CM योगी का कड़ा फरमान — 20 सितंबर तक सभी 120 चीनी मिलों का बकाया शून्य करें, कोताही पर DM नपेंगे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज 3 सितंबर को अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्चस्तरीय अंतर-विभागीय बैठक में आगामी पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों और पिछले पेराई सत्र के शेष गन्ना मूल्य भुगतान की गहन समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग तथा संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों को कड़े शब्दों में निर्देशित किया कि 20 सितंबर 2026 तक प्रदेश की सभी 120 चीनी मिलों का बकाया शत-प्रतिशत शून्य होना चाहिए। किसी भी जिले में यदि 20 सितंबर के बाद एक भी रुपया बकाया पाया गया, तो संबंधित जिलाधिकारी और जिला गन्ना अधिकारी (DCO) की सीधी जवाबदेही तय कर कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव (गन्ना) और राहत आयुक्त उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि पिछले पेराई सत्र 2025-26 के कुल ₹38,000 करोड़ से अधिक के देय गन्ना मूल्य में से 98.2% भुगतान किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जा चुका है। वर्तमान में लगभग ₹680 करोड़ का बकाया मुख्यतः शामली, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और लखीमपुर खीरी की 8 निजी चीनी मिलों पर लंबित है।
डिफाल्टर चीनी मिलों पर भू-राजस्व आरसी की सीधी चेतावनी
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो चीनी मिलें किसानों का पसीना बहाने के बाद भी समय पर भुगतान नहीं करती हैं, उनके प्रति सरकार की नीति बिल्कुल भी नरम नहीं होगी। उन्होंने आदेश दिया कि जिन मिलों ने 15 सितंबर तक अपने भुगतान का 90% हिस्सा साफ नहीं किया, उनके खिलाफ 16 सितंबर की सुबह भू-राजस्व अधिनियम की धारा के तहत वसूली प्रमाण पत्र (Recovery Certificate - RC) जारी कर दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा, “किसान का गन्ना सीधे मिल में जाता है और चीनी बनती है। चीनी, शीरा और एथेनॉल की बिक्री से आने वाले पैसे पर पहला अधिकार किसान का है। मिल प्रबंधकों को स्पष्ट बता दिया जाए कि वे चीनी और उप-उत्पादों की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग किसी अन्य व्यवसाय या लोन चुकाने में नहीं कर सकते। शत-प्रतिशत पैसा केवल किसान के खाते में जाएगा।”
एस्क्रो खाते और टैगिंग व्यवस्था का कड़ाई से पालन
अपर मुख्य सचिव (गन्ना) ने बैठक में जानकारी दी कि सभी डिफाल्टर मिलों के चीनी गोदामों पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की जा चुकी है। मिलों द्वारा प्रतिदिन बेची जाने वाली चीनी का 85% मूल्य अनिवार्य रूप से एस्क्रो खाते में जमा कराया जा रहा है, जिसे बैंकों के माध्यम से प्रतिदिन शाम को किसानों के बैंक खातों में आरटीजीएस कराया जाता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन चीनी मिलों का पुराना भुगतान 20 सितंबर तक शत-प्रतिशत क्लीयर नहीं होगा, उन्हें आगामी पेराई सत्र के लिए एक भी बाह्य गन्ना क्रय केंद्र (Purchase Center) आवंटित नहीं किया जाएगा और न ही पेराई शुरू करने का अंतिम लाइसेंस मिलेगा। सरकार का लक्ष्य 15 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में पारदर्शी, सुचारू और किसान-हितैषी पेराई सत्र का संचालन करना है।
पेराई सत्र 2026-27 के लिए नए दिशा-निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि आगामी सत्र में पर्ची वितरण पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होना चाहिए। किसी भी किसान को पर्ची के लिए समिति के चक्कर न काटने पड़ें। ई-गन्ना ऐप पर प्रत्येक किसान को 7 दिन पहले पर्ची की सूचना मिलनी चाहिए और तौल के 14 दिन के भीतर अनिवार्य भुगतान के नियम का अक्षरशः पालन कराया जाए।
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