2027 चुनाव से पहले गन्ना मूल्य कितना बढ़ेगा? ₹400 से ₹500 की मांग, 23 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन — पूरी गणित जानिए

पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने में बस कुछ दिन बचे हैं, और उत्तर प्रदेश के हर गन्ना किसान के मन में इस बार सिर्फ एक सवाल है — इस बार गन्ने का दाम बढ़ेगा या नहीं? 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, और नवभारत टाइम्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक किसान संगठन लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि इस चुनावी साल में गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य यानी एसएपी एक बार फिर बढ़ाया जाए। विभाग के अंदर भी इस पर मंथन चल रहा है, लेकिन आधिकारिक फैसला अभी बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2026-27 के लिए गन्ने का नया दाम कब घोषित होगा। हर किसान नई घोषणा का इंतजार कर रहा है, क्योंकि मिलें चलने से पहले दाम तय हो जाना ही किसानों के हित में है।
चुनावी साल में बढ़ोतरी की उम्मीद क्यों
उत्तर प्रदेश में गन्ने के दाम का इतिहास चुनावी कैलेंडर से जुड़ा रहा है। नवभारत टाइम्स की 3 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक 2027 में चुनाव होने हैं और किसान लगातार दबाव बना रहे हैं, ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार कुछ दाम बढ़ा सकती है। किसानों के बढ़ते दबाव के बाद गन्ना विभाग में इस मुद्दे पर मंथन चल रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक राज्य परामर्श समिति की बैठक नहीं हुई है, जबकि नया पेराई सत्र शुरू होने वाला है। आम तौर पर एसएपी की घोषणा इसी समिति की बैठक के बाद होती है, इसलिए उम्मीद है कि जल्द ही बैठक बुलाकर सरकार कोई निर्णय लेगी। यानी फैसला पेंडिंग है, लेकिन प्रक्रिया की घड़ी चल रही है।
2017 से अब तक: गन्ना मूल्य का ट्रैक रिकॉर्ड
पिछले सालों के आंकड़े एक साफ पैटर्न दिखाते हैं:
- 2017-19: बीजेपी सरकार बनने के बाद गन्ना मूल्य में 10 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
- 2021-22: विधानसभा चुनाव से पहले 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
- 2023-24: लोकसभा चुनाव से पहले 20 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
- 2025-26: चुनाव से पहले ही 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी (दैनिक जागरण के मुताबिक अगेती का एसएपी 370 से बढ़कर 400 रुपये हुआ)
2026-27 की स्थिति: एफआरपी ₹365, एसएपी का इंतजार
एक अहम बात साफ समझ लीजिए — 2026-27 सत्र के लिए उत्तर प्रदेश का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। गांव जंक्शन की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दी है, लेकिन यूपी के एसएपी को लेकर अभी खामोशी बनी हुई है।
इसका मतलब यह है कि अभी जो भाव चल रहा है, वह 2025-26 सत्र का है — अगेती गन्ने के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल। जब तक नया एसएपी घोषित नहीं होता, किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें; आधिकारिक घोषणा राज्य परामर्श समिति की बैठक के बाद ही होगी।
पड़ोसी राज्यों में क्या है भाव
गांव जंक्शन की रिपोर्ट से एक अहम तुलना सामने आती है — पड़ोसी राज्यों में भाव इस तरह हैं: पंजाब 416 रुपये, हरियाणा 415 रुपये और उत्तराखंड 405 रुपये प्रति क्विंटल। यानी यूपी का भाव (अगेती 400 रुपये) पंजाब-हरियाणा से 15-16 रुपये पीछे है। यही वजह है कि यूपी के किसान संगठन दाम बढ़ाने की मांग तेज कर रहे हैं। किसानों का तर्क सीधा है — जब चीनी और इथेनॉल के दाम बढ़ते हैं, तो उसका फायदा किसान तक क्यों नहीं पहुंचता?
