31 अक्टूबर से पहले अधिसूचना संभव: गन्ने के रस से एथेनॉल बनाने पर रोक की तैयारी, यूपी के गन्ना किसानों पर सीधा असर

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे (मोलासेस) को एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट करने पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। बिज़नेस स्टैंडर्ड (हिंदी) की 5 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में अधिसूचना 31 अक्टूबर से पहले जारी हो सकती है। ध्यान रहे — यह फैसला अभी विचाराधीन है, अंतिम मुहर नहीं लगी है। लेकिन अगर रोक लगती है, तो इसका सीधा असर देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की 122 चीनी मिलों और लाखों गन्ना किसानों पर पड़ेगा।
मुद्दा गंभीर इसलिए है क्योंकि नए चीनी सत्र 2026-27 की शुरुआती चीनी स्टॉक सिर्फ 37.5 लाख टन रही, जबकि एक साल पहले यह लगभग 50 लाख टन थी। यानी घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई पहले से तंग है।
क्यों उठा रही है सरकार यह कदम?
इस विचार के पीछे तीन बड़े कारण हैं।
पहला — घटता उत्पादन अनुमान। चीनी सत्र 2025-26 में शुरुआती अनुमान 343 लाख टन का था, लेकिन अगस्त में इसे घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया। एथेनॉल में गई चीनी हटाने के बाद शुद्ध उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहा, जबकि देश की सामान्य खपत 280 से 285 लाख टन है — सप्लाई और मांग के बीच अंतर बहुत कम बचा है।
दूसरा — चढ़ती चीनी की कीमतें। लाइव हिंदुस्तान की 11 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक महीने में चीनी की कीमत करीब 10 फीसदी तक बढ़ गई थी। सरकार ने निर्यात पर रोक और व्यापारियों के स्टॉक पर सीमा जैसे कदम पहले ही उठा रखे हैं — एथेनॉल डायवर्जन पर रोक अगला कदम हो सकती है।
तीसरा — बारिश की कमी। महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस बार कम बारिश हुई है, जिससे अगले सत्र के उत्पादन पर चिंता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्पादन कम रहने का अनुमान है, जिससे आयातित चीनी महंगी पड़ सकती है।
30 लाख टन का हिसाब: एथेनॉल में गया इतना गन्ना
आंकड़ों को समझिए तो तस्वीर साफ हो जाती है। चीनी मिलों ने 2025-26 सत्र के दौरान करीब 30 लाख टन चीनी — कुल उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत — एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट की थी। सरकार हर एथेनॉल साल की शुरुआत में तय करती है कि पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के अनिवार्य लक्ष्य के लिए कितने गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे को डायवर्ट किया जा सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि चीनी आधारित कच्चे माल पर देश की निर्भरता पहले से घट रही है। एथेनॉल में डायवर्ट होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है। अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अनाज — खासकर मक्का — से आता है। एथेनॉल इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि चीनी आधारित फीडस्टॉक पर प्रतिबंध के बावजूद पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
एथेनॉल सप्लाई ईयर 1 नवंबर से 31 अक्टूबर तक चलता है, जबकि चीनी सत्र 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक। इसलिए 31 अक्टूबर से पहले अधिसूचना का समय महत्वपूर्ण है — यह सीजन शुरू होने से पहले मिलों की योजना तय करेगा।
यूपी के गन्ना किसानों पर सीधा असर
सवाल यह है कि यह खबर यूपी के गन्ना किसानों के लिए क्या मायने रखती है। चार बिंदुओं में समझिए:
1. गन्ने की मांग कम नहीं होगी। रोक का मतलब यह नहीं कि मिलें कम गन्ना खरीदेंगी — उल्टा, मिलें उपलब्ध गन्ने से ज्यादा चीनी निकालेंगी। आपका गन्ना पहले की तरह बिकेगा।
