₹365 एफआरपी के ऊपर ₹3.56 प्रति क्विंटल बोनस: चीनी परता (पोल प्रतिशत) का पूरा गणित, नई किस्मों के आंकड़े क्या कहते हैं

गन्ने का भाव तय करते समय सिर्फ क्विंटल का वजन नहीं, गन्ने के अंदर छिपी चीनी की मात्रा भी गिनी जाती है — जिसे गन्ना जगत में चीनी परता या पोल प्रतिशत कहा जाता है। 29 सितंबर को उत्तर प्रदेश की किस्म स्वीकृति उप समिति ने जिन चार नई किस्मों को खेती की मंजूरी दी, उनके आंकड़ों में सबसे ज्यादा चर्चा उपज के साथ-साथ इसी परते की हो रही है। समझिए कि परता आखिर है क्या और केंद्र के ₹365 प्रति क्विंटल एफआरपी से इसका क्या संबंध है।
चीनी परता (पोल प्रतिशत) क्या होता है
सीधे शब्दों में कहें तो चीनी परता यह बताता है कि 100 किलोग्राम गन्ने से कितनी चीनी निकलती है। अगर किसी किस्म का पोल प्रतिशत 13.10 है, तो इसका मतलब है कि हर क्विंटल गन्ने से करीब 13.10 किलोग्राम चीनी बनाने की क्षमता है। प्रयोगशालाओं में गन्ने के रस से इसका मापन किया जाता है और यही आंकड़ा मिलों के लिए सबसे बड़ी कसौटी है — क्योंकि मिल का सारा कारोबार इसी परते पर टिका है। परता जितना ज्यादा, उतनी ही चीनी, उतना ही मुनाफा।
₹365 का एफआरपी और 10.25 प्रतिशत रिकवरी का गणित
केंद्र सरकार ने मई 2026 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) के फैसले से गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) चीनी सत्र 2026-27 (अक्टूबर से सितंबर) के लिए ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले सत्र के ₹355 से ₹10 ज्यादा है। लेकिन इसके साथ एक बुनियादी रिकवरी दर भी जुड़ी है — 10.25 प्रतिशत। इसका मतलब है कि ₹365 का भाव उन मिलों के लिए है जिनकी चीनी रिकवरी 10.25 प्रतिशत है।
आगे का गणित किसान के काम का है:
- प्रीमियम: रिकवरी 10.25 प्रतिशत से हर 0.1 प्रतिशत बढ़ने पर मिल को प्रति क्विंटल ₹3.56 अतिरिक्त देना होता है।
- कटौती पर रोक: जिन मिलों की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम हो, वहां कोई कटौती नहीं होगी — किसान को न्यूनतम ₹338.30 प्रति क्विंटल की गारंटी मिलेगी।
- लागत से तुलना: सरकार के अनुसार गन्ने की उत्पादन लागत (ए2+एफएल) ₹182 प्रति क्विंटल है, यानी ₹365 का एफआरपी लागत से करीब 100.5 प्रतिशत ज्यादा है।
सरकारी प्रेस नोट के मुताबिक इस बढ़े हुए एफआरपी से देश के करीब 5 करोड़ गन्ना किसानों और चीनी मिलों से जुड़े करीब 5 लाख श्रमिकों को लाभ होगा, और किसानों को करीब ₹1 लाख करोड़ का भुगतान होने का अनुमान है।
नई किस्मों के परता आंकड़े क्या कहते हैं
29 सितंबर की बैठक में गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में शाहजहांपुर और लखनऊ के शोध केंद्रों की किस्मों के आंकड़े रखे गए। सबसे ज्यादा सुर्खियों में रही शाहजहांपुर के गन्ना शोध परिषद की अगेती किस्म को.शा. 23232:
- औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर — मानक किस्म को.0238 से 9.44 प्रतिशत ज्यादा।
- नवंबर, जनवरी और मार्च में पोल प्रतिशत क्रमशः 13.10, 13.77 और 14.31 प्रतिशत — को.0238 से 0.09, 0.24 और 0.12 प्रतिशत ज्यादा।
- पेड़ी की उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर (को.0238 से 3.16 प्रतिशत ज्यादा)।
- लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी और अच्छी पेड़ी क्षमता।
लखनऊ के भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की को.लख. 21201 की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, लेकिन इसमें पोल प्रतिशत 13.94 प्रतिशत पाया गया, जबकि को.0238 में यह 13.71 प्रतिशत था। यह किस्म भी लाल सड़न के प्रति उच्च प्रतिरोधी पाई गई और पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अनुमोदित की गई है। दो अन्य किस्मों — को.शा. 19235 (87.58 टन/हे, मानक से 21.01 प्रतिशत ज्यादा) और को.शा. 18232 (92.38 टन/हे, मानक से 26.51 प्रतिशत ज्यादा, पेड़ी 82.06 टन/हे) — में भी लाल सड़न से बचने की अच्छी क्षमता मिली है।
