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यूरोप को 5,841 टन चीनी निर्यात का कोटा जारी: 9 अक्टूबर के DGFT नोटिस से गन्ना किसानों के भुगतान पर क्या असर होगा?

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 12, 2026 • 6 min read
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यूरोप को 5,841 टन चीनी निर्यात का कोटा जारी: 9 अक्टूबर के DGFT नोटिस से गन्ना किसानों के भुगतान पर क्या असर होगा?
अंतिम अपडेट: October 12, 2026 8:52 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 9 अक्टूबर 2026 को पब्लिक नोटिस संख्या 32/2026-2027 जारी करके यूरोपीय संघ (EU) को 5,841 मीट्रिक टन चीनी के निर्यात की अनुमति दे दी है। यह कोटा वित्त वर्ष 2026-27 (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत तय हुआ है। उधर घरेलू बाज़ार में चीनी की सप्लाई अभी भी टाइट है — नया चीनी सत्र 1 अक्टूबर से शुरू हो चुका है और यूपी की मिलें करीब 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने जा रही हैं। ऐसे में हर किसान के मन में सवाल है: निर्यात का यह कोटा गन्ना भाव और भुगतान पर कितना असर डालेगा?

सीधी बात: यह कोटा आकार में बहुत छोटा है, और इससे गन्ना भुगतान में रातों-रात कोई बदलाव नहीं आएगा। आइए पूरा मामला साफ-साफ समझते हैं।

TRQ क्या है और 5,841 टन के कोटे में क्या शर्तें हैं

टैरिफ रेट कोटा (TRQ) एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था है, जिसमें एक तय मात्रा तक चीनी पर रियायती (कम या शून्य) शुल्क लगता है। यूरोपीय संघ हर साल भारत से एक निश्चित मात्रा में चीनी आयात करने की सहमति देता है, और उस सीमा के भीतर निर्यात होने वाली चीनी पर कम टैक्स देना पड़ता है।

DGFT के नोटिस की मुख्य बातें:

  • मात्रा: 5,841 मीट्रिक टन चीनी का निर्यात यूरोपीय संघ को (2026-27 के लिए)।
  • अवधि: अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027।
  • HS कोड: 17010000 — इसके तहत चीनी का निर्यात “मुक्त” श्रेणी में है, लेकिन तय शर्तों के अधीन (नोटिस संख्या 03/2015-20, दिनांक 20 अप्रैल 2015)।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA, नई दिल्ली) इस कोटे को संचालित करेगा।
  • मूल प्रमाणपत्र: मूल प्रमाणपत्र (Certificate of Origin) मुंबई के अपर महानिदेशक, विदेश व्यापार द्वारा APEDA की सिफारिश पर जारी किया जाएगा — यानी केवल पात्र निर्यातकों को ही यह सुविधा मिलेगी।

यह व्यवस्था नई नहीं है। हर साल DGFT यूरोपीय संघ और अमेरिका के TRQ के तहत चीनी निर्यात का कोटा जारी करता है — यह भारत की अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रतिबद्धताओं का हिस्सा है। यहां सबसे जरूरी बात यह है कि यह कोटा केवल यूरोपीय संघ के TRQ तक सीमित है। देश के आम चीनी निर्यात पर सरकार की रोक अभी भी लागू है। DGFT ने विदेश व्यापार नीति 2023 के तहत चीनी निर्यात नीति को “प्रतिबंधित” से “निषिद्ध” कर दिया था, जो 30 सितंबर 2026 तक (या अगले आदेश तक) लागू है।

इस रोक से केवल तीन तरह के निर्यात बाहर रखे गए हैं:

  1. यूरोपीय संघ और अमेरिका के CXL/TRQ व्यवस्था के तहत निर्यात।
  2. एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) के तहत निर्यात।
  3. सरकार-से-सरकार (G2G) निर्यात, जो दूसरे देशों की खाद्य सुरक्षा की मांग पर भारत सरकार द्वारा अनुमोदित हों।

यानी अगर कोई कहे कि “चीनी का निर्यात खुल गया है, अब भाव बढ़ेंगे”, तो वह गलत है। सरकार ने घरेलू सप्लाई और महंगाई को ध्यान में रखकर खुला निर्यात बंद ही रखा है — यह कोटा तो केवल एक पुरानी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नियमित किश्त है।

चीनी बाज़ार की तस्वीर — सप्लाई क्यों टाइट है

सरकार ने खुला निर्यात इसलिए बंद रखा है, क्योंकि घरेलू चीनी की सप्लाई अभी ढीली नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया की 5 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक:

  • 2025-26 सत्र में चीनी उत्पादन शुरुआती अनुमान से लगभग 11% कम रहा — महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे और मौसमी दिक्कतों के कारण।
  • पिछले सत्र में मिलों ने करीब 30 लाख टन चीनी (कुल उत्पादन का लगभग 10%) एथेनॉल बनाने में डायवर्ट की थी।
  • नया चीनी सत्र 1 अक्टूबर को शुरू हुआ है, और शुरुआत का स्टॉक 37.5 लाख टन है — जबकि एक साल पहले यही स्टॉक करीब 50 लाख टन था।

यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है

अब मुख्य सवाल — इस कोटे का किसानों की जेब पर क्या असर पड़ेगा? ईमानदारी से समझें:

सीधा असर न के बराबर है। 5,841 टन चीनी देश के कुल उत्पादन के मुकाबले बेहद छोटी मात्रा है। देश में सालाना करीब 2.9 करोड़ टन चीनी बनती है और घरेलू खपत हर महीने करीब 23-24 लाख टन रहती है। इस हिसाब से 5,841 टन का कोटा देश के एक दिन की खपत से भी कम है। इससे न तो गन्ना भाव पर दबाव बनेगा, न ही भुगतान की रफ्तार में कोई दिखने वाला बदलाव आएगा।

अप्रत्यक्ष संकेत जरूर हैं। जो निर्यातक इस कोटे में चीनी भेजेंगे, उन्हें बेहतर दाम मिल सकता है, और मिलों की आर्थिक सेहत सुधरने से भुगतान क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ता है। लेकिन यह असर धीमा और लंबी अवधि का है — इसे तुरंत बकाया भुगतान की उम्मीद से जोड़ना सही नहीं होगा।

भाव पर नजर कहां रखें: गन्ना किसानों के लिए असली मुद्दा निर्यात कोटा नहीं, बल्कि तीन चीजें हैं — (1) 2026-27 सत्र की SAP दर की घोषणा, जो अभी बाकी है (2025-26 की SAP: ₹400/क्विंटल, अगेती किस्म); (2) केंद्र सरकार का FRP, जो 2026-27 के लिए ₹365/क्विंटल तय हो चुका है (10.25% रिकवरी दर पर); और (3) पेराई शुरू होने के बाद भुगतान की समयसीमा — सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिन के भुगतान और 15% ब्याज के नियम को बरकरार रखा है।

किसानों के लिए 5 जरूरी सलाह

  1. अफवाहों पर ध्यान न दें: “निर्यात खुलने से गन्ना भाव बढ़ेगा” जैसी बातें इस कोटे के बारे में गलत हैं — यह एक छोटा, पहले से तय TRQ कोटा है।
  2. पेराई की तैयारी करें: पश्चिमी यूपी की मिलें करीब 20 अक्टूबर से पेराई शुरू कर सकती हैं। गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड, बैंक खाता और मोबाइल नंबर ठीक करा लें।
  3. SAP घोषणा पर नजर रखें: राज्य सरकार की SAP घोषणा ही यूपी में असली गन्ना भाव तय करेगी — उसकी प्रतीक्षा करें, अंदाजों पर भरोसा न करें।
  4. भुगतान में देरी पर शिकायत करें: गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 और SMS शॉर्टकोड 51969 पर समस्या दर्ज कराई जा सकती है।
  5. पुराना बकाया वसूलें: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पुराने बकाए पर 15% ब्याज की कानूनी बाध्यता है — अपने जिले के गन्ना अधिकारी से इसकी जानकारी लें।

आपके सवाल

क्या अब चीनी का खुला निर्यात शुरू हो गया है? नहीं। आम निर्यात पर रोक 30 सितंबर 2026 तक जारी है। 5,841 टन का यह कोटा सिर्फ यूरोपीय संघ के TRQ के तहत एक सीमित, पहले से तय मात्रा है।

यह TRQ कोटा क्या है? टैरिफ रेट कोटा वह व्यवस्था है जिसमें एक तय मात्रा तक चीनी पर यूरोपीय संघ में रियायती शुल्क लगता है। DGFT हर साल इसका नोटिस जारी करता है — यह कोई नई योजना नहीं है।

क्या इस कोटे से गन्ना भाव बढ़ेगा? नहीं। 5,841 टन देश की एक दिन की खपत से भी कम है। गन्ना भाव FRP (केंद्र) और SAP (राज्य) से तय होता है — निर्यात के इस छोटे कोटे से कोई सीधा असर नहीं होगा।

क्या किसानों को सीधे निर्यात से फायदा होता है? अप्रत्यक्ष रूप से हां — निर्यात से मिलों की आमदनी और भुगतान क्षमता सुधरती है, जिससे बकाया कम होने में मदद मिलती है। लेकिन यह असर तुरंत नहीं दिखता।

UP में 2026-27 की SAP दर कब घोषित होगी? अभी घोषणा नहीं हुई है। 2025-26 की SAP ₹400/क्विंटल (अगेती किस्म) थी। घोषणा होते ही caneup.xyz पर पूरी जानकारी दी जाएगी।

स्रोत: A2Z Taxcorp (DGFT पब्लिक नोटिस संख्या 32/2026-2027, 9 अक्टूबर 2026); ChiniMandi; Times of India (5 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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