2. भाव की गारंटी बरकरार। 2026-27 सत्र के लिए FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) 1 अक्टूबर से लागू है। उत्तर प्रदेश का SAP 2026-27 अभी घोषित नहीं हुआ है — पिछले सत्र में अगेती गन्ने का SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल था।
3. भुगतान पर नजर रखें। एथेनॉल मिलों के लिए तेज नकदी का स्रोत रहा है, जिससे समय पर भुगतान होता है। अगर एथेनॉल आय घटती है, तो कुछ मिलों की नकदी पर दबाव पड़ सकता है। कानून के मुताबिक मिल को 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है — पेराई सत्र में अपने भुगतान की नियमित निगरानी जरूर करें।
4. पेराई जल्दी शुरू हो सकती है। सरकार चाह रही है कि पेराई 15 अक्टूबर के आसपास शुरू हो, ताकि चीनी की सप्लाई बढ़े। पश्चिमी यूपी की कई मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं — खेत समय पर खाली होगा और गेहूं की बुवाई का मौका मिलेगा।
मिलों की दलील और किसानों की चिंता
मिलों का कहना है कि एथेनॉल से बेहतर रिटर्न मिलता है, इसलिए प्रतिबंध उनके संचालन को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि चीनी से भी बेहतर रिटर्न की उम्मीद है, जिससे असर सीमित रहेगा। किसान संगठनों की पुरानी मांग रही है कि एथेनॉल की आय में किसानों की हिस्सेदारी तय हो — अगर एथेनॉल उत्पादन ही सीमित हो जाता है, तो यह बहस ठंडी पड़ सकती है।
अगले 25 दिन: किसानों के लिए तैयारी की सूची
अधिसूचना 31 अक्टूबर से पहले कभी भी आ सकती है। ये काम अभी से कर लें:
- सर्वे रिकॉर्ड जांच लें: caneup.in या e-Ganna ऐप पर अपने गन्ने का सर्वे, रकबा और किस्म का रिकॉर्ड सही करवाएं। गलती पर पर्ची अटक सकती है।
- बैंक खाता चालू रखें: खाता आधार से लिंक और सक्रिय हो — भुगतान सीधे खाते में आता है, छोटी सी गलती से पैसा अटकता है।
- कच्चा कैलेंडर डाउनलोड करें: 2026-27 का कच्चा कैलेंडर जारी हो चुका है। अपना सट्टा, प्लॉट और पर्ची की स्थिति अभी से जांच लें।
- मिल की तैयारी पर नजर: अपनी मिल की पेराई शुरू होने की तारीख का पता रखें — देर से पेराई का मतलब खेत देर से खाली होना।
- भाव की घोषणा पर नजर: यूपी सरकार के SAP 2026-27 की घोषणा का इंतजार करें — यही आपके असली भाव का फैसला करेगा।
आपके सवाल
क्या एथेनॉल पर रोक लग गई है? नहीं। सरकार अभी इस पर विचार कर रही है। बिज़नेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 अक्टूबर से पहले अधिसूचना जारी हो सकती है। अंतिम फैसला आना बाकी है।
रोक लगने पर गन्ना किसानों का भाव घटेगा क्या? नहीं, सीधा असर भाव पर नहीं होगा। FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल की गारंटी 2026-27 सत्र के लिए लागू है और यूपी के SAP की घोषणा बाकी है। रोक का असर मिलों के उत्पादन मिश्रण (चीनी बनाम एथेनॉल) पर होगा, न कि किसानों के भाव पर।
क्या मिलें कम गन्ना खरीदेंगी? उम्मीद नहीं है। उसी गन्ने से ज्यादा चीनी बनेगी, इसलिए पेराई के लिए गन्ना पहले जैसा ही चाहिए होगा।
मिलों के भुगतान में देरी हो सकती है? यह जोखिम संभव है, क्योंकि एथेनॉल से मिलों को तेज नकदी मिलती है। लेकिन 14 दिन में भुगतान का नियम लागू है। पेराई सत्र में अपने भुगतान की नियमित निगरानी करें और देरी पर गन्ना विभाग से शिकायत करें।
एथेनॉल मिश्रण का E20 लक्ष्य प्रभावित होगा? इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक नहीं। अब एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा मक्का जैसे अनाज से बनता है, इसलिए पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
स्रोत: बिज़नेस स्टैंडर्ड (हिंदी, 5 अक्टूबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (11 अगस्त 2026), चीनी उद्योग के आंकड़े।
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