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दिवाली से पहले चीनी 65 रुपये किलो तक: उत्पादन अनुमान घटकर 30.6 मिलियन टन, गन्ना किसानों पर क्या असर?

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 15, 2026 • 6 min read
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दिवाली से पहले चीनी 65 रुपये किलो तक: उत्पादन अनुमान घटकर 30.6 मिलियन टन, गन्ना किसानों पर क्या असर?
अंतिम अपडेट: October 15, 2026 1:46 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

त्योहारों के मौसम में मिठास महंगी पड़ सकती है। दिवाली से करीब तीन हफ्ते पहले उत्तर प्रदेश में चीनी के खुदरा भाव तेज़ी से बढ़े हैं — नरद संवाद की रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर में भाव 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह देश के चीनी उत्पादन अनुमान में बड़ी कटौती है: अनुमान 34.3 मिलियन टन से घटाकर 30.6 मिलियन टन कर दिया गया है। यानी उत्पादन पहले की उम्मीद से करीब 11 फीसदी कम रह सकता है।

सवाल यह है कि इस उछाल का गन्ना किसानों पर क्या असर पड़ेगा? क्या उन्हें गन्ने की कीमत भी बढ़ी हुई मिलेगी, और दिवाली पर चीनी की कमी तो नहीं होगी? इस खबर में जानिए — कितना उत्पादन घटा और क्यों, सरकार ने दाम थामने के लिए कौन से कदम उठाए हैं, और उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए इसका मतलब क्या है।

कीमतों में उछाल की पूरी कहानी

फूड प्राइस वॉच के आंकड़ों के अनुसार चीनी की खुदरा कीमतें जुलाई में अचानक बढ़नी शुरू हुईं — 20 जुलाई को औसत भाव 48.18 रुपये प्रति किलो था, जो 20 अगस्त तक 55.70 रुपये पर पहुंच गया और 26 अगस्त को 65.05 रुपये प्रति किलो का चरम छू लिया। सरकारी दखल के बाद 20 सितंबर तक भाव 57.54 रुपये पर आ गए थे, लेकिन दिवाली नजदीक आते ही बाजार में फिर हलचल है। नरद संवाद की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर में खुदरा भाव फिर 65 रुपये किलो तक पहुंचे हैं। वजह सप्लाई की चिंता बताई जा रही है — पेराई सीजन में देरी हुई है और यूपी में बड़े पैमाने पर पेराई नवंबर से पहले शुरू होने की उम्मीद नहीं है।

उत्पादन अनुमान क्यों घटा: बीमारी, जलभराव और खराब मौसम

उत्पादन अनुमान घटने की मुख्य वजहें तीन हैं। बिजनेस स्टैंडर्ड और द न्यूज मिनट के अनुसार रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों ने प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल को नुकसान पहुंचाया। दूसरी वजह अतिवृष्टि से हुआ जलभराव है — महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात के कई इलाकों में महत्वपूर्ण वृद्धि चरण के दौरान खेतों में पानी भर गया। तीसरी वजह चीनी रिकवरी में गिरावट है — खराब मौसम से गन्ने में चीनी की मात्रा कम हुई, यानी प्रति टन गन्ने से कम चीनी निकली। मोनार्क पीएमएस के नोट के अनुसार अक्टूबर की शुरुआत में मिलों के पास 3 से 3.5 मिलियन टन स्टॉक था, जबकि मासिक खपत करीब 2.2 मिलियन टन है — यानी स्टॉक तंग है, लेकिन कमी जैसी स्थिति नहीं है।

दाम थामने के लिए सरकार के बड़े कदम

कीमतों में उछाल रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं:

  1. 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात — करीब एक दशक में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में आयात की अनुमति दी गई है। आयात अक्टूबर के आखिर तक पूरा होने की उम्मीद है।

  2. डीलरों पर स्टॉक सीमा — जमाखोरी रोकने के लिए डीलरों के लिए 1,000 क्विंटल (100 टन) की स्टॉक सीमा तय की गई है। यह सीमा 30 नवंबर तक लागू रहेगी।

  3. थोक उपभोक्ताओं पर सीमा — मिठाई बनाने वालों, पेय और बेकरी इकाइयों जैसे थोक खरीददारों के स्टॉक को उनके 15 दिन के उपभोग तक सीमित किया गया है।

  4. जल्दी पेराई की सलाह — मिलों से करीब 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने को कहा गया है, ताकि नई चीनी बाजार में जल्दी आए। इसके अलावा स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कराया जा रहा है।

दिवाली पर चीनी की कमी होगी?