किसान संगठन क्या मांग रहे हैं: 23 अक्टूबर का आंदोलन
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक किसान संगठन अब प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक का कहना है कि अब तो चीनी के दाम भी बहुत बढ़ गए हैं। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में गन्ना उत्पादन कम होने से चीनी के अच्छे दाम मिलेंगे, इसलिए सरकार को ठीक से गन्ना मूल्य बढ़ाना चाहिए — और इसी महीने सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन होगा।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश प्रवक्ता आलोक वर्मा का कहना है कि किसान 23 अक्टूबर को गन्ना संस्थान में जुटेंगे और प्रदर्शन करेंगे।
दूसरी तरफ गांव जंक्शन की रिपोर्ट बताती है कि मांगें और भी बड़ी हैं — लखीमपुर खीरी के राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन ने 600 रुपये तक का दाम मांगा है, भारतीय किसान यूनियन ने हरिद्वार पंचायत में 550 रुपये की मांग रखी थी, और हापुड़ की गन्ना समिति की बैठक में भी 500 रुपये प्रति क्विंटल का प्रस्ताव पारित हुआ था।
अगर दाम बढ़ा तो आपकी जेब पर क्या असर होगा
आइए एक सीधा हिसाब लगाते हैं। अगर सरकार ने इस बार 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की, जैसी 2025-26 में हुई थी, तो:
- 100 क्विंटल गन्ना बेचने वाले किसान को 3,000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे
- 300 क्विंटल बेचने पर 9,000 रुपये और 500 क्विंटल पर 15,000 रुपये अतिरिक्त
यह सिर्फ अनुमानित गणना है — असली बढ़ोतरी सरकार की घोषणा के बाद ही पता चलेगी। लेकिन कृषि लागत और मूल्य आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गन्ने की खेती की लागत 182 रुपये प्रति क्विंटल आंकी गई है, और इसमें 54.9 फीसदी लागत सिर्फ मानवीय श्रम की है। ऐसे में हर रुपये की बढ़ोतरी किसान की कमाई में सीधा फर्क डालती है।
फैसला कब आएगा: आगे क्या होगा
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गन्ना विभाग इस मुद्दे पर मंथन कर रहा है और जल्द ही राज्य परामर्श समिति की बैठक होने की उम्मीद है। पेराई सत्र शुरू होने से पहले एसएपी की घोषणा हो जाना किसानों के हित में होगा, ताकि मिलों में गन्ना डालते समय उन्हें सही भाव का भरोसा रहे।
किसान संगठनों का अक्टूबर में प्रदर्शन का ऐलान भी सरकार पर दबाव बढ़ाएगा। 23 अक्टूबर को गन्ना संस्थान में होने वाले प्रदर्शन के बाद सरकार के रुख का अंदाजा लगेगा। हमारी सलाह है कि किसान अफवाहों के बजाय आधिकारिक घोषणा का इंतजार करें और अपना गन्ना तैयार रखें, ताकि पेराई शुरू होते ही पर्ची मिल सके।
जवाब जानिए
2026-27 के लिए गन्ने का नया दाम घोषित हुआ है क्या? नहीं। केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन यूपी का नया एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। राज्य परामर्श समिति की बैठक अभी बाकी है।
अभी कौन सा भाव लागू है? अभी 2025-26 सत्र का भाव लागू है — अगेती गन्ने के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल। यह 2025-26 में 30 रुपये की बढ़ोतरी के बाद तय हुआ था।
गन्ना मूल्य बढ़ने की उम्मीद क्यों है? 2027 में यूपी में विधानसभा चुनाव हैं, और इतिहास बताता है कि चुनावी सालों में गन्ने का दाम बढ़ता रहा है — 2021-22 में 25 रुपये, 2023-24 में 20 रुपये और 2025-26 में 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी।
किसान संगठन क्या कर रहे हैं? भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) इसी महीने सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी, और भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) 23 अक्टूबर को गन्ना संस्थान में बड़ा प्रदर्शन करेगी।
किसान कितने दाम की मांग कर रहे हैं? अलग-अलग संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक है — हापुड़ गन्ना समिति ने 500 रुपये और लखीमपुर के किसान संगठन ने 600 रुपये प्रति क्विंटल मांगा है।
स्रोत: नवभारत टाइम्स (3 अक्टूबर 2026), गांव जंक्शन (सितंबर 2026), दैनिक जागरण (अक्टूबर 2025)
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