देवरिया में Cos 8279 गन्ने पर लाल सड़न का हमला, किसानों की बढ़ी चिंता — पैदावार और रिकवरी पर खतरा, जानें बचाव के उपाय

देवरिया जिले के बनकटा क्षेत्र के गन्ना किसानों की चिंता बढ़ गई है। बेहतर पैदावार और अच्छी चीनी रिकवरी की उम्मीद में बोई गई Cos 8279 प्रजाति के गन्ने में लाल सड़न रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। किसानों को डर है कि अगर समय रहते बीमारी पर काबू नहीं पाया गया तो उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर सकता है। किसानों ने गन्ना विभाग और चीनी मिल प्रबंधन से प्रभावित खेतों का तुरंत निरीक्षण कर जांच और उपचार की मांग की है।
बनकटा में क्या दिखा, किसानों ने क्या कहा
देवरिया के बनकटा इलाके में Cos 8279 प्रजाति के गन्ने की फसल पर लाल सड़न बीमारी के लक्षण सामने आए हैं। किसानों के मुताबिक फसल की बढ़वार पर असर दिखने लगा है और गन्ने की गुणवत्ता में गिरावट की आशंका है। गन्ने की खेती इस क्षेत्र के किसानों की आय का प्रमुख आधार है, इसलिए फसल में रोग लगना उनके लिए सीधी आर्थिक परेशानी का कारण बन गया है।
लाल सड़न क्या है — गन्ने का सबसे खतरनाक रोग
लाल सड़न रोग को गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है। यह कोलेटोट्राइकम फाल्केटम नामक फफूंद के कारण होता है और गन्ने की फसल में लगने वाला सबसे घातक रोग माना जाता है। इस रोग का प्रकोप जुलाई-अगस्त के महीनों में अधिक देखा जाता है, लेकिन इसके लक्षण फसल की कटाई तक बने रह सकते हैं। रोग का प्रसार मुख्य रूप से संक्रमित बीज गन्ने और मिट्टी के जरिए होता है, और एक ही खेत में साल-दर-साल गन्ना बोने से इसका खतरा बढ़ जाता है।
रोग की पहचान के लक्षण साफ हैं। प्रभावित पौधों की पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़ने लगती हैं और फिर ऊपर से नीचे की तरफ सूखने लगती हैं। गन्ने को बीच से चीरकर देखने पर भीतरी भाग लाल रंग का नजर आता है, जिसमें सफेद रंग के धब्बे बने होते हैं। पौधों के सूखने पर उनसे खट्टी शराब जैसी गंध आने लगती है। गन्ने की गांठों और छिलकों पर फफूंद के बीजाणु विकसित होने लगते हैं। अगर आपके खेत में भी ऐसे लक्षण दिखें तो इसे हल्के में न लें — यही वह समय है जब तुरंत कदम उठाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है।
Cos 8279 पर हमला क्यों चिंता बढ़ाता है
Cos 8279 उन नई प्रजातियों में से है जिन्हें किसानों ने बेहतर पैदावार और अच्छी चीनी रिकवरी की उम्मीद में अपनाया है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के वैज्ञानिकों के शोध के मुताबिक लाल सड़न के कारण पहले भी कई प्रजातियां प्रभावित हो चुकी हैं — को. 0238 प्रजाति पर इस रोग ने महामारी का रूप ले लिया था और उसकी जगह लेने वाली प्रजातियों में कोशा. 8279 का भी नाम शामिल है। यानी यह वही प्रजाति है जिसे पुरानी रोगग्रस्त प्रजाति के विकल्प के तौर पर अपनाया गया था, और अब उसी पर रोग के लक्षण दिखना किसानों के भरोसे को हिला रहा है।
किसान अभी क्या करें — पहचान, बचाव और उपचार
लाल सड़न का कोई पक्का इलाज नहीं है — एक बार पौधा संक्रमित हो जाए तो उसे बचाना लगभग नामुमकिन होता है। इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है। कृषि विशेषज्ञों और देहात की सलाह के मुताबिक किसान ये कदम उठा सकते हैं:
रोग की पहचान करें: पत्तियों का पीला पड़ना और ऊपर से नीचे सूखना, गन्ना चीरने पर अंदर लाल रंग और सफेद धब्बे, और सूखे पौधों से शराब जैसी गंध — ये तीनों लक्षण लाल सड़न की पहचान हैं। लक्षण दिखते ही गन्ना विभाग के स्थानीय अधिकारी या मिल के गन्ना विकास कर्मी से संपर्क करें।
