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2 अक्टूबर से गन्ना बेल्ट में किसान अधिकार यात्रा: मीरापुर से 7 अक्टूबर तक गन्ना मूल्य और बकाए पर होगा संवाद

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 2, 2026 • 6 min read
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2 अक्टूबर से गन्ना बेल्ट में किसान अधिकार यात्रा: मीरापुर से 7 अक्टूबर तक गन्ना मूल्य और बकाए पर होगा संवाद
अंतिम अपडेट: October 2, 2026 12:45 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ने की खेती का दिल कहे जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज से किसानों के मुद्दों पर एक बड़ी यात्रा शुरू हो रही है। कांग्रेस की किसान अधिकार यात्रा 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को मुजफ्फरनगर के मीरापुर से शुरू होगी और 7 अक्टूबर तक गौतमबुद्धनगर के जेवर तक जाएगी। छह दिनों में छह जिलों से गुजरने वाली इस यात्रा में गन्ने के मूल्य, भुगतान में देरी, एमएसपी और खाद की उपलब्धता जैसे मुद्दे सबसे आगे रखे गए हैं।

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अभिमन्यु त्यागी ने मेरठ में कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के वादे, न्यूनतम समर्थन मूल्य, गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान और खाद की उपलब्धता किसानों के लिए सबसे अहम मुद्दे हैं। पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार ने किसानों को कई मुद्दों पर भरोसा दिलाया, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी समस्याएं आज भी जस की तस हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर पार्टी किसान अधिकार यात्रा के जरिए सीधे किसानों के बीच पहुंचेगी।

यात्रा का पूरा रूट: 2 से 7 अक्टूबर तक छह जिले

कांग्रेस की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार यात्रा का शेड्यूल इस तरह तय हुआ है:

  • 2 अक्टूबर: मुजफ्फरनगर के मीरापुर से शुरुआत — हरी झंडी दिखाकर यात्रा का शुभारंभ
  • 3 अक्टूबर: शामली के थानाभवन में कार्यक्रम
  • 4 अक्टूबर: बागपत के छपरौली में सभा
  • 5 अक्टूबर: मेरठ के सिवालखास और मेरठ दक्षिण में संवाद
  • 6 अक्टूबर: गाजियाबाद के लोनी में कार्यक्रम
  • 7 अक्टूबर: गौतमबुद्धनगर के जेवर में समापन

ध्यान देने वाली बात है कि यह पूरा रूट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की गन्ना बेल्ट से होकर गुजरता है। मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत और मेरठ — ये वही जिले हैं जहां उत्तर प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से बड़ा हिस्सा चलता है और जहां सबसे ज्यादा गन्ना किसान बसे हैं। इसीलिए यात्रा के एजेंडे में गन्ने का मूल्य और बकाया भुगतान प्रमुखता से रखे गए हैं।

हरी झंडी पर कौन-कौन दिग्गज मौजूद रहेंगे

कार्यक्रम के अनुसार 2 अक्टूबर को मीरापुर में यात्रा की शुरुआत में कांग्रेस के बड़े नेता शामिल होंगे। इनमें एआईसीसी के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय, एआईसीसी के उत्तर प्रदेश सह-प्रभारी सचिव संजीव आर्य, सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद, अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष अखिलेश शुक्ला और वरिष्ठ नेता रोहित जाखड़ शामिल होंगे।

यात्रा के आगे के चरणों में वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी अलग-अलग जिलों के कार्यक्रमों के हिसाब से तय की गई है। 5 अक्टूबर को मेरठ के सिवालखास में होने वाले कार्यक्रम में सांसद इमरान मसूद के साथ ब्रजलाल खाबरी, अखिलेश शुक्ला, रोहित जाखड़ और मनोज चौधरी के संबोधन का कार्यक्रम बताया गया है। पार्टी की सूची के मुताबिक यात्रा के विभिन्न चरणों में राज बब्बर सहित कई वरिष्ठ नेता भी जुड़ेंगे।

गन्ना किसानों के लिए पांच बड़े मुद्दे

कांग्रेस नेताओं के अनुसार यात्रा के दौरान किसानों से संवाद में ये मुद्दे सबसे ऊपर रखे जाएंगे:

1. गन्ने का मूल्य: गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल है — इस सीजन का गन्ना मूल्य कब और कितना घोषित होगा। केंद्र सरकार ने 2026-27 पेराई सीजन के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय किया है, लेकिन राज्य सलाहकारी मूल्य (SAP) की घोषणा अभी बाकी है। पेराई सीजन 2025-26 में SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था। किसान संगठनों की मांग इससे कहीं ऊपर की है — कुछ समय पहले अमरोहा की महापंचायत में 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उठ चुकी है।

