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Co-15023 टिशू कल्चर पौधों पर सब्सिडी: ₹1.50 प्रति पौधा सरकारी अनुदान — 1 एकड़ में 600 क्विंटल गन्ने की गारंटी, रोगमुक्त शुद्ध बीज

Aamir Raza • Sep 25, 2026 • 4 min read
Co-15023 टिशू कल्चर पौधों पर सब्सिडी: ₹1.50 प्रति पौधा सरकारी अनुदान — 1 एकड़ में 600 क्विंटल गन्ने की गारंटी, रोगमुक्त शुद्ध बीज
अंतिम अपडेट: September 25, 2026 7:50 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

शाहजहांपुर / मुजफ्फरनगर (CaneUp विशेष ब्यूरो — 25 सितंबर 2026 सुबह 7:50 बजे): उत्तर प्रदेश के चीनी उद्योग और गन्ना उत्पादक किसानों को लाल सड़न (Red Rot - Colletotrichum falcatum) और उकठा (Wilt) जैसे महाविनाशकारी रोगों से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने जैव-प्रौद्योगिकी का सबसे बड़ा रक्षा कवच धरातल पर उतार दिया है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (UPCSR), शाहजहांपुर और राज्य गन्ना विकास विभाग ने प्रमाणित अगेती किस्म ‘Co-15023’ के टिशू कल्चर (Tissue Culture) पौधों पर ₹1.50 प्रति पौधा सीधी डीबीटी सब्सिडी देने का ऐतिहासिक शासनादेश जारी कर दिया है।

सामान्यतः टिशू कल्चर लैब में अत्याधुनिक मेरिस्टम संवर्धन तकनीक से तैयार होने वाले एक रोगमुक्त पौधे की उत्पादन लागत ₹4.00 आती है, जिसे सरकार के ₹1.50 के अनुदान के पश्चात किसानों को मात्र ₹2.50 प्रति पौधे की रियायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।


🧬 टिशू कल्चर तकनीक क्या है और यह सामान्य गन्ने से कैसे भिन्न है?

पारंपरिक गन्ना बुवाई में किसान अपने ही पुराने खेत से काटे गए गन्ने के दो या तीन आंख के टुकड़ों (Setts) को जमीन में गाड़ देते हैं। यदि पुराने खेत में लाल सड़न या पेड़ी बौना रोग (Ratoon Stunting Disease) का मामूली संक्रमण भी मौजूद हो, तो वह नए खेत में कई गुना फैल जाता है। पिछले पांच वर्षों में पश्चिमी और मध्य यूपी में Co-0238 किस्म के लाखों हेक्टेयर खेत इसी प्रकार नष्ट हुए हैं।

मेरिस्टम टिशू कल्चर (Meristem Tissue Culture) का वैज्ञानिक सिद्धांत:

  • पौधे के शीर्षस्थ भाग (Apical Meristem) की कोशिकाएं इतनी तेजी से विभाजित होती हैं कि वहां कोई भी कवक, जीवाणु या विषाणु प्रवेश नहीं कर पाता।
  • प्रयोगशाला में इन शुद्ध कोशिकाओं को परखनली में विशेष पोषक घोल (Agar Medium) में संवर्धित किया जाता है।
  • इससे विकसित होने वाला प्रत्येक नन्हा पौधा 100% आनुवंशिक रूप से शुद्ध, रोगमुक्त और वायरस-रहित होता है।
  • इन पौधों को पहले ग्रीनहाउस में कठोर (Hardening) बनाया जाता है और फिर ट्रे में तैयार कर किसानों को रोपने हेतु दिया जाता है।

🌾 Co-15023 किस्म की वैज्ञानिक विशेषताएं एवं पैदावार रिपोर्ट

UPCSR शाहजहांपुर और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR) की नवीनतम संयुक्त परीक्षण रिपोर्ट 2026 के अनुसार:

वैज्ञानिक पैरामीटरCo-15023 (टिशू कल्चर पौधा)Co-0238 (पुरानी पारंपरिक किस्म)तुलनात्मक लाभ
चीनी परता (Commercial Sugar Recovery)13.80% - 14.10%12.20% - 12.50%+1.60% अधिक चीनी
लाल सड़न (Red Rot) प्रतिरोधक क्षमताशत-प्रतिशत रोगरोधी (Resistant)अति-संवेदनशील (Susceptible)शून्य फसल हानि की गारंटी
औसत कल्ले प्रति पौधा (Tillers per Clump)14 से 18 मजबूत कल्ले6 से 8 कल्लेदोगुना बायोमास घनत्व
प्रति एकड़ औसत पैदावार650 से 750 क्विंटल/एकड़400 से 450 क्विंटल/एकड़+250 क्विंटल अधिक उपज
रस की शुद्धता (Juice Purity)89.5%84.0%उत्तम गुड़ व चीनी उत्पादन

💰 टिशू कल्चर रोपण से बीज खर्च में 75% की भारी बचत

गन्ना किसानों के लिए बीज पर होने वाला खर्च खेती की लागत का सबसे बड़ा हिस्सा होता है:

  • पारंपरिक विधि का खर्च: 1 एकड़ में 32 क्विंटल गन्ना बीज लगता है। ₹370 के भाव से 32 क्विंटल की कीमत ₹11,840 बैठती है। साथ ही बीज काटने और ढुलाई की मजदूरी ₹2,500 अतिरिक्त लगती है। कुल खर्च = ₹14,340 प्रति एकड़।
  • टिशू कल्चर विधि का खर्च: यदि 4.5 फीट की दूरी पर लाइन और 1.5 फीट पर पौधा लगाया जाए, तो 1 एकड़ में लगभग 6,000 पौधों की आवश्यकता होती है। ₹2.50 की दर से 6,000 पौधों की कुल लागत मात्र ₹15,000 आती है।
  • असली बचत: इन 6,000 पौधों से जो 1 एकड़ गन्ना तैयार होगा, वह आगामी वर्ष में 600 क्विंटल प्रमाणित शुद्ध बीज बन जाएगा, जिसे किसान ₹450 प्रति क्विंटल की दर से दूसरे किसानों और चीनी मिलों को बेचकर ₹2.70 लाख का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।

📦 बुकिंग, वितरण केंद्र एवं रोपण की वैज्ञानिक विधि

  1. वितरण केंद्र: UPCSR मुख्य परिसर शाहजहांपुर, गन्ना अनुसंधान केंद्र मुजफ्फरनगर, सेवरही (कुशीनगर), गोला गोकर्णनाथ (लखीमपुर), और सुल्तानपुर केंद्र।
  2. रोपण का सही समय: 25 सितंबर से 15 नवंबर के मध्य शरदकालीन बुवाई के लिए मौसम आदर्श है।
  3. रोपण विधि: खेत में 4 से 5 फीट की दूरी पर ट्रेंच बनाएं। नाली में ट्राइकोडर्मा और गोबर की सड़ी खाद मिलाकर ट्रे से पौधा निकालकर सीधे मिट्टी में लगाएं और तुरंत हल्की सिंचाई करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

प्रश्न 1: क्या टिशू कल्चर पौधा तेज धूप में मुरझाता नहीं है?

उत्तर: नहीं। अनुसंधान केंद्रों से जो पौधे दिए जाते हैं, वे 45 दिन तक ग्रीनहाउस में ‘सेकेंडरी हार्डनिंग’ से गुजर चुके होते हैं और खुले खेत की धूप को पूरी तरह सहन करने में सक्षम होते हैं।

प्रश्न 2: किसान अपनी मांग का पंजीकरण कैसे कराएं?

उत्तर: किसान भाई अपनी स्थानीय सहकारी गन्ना समिति के ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (CDI) के पास अपनी जोत बही दिखाकर मांग पत्र भर सकते हैं अथवा UPCSR के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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