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गन्ना किस्म Co-0238 की विदाई: 86 से 29 प्रतिशत पर सिमटा रकबा, 2026-27 में ये 5 किस्में होंगी अनिवार्य

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 30, 2026 • 3 min read
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गन्ना किस्म Co-0238 की विदाई: 86 से 29 प्रतिशत पर सिमटा रकबा, 2026-27 में ये 5 किस्में होंगी अनिवार्य
अंतिम अपडेट: August 30, 2026 10:05 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ना किस्म Co-0238 की विदाई: 86 से 29 प्रतिशत पर सिमटा रकबा, 2026-27 में ये 5 किस्में होंगी अनिवार्य

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Aamir Raza - 2026-08-30

शाहजहांपुर/लखनऊ (विशेष संवाददाता)। उत्तर प्रदेश के गन्ना उत्पादन में क्रांति लाने वाली प्रजाति ‘सीओ-0238’ का दौर अब समाप्त हो रहा है। यूपी गन्ना शोध परिषद और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, लाल सड़न (रेड रॉट) रोग की चपेट में आने के कारण इस किस्म का क्षेत्रफल वर्ष 2020-21 के 86 प्रतिशत से घटकर 2026 में मात्र 29 प्रतिशत रह गया है।

आगामी शरदकालीन बुवाई के लिए गन्ना विकास विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे सीओ-0238 की जगह पांच नई रोगरोधी और अधिक शर्करा वाली प्रजातियों को ही प्राथमिकता दें।

यूपी गन्ना शोध परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वी.पी. सिंह ने बताया, “सीओ-0238 एक शानदार किस्म रही है, लेकिन लगातार एक ही किस्म की खेती होने से फंगस के नए पैथोटाइप्स तैयार हो गए। अब यह किस्म अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता खो चुकी है। किसानों की आय सुरक्षित रखने के लिए विभाग ने तेजी से इसका बीज प्रतिस्थापन कराया है।”

शरदकालीन बुवाई 2026 के लिए अनुमोदित 5 प्रमुख प्रजातियां

विभाग ने पेराई सत्र 2026-27 के लिए निम्नलिखित अगेती प्रजातियों के प्रमाणित बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की है:

गन्ना किस्मपरिपक्वता कालऔसत उपज (प्रति एकड़)शर्करा रिकवरीप्रमुख विशेषताएं
Co-15023अगेती380 से 450 क्विंटल12.2% से 12.8%लाल सड़न प्रतिरोधी, अगेती पेराई हेतु सर्वोत्तम
CoLk-14201 (इक्षु-10)अगेती400 से 460 क्विंटल11.9% से 12.4%पेड़ी फसल में अधिक फुटाव, सूखा सहनशील
CoS-19231 (लाहिड़ी)अगेती420 से 480 क्विंटल12.0% से 12.5%मोटा तना, आंधी में गिरने से बचाव
CoSe-17451 (कृष्णा)अगेती390 से 440 क्विंटल11.8% से 12.3%पूर्वी व मध्य यूपी के लिए उपयुक्त
Co-0118अगेती370 से 420 क्विंटल12.0% से 12.6%ठोस और वजनदार गन्ना, अधिक रस

सिंगल बड तकनीक से 80 प्रतिशत बीज की बचत

गन्ना आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी एडवाइजरी में किसानों को सिंगल बड यानी एक आंख के टुकड़े से नर्सरी तैयार करने की सलाह दी गई है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक बुवाई में प्रति एकड़ 25 से 30 क्विंटल बीज गन्ना लगता था, जबकि पॉली-ट्रे विधि से मात्र 5 से 6 क्विंटल बीज में ही पूरा खेत तैयार हो जाता है। इससे किसानों के बीज खर्च में प्रति एकड़ 8,000 से 10,000 रुपये की सीधी बचत होती है।

मुजफ्फरनगर के प्रगतिशील किसान संजीव राठी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “हमने पिछले वर्ष 5 एकड़ में को-15023 और कोलख-14201 की बुवाई की थी। फसल पूरी तरह हरी-भरी रही और लाल सड़न का एक भी पौधा नहीं दिखा। मिल ने भी हमारी फसल को अगेती पर्चियों पर प्राथमिकता से तौला।”

पश्चिमी यूपी के अमरोहा जिले की मिलों जैसे बेलवाड़ा चीनी मिल, चंदनपुर मिल और असमौली मिल ने अपनी विकास समितियों के माध्यम से इन नई किस्मों के वितरण केंद्र स्थापित किए हैं।

किसान अपने सट्टे में दर्ज किस्म की जांच enquiry.caneup.in पोर्टल पर कर सकते हैं। समय पर पर्चियां पाने के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026-27 देखें और मोबाइल पर ई-गन्ना ऐप डाउनलोड करें।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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