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धाराशिव में सूखे से जूझते पशुओं के लिए बड़ा फैसला: 30% गन्ना क्षेत्र चारे के लिए आरक्षित, मिलों को हाथ से कटाई का आदेश

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 26, 2026 • 6 min read
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धाराशिव में सूखे से जूझते पशुओं के लिए बड़ा फैसला: 30% गन्ना क्षेत्र चारे के लिए आरक्षित, मिलों को हाथ से कटाई का आदेश
अंतिम अपडेट: October 26, 2026 7:04 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में पेराई सत्र शुरू होने से ठीक पहले जिला प्रशासन ने एक ऐसा आदेश जारी किया है, जिसकी चर्चा अब पूरे चीनी उद्योग में हो रही है। आदेश के मुताबिक जिले की सभी चीनी मिलों को कुल गन्ना क्षेत्र का 30 प्रतिशत हिस्सा पशुओं के चारे के लिए आरक्षित रखना होगा। साथ ही मिलों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कुल गन्ना कटाई का कम से कम 60 से 70 प्रतिशत काम मजदूरों के हाथ से हो, मशीन से नहीं। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र के कई जिले सूखे जैसी स्थिति से जूझ रहे हैं और पशुओं के लिए चारे की कमी एक बड़ी चिंता बन गई है।

आदेश में मिलों के लिए क्या-क्या तय हुआ है

प्रशासन का मानना है कि मशीन से कटाई में गन्ने की अगोला और पत्तियां खेत में ही बिखरकर बर्बाद हो जाती हैं, जबकि हाथ की कटाई में यही अगोला-पत्ती संभालकर पशुओं के चारे के काम आ सकती है। इसी सोच के तहत मिलों को चार बातों का पालन करना होगा। पहली, कुल गन्ना क्षेत्र का 30 प्रतिशत चारे के लिए आरक्षित रखा जाए। दूसरी, 60 से 70 प्रतिशत कटाई हाथ से कराई जाए। तीसरी, मिलें गन्ने की अगोला को जहां तक संभव हो, फैक्ट्री स्तर पर ही भंडारित करें, ताकि सूखे के दौरान चारे की उपलब्धता बनी रहे। चौथी, मिलों को पालन की साप्ताहिक रिपोर्ट पशुपालन उपायुक्त और सहकारी समितियों (चीनी) के विशेष लेखा परीक्षक, श्रेणी-एक, धाराशिव को देनी होगी। प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाली मिलों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है। यानी यह आदेश सिर्फ एक सलाह नहीं है, बल्कि पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी खुला रखा गया है।

खोई और शीरे का 30-30 प्रतिशत भी आरक्षित

इस आदेश का एक और अहम पहलू यह है कि जिले की सभी सहकारी और निजी चीनी मिलों को अपने खोई (बगास) और शीरे (मोलासेस) के उत्पादन का भी 30-30 प्रतिशत सूखा राहत और चारा-पशुआहार निर्माण के लिए आरक्षित रखना होगा। जिला प्रशासन की पूर्व अनुमति के बिना इस आरक्षित स्टॉक का इस्तेमाल या निपटान नहीं किया जा सकेगा। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि खोई और शीरे से पशुआहार बनाया जा सकता है। इससे पहले धाराशिव प्रशासन खोई और शीरे से पशु चारा बनाने की पायलट परियोजना पर भी काम कर चुका है। उस परियोजना में यूरिया-मोलासेस संवर्धित भूसा (यूएमईएस) तकनीक का जिक्र आया था, जिसमें यूरिया से प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है और शीरा स्वाद व ऊर्जा देता है।

हिंगोली में भी ऐसा ही आदेश, पांचों तहसील सूखाग्रस्त

धाराशिव अकेला जिला नहीं है जहां ऐसा कदम उठाया गया है। 17 अक्टूबर को हिंगोली जिले में भी चीनी मिलों को गन्ने की फसल का 30 प्रतिशत पशुओं के चारे के लिए आरक्षित रखने का निर्देश दिया गया था। वहां भी मिलों को मशीन की बजाय हाथ से कटाई कराने को कहा गया था, ताकि गन्ने की अगोला चारे के रूप में इकट्ठा की जा सके। हिंगोली के जिलाधिकारी राहुल गुप्ता ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा था कि जिले की सभी पांचों तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं, इसलिए पशुओं के लिए पर्याप्त चारा सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है। दो जिलों में एक जैसे आदेश यह बताते हैं कि सूखा प्रभावित मराठवाड़ा क्षेत्र में चारे की कमी अब जिला प्रशासन की पेराई सत्र की योजना का हिस्सा बन गई है।

