबर से पाक्षिक रिलीज कोटा।

चीनी के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) ₹31 प्रति किलो पर अपरिवर्तित बना हुआ है, हालांकि इस पर दोबारा दबाव बढ़ रहा है — महाराष्ट्र की राज्य सरकार ने अगस्त 2026 में इसे बढ़ाकर ₹41 प्रति किलो करने की मांग की थी। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि भाव अभी चरम के करीब हैं और सरकार भाव नियंत्रण में आक्रामक रहेगी।

यह जानना किसानों के लिए जरूरी है कि सरकार ने स्पष्ट कहा है कि एथेनॉल डायवर्जन चीनी की महंगाई की मुख्य वजह नहीं है। गन्ना उद्योग लगभग पांच करोड़ किसानों की आजीविका और मिलों में लगभग पांच लाख नौकरियों को सहारा देता है — इसलिए चीनी की सेहत सीधे किसानों की जेब से जुड़ी है।

गुड़ टूटा, चीनी टिकी: किसान के लिए कौन सा रास्ता बेहतर

पश्चिमी यूपी के किसानों के लिए सबसे व्यावहारिक सवाल यही है — गन्ना मिल को भेजें या कोल्हू को। मौजूदा आंकड़े मिल के पक्ष में बोलते दिख रहे हैं। गुड़ के भाव नई पेराई की शुरुआत और मंडियों में भारी आवक से ₹600-700 प्रति क्विंटल टूट चुके हैं, जबकि चीनी के मिल-स्तर भाव ₹25-50 प्रति क्विंटल चढ़े हैं।

याद रहे कि इसी चुनावी साल में कोल्हू मालिकों ने गन्ना ₹500 प्रति क्विंटल तक खरीदा था। लेकिन अक्टूबर में गुड़ की आवक बढ़ते ही भाव टूटे हैं और कोल्हू की खरीद क्षमता कमजोर होती है। किसानों को सलाह है कि अपने इलाके की मंडी के ताजा भाव पता करके ही फैसला लें — गुड़ भाव अगर और टूटते हैं तो मिल की पर्ची वाला रास्ता सुरक्षित रहेगा।

मिलों की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं। पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, सीतापुर की मिलों ने लगभग 80 प्रतिशत मेंटेनेंस पूरा कर लिया है और नवंबर की शुरुआत में पेराई संभव है। जल्द पेराई से खेत समय पर खाली होंगे और गेहूं की बुवाई का मौका मिलेगा।

गन्ना भाव पर असर: ₹600 की मांग को मिलेगा बल?

चीनी के भाव जब तेज होते हैं, तो गन्ना किसानों की भाव बढ़ाने की मांग को स्वाभाविक बल मिलता है। किसान संगठन ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग उठा रहे हैं, जबकि यूपी में पेराई सत्र 2025-26 का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था। पेराई सत्र 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

उधर चेतावनी भी आ रही है — मौसम विज्ञान संगठन के मुताबिक बढ़ती जल-कमी और सूखे जैसी स्थिति 2027 की शुरुआत में मिलिंग को जटिल बना सकती है, जिससे गन्ने की उपज और चीनी रिकवरी दोनों पर असर पड़ेगा। अल नीनो का डर पहले ही अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार को मजबूती दे रहा है, कच्ची चीनी के भाव 18 सेंट प्रति पाउंड के ऊपर चल रहे हैं।

किसानों को सलाह है कि वे अपने गन्ना सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाते और समिति सदस्यता की स्थिति तुरंत ठीक कर लें। चीनी भाव तेज होने का फायदा तभी मिलेगा जब पेराई शुरू होते ही गन्ना समय पर मिल तक पहुंचे और भुगतान में देरी न हो। देर से भुगतान पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का कानूनी हक अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से और मजबूत हो चुका है।

पूछे जाने वाले प्रश्न

चीनी का मौजूदा खुदरा भाव क्या है? उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 8 अक्टूबर 2026 को चीनी का औसत खुदरा भाव ₹55.21 प्रति किलो रहा, जो एक साल पहले से लगभग 19 प्रतिशत ज्यादा है।

गुड़ के भाव क्यों टूटे हैं? पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नई पेराई शुरू होने से मंडियों में गुड़ की भारी आवक हुई है, जिससे मांग की तुलना में आपूर्ति ज्यादा हो गई और भाव ₹600-700 प्रति क्विंटल टूट गए।

गन्ना मिल को देना बेहतर होगा या कोल्हू को? मौजूदा बाजार संकेत मिल के पक्ष में हैं — गुड़ भाव टूटे हैं और चीनी भाव स्थिर-तेज हैं। फिर भी अपने इलाके की मंडी के ताजा भाव जरूर पता करें और पर्ची वाले सुरक्षित रास्ते को प्राथमिकता दें।

क्या चीनी महंगी होने से गन्ना भाव बढ़ेगा? ऐतिहासिक तौर पर चीनी भाव तेज होने पर किसानों की भाव-बढ़ोतरी की मांग मजबूत होती है। किसान संगठन ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं, जबकि 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

सरकार ने चीनी भाव काबू करने के लिए क्या किया? 31 अक्टूबर तक 1 मिलियन टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात, डीलरों पर स्टॉक सीमा, जल्दी पेराई (15 अक्टूबर के आसपास) और पाक्षिक रिलीज कोटा जैसे कदम उठाए गए हैं।

स्रोत: एनडीटीवी (9 अक्टूबर 2026), फाइनेंशियल एक्सप्रेस (9 अक्टूबर 2026), बिजनेस स्टैंडर्ड (6 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी (10 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिजनेसलाइन।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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