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5 मिनट में बुक हुए 2 लाख सिंगल बड: को.शा. 23232 को किसानों ने हाथों-हाथ लिया, बीज न मिले तो फरवरी में मिलेगा मौका

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 12, 2026 • 6 min read
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5 मिनट में बुक हुए 2 लाख सिंगल बड: को.शा. 23232 को किसानों ने हाथों-हाथ लिया, बीज न मिले तो फरवरी में मिलेगा मौका
अंतिम अपडेट: October 12, 2026 10:30 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों ने जिस अंदाज में नई गन्ना किस्म को.शा. 23232 को अपनाया है, वह शोध वैज्ञानिकों के लिए भी हैरानी भरा रहा। शुक्रवार 9 अक्टूबर की सुबह 10 बजे जैसे ही गन्ना विभाग के पोर्टल enquiry.caneup.in पर नई किस्म के सिंगल बड बीज की ऑनलाइन बुकिंग खुली, किसान वेबसाइट पर टूट पड़े। नतीजा — महज पांच मिनट के अंदर वितरण के लिए रखे गए पूरे 2 लाख सिंगल बड बुक हो गए। बड़ी संख्या में किसान बुकिंग कराने से वंचित रह गए, जिन्हें अब शोध परिषद ने फरवरी में बीज के दूसरे दौर का भरोसा दिया है।

यह खबर उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर की नई अगेती किस्म को.शा. 23232 के लिए किसानों के भरोसे का सबूत है। लाल सड़न रोग से जूझ रही पुरानी प्रचलित किस्म को.0238 का विकल्प तलाश रहे लाखों किसानों के लिए यह किस्म उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है।

शुक्रवार सुबह 10 बजे: बुकिंग खुली और 5 मिनट में स्टॉक खत्म

शोध परिषद ने इस साल मिनी सीड किट योजना के तहत दो नई किस्मों के सिंगल बड किसानों को देने का ऐलान किया था — को.शा. 23232 के 2 लाख सिंगल बड और को.शा. 19231 के 1 लाख सिंगल बड। बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन थी; एक किसान अपने कृषक कोड से सिर्फ एक किट बुक करा सकता था और ऑफलाइन बुकिंग किसी सूरत में स्वीकार नहीं की गई।

9 अक्टूबर सुबह 10 बजे बुकिंग विंडो खुलते ही इतनी बड़ी संख्या में किसान पोर्टल पर आए कि को.शा. 23232 के पूरे 2 लाख बड पांच मिनट में बुक हो गए। यानी पहले आओ, पहले पाओ के नियम के तहत बहुत से किसान बीज पाने से चूक गए। शोध परिषद के निदेशक अभिषेक आनंद ने कहा है कि किसानों के इस उत्साह को देखते हुए सिंगल बड और टिशू कल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों से नई किस्म के बीज का तेजी से संवर्धन किया जा रहा है, ताकि आगामी बुवाई सत्र में अधिक से अधिक किसानों तक यह बीज पहुंच सके।

परिषद के मुताबिक पहली बार ऐसा हो रहा है कि परिषद की ओर से विकसित किसी नई गन्ना किस्म का बीज उसके अवमुक्त होने के एक माह के भीतर किसानों को उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। को.शा. 23232 को सितंबर 2026 में ही उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अवमुक्त किया गया था।

क्यों इस किस्म के दीवाने हुए किसान: डॉ. अरविंद कुमार की राय

किस्म के जनक और शोध परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार को.शा. 23232 तेजी से बढ़ने वाली अगेती किस्म है। उन्होंने बताया कि इस किस्म में जमाव, कल्लों की संख्या, मिल योग्य गन्नों की संख्या, उपज क्षमता और शर्करा प्रतिशत — सभी पहलू बेहतर हैं। डॉ. अरविंद ने इसे प्रदेश में प्रचलित को.0238 के विकल्प के रूप में उपयोगी होने की संभावना जताई है।

शोध परिषद के परीक्षणों में को.शा. 23232 ने प्रभावित किया है। पौधा गन्ने की औसत उपज 85.56 टन प्रति हेक्टेयर मिली, जो को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। पेड़ी फसल में भी यह 80.57 टन प्रति हेक्टेयर पर पहुंची, यानी को.0238 से 3.16 प्रतिशत ज्यादा। नवंबर, जनवरी और मार्च — तीनों समय बिंदुओं पर इसकी शर्करा मात्रा मानक किस्म से अधिक मिली। सबसे अहम बात: यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है और इसकी पेड़ी क्षमता भी अच्छी है।

दरअसल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में को.0238 में लाल सड़न रोग ने भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे राज्य के चीनी उत्पादन पर भी असर पड़ा। ऐसे में एक ऐसी अगेती किस्म जो लाल सड़न से लड़ सके और ज्यादा चीनी भी दे, किसानों के लिए सोने पर सुहागा है। यही वजह है कि 5 मिनट में 2 लाख बड की बुकिंग होना असल में इस भरोसे का इजहार है।