सूखे की पृष्ठभूमि और पेराई सत्र की हालत

राज्य सरकार ने 11 अक्टूबर के आसपास ग्रामीण राहत पैकेज की घोषणा की थी, जिसमें कहा गया था कि विभिन्न जिलों में चारे का भंडार फिलहाल 90 से 120 दिनों के लिए पर्याप्त है। केंद्र की तीन टीमों ने भी सूखा प्रभावित गांवों का दौरा किया था, जिनमें अहिल्यानगर, सोलापुर, जालना, बीड़, धाराशिव, वाशिम और यवतमाल जिले शामिल थे।

महाराष्ट्र का 2026-27 पेराई सत्र पहले से ही मुश्किल हालात में चल रहा है। 22 अक्टूबर तक राज्य में 65 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी और 158 मिलों को पेराई लाइसेंस जारी किए जा चुके थे। गन्ने की उपलब्धता को लेकर अनुमान अलग-अलग हैं — राज्य आयुक्तालय ने चीनी उत्पादन का अनुमान 90.18 लाख टन लगाया है, जबकि वेस्ट इंडिया शुगर मिल्स एसोसिएशन ने लगभग 80 लाख टन और एक अन्य आकलन में 75 लाख टन उत्पादन की बात कही गई है।

मजदूरों और यूपी के किसानों के लिए क्या मायने हैं

इस आदेश का एक और पहलू गन्ना कटाई मजदूरों से जुड़ा है। प्रशासन का कहना है कि हाथ की कटाई से स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिलेगा और काम की तलाश में उनका पलायन कम होगा।

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह खबर सीधे तौर पर कोई सरकारी आदेश नहीं है, लेकिन इसमें काम की सीख छिपी है। पहली सीख यह है कि गन्ने की अगोला और पत्ती कचरा नहीं है — पशुओं के लिए यह कीमती चारा है, जिसे कटाई के समय संभालकर रखा जा सकता है। दूसरी सीख यह है कि पत्तियों को खेत में जलाना नुकसानदेह है — जलाने से चारा भी नष्ट होता है और मिट्टी को भी नुकसान पहुंचता है।

आगे किन बातों पर नजर रहेगी

आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि धाराशिव की मिलें इस आदेश का पालन कितनी गंभीरता से करती हैं। साप्ताहिक रिपोर्टों से यह साफ होगा कि कितने क्षेत्र में हाथ की कटाई हुई और कितनी अगोला भंडारित की गई। अगर किसी मिल ने निर्देश नहीं माना तो क्या वाकई आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत कार्रवाई होती है, यह भी एक कसौटी होगी।

आपके सवाल

क्या धाराशिव में गन्ने की पेराई पर रोक लगा दी गई है?

नहीं, पेराई पर कोई रोक नहीं लगी है। आदेश सिर्फ इतना है कि कुल गन्ना क्षेत्र का 30 प्रतिशत चारे के लिए आरक्षित रखा जाए और 60 से 70 प्रतिशत कटाई हाथ से कराई जाए।

हाथ की कटाई को तरजीह क्यों दी गई है?

क्योंकि मशीन से कटाई में गन्ने की अगोला और पत्तियां खेत में बिखरकर बर्बाद हो जाती हैं। हाथ की कटाई में यही सामग्री संभालकर इकट्ठा की जा सकती है और पशुओं के चारे के काम आ सकती है।

खोई और शीरे के आरक्षण का क्या मतलब है?

मिलों को अपने खोई और शीरे के उत्पादन का 30-30 प्रतिशत सूखा राहत और चारा-पशुआहार निर्माण के लिए अलग रखना होगा। जिला प्रशासन की अनुमति के बिना इस स्टॉक का इस्तेमाल या बिक्री नहीं की जा सकेगी।

क्या हिंगोली में भी ऐसा ही आदेश है?

हां, 17 अक्टूबर को हिंगोली जिले में भी मिलों को गन्ने की फसल का 30 प्रतिशत पशु चारे के लिए आरक्षित रखने और हाथ से कटाई कराने का निर्देश दिया गया था। वहां की सभी पांचों तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित की गई हैं।

यूपी के किसान इस खबर से क्या कर सकते हैं?

वे कटाई के समय गन्ने की अगोला और पत्ती संभालकर रख सकते हैं, पत्तियों को जलाने से बच सकते हैं और अपने मिल क्षेत्र के केंद्र व सोसायटी से पेराई व चारे से जुड़े निर्देशों की जानकारी लेते रह सकते हैं।

स्रोत: चिनीमंडी (पुढारी की रिपोर्ट के हवाले से), चिनीमंडी/पीटीआई (हिंगोली आदेश), टाइम्स ऑफ इंडिया (धाराशिव खोई-शीरा पायलट), डेक्कन हेराल्ड (महाराष्ट्र सूखा राहत), एग्रीइनसाइट/चिनीमंडी (महाराष्ट्र पेराई सत्र अपडेट)।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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