65 रुपये वाली चीनी अब 52-55 रुपये: थोक दाम 25-30% गिरे, दिवाली से पहले और सस्ती हो सकती है, किसानों पर दोहरा असर

बाजार से चीनी लेकर लौटते वक्त अगर आपकी जेब में पिछले महीने से कुछ ज्यादा पैसे बचे हैं, तो चौंकिए मत। जो चीनी एक महीने पहले 65 रुपये किलो तक बिक रही थी, वह अब उत्तर प्रदेश की मंडियों में 52 से 55 रुपये किलो में मिल रही है। थोक मंडियों में गिरावट 25 से 30 प्रतिशत तक दर्ज हुई है, और उद्योग का कहना है कि दिवाली तक दाम और नीचे आ सकते हैं।
गन्ना किसानों के लिए यह खबर दोतरफा है। एक तरफ उपभोक्ता के तौर पर राहत है, दूसरी तरफ यह सवाल भी है कि चीनी के दाम गिरने से मिलों की कमाई घटेगी तो 2026-27 के नए पेराई सत्र में गन्ना भुगतान पर क्या असर पड़ेगा।
थोक दाम में 25 से 30 प्रतिशत की गिरावट
इस्मा के मुताबिक, चीनी की एक्स-मिल कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। इस्मा के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने आईएएनएस से बातचीत में बताया कि पूरे देश में एक्स-मिल चीनी का औसत भाव अब करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल है। सरकार और चीनी उद्योग मिलकर त्योहारों में उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी दिलाने की दिशा में काम कर रहे हैं, और घरेलू त्योहारी मांग के लिए बाजार में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।
थोक मंडी के सस्ते रेट का असर खुदरा दुकानों तक पहुंचने में आमतौर पर थोड़ा समय लगता है, क्योंकि मिल से निकलने के बाद चीनी कई स्तरों से होकर ग्राहक तक पहुंचती है। लेकिन इस्मा का कहना है कि खुदरा बाजारों में भी चीनी की कीमतें घटने लगी हैं और आने वाले हफ्तों में और कमी की उम्मीद है।
यूपी की दुकानों पर अब क्या भाव
समाचार वार्ता की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश के वाराणसी, लखनऊ और गोंडा बेल्ट में फुटकर बाजार में चीनी अब 52 से 55 रुपये प्रति किलो मिल रही है। एक हफ्ते पहले यही चीनी 58 रुपये किलो थी और एक महीने पहले 65 रुपये किलो तक पहुंच गई थी।
थोक मंडी में गिरावट और तेज है। विश्वेश्वरगंज जैसी बड़ी थोक मंडियों में भाव 6,400 रुपये प्रति क्विंटल से गिरकर 5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। एक्स-मिल रेट महाराष्ट्र में 4,300 से 4,400 रुपये और उत्तर प्रदेश में 4,500 से 4,600 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जो पिछले साल से 25 से 30 प्रतिशत कम है।
दाम नीचे लाने के पीछे सरकार के चार बड़े कदम
1. सितंबर का सख्त रिलीज ऑर्डर: केंद्र सरकार ने सितंबर 2026 के मासिक रिलीज ऑर्डर में सभी चीनी मिलों को 40 प्रतिशत कोटा 22 सितंबर तक और बाकी 60 प्रतिशत 30 सितंबर तक बाजार में बेचना अनिवार्य किया। इससे मिलों ने स्टॉक रोकना बंद कर दिया और बाजार में सप्लाई बढ़ गई।
2. व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट: जीके टुडे के अनुसार केंद्र सरकार ने 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक देशभर के चीनी व्यापारियों पर स्टॉकहोल्डिंग सीमा लागू की है। कोई भी डीलर एक बार में 4,000 क्विंटल यानी 400 टन से ज्यादा चीनी नहीं रख सकेगा, और खेप मिलने के 30 दिन के अंदर उसे बेचना होगा। यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 और शुगर कंट्रोल ऑर्डर 2025 के तहत 28 जुलाई 2026 को जारी हुआ था।
3. बड़ी कंपनियों की सीमा दोगुनी, पर शर्त के साथ: हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े खरीदारों को अब 15 दिनों के बजाय 30 दिनों का स्टॉक रखने की मंजूरी मिली है। शर्त यह है कि 15 दिनों से ज्यादा का अतिरिक्त स्टॉक सिर्फ आयातित चीनी से पूरा होगा। कंपनियों को हर शुक्रवार अपने ऑनलाइन पोर्टल पर स्टॉक की जानकारी देना भी अनिवार्य किया गया है।
