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चीनी मिलों के एस्क्रो खाते पर जिलाधिकारियों की पैनी नजर, बिक्री का 85 प्रतिशत सीधे किसानों के भुगतान खाते में जाएगा

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 30, 2026 • 3 min read
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चीनी मिलों के एस्क्रो खाते पर जिलाधिकारियों की पैनी नजर, बिक्री का 85 प्रतिशत सीधे किसानों के भुगतान खाते में जाएगा
अंतिम अपडेट: August 30, 2026 7:15 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

चीनी मिलों के एस्क्रो खाते पर जिलाधिकारियों की पैनी नजर, बिक्री का 85 प्रतिशत सीधे किसानों के भुगतान खाते में जाएगा

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Aamir Raza - 2026-08-30

लखनऊ/मेरठ (विशेष संवाददाता)। उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत से पहले गन्ना किसानों के भुगतान की सुरक्षा के लिए शासन ने अभूतपूर्व वित्तीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गन्ना विकास विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने जिले की प्रत्येक चीनी मिल के ‘एस्क्रो खाता’ (Escrow Account) का दैनिक ऑनलाइन ऑडिट करें।

शासनादेश के अनुसार, चीनी मिलों को चीनी, शीरा, बायो-एथेनॉल और बिजली की बिक्री से प्राप्त होने वाली कुल सकल धनराशि का न्यूनतम 85 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से एस्क्रो खाते में जमा कराना होगा। इस खाते से कोई भी धनराशि मिल के अन्य खर्चों के लिए नहीं निकाली जा सकेगी और वह स्वतः किसानों के आधार-सीडेड बैंक खातों में ट्रांसफर होगी।

एस्क्रो अकाउंट कैसे सुनिश्चित करता है 14-दिवसीय भुगतान?

गन्ना आयुक्त कार्यालय के वित्तीय नियंत्रक ने बताया कि पूर्व में कुछ निजी मिलें चीनी बिक्री का पैसा दूसरे व्यवसायों या रियल एस्टेट में लगा देती थीं, जिससे किसानों का भुगतान अटक जाता था।

अधिकारी ने कहा, “एस्क्रो खाता एक त्रिपक्षीय समझौता (Tripartite Agreement) होता है, जिसमें बैंक, चीनी मिल और जिला गन्ना अधिकारी शामिल होते हैं। तेल कंपनियों (IOCL, BPCL) और थोक चीनी खरीदारों द्वारा भेजा जाने वाला पैसा सीधे इसी खाते में गिरता है। बैंक इस पैसे से सबसे पहले गन्ना किसानों की सप्लाय पर्चियों का भुगतान क्लियर करता है। मिल प्रबंधन अपनी मर्जी से इस पैसे को रोक नहीं सकता।”

राजस्व स्रोतकुल बिक्री प्राप्तिएस्क्रो खाते में अनिवार्य जमा %शेष मिल का परिचालन खर्च %
सफेद चीनी बिक्री100%85% (सीधे किसान भुगतान)15% (मजदूरी, बिजली, मेंटेनेंस)
बायो-एथेनॉल व स्पिरिट100%85% (10 दिन के भीतर किसान ट्रांसफर)15%
सह-उत्पाद बिजली (ग्रिड)100%80%20%

डिफाल्टर मिलों के प्रबंधकों पर सीधे एफआईआर

मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और अमरोहा के जिलाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी चीनी मिल ने एस्क्रो खाते को बाईपास कर किसी अन्य खाते में पैसा डाइवर्ट करने का प्रयास किया, तो मिल मालिक और मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) के खिलाफ धोखाधड़ी और उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति अधिनियम की धाराओं में तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

दैनिक डैशबोर्ड से होगी निगरानी

राज्य स्तर पर गन्ना आयुक्त कार्यालय में एक केंद्रीय ‘एस्क्रो डैशबोर्ड’ बनाया गया है, जो सीधे भारतीय रिजर्व बैंक और प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंकों के सर्वर से जुड़ा है।

इस डैशबोर्ड पर हर मिल के खाते में आने वाले पैसे और किसानों को ट्रांसफर होने वाली धनराशि का रियल-टाइम रिकॉर्ड प्रदर्शित होता है। किसी भी मिल द्वारा 85% के अनुपात में विचलन करने पर सिस्टम स्वतः संबंधित जिलाधिकारी और गन्ना अधिकारी को अलर्ट भेज देता है।

पश्चिमी यूपी के अमरोहा जिले की 16 चीनी मिलों के अंतर्गत आने वाली चंदनपुर चीनी मिल, असमौली चीनी मिल, अगवानपुर चीनी मिल और बेलवाड़ा चीनी मिल में एस्क्रो खाते सुचारू रूप से संचालित हैं और इनका 100% भुगतान क्लियर हो चुका है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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