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गन्ने के बाद अब चावल से एथेनॉल पर भी 324 करोड़ लीटर की सीमा, मक्के की मांग 1.6 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 4, 2026 • 6 min read
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गन्ने के बाद अब चावल से एथेनॉल पर भी 324 करोड़ लीटर की सीमा, मक्के की मांग 1.6 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान
अंतिम अपडेट: November 4, 2026 4:53 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की नीति में सरकार ने एक और बड़ा मोड़ ले लिया है। गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाने पर रोक के बाद अब अतिरिक्त चावल और खराब अनाज से एथेनॉल बनाने की मात्रा पर भी सीमा तय कर दी गई है। 3 नवंबर को जारी संशोधित टेंडर के मुताबिक, एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 की पहली तीन तिमाहियों में भारतीय खाद्य निगम के अतिरिक्त चावल से अधिकतम 324 करोड़ लीटर एथेनॉल ही बनाया जा सकेगा, जबकि खराब अनाज से पूरे साल में अधिकतम 160 करोड़ लीटर एथेनॉल बनाने की अनुमति होगी।

इन दोनों स्रोतों से कुल अधिकतम 484 करोड़ लीटर एथेनॉल ही मिलेगा, जो तेल विपणन कंपनियों के 1,100 करोड़ लीटर के कुल टेंडर का करीब 44 प्रतिशत है। बाकी जरूरत का बड़ा हिस्सा अब मक्के से पूरा करना होगा। उद्योग जगत के अनुमान के मुताबिक, 2026-27 में एथेनॉल बनाने के लिए मक्के की मांग करीब 1.6 करोड़ टन तक पहुंच सकती है, जबकि मौजूदा आपूर्ति वर्ष में यह करीब 1.3 करोड़ टन रहने का अनुमान है।

यह खबर उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि यूपी देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है और यहां 122 चीनी मिलें चलती हैं। एथेनॉल नीति में हर बदलाव का असर मिलों की कमाई पर पड़ता है, और मिलों की कमाई का असर किसानों के भुगतान पर पड़ता है।

संशोधित टेंडर में क्या तय हुआ

पहली सीमा चावल पर है। एफसीआई के अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल की कुल सीमा 324 करोड़ लीटर तय की गई है, जो पहली तीन तिमाहियों पर लागू होगी। हर तिमाही में इस स्रोत से अधिकतम 108 करोड़ लीटर एथेनॉल का ही आवंटन होगा। सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए 72 लाख टन अतिरिक्त चावल आवंटित किया है, और यह आवंटन 30 जून 2027 तक मान्य रहेगा।

दूसरी शर्त किसी एक कंपनी पर लागू होती है। कोई भी एथेनॉल उत्पादक अपनी एक तिमाही की कुल पेशकश में 30 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा एफसीआई के चावल से बने एथेनॉल का नहीं रख सकेगा। अगर सभी कंपनियों की कुल पेशकश 108 करोड़ लीटर से ज्यादा हो जाती है, तो तेल कंपनियां सभी की पात्र मात्रा में उसी अनुपात में कटौती करेंगी।

तीसरी सीमा खराब अनाज पर है। खराब खाद्यान्न से पूरे साल में अधिकतम 160 करोड़ लीटर एथेनॉल बनाया जा सकेगा, जो कुल टेंडर का करीब 14.5 प्रतिशत है। हर तिमाही में इस स्रोत से अधिकतम 40 करोड़ लीटर एथेनॉल ही खरीदा जाएगा।

गन्ने पर रोक पहले ही लागू है

नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक के आपूर्ति वर्ष के लिए सरकार ने गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाने की खरीद पर पहले ही रोक लगा दी थी। 16 अक्टूबर के टेंडर में भी इन स्रोतों से खरीद शून्य रखने का निर्देश दिया गया था। इसका मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना बताया गया है।

पहले चीनी मिलें गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाती थीं। इससे उन्हें अतिरिक्त कमाई होती थी, और बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक इस कमाई से किसानों का बकाया चुकाने में मदद मिलती थी। अब यह रास्ता बंद है, इसलिए मिलों को कमाई मुख्य रूप से चीनी की बिक्री से ही करनी होगी।

मक्के की मांग और कीमत का गणित

गन्ने और चावल पर पाबंदी के बाद बाकी एथेनॉल मक्के से आएगा, और यहीं नई चिंता शुरू होती है। एक टन मक्के से करीब 380 लीटर एथेनॉल बनता है, इसलिए 160 लाख टन मक्के से लगभग 610 करोड़ लीटर एथेनॉल बनाया जा सकता है।

