चीनी मिलों को केंद्र का सख्त निर्देश — 7 दिन में पाक्षिक कोटा न बेचने पर कोटा रद्द कर दूसरी मिलों को होगा ट्रांसफर

नई दिल्ली: आगामी त्योहारी सीजन (गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, दशहरा और दिवाली) के दौरान देश भर में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी के जरिए कृत्रिम रूप से दाम बढ़ाने की किसी भी साजिश को कुचलने के लिए केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने चीनी मिलों के लिए एक बेहद कड़ा विनियामक आदेश जारी किया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रत्येक चीनी मिल को पाक्षिक रिलीज ऑर्डर जारी होने के ठीक 7 दिनों के भीतर अपने आवंटित कोटे का कम से कम 60% और 15 दिनों के भीतर 100% माल अनिवार्य रूप से डिस्पैच करना होगा।
मंत्रालय के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार ने आज नई दिल्ली में बताया कि यदि कोई मिल निर्धारित 7 दिनों में अपने कोटे का न्यूनतम उठान नहीं कराती है या जानबूझकर बाजार में आपूर्ति रोकने के लिए ट्रकों की लोडिंग धीमी करती है, तो उसका शेष अप्रयुक्त कोटा तत्काल प्रभाव से रद्द (Forfeit) कर दिया जाएगा।
रद्द किया गया कोटा अनुपालक मिलों को तुरंत होगा ट्रांसफर
मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए नियम के तहत, डिफाल्टर मिलों से छीना गया बिक्री कोटा उन सक्रिय और अनुपालक चीनी मिलों को अतिरिक्त कोटे के रूप में तुरंत पुनः आवंटित (Reallocate) कर दिया जाएगा जो सरकारी नियमों का पालन करते हुए तेजी से बाजार में चीनी की सप्लाई कर रही हैं। इसके अतिरिक्त डिफाल्टर मिलों को आगामी अक्टूबर माह के त्योहारी कोटे में 25% की भारी कटौती की दंडात्मक सजा भी भुगतनी पड़ेगी।
खाद्य मंत्रालय के दैनिक मॉनिटरिंग सेल के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा 13 लाख टन का पाक्षिक कोटा जारी किए जाने और व्यापारियों पर 2,000 क्विंटल की सख्त स्टॉक सीमा लगाए जाने के बाद से देश के प्रमुख थोक बाजारों में एक्स-मिल चीनी की कीमतों में औसतन 18 से 20 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की मिलों में एम/30 चीनी के भाव ₹3,920 से घटकर ₹3,760 प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गए हैं।
दैनिक रेलवे रैक और ट्रक डिस्पैच की सैटेलाइट ट्रैकिंग
खाद्य मंत्रालय ने भारतीय रेलवे और राज्य परिवहन विभागों के साथ मिलकर एक एकीकृत डिजिटल पोर्टल तैयार किया है। इस पोर्टल पर चीनी मिलों को प्रतिदिन शाम 5:00 बजे तक अपने कुल वजन, ट्रक नंबर और जीएसटी ई-वे बिल का डेटा अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को ₹40 से ₹42 प्रति किलो के उचित मूल्य पर चीनी उपलब्ध कराना और साथ ही मिलों में पर्याप्त नकदी प्रवाह बनाकर गन्ना किसानों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करना है।
औद्योगिक उपभोक्ताओं के स्टॉक पर भी नजर
मंत्रालय ने शीतल पेय, बिस्कुट, कन्फेक्शनरी और बड़ी मिठाई निर्माता कंपनियों (Bulk Consumers) को भी सख्त हिदायत दी है कि वे अपनी मासिक खपत के 15 दिनों से अधिक का स्टॉक गोदामों में न रखें। औद्योगिक उपभोक्ताओं की दैनिक खरीद की भी नियमित जांच की जा रही है।
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