पूर्वी UP की 28 चीनी मिलों में एथेनॉल विस्तार: 15 लाख लीटर दैनिक उत्पादन का लक्ष्य — गोरखपुर व देवरिया में नए डिस्टिलरी प्लांट

गोरखपुर / देवरिया / लखनऊ (CaneUp विशेष ब्यूरो — 25 सितंबर 2026 सुबह 7:38 बजे): पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के गन्ना किसानों, चीनी उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए आज लखनऊ शासन से एक युगांतकारी औद्योगिक घोषणा हुई है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट की उच्चाधिकार प्राप्त निवेश समिति ने पूर्वांचल के 8 प्रमुख गन्ना उत्पादक जनपदों में संचालित 28 सहकारी एवं निजी चीनी मिलों में आधुनिक एथेनॉल आसवनी (Distillery Units) के मेगा क्षमता विस्तार हेतु ₹2,450 करोड़ के विशेष वित्तीय पैकेज को औपचारिक प्रशासनिक मंजूरी प्रदान कर दी है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूर्ण होने के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रतिदिन 15 लाख लीटर अतिरिक्त एथेनॉल (Green Bio-Fuel) का उत्पादन होगा। केंद्र सरकार के ‘E-20 पेट्रोल ब्लेंडिंग’ (पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण) राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में पूर्वांचल की चीनी मिलें देश का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनकर उभरेंगी।
🏭 पूर्वांचल के इन प्रमुख औद्योगिक केंद्रों पर स्थापित हो रहे हैं नए प्लांट
- गोरखपुर (पिपराइच सहकारी चीनी मिल): उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम की इस फ्लैगशिप सहकारी मिल में ₹220 करोड़ की लागत से 120 केएलपीडी (Kilo Litres Per Day) क्षमता का नया अत्याधुनिक डिस्टिलरी और बायो-रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स बनकर तैयार हो चुका है, जो सीधे गन्ने के ताज़ा रस और बी-हैवी शीरे से एथेनॉल का निर्माण करेगा।
- देवरिया जनपद (प्रतापपुर व बैतालपुर क्षेत्र): 100 केएलपीडी क्षमता का पर्यावरण अनुकूल ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (ZLD) डिस्टिलरी प्लांट।
- कुशीनगर जनपद (ढ़ाढ़ा बुजुर्ग, कप्तानगंज व सेवरही): 150 केएलपीडी की नई डिस्टिलरी इकाइयां, जिससे गंडक और घाघरा कछार के किसानों का पूरा गन्ना समय पर खपेगा।
- बलरामपुर चीनी मिल्स समूह (बभनान, तुलसीपुर, अकबरपुर): 250 केएलपीडी का विशाल ग्रेन व मोलासेस हाइब्रिड प्लांट, जो पेराई सत्र समाप्त होने के बाद टूटे चावल व मक्के से भी साल भर एथेनॉल बनाएगा।
- बस्ती व महाराजगंज (रुधौली व सिसवा बाजार): आधुनिक मॉलिक्यूलर सीव डिहाइड्रेशन (MSDH) तकनीक वाले एथेनॉल प्लांट।
📈 चीनी उत्पादन बनाम एथेनॉल डायवर्जन: सरकार की नई आर्थिक नीति
विगत वर्षों में जब भी वैश्विक या घरेलू बाजार में चीनी का अत्यधिक उत्पादन होता था, चीनी के थोक भाव ₹31 से ₹33 प्रति किलोग्राम तक गिर जाते थे। मिलों की चीनी गोदामों में डंप हो जाती थी, कार्यशील पूंजी (Working Capital) फंस जाती थी और अंततः किसानों का गन्ना भुगतान 6 से 8 महीने तक लटक जाता था।
शासन की नई ‘शुगर-टू-बायोफ्यूल डायवर्जन’ नीति ने इस चक्रव्यूह को पूरी तरह तोड़ दिया है:
- सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल: चीनी बनाने की जगह सीधे रस को फर्मेंटेशन टैंक में डालकर एथेनॉल बनाया जाता है, जिसकी कीमत केंद्र सरकार ने ₹65.61 प्रति लीटर निर्धारित की है।
- बी-हैवी शीरा (B-Heavy Molasses): प्रथम क्रिस्टलीकरण के बाद निकलने वाले समृद्ध शीरे से एथेनॉल बनता है, जिसकी दर ₹60.73 प्रति लीटर है।
- तेल विपणन कंपनियों (OMCs) से 10 दिन में कैश: इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) तेल डिपो में एथेनॉल पहुंचते ही 10 दिन के भीतर आरटीजीएस द्वारा भुगतान कर देती हैं।
💰 गन्ना किसानों के 14-दिन भुगतान पर इसका क्रांतिकारी असर
उत्तर प्रदेश गन्ना पूर्ति एवं खरीद विनियमन अधिनियम 1953 की धारा 17 के तहत चीनी मिलों को 14 दिन में भुगतान करना अनिवार्य है। एथेनॉल विस्तार से किसानों को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ:
- दैनिक नकदी प्रवाह (Daily Cash Flow): मिलों को तेल कंपनियों से हर हफ्ते करोड़ों रुपये का नकद भुगतान मिलेगा, जिससे मिलों के एस्क्रो खाते हमेशा भरे रहेंगे।
- बैंक ब्याज से मुक्ति: मिलों को बैंकों से 12% ब्याज पर वर्किंग कैपिटल लोन नहीं लेना पड़ेगा, जिससे मिलों की वित्तीय सेहत सुधरेगी।
- गन्ने की शत-प्रतिशत खपत की गारंटी: डिस्टिलरी को वर्ष में 300 से 330 दिन संचालित रखने के लिए भारी मात्रा में गन्ने की आवश्यकता होगी। इससे पूर्वांचल के किसानों को अपने गन्ने को बिहार की मिलों या अवैध बिचौलियों को औने-पौने दाम पर बेचने की विवशता समाप्त हो जाएगी।
🌿 पर्यावरण एवं सह-उत्पाद (Co-Products): किसानों को मुफ्त पोटाश खाद
इस एथेनॉल विस्तार की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता इसका ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (ZLD) स्वरूप है:
- प्रेसमड व स्पेंट वॉश से पोटाश: डिस्टिलरी से निकलने वाले अपशिष्ट (Spent Wash) को चीनी मिल की मैल (Press Mud) के साथ मिलाकर ‘बायो-कंपोस्ट’ बनाई जा रही है।
- प्राकृतिक पोटाश की भरमार: इस जैविक खाद में 4% से 6% शुद्ध घुलनशील पोटाश होता है। पूर्वांचल की गन्ना विकास समितियां इसे स्थानीय किसानों को मात्र ₹150 प्रति क्विंटल की नाममात्र दर पर उपलब्ध कराएंगी, जिससे महंगे रासायनिक पोटाश (MOP) का आयात घटेगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: क्या गन्ने से एथेनॉल बनाने से देश में चीनी की कमी हो जाएगी?
उत्तर: नहीं। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 320 से 340 लाख टन चीनी की खपत होती है, जबकि उत्पादन 370 लाख टन से अधिक होता है। अतिरिक्त 40 लाख टन अधिशेष चीनी को ही एथेनॉल में डायवर्ट किया जा रहा है, जिससे घरेलू चीनी की कीमतें पूरी तरह स्थिर रहेंगी।
प्रश्न 2: पिपराइच और देवरिया के नए प्लांट कब से व्यावसायिक उत्पादन शुरू करेंगे?
उत्तर: उद्योग विभाग के अनुसार, पिपराइच प्लांट का सफल वेट-ट्रायल पूरा हो चुका है और आगामी 15 अक्टूबर 2026 से दोनों इकाइयां पूर्ण व्यावसायिक उत्पादन प्रारंभ कर देंगी।
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