4. खुदरा तक फायदा पहुंचाने का निर्देश: खाद्य सचिव ने चीनी निर्माताओं और व्यापारिक संगठनों के साथ बैठक में कहा कि मिलों से चीनी के थोक भाव में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, लेकिन खुदरा बाजार में आम ग्राहकों को इसका सिर्फ 10 प्रतिशत ही फायदा मिला है। सरकार ने थोक दरों में आई कमी का पूरा फायदा तुरंत उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का निर्देश दिया।
किसानों पर दोहरा असर: राहत भी, चिंता भी
राहत वाली तरफ: किसान खुद भी उपभोक्ता हैं। दिवाली से पहले मिठाई और घरेलू इस्तेमाल की चीनी सस्ती मिलना सीधी राहत है, त्योहारों के मौसम में रसोई का बजट हल्का होना अच्छी खबर है।
चिंता वाली तरफ: चीनी के थोक दाम गिरने का मतलब है मिलों की कमाई घट रही है, और मिलों की कमाई ही गन्ना भुगतान की नींव है। विदा हो रहे 2025-26 सत्र में सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना भुगतान पूरा हो चुका है, पर नया सत्र 2026-27 आज 1 अक्टूबर से शुरू हो गया है, और इसी सत्र से गन्ने का एफआरपी बढ़कर 365 रुपये प्रति क्विंटल लागू हो गया है।
यानी मिलों को किसानों को भाव ज्यादा देना है, पर चीनी बेचकर मिलने वाला पैसा घट रहा है। अगर थोक दाम कमजोर बने रहे तो नए सत्र में भुगतान की रफ्तार पर दबाव आ सकता है। यह अभी जोखिम है, हकीकत नहीं। एक बात और याद रखें: 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है, इसलिए पुराने सत्र का 400 रुपये वाला भाव नए सत्र पर लागू नहीं माना जाएगा।
वैश्विक बाजार भी खेल बदल रहा है
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि कृषि उपजों के दाम अब वैश्विक मांग और सप्लाई से तय होते हैं। उनके मुताबिक ब्राजील में चीनी उत्पादन की लागत करीब 23 रुपये प्रति किलो है, जबकि भारत में यह करीब 33 से 34 रुपये प्रति किलो है। गन्ना किसानों के लिए इसका मतलब साफ है: एथेनॉल जैसे विकल्प मिलों की कमाई का दूसरा रास्ता बन सकते हैं, और मिलों की सेहत ही किसानों के भुगतान की गारंटी है।
आगे क्या: त्योहार तक नजर रखें
इस्मा के अनुसार घरेलू बाजार में चीनी का पर्याप्त स्टॉक है और त्योहारी मांग के बावजूद सप्लाई स्थिर रहेगी। खुदरा दाम और घटने की उम्मीद है, इसलिए दिवाली से पहले खरीदारी में और राहत मिल सकती है। लेकिन किसानों को दो चीजों पर नजर रखनी चाहिए: थोक दाम कब स्थिर होते हैं, और 2026-27 के एसएपी की घोषणा कब होती है। भुगतान की स्थिति caneup.in पोर्टल और eGanna ऐप पर देखते रहें, किसी समस्या पर गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दाम गिरने की सबसे बड़ी वजह क्या है? सरकार के कड़े कदम: सितंबर का सख्त रिलीज ऑर्डर, व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट, कंपनियों की साप्ताहिक रिपोर्टिंग और खुदरा तक फायदा पहुंचाने का निर्देश।
क्या दिवाली तक चीनी और सस्ती होगी? इस्मा के अनुसार खुदरा बाजार में कीमतें घटने लगी हैं और आने वाले हफ्तों में और कमी की उम्मीद है। अंतिम भाव सप्लाई चेन और मांग पर निर्भर करेगा।
गन्ना किसानों को इससे क्या नुकसान हो सकता है? चीनी के कम दाम से मिलों की कमाई घटती है, जिससे नए पेराई सत्र में गन्ना भुगतान की रफ्तार पर दबाव आ सकता है। यह अभी जोखिम है, हकीकत नहीं।
नए सत्र 2026-27 में गन्ने का भाव क्या है? केंद्र का एफआरपी 1 अक्टूबर 2026 से बढ़कर 365 रुपये प्रति क्विंटल लागू हो गया है। यूपी का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है।
व्यापारियों पर क्या पाबंदी लगी है? 1 अगस्त से 30 नवंबर 2026 तक कोई भी डीलर एक बार में 4,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी नहीं रख सकता, और खेप मिलने के 30 दिन के अंदर बेचना होगा।
स्रोत: एनडीटीवी इंडिया (25 सितंबर और 19 सितंबर 2026 की रिपोर्ट), समाचार वार्ता, जीके टुडे, द स्टेट्समैन/टाइम्स ऑफ इंडिया (भुगतान आंकड़े)।
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