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16 लाख टन चीनी का नया कोटा जारी: 10 दिन में भाव ₹1000 बढ़े, यूपी को 4.51 लाख टन — किसानों के लिए क्या मतलब है

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 14, 2026 • 6 min read
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16 लाख टन चीनी का नया कोटा जारी: 10 दिन में भाव ₹1000 बढ़े, यूपी को 4.51 लाख टन — किसानों के लिए क्या मतलब है
अंतिम अपडेट: October 14, 2026 6:22 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

दिवाली की तैयारियों के बीच सरकार ने बाजार में चीनी की सप्लाई थमने से पहले ही बड़ा फैसला ले लिया है। खाद्य मंत्रालय ने 13 अक्टूबर को 13 से 31 अक्टूबर तक के लिए 16 लाख टन चीनी का बिक्री कोटा जारी कर दिया — तय समय से दो दिन पहले, क्योंकि पिछले 10 दिनों में एक्स-मिल चीनी के भाव करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ चुके हैं।

यूपी के गन्ना किसानों के लिए खबर दोहरी खुशखबरी जैसी है: उत्तर प्रदेश को इस कोटे में 4.51 लाख टन का हिस्सा मिला है — महाराष्ट्र के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा। और जो मिलें अक्टूबर में पेराई शुरू करेंगी, वे कोटे से अलग अपनी बनाई चीनी भी बेच सकेंगी — यानी मिलों के पास सीजन की शुरुआत में ही नकदी आएगी।

नया कोटा: 16 लाख टन का पूरा बंटवारा

13 अक्टूबर को जारी खाद्य मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े (13 से 31 अक्टूबर) के लिए कुल 16 लाख टन चीनी बिक्री का कोटा तय हुआ है। इसमें 14 लाख टन 587 घरेलू चीनी मिलों को और 2 लाख टन आयातित चीनी की रिफाइनरियों को दिया गया है। रिफाइनरियों में श्री रेणुका शुगर्स को 1.30 लाख टन और श्री दत्त इंडिया को 70 हजार टन बेचने की अनुमति मिली है।

राज्यवार बंटवारे में महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा 4,76,201 टन, उत्तर प्रदेश को 4,50,809 टन और कर्नाटक को 2,32,351 टन कोटा मिला है — तीनों को मिलाकर कुल आवंटन का 83 फीसदी। 587 में से 134 मिलों को कोई आवंटन नहीं मिला, जबकि 39 मिलों को 100 टन तक का सीमित कोटा दिया गया है।

यह सितंबर में शुरू हुई पखवाड़ा-आधारित कोटा प्रणाली का चौथा आवंटन है। तुलना के लिए: सितंबर में कुल 26.50 लाख टन (पहले पखवाड़े में 13 लाख टन, दूसरे में 13.50 लाख टन) का कोटा था, जबकि अक्टूबर 2025 में पूरे महीने के लिए सिर्फ 24 लाख टन का कोटा जारी हुआ था। अक्टूबर के पहले पखवाड़े के 14 लाख टन कोटे पर पूरी जानकारी यहां पढ़ें।

कोटा जारी करने की वजह: 10 दिन में 1000 रुपये का उछाल

खाद्य मंत्रालय ने यह कोटा तय तारीख से दो दिन पहले इसलिए घोषित किया, क्योंकि एक्स-मिल भाव पिछले 10 दिनों में करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गए थे। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कई मिलों ने 1 से 15 अक्टूबर का अपना बिक्री कोटा खत्म कर लिया था, इसलिए वे चीनी बेच नहीं पा रही थीं — इसी से बाजार में कमी की अटकलें तेज हुईं और भाव चढ़ने लगे।

अब नया कोटा घोषित होने से दिवाली की मांग पूरी होने की उम्मीद है — इस साल दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी, और दशहरा (20 अक्टूबर) की मांग लगभग पूरी हो चुकी है। सरकार ने मिलों को अक्टूबर में बनाई गई चीनी कोटे का इंतजार किए बिना बेचने की भी छूट दे रखी है।

यूपी के किसानों के लिए क्या मतलब है

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए इस फैसले के तीन सीधे मतलब हैं:

पहला — भुगतान की रफ्तार बढ़ेगी: यूपी की मिलों को 4.51 लाख टन चीनी बेचने का मौका मिला है। सीजन की शुरुआत में मिलों के पास नकदी आएगी तो गन्ने के भुगतान का चक्र भी जल्दी घूमेगा। एफआरपी और एसएपी के अंतर को समझें।

दूसरा — जल्दी पेराई करने वाली मिलों को दोहरा फायदा: जो मिलें अक्टूबर में पेराई शुरू करेंगी, वे कोटे के अलावा अपनी नई बनी चीनी भी अक्टूबर-नवंबर में बेच सकेंगी। महाराष्ट्र में 30 मिलें पेराई शुरू कर चुकी हैं और यूपी में 20 अक्टूबर के आसपास 10 से 15 मिलों के पेराई शुरू करने का अनुमान है।