2. बकाया भुगतान में देरी: कई चीनी मिलों पर किसानों का करोड़ों रुपये का भुगतान अटका है। बजाज और ओसवाल जैसी मिलों के मामले सुर्खियों में रहे हैं। भुगतान में देरी गन्ना किसानों की सबसे बड़ी शिकायत है और यात्रा के एजेंडे में यह दूसरे नंबर का मुद्दा है।

3. न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी): गेहूं-धान समेत अन्य फसलों के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग भी यात्रा के मुद्दों में शामिल है।

4. खाद और बीज की उपलब्धता: बुवाई के समय खाद-बीज की किल्लत किसानों की पुरानी परेशानी है। पार्टी का कहना है कि किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ता है।

5. बिजली के दाम और आवारा पशु: किसान संगठनों के अनुसार ट्यूबवेल की बिजली के बढ़ते दाम और आवारा पशुओं से फसल को हो रहा नुकसान भी गांव-गांव में उठेगा।

2027 के चुनाव से पहले किसान वोट बैंक की लड़ाई

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इस यात्रा का संदर्भ 2027 के विधानसभा चुनाव भी हैं। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दो दिन पहले ही कहा था कि उत्तर प्रदेश समेत कई राज्य केंद्र के एफआरपी से ऊपर राज्य सलाहकारी मूल्य (SAP) तय करते हैं, जिससे किसानों को ज्यादा भाव मिलता है। गन्ना मूल्य हमेशा से पश्चिमी यूपी की राजनीति का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है।

पार्टी के पश्चिम उत्तर प्रदेश प्रभारी संजीव आर्य के अनुसार यात्रा में हजारों किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ शामिल होंगे। संगठन का दावा है कि यह यात्रा किसानों के सम्मान और अधिकार की यात्रा है, न कि सामान्य राजनीतिक यात्रा। यात्रा के दौरान अलग-अलग जिलों में किसानों की समस्याएं सुनने और स्थानीय मांगों को नोट करने का कार्यक्रम भी रखा गया है।

गन्ना किसानों को क्या करना चाहिए

अगर आप पश्चिमी यूपी के गन्ना किसान हैं और आपके जिले में यात्रा आ रही है, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • अपने गन्ना बकाए, पर्ची या भुगतान से जुड़ी शिकायतें लिखकर रखें — यात्रा के दौरान किसानों से संवाद का कार्यक्रम है।
  • गन्ना भुगतान से जुड़ी शिकायत के लिए किसान कॉल सेंटर के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर भी संपर्क किया जा सकता है।
  • गन्ना मूल्य, SAP या भुगतान से जुड़ा कोई भी फैसला सामने आने पर हम caneup.xyz पर सबसे पहले अपडेट देंगे।

जवाब जानिए

किसान अधिकार यात्रा कब और कहां से शुरू हो रही है?

यह यात्रा 2 अक्टूबर 2026 को मुजफ्फरनगर के मीरापुर से शुरू होगी और 7 अक्टूबर को गौतमबुद्धनगर के जेवर में इसका समापन होगा।

यात्रा किन जिलों से होकर गुजरेगी?

छह दिनों में यात्रा मुजफ्फरनगर (मीरापुर), शामली (थानाभवन), बागपत (छपरौली), मेरठ (सिवालखास और मेरठ दक्षिण), गाजियाबाद (लोनी) और गौतमबुद्धनगर (जेवर) से गुजरेगी।

यात्रा में गन्ना किसानों के कौन से मुद्दे उठेंगे?

गन्ने का मूल्य (SAP/FRP), बकाया भुगतान में देरी, एमएसपी, खाद-बीज की उपलब्धता और बिजली के दाम प्रमुख मुद्दे हैं।

यात्रा की शुरुआत में कौन-कौन नेता शामिल होंगे?

राजेंद्र पाल गौतम, अजय राय, संजीव आर्य, इमरान मसूद, अखिलेश शुक्ला और रोहित जाखड़ सहित कई वरिष्ठ नेता 2 अक्टूबर को मीरापुर में मौजूद रहेंगे।

इस सीजन का गन्ना मूल्य (SAP 2026-27) घोषित हुआ क्या?

नहीं। केंद्र ने 2026-27 सीजन का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन उत्तर प्रदेश के SAP 2026-27 की घोषणा अभी बाकी है। 2025-26 में SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल (अगेती) था।

स्रोत: रॉयल बुलेटिन (1 अक्टूबर 2026), मुड़गल टाइम्स, डेक्कन हेराल्ड (30 सितंबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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