यहां राहत की खबर है — विशेषज्ञ दिवाली पर कमी की संभावना नहीं देख रहे। द हिंदू बिजनेसलाइन की विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में 33-34 लाख टन चीनी उपलब्ध रहेगी, जबकि त्योहारी खपत 24-25 लाख टन रहने का अनुमान है। यानी कोई वास्तविक कमी नहीं है, हालांकि दाम ऊंचे रह सकते हैं। हां, लंबी अवधि में 2026-27 सीजन में 15-25 लाख टन का घाटा रह सकता है, जिससे 2027 में दाम और बढ़ सकते हैं।

गन्ना किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?

यहां असली मुद्दा यह है कि चीनी महंगी हो रही है, लेकिन क्या गन्ना किसानों को भी इसका फायदा मिलेगा?

एमएसपी बढ़ाने की मांग: चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (एमएसपी) फरवरी 2019 से 31 रुपये प्रति किलो पर अटका है। किसान इसे 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग कर रहे हैं — मिलों की कमाई बढ़ेगी तभी वे किसानों को बेहतर दाम दे पाएंगी। महाराष्ट्र सरकार ने अगस्त 2026 में ही केंद्र से एमएसपी 41 रुपये प्रति किलो करने की मांग की थी।

यूपी में एसएपी 600 रुपये की मांग: किसान संगठन 2026-27 पेराई सत्र के लिए एसएपी 600 रुपये प्रति क्विंटल घोषित करने की मांग कर रहे हैं; 7 अक्टूबर को लखनऊ में गन्ना आयुक्त कार्यालय की बैठक में भी यह मांग उठी थी। लेकिन 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — सरकार ने अभी तक नई दर घोषित नहीं की है।

एफआरपी पहले से तय: केंद्र 2026-27 के लिए गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल पहले ही घोषित कर चुका है (1 अक्टूबर 2026 से लागू)। एसएपी हमेशा एफआरपी से ऊपर होता है, इसलिए यूपी के किसानों को 365 रुपये से कम दाम मिलने का सवाल नहीं उठता।

पेराई का समय: सरकार ने मिलों को 15 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की सलाह दी है, हालांकि यूपी में बड़े पैमाने पर पेराई नवंबर में शुरू होने की संभावना है। गन्ने की कटाई मिल के कैलेंडर और पर्ची के अनुसार ही करें।

किसानों के लिए 4 जरूरी बातें

  • पर्ची और कैलेंडर देखते रहें: जल्दी पेराई की स्थिति में आपका गन्ना समय पर तुल सकता है। ई-गन्ना ऐप पर अपना कैलेंडर चेक करते रहें।
  • एसएपी घोषणा का इंतज़ार करें: 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। अफवाहों पर भरोसा न करें — आधिकारिक घोषणा गन्ना आयुक्त कार्यालय से होगी।
  • बीमारी से बचाव: इस सीजन में रेड रॉट और टॉप बोरर का खतरा रहा है। खेत में रोग के लक्षण दिखें तो तुरंत जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें।
  • भुगतान पर नज़र: देरी हो तो गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत कर सकते हैं।

आपके सवाल

सवाल: क्या दिवाली पर चीनी की कमी हो जाएगी? जवाब: नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार अक्टूबर में 33-34 लाख टन चीनी उपलब्ध रहेगी, जबकि त्योहारी खपत 24-25 लाख टन रहने का अनुमान है। कोई वास्तविक कमी नहीं है, हालांकि दाम ऊंचे रह सकते हैं।

सवाल: यूपी में 2026-27 का गन्ना एसएपी कब घोषित होगा? जवाब: अभी घोषणा बाकी है। किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल पहले से तय है, इसलिए एसएपी इससे ऊपर ही होगा।

सवाल: चीनी महंगी हो रही है तो क्या गन्ने का दाम भी बढ़ेगा? जवाब: सीधा संबंध है, लेकिन गारंटी नहीं। किसान एमएसपी (चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य) 31 से बढ़ाकर 50 रुपये किलो करने की मांग कर रहे हैं। एमएसपी बढ़ेगा तो मिलों की आय बढ़ेगी और गन्ने का बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

सवाल: सरकार ने दाम रोकने के लिए क्या किया है? जवाब: 10 लाख टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात, डीलरों पर 1,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा (30 नवंबर तक), थोक उपभोक्ताओं के स्टॉक पर सीमा, 15 अक्टूबर के आसपास जल्दी पेराई की सलाह और स्टॉक का भौतिक सत्यापन।

स्रोत: नरद संवाद, द हिंदू बिजनेसलाइन, बिजनेस स्टैंडर्ड (मोनार्क पीएमएस नोट), द न्यूज मिनट (फूड प्राइस वॉच आंकड़े), चिनीमंडी

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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