14 लाख टन चीनी कोटा जारी: 1 अक्टूबर से नया चीनी सीजन शुरू, पश्चिमी यूपी में 20 अक्टूबर से पेराई — किसानों के 3 बड़े फायदे

आज 1 अक्टूबर से नया चीनी सीजन 2026-27 शुरू हो गया है, और पहले ही दिन गन्ना किसानों के लिए दो बड़ी खबरें आई हैं। केंद्र सरकार ने 1 से 15 अक्टूबर के लिए 14 लाख टन चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा जारी कर दिया है — सितंबर से ज्यादा। वहीं पश्चिमी यूपी की चीनी मिलें इस बार पिछले साल से करीब 10 दिन पहले, 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं।
इन दोनों फैसलों का सीधा असर गन्ने की बिक्री, भुगतान की रफ्तार और खेत खाली होने के समय पर पड़ेगा। समझते हैं कि केंद्र का फैसला क्या कहता है और किसानों को अभी क्या तैयारी करनी चाहिए।
केंद्र ने 14 लाख टन चीनी कोटा जारी किया: फैसला क्या कहता है
बुधवार (30 सितंबर) को खाद्य मंत्रालय ने 1 से 15 अक्टूबर के बीच घरेलू बाजार में बेचने के लिए 14 लाख टन (1.40 मिलियन टन) चीनी का कोटा तय किया है, जिसमें 1 लाख टन स्टैंडअलोन रिफाइनरों के हिस्से का है। सितंबर में शुरू हुई पखवाड़ा-आधारित कोटा प्रणाली का यह तीसरा आवंटन है — सितंबर के पहले पखवाड़े में 13 लाख टन और दूसरे में 13.50 लाख टन का कोटा मिला था। यानी इस बार कोटा बढ़ाया गया है।
आदेश में दो अहम शर्तें हैं। पहली — मिलों को पहले सप्ताह में अपने कोटे का कम से कम 45 फीसदी बेचना अनिवार्य होगा, बाकी दूसरे सप्ताह में। दूसरी — जो मिलें अक्टूबर में पेराई शुरू करेंगी, वे कोटे के अलावा अक्टूबर-नवंबर में किसी भी समय अतिरिक्त चीनी बेच सकेंगी। यह जल्दी पेराई का सीधा प्रोत्साहन है — मिल जितनी जल्दी चलेगी, उतनी जल्दी नकदी आएगी, और नकदी आएगी तो किसानों का भुगतान भी तेज होगा।
कोटा बढ़ाने के पीछे त्योहारी मांग है — नवरात्रि, दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली में चीनी की खपत साल के सबसे ऊंचे स्तर पर रहती है। राज्यवार बंटवारे में महाराष्ट्र को 4.39 लाख टन, उत्तर प्रदेश को 4.18 लाख टन और कर्नाटक को 2.20 लाख टन मिला है; तीनों को मिलाकर 10.77 लाख टन — कुल आवंटन का 83 फीसदी। यूपी का 4.18 लाख टन कोटा यहां की मिलों के लिए सीजन की पहली बड़ी नकदी का रास्ता खोलेगा।
पश्चिमी यूपी में 20 अक्टूबर से पेराई: पिछले साल से 10 दिन पहले
बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की चीनी मिलों ने पेराई सीजन 2026-27 की तैयारी तेज कर दी है। बायलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरे हो जाएंगे, और मौसम साथ रहा तो 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू हो जाएगी — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले।
सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के अनुसार, यूपी की 122 चीनी मिलों में से कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं। उन्होंने कहा कि इस बार पेराई पिछले साल से 10 दिन पहले शुरू हो सकती है, हालांकि अंतिम फैसला मौसम पर निर्भर करेगा। अक्टूबर के पहले सप्ताह में गन्ना क्रय केंद्रों की व्यवस्था भी तय कर दी जाएगी।
जल्दी पेराई की मांग किसान संगठन लंबे समय से कर रहे थे — 22 सितंबर को बिजनौर महापंचायत में सरदार वीएम सिंह के नेतृत्व में मिलों को जल्दी खोलने की मांग उठी थी। 20 अक्टूबर की संभावित शुरुआत इसी मांग की दिशा में एक कदम है।
किसानों के लिए 3 सीधे फायदे
पहला फायदा — खेत जल्दी खाली, गेहूं की बुवाई समय पर: पेराई 10 दिन पहले शुरू होने से गन्ना जल्दी कटकर मिल पहुंचेगा और खेत जल्दी खाली होंगे। रबी की फसल — खासकर गेहूं — की बुवाई सही समय पर हो सकेगी। हर दिन की बचत मायने रखती है।
दूसरा फायदा — भुगतान का चक्र जल्दी शुरू: अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली मिलों को कोटे के अलावा अतिरिक्त चीनी बेचने की छूट मिली है। मिलों के पास सीजन की शुरुआत में ही नकदी आएगी, तो गन्ने का भुगतान भी जल्दी शुरू होगा — लंबे इंतजार की नौबत नहीं आएगी।