यानी खबर का असली संदेश यही है: नई किस्में ज्यादा उपज के साथ ज्यादा परता भी लेकर आई हैं — और परता ही वह कड़ी है जो किसान के दाम से जुड़ती है।
मिलें ऊंचे परते वाली किस्म क्यों चाहती हैं
एक मिल को समझिए: अगर वह रोज 10,000 क्विंटल गन्ना पेरती है और परता 13.71 प्रतिशत के बजाय 13.94 प्रतिशत हो, तो हर दिन उसी गन्ने से करीब 23 क्विंटल ज्यादा चीनी बनेगी — महीने में सैकड़ों क्विंटल। यही वजह है कि मिल प्रबंधन ऊंचे परते वाली किस्मों को अपने क्षेत्र में बढ़ावा देता है और गन्ना आवंटन से लेकर बीज वितरण तक इन्हीं किस्मों को प्राथमिकता मिलती है। किसान के लिए इसका सीधा फायदा दोहरा है: खेत में उपज बढ़ती है और मिल में ऐसी किस्म की मांग भी बढ़ती है।
उप समिति की बैठक में यह भी फैसला हुआ कि छह पुरानी, कम लोकप्रिय किस्मों को अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बाहर कर दिया जाएगा। को.0238 जैसी पुरानी किस्मों पर निर्भर किसानों को समय रहते नई रोगरोधी किस्मों की ओर बढ़ना होगा, खासकर लाल सड़न प्रभावित इलाकों में।
यूपी के किसान के लिए व्यावहारिक नतीजा
एक बात साफ समझ लीजिए: उत्तर प्रदेश में गन्ने का भुगतान केंद्र के एफआरपी पर नहीं, राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) पर होता है। सत्र 2025-26 में यूपी का एसएपी अगेती किस्मों के लिए ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्मों के लिए ₹390 प्रति क्विंटल रहा, जो एफआरपी से काफी ऊपर है। सत्र 2026-27 के लिए यूपी के एसएपी की घोषणा इस लेख के प्रकाशन तक नहीं हुई थी — जब भी होगी, वह एफआरपी से ऊपर रहने की उम्मीद है।
लेकिन एफआरपी-रिकवरी का गणित फिर भी किसान के काम का है, क्योंकि:
- किस्म चयन का आधार: बीज चुनते समय सिर्फ उपज नहीं, पोल प्रतिशत भी देखिए — 14.31 प्रतिशत परते वाली किस्म 13.10 वाली से मिल के लिए ज्यादा कीमती है।
- कटाई का समय: को.शा. 23232 के आंकड़े दिखाते हैं कि मार्च में परता नवंबर से ज्यादा था — सही समय पर कटाई से परता और भाव दोनों सुधरते हैं।
- पेड़ी प्रबंधन: अच्छी पेड़ी क्षमता वाली किस्में (जैसे को.शा. 23232 की 80.57 टन/हे पेड़ी) अगले साल दोबारा बुवाई का खर्च बचाती हैं।
- रोग से बचाव: लाल सड़न से प्रभावित खेत में रोगरोधी किस्म लगाना ही सबसे सस्ता बीमा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: चीनी परता और पोल प्रतिशत में क्या अंतर है? उत्तर: दोनों एक ही बात के दो नाम हैं। प्रयोगशाला में मापा जाने वाला “पोल इन केन” प्रतिशत ही चीनी परता कहलाता है — यह बताता है कि गन्ने में कितनी चीनी है।
प्रश्न: क्या ज्यादा परते वाली किस्म लगाने से किसान को सीधे ज्यादा दाम मिलता है? उत्तर: केंद्र के एफआरपी नियमों में 10.25 प्रतिशत से ऊपर रिकवरी पर ₹3.56 प्रति क्विंटल प्रति 0.1 प्रतिशत का प्रीमियम है, लेकिन यह मिल-स्तर की रिकवरी पर लागू होता है। यूपी में किसान को एसएपी (पिछले सत्र में ₹400/क्विंटल अगेती) मिलता है। ऊंचे परते वाली किस्म का सीधा फायदा यह है कि मिल ऐसी किस्म को प्राथमिकता देती है और खेत में उपज भी बढ़ती है।
प्रश्न: 2026-27 सत्र में एफआरपी कितना है? उत्तर: ₹365 प्रति क्विंटल, 10.25 प्रतिशत बुनियादी रिकवरी पर। 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी वाली मिलों में भी किसान को न्यूनतम ₹338.30 प्रति क्विंटल मिलेगा।
प्रश्न: पुरानी किस्में कब तक चलेंगी? उत्तर: उप समिति ने छह पुरानी किस्मों को दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से बाहर करने का फैसला किया है। नई रोगरोधी किस्मों की ओर समय रहते बढ़ना समझदारी होगी।
स्रोत: द हिंदू (5 अक्टूबर 2026), एबीपी लाइव (3 अक्टूबर 2026), कृषक जगत (2 अक्टूबर 2026), सीएनबीसी टीवी18 और केंद्र सरकार की सीसीईए प्रेस विज्ञप्ति।
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