चीनी मिलों के शेयर 6% तक टूटे: गन्ने से एथेनॉल पर रोक, मक्के का दाम ₹3 घटा — यूपी के किसानों के भुगतान का क्या होगा

सोमवार, 19 अक्टूबर को शेयर बाजार खुलते ही चीनी कंपनियों के निवेशकों को झटका लगा। देश की बड़ी चीनी मिलों के शेयर 2 से 6 प्रतिशत तक टूट गए — बजाज हिंदुस्थान शुगर 5.22 प्रतिशत गिरकर ₹20.16 पर आ गई, द्वारिकेश शुगर 4.45 प्रतिशत फिसली और श्री रेणुका शुगर्स 4.43 प्रतिशत लुढ़ककर ₹21.16 के करीब कारोबार करती दिखी। धामपुर, डालमिया भारत, बलरामपुर चीनी, ईआईडी पैरी और त्रिवेणी के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई।
सवाल सीधा है: बाजार की इस घबराहट के पीछे केंद्र सरकार का वह फैसला है, जिसमें एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 के लिए गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद पर रोक लगा दी गई है। शेयर बाजार में मिल मालिकों को नुकसान हो रहा है, तो यूपी के गन्ना किसान के भुगतान का क्या होगा? इस खबर में हम पूरे टेंडर का हिसाब, मक्के के दाम में कटौती और किसानों पर पड़ने वाले असर को आसान भाषा में समझेंगे।
बीपीसीएल का 16 अक्टूबर वाला टेंडर: क्या-क्या लिखा है
भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने 16 अक्टूबर को तेल कंपनियों की ओर से एथेनॉल खरीद का टेंडर जारी किया। यह नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक चलने वाले सप्लाई ईयर 2026-27 के लिए है, जिसमें लगभग 1100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का लक्ष्य है — पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के लिए।
लेकिन इस बार टेंडर दस्तावेज़ में सरकार का स्पष्ट निर्देश दर्ज है: “एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में चीनी का डायवर्जन शून्य किया जाएगा” — यानी चीनी उत्पादन से एथेनॉल की ओर जाने वाला हिस्सा इस बार शून्य होगा। टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए कोई प्रस्ताव मांगा ही नहीं गया है। खबर एजेंसी पीटीआई के हवाले से टाइम्स ऑफ इंडिया ने टेंडर की यही शर्त उजागर की है।
फ्री प्रेस जर्नल के मुताबिक, इस फैसले के पीछे त्योहारी सीजन में चीनी के दामों में 10 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी और घरेलू चीनी की उपलब्धता बनाए रखने की चिंता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से उत्पादन घटने की आशंका ने सरकार को यह कदम उठाने पर मजबूर किया।
मक्के का दाम ₹71.86 से घटकर ₹68.86: क्या बदला
टेंडर में सिर्फ गन्ने वाले एथेनॉल पर रोक नहीं लगी — मक्के से बने एथेनॉल की खरीद दर भी घटा दी गई है। मक्के आधारित एथेनॉल की खरीद कीमत ₹71.86 प्रति लीटर से घटाकर ₹68.86 प्रति लीटर कर दी गई है, यानी ₹3 प्रति लीटर की कटौती। साथ ही अतिरिक्त प्रोत्साहन (इंसेंटिव) भी ₹5.79 से घटाकर ₹2.79 प्रति लीटर कर दिया गया है।
टेंडर में अब एथेनॉल की आपूर्ति मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे से हो सकेगी। ध्यान देने वाली बात: सी-हेवी शीरा, जो चीनी बनाने की प्रक्रिया का अंतिम उप-उत्पाद है, इस रोक से बाहर रखा गया है — प्रतिबंध सिर्फ गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे पर है।
शेयर 6% क्यों टूटे: मिलों की कमाई का गणित
एनालिटिक्स इनसाइट के मुताबिक, इस फैसले से चीनी कंपनियों की कमाई पर दोहरा दबाव पड़ेगा। पहला, मिलों के पास गन्ने और शीरे को चीनी या एथेनॉल — जिसमें ज्यादा मार्जिन मिले — उस ओर मोड़ने की छूट अब नहीं रहेगी। दूसरा, जिन मिलों ने एथेनॉल प्लांट लगाने में बड़ा निवेश किया था, उस निवेश पर मिलने वाला रिटर्न अब घट सकता है।
फ्री प्रेस जर्नल ने भी यही विश्लेषण दिया है — बजाज हिंदुस्थान, श्री रेणुका, धामपुर और बलरामपुर चीनी जैसी यूपी से जुड़ी बड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट इसी चिंता का नतीजा है।