कीमतों पर असर अभी से दिख रहा है। प्रमुख मंडियों में मक्के की कीमत 30 से 31 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 24.10 रुपये प्रति किलोग्राम है।

20 प्रतिशत ब्लेंडिंग का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाना है। उद्योग जगत के मुताबिक, 1,100 करोड़ लीटर का मौजूदा टेंडर पूरे साल यह लक्ष्य पूरा करने के लिए कम पड़ सकता है।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की 2 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, बोली जमा करने की अंतिम तारीख 29 अक्टूबर से बढ़ाकर 5 नवंबर कर दी गई थी। यानी बोली की प्रक्रिया इसी हफ्ते पूरी होगी।

यूपी के गन्ना किसान के लिए मतलब

सबसे पहले एक जरूरी स्पष्टीकरण। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य यानी एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर लागू होता है। यह केंद्र का न्यूनतम मूल्य है। राज्य सरकारें इससे ऊपर राज्य परामर्शी मूल्य यानी एसएपी घोषित करती हैं, और 2026-27 के लिए यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। इसलिए पुराने सत्र की दर को इस सत्र की दर समझकर गन्ना न बेचें।

दूसरा असर भुगतान पर पड़ सकता है। एथेनॉल से अतिरिक्त कमाई कम होने पर मिलों की नकदी पर दबाव बढ़ता है। दूसरी ओर, चीनी घरेलू बाजार में ही रहेगी, इसलिए चीनी की बिक्री मिलों के लिए अहम हो जाती है। अगर चीनी के दाम मजबूत रहते हैं तो मिलों की कमाई अच्छी हो सकती है, लेकिन रिकवरी कम रहने या बिक्री धीमी होने पर भुगतान में देरी का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए अपनी पर्ची, तौल और भुगतान की स्थिति पर नजर रखें और देरी होने पर गन्ना समिति तथा जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें। शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 तथा एसएमएस शॉर्टकोड 51969 उपलब्ध हैं।

आपके सवाल

क्या गन्ने से एथेनॉल बनाना पूरी तरह बंद हो गया है? नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक के आपूर्ति वर्ष के लिए गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल की खरीद शून्य है। सी-हेवी शीरे से खरीद का रास्ता खुला है।

क्या चावल से एथेनॉल बनाना भी पूरी तरह बंद हो गया है? नहीं। एफसीआई के अतिरिक्त चावल से एथेनॉल पर 324 करोड़ लीटर की सीमा है, और किसी एक कंपनी की तिमाही पेशकश में इस स्रोत का हिस्सा 30 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता।

324 और 160 करोड़ लीटर का क्या मतलब है? 324 करोड़ लीटर एफसीआई चावल से बनने वाले एथेनॉल की अधिकतम सीमा है, जो पहली तीन तिमाहियों में लागू होगी। 160 करोड़ लीटर खराब खाद्यान्न से बनने वाले एथेनॉल की सालाना सीमा है। दोनों मिलाकर 484 करोड़ लीटर होता है।

मक्का महंगा क्यों हो रहा है? गन्ने और चावल पर सीमा के बाद एथेनॉल कंपनियों को मक्के पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि पोल्ट्री, डेयरी और स्टार्च उद्योग भी मक्का खरीदते हैं। मांग बढ़ने और पैदावार को लेकर चिंता से मंडी भाव एमएसपी से ऊपर चल रहा है।

यूपी के गन्ना किसान को सीधा फायदा होगा या नुकसान? सीधा जवाब अभी तय नहीं है। चीनी घरेलू बाजार में रहने से मिलों की चीनी बिक्री अहम हो गई है, लेकिन एथेनॉल से अतिरिक्त कमाई कम होने से नकदी पर दबाव बढ़ सकता है। भुगतान की स्थिति पर नजर रखना सबसे जरूरी है।

2026-27 के लिए यूपी का एसएपी क्या है? 2026-27 के लिए यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। केंद्र का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन राज्य का एसएपी अलग से घोषित होता है।

स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड (हिंदी), 4 नवंबर 2026; ज़ी बिज़नेस, 4 नवंबर 2026; फाइनेंशियल एक्सप्रेस, 2 नवंबर 2026; द वीक, 4 नवंबर 2026।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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