तीसरा — गन्ना भाव की मांग को मजबूती: चीनी के भाव बढ़ने से मिलों की आय सुधरेगी, और यही वह आधार है जिस पर किसान संगठन गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसान प्रति टन 5,500 रुपये की मांग रख चुके हैं। भाव पर फैसला सरकार को लेना है, लेकिन बढ़ते चीनी भाव किसानों की मांग को बल देते हैं।

यहां ईमानदारी से एक बात साफ कर दें: चीनी के भाव बढ़ने का मतलब यह नहीं कि गन्ने का भाव अपने आप बढ़ जाएगा। 2026-27 सत्र के लिए केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय है, और यूपी के एसएपी 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है — पिछले सत्र के 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) के भाव को इस सत्र का भाव न समझें।

मिलों पर सख्त शर्तें: 45 फीसदी पहला सप्ताह, 18 अक्टूबर की डेडलाइन

कोटा मिलने के साथ मिलों पर कड़ी शर्तें भी लगाई गई हैं। हर मिल को अपने आवंटन का कम से कम 45 फीसदी पहले सप्ताह में बेचना होगा। 15 अक्टूबर तक की पूरी बिक्री का ब्योरा 18 अक्टूबर तक जमा करना होगा — ऐसा न करने वाली मिलों को नवंबर का कोटा नहीं मिलेगा।

इसके अलावा हर डीलर को खाद्य मंत्रालय के पोर्टल पर पंजीकृत होना होगा और हर शुक्रवार को अपना स्टॉक घोषित करना होगा। 15 अक्टूबर से डीलर 1000 क्विंटल से ज्यादा या 15 दिन से ज्यादा चीनी नहीं रख सकेंगे। सरकार ने 9 अक्टूबर से मिलों के स्टॉक का गहन भौतिक सत्यापन भी शुरू कर दिया है।

आगे क्या: किसानों की तैयारी

अक्टूबर के दोनों पखवाड़ों को मिलाकर महीने का कुल कोटा 30 लाख टन हो गया है — पिछले साल के 24 लाख टन से काफी ज्यादा। यानी सरकार दिवाली तक बाजार में सप्लाई की कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। किसानों के लिए अभी तीन तैयारी जरूरी हैं: गन्ना सर्वे के रिकॉर्ड में रकबा और किस्म का विवरण सही करवाएं, बैंक खाता सक्रिय और आधार से लिंक रखें, और तौल के समय पर्ची पर दर्ज वजन खुद मिलान करें — कटौती दिखे तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें।

आपके सवाल

सवाल: 13 से 31 अक्टूबर का चीनी कोटा कितना है और यूपी को कितना मिला? जवाब: कुल 16 लाख टन का कोटा जारी हुआ है — 14 लाख टन 587 चीनी मिलों को और 2 लाख टन आयातित चीनी की रिफाइनरियों को। उत्तर प्रदेश को 4,50,809 टन (4.51 लाख टन) मिला है, जो महाराष्ट्र (4.76 लाख टन) के बाद दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा है।

सवाल: चीनी के भाव क्यों बढ़ रहे हैं? जवाब: पिछले 10 दिनों में एक्स-मिल भाव करीब 1000 रुपये प्रति क्विंटल बढ़े हैं। वजह — कई मिलों ने पहले पखवाड़े का बिक्री कोटा खत्म कर लिया था, जिससे बाजार में कमी की अटकलें तेज हुईं और भाव चढ़ने लगे। त्योहारी मांग भी दबाव बना रही है।

सवाल: क्या चीनी भाव बढ़ने से गन्ने का भाव भी बढ़ेगा? जवाब: अपने आप नहीं। गन्ने का भाव सरकार तय करती है — 2026-27 सत्र के लिए केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है। यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। हालांकि बढ़े चीनी भाव किसानों की भाव-वृद्धि की मांग को मजबूती देते हैं।

सवाल: यूपी में पेराई कब शुरू होगी? जवाब: सरकार के अनुमान के मुताबिक 20 अक्टूबर के आसपास यूपी में 10 से 15 मिलें पेराई शुरू करेंगी। जो मिलें अक्टूबर में पेराई शुरू करेंगी, वे कोटे के अलावा अपनी नई चीनी भी बेच सकेंगी।

सवाल: मिलों पर कौन-सी सख्त शर्तें लागू हैं? जवाब: कोटे का कम से कम 45 फीसदी पहले सप्ताह में बेचना होगा, 15 अक्टूबर तक की बिक्री का ब्योरा 18 अक्टूबर तक जमा करना होगा, डीलरों का पंजीकरण अनिवार्य है और 15 अक्टूबर से डीलर 1000 क्विंटल से ज्यादा या 15 दिन से ज्यादा चीनी नहीं रख सकेंगे।

स्रोत: द हिंदू बिज़नेसलाइन, चीनिमंडी, एग्रीइनसाइट — 12-13 अक्टूबर 2026

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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