यूपी के गन्ना किसानों के भुगतान पर कितना असर
अब सबसे अहम सवाल — क्या इससे किसानों का भुगतान फंस सकता है? ईमानदार जवाब यह है कि सीधा और तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन मिलों की वित्तीय सेहत पर दबाव बढ़ा है, जिस पर नजर रखनी होगी।
पहली राहत वाली बात: सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनी रहे और दाम न बढ़ें। चीनी के दाम स्थिर या मजबूत रहने से मिलों को चीनी बेचकर आय होती रहेगी। दूसरा, सी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाना अभी भी अनुमत है, यानी मिलों का एथेनॉल कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है।
लेकिन चिंता का पक्ष भी साफ है। मिलों की एथेनॉल से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से आता था। उस रास्ते के बंद होने से मिलों की कुल आय पर असर पड़ेगा। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं और पेराई सत्र बस शुरू होने वाला है — किसानों को सलाह है कि अपना गन्ना सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाता और आधार लिंक पहले से दुरुस्त रखें।
एथेनॉल नीति में यह मोड़ क्यों आया
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता देश है। सरकार कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ा रही है, लेकिन दाम चढ़ने पर उसे ऊर्जा जरूरतों और घरेलू खाद्य उपलब्धता के बीच संतुलन बनाना पड़ता है — यही संतुलन इस फैसले की वजह है।
किसान के लिए आगे की राह: 5 जरूरी बातें
- घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें: शेयर बाजार का झटका मिल मालिकों को है, किसान के भुगतान का नियम नहीं बदला है। गन्ना मूल्य का भुगतान 14 दिन के भीतर करना मिलों की कानूनी जिम्मेदारी बनी हुई है।
- सी-हेवी शीरा छूट में है: मिलों का एथेनॉल कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है — सी-हेवी शीरे से बनाना अभी भी अनुमत है।
- कागज दुरुस्त रखें: सर्वे रिकॉर्ड, कृषक कोड और बैंक खाता-आधार लिंक की जांच कर लें।
- 2026-27 एसएपी पर नजर: इस सत्र के गन्ना मूल्य की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का ₹400 प्रति क्विंटल था।
- चीनी के दाम का फायदा: घरेलू चीनी की मांग मजबूत रहने से मिलों की चीनी बिक्री से आय बनी रहने की उम्मीद है।
जवाब जानिए
क्या गन्ने से एथेनॉल बनाना पूरी तरह बंद हो गया है? नहीं। रोक सिर्फ एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) के सरकारी खरीद टेंडर में गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल पर है। सी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाना अभी भी अनुमत है।
शेयर गिरने से किसान के भुगतान पर क्या असर पड़ेगा? तत्काल कोई सीधा असर नहीं है। भुगतान 14 दिन के नियम से बंधा है। लेकिन मिलों की कमाई पर दबाव बढ़ा है, इसलिए कागजात दुरुस्त रखने और भुगतान की निगरानी की सलाह है।
मक्के के एथेनॉल का दाम क्यों घटाया गया? सरकार ने मक्का आधारित एथेनॉल की खरीद कीमत ₹71.86 से घटाकर ₹68.86 प्रति लीटर और प्रोत्साहन ₹5.79 से घटाकर ₹2.79 प्रति लीटर कर दिया है। इसका असर मक्के से एथेनॉल बनाने वाली डिस्टिलरियों की कमाई पर पड़ेगा।
क्या पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य बदलेगा? नहीं। टेंडर 1100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदकर ई-20 लक्ष्य को पूरा करने के लिए जारी हुआ है — सिर्फ कच्चे माल का स्रोत बदला है, लक्ष्य नहीं।
स्रोत: The Times of India (19 अक्टूबर 2026), Free Press Journal (19 अक्टूबर 2026), Analytics Insight (19 अक्टूबर 2026), Mathrubhumi English (18 अक्टूबर 2026), The Shillong Times/PTI (18 अक्टूबर 2026)
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