बुकिंग करा चुके किसान अब क्या करें: बीज लेने की पूरी प्रक्रिया

जिन किसानों ने 9 अक्टूबर को बुकिंग कराई थी, उन्हें अब बीज वितरण का इंतजार है। बुकिंग के समय मिली पंजीकरण संख्या को सुरक्षित रखें — बीज लेते समय इसी की जरूरत पड़ेगी। बुकिंग के समय दिया गया एक किट का शुल्क 200 रुपये था, जिसका भुगतान ऑनलाइन यूपीआई या कार्ड से किया गया था।

बीज वितरण अक्टूबर में प्रस्तावित मिठास मेला-2026 के दौरान किया जाएगा। बुकिंग कराने वाले किसानों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर बीज वितरण की तारीख की जानकारी एसएमएस से भेजी जाएगी। तय तारीख पर किसान को संबंधित संस्थान पहुंचकर अपना मिनी सीड किट स्वयं लेना होगा।

बीज लेने के दिन तीन चीजें साथ ले जाना अनिवार्य है — पंजीकरण नंबर, आधार कार्ड की मूल प्रति और किसान की स्वयं उपस्थिति। पहचान की पुष्टि के बाद टोकन मिलेगा, फिर निर्धारित काउंटर से किट मिलेगी। ध्यान रहे, किसी दूसरे व्यक्ति को भेजकर किट नहीं मिलेगी।

इस बार चूक गए? फरवरी में मिलेगा दूसरा मौका

जो किसान पांच मिनट की इस रेस में बीज नहीं ले पाए, उनके लिए अच्छी खबर है। शोध परिषद ने भरोसा दिया है कि फरवरी में बीज वितरण का दूसरा दौर होगा, जिसमें नई किस्मों के सिंगल बड फिर से उपलब्ध कराए जाएंगे। सिंगल बड और टिशू कल्चर तकनीक से बीज का संवर्धन तेजी से चल रहा है, ताकि अगले बुवाई सत्र से पहले ज्यादा से ज्यादा किसानों के खेतों तक यह बीज पहुंचे।

फरवरी के दूसरे दौर में मौका न चूकने के लिए किसान अभी से तैयारी रखें — enquiry.caneup.in पोर्टल पर अपने कृषक कोड और पंजीकृत मोबाइल नंबर को अपडेट रखें, भुगतान के लिए यूपीआई या कार्ड तैयार रखें (बुकिंग सिर्फ ऑनलाइन होती है), और बुकिंग के दिन सुबह 10 बजे से पहले पोर्टल पर लॉगिन करके तैयार रहें। पिछली बार पांच मिनट में स्टॉक खत्म हुआ था, अगली बार भीड़ और ज्यादा हो सकती है।

इस बीच जिन किसानों के खेतों में को.0238 लगा है, उन्हें लाल सड़न रोग के लक्षणों पर नजर रखनी चाहिए। रोगग्रस्त गन्ने को तुरंत खेत से हटाकर नष्ट करें, ताकि संक्रमण न फैले। नई किस्म का बीज मिलते ही उसे छोटे प्लॉट में लगाकर पहले अपने खेत की मिट्टी और पानी के हिसाब से उसका प्रदर्शन देखें — यह तरीका वैज्ञानिक भी सुझाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

को.शा. 23232 की बुकिंग कब और कहां हुई थी? बुकिंग शुक्रवार 9 अक्टूबर सुबह 10 बजे गन्ना विभाग के पोर्टल enquiry.caneup.in पर शुरू हुई थी और पांच मिनट में 2 लाख सिंगल बड बुक हो गए।

मुझे बीज नहीं मिला, अब क्या करूं? निराश न हों। शोध परिषद ने फरवरी में बीज वितरण का दूसरा दौर आयोजित करने का भरोसा दिया है। अपने कृषक कोड और मोबाइल नंबर को पोर्टल पर अपडेट रखें।

बुकिंग करा चुके किसानों को बीज कब और कैसे मिलेगा? बीज वितरण अक्टूबर में मिठास मेला-2026 के दौरान होगा। पंजीकृत मोबाइल पर एसएमएस से तारीख की जानकारी मिलेगी। बीज लेने के दिन पंजीकरण नंबर, आधार कार्ड की मूल प्रति और स्वयं उपस्थिति जरूरी है।

को.शा. 23232 खास क्यों है? यह तेजी से बढ़ने वाली अगेती किस्म है जिसमें जमाव, कल्लों की संख्या, मिल योग्य गन्नों की संख्या, उपज क्षमता और शर्करा प्रतिशत बेहतर हैं। यह लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है और को.0238 का विकल्प मानी जा रही है।

एक किसान को कितने किट मिल सकते हैं? एक किसान अपने कृषक कोड से अधिकतम एक ही मिनी सीड किट ले सकता है। ऑफलाइन बुकिंग स्वीकार नहीं की जाती।

स्रोत: रूरल वॉयस (हिंदी), लाइव हिंदुस्तान (शाहजहांपुर)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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