संक्रमित पौधे हटाएं: प्रभावित पौधों को खेत से बाहर निकालकर जला दें। रोगग्रस्त फसल की पेड़ी (रैटून) का उपयोग अगले साल बीज के तौर पर बिल्कुल न करें, क्योंकि रोग बीज गन्ने के जरिए ही सबसे ज्यादा फैलता है।
बीज उपचार करें: बुवाई से पहले बीज गन्ने को कार्बेन्डाजिम या मैंकोजेब के घोल से उपचारित करें। गर्म नमी शोधन मशीन से 54 डिग्री सेल्सियस पर एक घंटे तक बीज को उपचारित करके भी इस रोग से बचा जा सकता है।
फसल चक्र अपनाएं: एक ही खेत में बार-बार गन्ना न बोएं। फसल चक्र का प्रयोग करें और खेत में जल निकास की व्यवस्था दुरुस्त रखें, क्योंकि जलभराव वाली मिट्टी में रोग का प्रसार तेज होता है।
विभाग और मिल प्रबंधन से क्या उम्मीद है
किसानों का कहना है कि Cos 8279 प्रजाति में बीमारी के लक्षण सामने आने पर गन्ना विभाग और चीनी मिल के अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर किसानों को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है — विभागीय टीम खेतों का दौरा करके बीमारी की पुष्टि करे और प्रभावित किसानों को उपचार की लिखित सलाह दे।
इस बीच पेराई सत्र 2026-27 को लेकर किसानों की एक और बड़ी चिंता बनी हुई है — इस सत्र के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 के लिए अगेती प्रजाति का भाव 400 रुपये, सामान्य का 390 रुपये और अनुपयुक्त प्रजाति का 355 रुपये प्रति क्विंटल तय हुआ था। किसान संगठन 100 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, जबकि मिल मालिक मौजूदा दरें बनाए रखने के पक्ष में हैं।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
देवरिया की यह खबर एक चेतावनी है, घबराहट की वजह नहीं। लाल सड़न के लक्षण दिखे हैं, नुकसान का आकलन अभी बाकी है। किसान अपने खेतों की रोजाना निगरानी करें, लक्षण दिखते ही विभाग को सूचना दें और रोगग्रस्त पौधों को खेत से अलग करें। जिन किसानों ने Cos 8279 बोई है, वे अपने खेत की खास तौर पर जांच करें। सही समय पर उठाया गया एक कदम पूरी फसल बचा सकता है।
आपके सवाल
लाल सड़न रोग की पहचान कैसे करें? प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली पड़कर ऊपर से नीचे सूखने लगती हैं। गन्ना चीरने पर अंदर लाल रंग के साथ सफेद धब्बे दिखते हैं और सूखे पौधों से शराब जैसी गंध आती है।
लाल सड़न रोग किस फफूंद से होता है? यह रोग कोलेटोट्राइकम फाल्केटम नामक फफूंद के कारण होता है। इसे गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है और यह गन्ने का सबसे घातक रोग माना जाता है।
रोगग्रस्त गन्ने का बीज अगले साल बो सकते हैं? नहीं। रोगग्रस्त फसल की पेड़ी या बीज का उपयोग बिल्कुल न करें, क्योंकि रोग बीज गन्ने के जरिए ही सबसे ज्यादा फैलता है। रोगमुक्त क्षेत्र के स्वस्थ पौधों से ही बीज लें।
लाल सड़न से बचाव के लिए बीज का उपचार कैसे करें? बुवाई से पहले बीज गन्ने को कार्बेन्डाजिम या मैंकोजेब के घोल से उपचारित करें। गर्म नमी शोधन से 54 डिग्री सेल्सियस पर एक घंटे तक बीज उपचार भी असरदार माना जाता है।
देवरिया में किस प्रजाति के गन्ने पर रोग के लक्षण दिखे हैं? देवरिया के बनकटा क्षेत्र में Cos 8279 प्रजाति के गन्ने पर लाल सड़न रोग के लक्षण दिखाई दिए हैं। किसानों ने गन्ना विभाग से जांच और उपचार की मांग की है।
स्रोत: दैनिक जागरण (5 नवंबर 2026), देहात, उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर — कृषिलोक शोध पत्र
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