चीनी ₹700 प्रति क्विंटल उछली, बरकातपुर की नई चीनी ₹5,400 में बिकी: कम रिकवरी से पेराई टाल रहीं मिलें, किसानों को क्या मिलेगा

नवंबर के पहले पखवाड़े में ही चीनी के बाजार में बड़ा उछाल आ गया है। दाम एक साथ करीब ₹700 प्रति क्विंटल तक बढ़ गए हैं। बिजनौर की बरकातपुर मिल की नए सत्र की चीनी ₹5,400 प्रति क्विंटल में तय हुई है, जबकि द्वारिकेश ग्रुप की पिछले सत्र की चीनी ₹5,100 प्रति क्विंटल में बिकी है। यानी नई चीनी का भाव पुरानी से ₹300 प्रति क्विंटल ज्यादा खुला है। यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब ज्यादातर मिलें पेराई शुरू करने में देरी कर रही हैं और गन्ने की रिकवरी भी कम आ रही है।
किसानों के लिए यह खबर दो तरह का संकेत है। एक तरफ तेज भाव से मिलों की कमाई बढ़ेगी, जिससे गन्ना भुगतान सुधरने की उम्मीद है। दूसरी तरफ कम रिकवरी से मिलें पेराई शुरू करने में हिचक रही हैं, जिससे कुछ इलाकों में आपूर्ति में देरी हो सकती है। नीचे पूरी तस्वीर समझिए।
₹700 का उछाल: भाव कहां से कहां पहुंचे
मिलों की टलती पेराई और कम रिकवरी का सीधा असर दामों पर पड़ा है। उत्तर प्रदेश की थोक मंडियों में चीनी का भाव पहले ₹4,800 प्रति क्विंटल के आसपास था, जो अब बढ़कर ₹5,700 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। त्योहारी मांग के बीच नई चीनी की आवक कम रही और भाव चढ़ गए।
स्थानीय बाजार में यूपी की नई चीनी अभी पूरी तरह नहीं पहुंची है और मिलों के गोदाम पिछले सत्र की चीनी से खाली हो रहे हैं। ऐसे में नई चीनी की पहली खेप ऊंचे भाव पर बिकी है। जब तक ज्यादातर मिलों की पेराई शुरू नहीं हो जाती, भाव में नरमी की उम्मीद कम है।
बरकातपुर में रिकवरी सिर्फ 7.70 प्रतिशत
इस तेजी की सबसे बड़ी वजह गन्ने से कम चीनी निकलना है। बरकातपुर मिल में रिकवरी सिर्फ 7.70 प्रतिशत आ रही है, यानी प्रति क्विंटल गन्ने से आठ किलोग्राम से भी कम चीनी बन रही है। बारिश से गन्ने में चीनी की मात्रा घटी है, जिससे मिलों की लागत बढ़ गई है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी रिकवरी करीब 1.30 प्रतिशत तक कम आ रही है। यही वजह है कि कई मिलें पेराई शुरू करते हुए डर रही हैं। बरकातपुर मिल के संयुक्त अध्यक्ष नरपत सिंह ने कहा है कि अभी मिल चलाने में घाटा है, लेकिन किसानों के हित में पेराई निर्बाध जारी रहेगी।
सरकार ने नवंबर के पहले पखवाड़े का कोटा घटाया
केंद्र सरकार ने नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए चीनी मिलों का बिक्री कोटा घटाकर 1.30 करोड़ क्विंटल कर दिया है। सितंबर-अक्टूबर में त्योहारी सीजन के लिए अतिरिक्त कोटा दिया गया था, लेकिन अब खपत पूरी होने पर कोटा करीब 30 लाख क्विंटल कम हुआ है। इस पखवाड़े में यूपी की मिलें 41 लाख क्विंटल से अधिक चीनी बेचेंगी।
कोटा घटने से बाजार में चीनी की आमद नियंत्रित रहती है, जिससे भाव को सहारा मिलता है, लेकिन मिलों की बिक्री सीमित रहने से नकदी प्रवाह पर असर पड़ता है। बिजनौर में अगस्त में चीनी ₹6,000 प्रति क्विंटल तक पहुंची थी, लेकिन अतिरिक्त कोटे के बाद दाम नियंत्रण में आ गए थे। अब कोटा घटने और नई चीनी की कम आवक ने फिर भाव को ऊपर धकेल दिया है।
पेराई में देरी क्यों
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र की शुरुआत धीमी रही है। प्रदेश में अब तक 9 चीनी मिलों में पेराई शुरू हुई है और 33 मिलों ने गन्ना खरीद के लिए इंडेंट जारी किए हैं। कई मिलों ने पेराई तारीखें आगे बढ़ाई हैं, क्योंकि बारिश से रिकवरी घटी है और कम रिकवरी पर मिल चलाना घाटे का सौदा बन रहा है।