तीसरा फायदा — त्योहारी सीजन में स्थिर बाजार: 14 लाख टन के बढ़े कोटे से बाजार में चीनी की आपूर्ति बनी रहेगी। आपूर्ति स्थिर रहेगी तो कीमतों में अचानक उछाल नहीं आएगा, और मिलों को चीनी बेचने में दिक्कत नहीं होगी। स्थिर बाजार का फायदा गन्ना भुगतान की नियमितता के रूप में किसानों तक पहुंचता है।
पेराई शुरू होने से पहले ये 4 काम निपटा लें
- गन्ना सर्वे रिकॉर्ड जांच लें: सर्वे में दर्ज रकबा और किस्म सत्यापित कर लें। गलत रिकॉर्ड पर्ची और भुगतान में देरी की सबसे बड़ी वजह है।
- बैंक खाता सक्रिय रखें: भुगतान सीधे खाते में आता है। खाता सक्रिय और पहचान पत्र से जुड़ा हो, वरना भुगतान अटक सकता है।
- कच्चा कैलेंडर देख लें: 2026-27 का कच्चा कैलेंडर जारी हो चुका है। अपना सट्टा और पर्चियों का ब्योरा अभी जांच लें।
- क्रय केंद्र की जानकारी रखें: अपने इलाके के क्रय केंद्र की व्यवस्था अक्टूबर के पहले सप्ताह में तय होगी। केंद्र प्रभारी और तौल की जानकारी पहले से रखें।
भाव का सवाल: एफआरपी लागू, एसएपी पर फैसला बाकी
किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल भाव का है। केंद्र का एफआरपी 2026-27 सीजन के लिए ₹365 प्रति क्विंटल 1 अक्टूबर से लागू हो गया है। लेकिन उत्तर प्रदेश का राज्य परामर्शी मूल्य (एसएपी) 2026-27 के लिए अभी घोषित नहीं हुआ है — इसकी घोषणा अभी बाकी है। पिछले सीजन 2025-26 का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती किस्म) था, लेकिन वह दर नए सीजन पर स्वतः लागू नहीं होगी।
किसान संगठन एसएपी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं — हापुड़ की गन्ना समिति बैठक में ₹500 प्रति क्विंटल और बिजनौर महापंचायत में लागत के हिसाब से भाव की मांग उठी थी। सरकार की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। नई घोषणा होते ही हम सबसे पहले बताएंगे।
पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 14 लाख टन चीनी कोटा किसानों के लिए क्यों अहम है? उत्तर: सरकार हर पखवाड़े तय करती है कि मिलें घरेलू बाजार में कितनी चीनी बेच सकती हैं। कोटा ज्यादा होने से मिलों के पास ज्यादा नकदी आती है और गन्ने का भुगतान तेजी से होता है।
प्रश्न 2: पश्चिमी यूपी में पेराई कब से शुरू होगी? उत्तर: बायलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले सप्ताह तक पूरे होंगे। मौसम अनुकूल रहा तो 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू हो सकती है — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले।
प्रश्न 3: अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली मिलों को क्या छूट मिली है? उत्तर: खाद्य मंत्रालय के आदेश के अनुसार, अक्टूबर में पेराई शुरू करने वाली मिलें तय कोटे के अलावा अक्टूबर-नवंबर में किसी भी समय अतिरिक्त चीनी बेच सकेंगी। यह जल्दी पेराई का प्रोत्साहन है।
प्रश्न 4: क्या 2026-27 का गन्ना भाव (एसएपी) घोषित हो गया है? उत्तर: नहीं। यूपी सरकार ने 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी नहीं की है। केंद्र का एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल 1 अक्टूबर से लागू हो गया है। एसएपी की घोषणा होते ही जानकारी दी जाएगी।
प्रश्न 5: पेराई से पहले किसान सबसे जरूरी क्या करें? उत्तर: गन्ना सर्वे रिकॉर्ड (रकबा और किस्म) सत्यापित करें, बैंक खाता सक्रिय और पहचान पत्र से जुड़ा रखें, और कच्चा कैलेंडर 2026-27 में अपना सट्टा जांच लें। यही तीन काम भुगतान की देरी रोकते हैं।
स्रोत: The Hindu BusinessLine (30 सितंबर 2026), CNBC TV18 (30 सितंबर 2026), The Times of India (28 सितंबर 2026), ChiniMandi (30 सितंबर 2026)
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