बागपत की मलकपुर मिल में पहले दिन पेराई शुरू हुई, उसके बाद मोदीनगर, बुलंदशहर, साबितगढ़ और मोरना की मिलों ने पेराई शुरू की। दो नवंबर को मवाना, दौराला, नंगला मल, रमाला, अनामिका और धामपुर में पेराई होनी थी, लेकिन बारिश से कई जगह कार्यक्रम टला। किनौनी, सकौती, मोहिउद्दीनपुर और टिकौला मिलें 4 से 7 नवंबर के बीच शुरू होंगी। पेराई में देरी से पर्ची और आपूर्ति का कार्यक्रम भी खिसकता है और गन्ना खेत में ज्यादा दिन खड़ा रहता है।
किसानों के लिए इसका मतलब क्या है
चीनी के तेज भाव का सबसे बड़ा फायदा भुगतान में दिख सकता है। मिल को चीनी ऊंचे दाम पर बिकने से भुगतान के लिए ज्यादा नकदी मिलती है। बिजनौर की 10 मिलों में से 9 ने पिछले सत्र का पूरा भुगतान कर दिया है, सिर्फ बिलाई मिल पर बकाया लंबित है।
लेकिन एक चेतावनी भी है। 2026-27 सत्र के गन्ना मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। जब तक नया एसएपी घोषित नहीं होता, किसान पुराने भाव के हिसाब से ही भुगतान की उम्मीद रखें। पिछले सत्र का एसएपी 2025-26 के लिए ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था, लेकिन इसे इस सत्र का भाव मानना गलत होगा। किसान संगठनों ने ₹500 प्रति क्विंटल तक भाव बढ़ाने की मांग की है, लेकिन सरकार की ओर से अभी कोई फैसला नहीं आया है।
किसान अब क्या करें — पांच जांच
- पर्ची और इंडेंट: अपने क्रय केंद्र का इंडेंट जारी हुआ है या नहीं, गन्ना समिति या ई-गन्ना ऐप से जांच लें।
- तौल पर्ची संभालकर रखें: हर ट्रॉली की तौल पर्ची और आपूर्ति रसीद अपने पास रखें।
- रिकवरी को भाव से न जोड़ें: कम रिकवरी मिल की समस्या है, किसान के भाव पर इसका सीधा असर नहीं पड़ता।
- बकाया की स्थिति जांचें: पिछले सत्र का बकाया बाकी है तो जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय या आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
- खेत के गन्ने का ध्यान रखें: पेराई में देरी हो तो कटाई का कार्यक्रम क्रय केंद्र से तालमेल करके बनाएं, ताकि गन्ना सूखे नहीं।
आगे क्या देखना होगा
आने वाले एक-दो हफ्ते में तीन बातों पर नजर रहेगी: एसएपी 2026-27 की घोषणा, ज्यादा मिलों के शुरू होने पर भाव में नरमी, और रिकवरी में सुधार। अगर रिकवरी 9 प्रतिशत के आसपास पहुंचती है, तो मिलों का घाटा कम होगा और पेराई की रफ्तार बढ़ेगी।
पूछे जाने वाले प्रश्न
चीनी के दाम कितने बढ़े हैं? नवंबर के पहले पखवाड़े में चीनी के दाम करीब ₹700 प्रति क्विंटल बढ़ गए हैं। बरकातपुर मिल की नई चीनी ₹5,400 और द्वारिकेश ग्रुप की पिछले सत्र की चीनी ₹5,100 प्रति क्विंटल में बिकी है।
गन्ने की रिकवरी कम क्यों आ रही है? बारिश से गन्ने में चीनी की मात्रा घटी है। बरकातपुर में रिकवरी सिर्फ 7.70 प्रतिशत है, यानी एक क्विंटल गन्ने से 8 किलो से भी कम चीनी बन रही है। महाराष्ट्र-कर्नाटक में भी रिकवरी करीब 1.30 प्रतिशत तक कम है।
नवंबर के पहले पखवाड़े के लिए चीनी का बिक्री कोटा कितना है? कोटा घटाकर 1.30 करोड़ क्विंटल कर दिया गया है। इसमें यूपी की मिलें 41 लाख क्विंटल से अधिक चीनी बेचेंगी।
क्या 2026-27 सत्र का एसएपी घोषित हो गया है? नहीं, 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र (2025-26) का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था, लेकिन इसे इस सत्र का भाव नहीं माना जा सकता।
चीनी के तेज भाव से किसानों को क्या फायदा होगा? चीनी ऊंचे दाम पर बिकने से मिलों के पास ज्यादा नकदी आएगी, जिससे भुगतान की रफ्तार बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन पूरा फायदा तभी मिलेगा, जब मिलें समय पर पेराई करें।
स्रोत: दैनिक जागरण (बिजनौर, 4 नवंबर 2026), दैनिक जागरण (चीनी कोटा, 2 नवंबर 2026), सीएनबीसी आवाज़ (3 नवंबर 2026), किसान तक (4 नवंबर 2026)
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