इथेनॉल का नया भाव: मक्के पर ₹3 की कटौती, गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की खरीद ही बंद — जानें गन्ना किसान पर क्या असर

पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की कीमत को लेकर इस बार एक बड़ा फैसला आया है, जिसका असर उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों और चीनी मिलों पर पड़ेगा। पांच सरकारी तेल कंपनियों ने इथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने की निविदा जारी की है। इसमें मक्के से बनने वाले इथेनॉल की खरीद कीमत में ₹3 प्रति लीटर की कटौती कर दी गई है, जबकि गन्ने के रस, चीनी, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद पर पूरी रोक जारी है — इन स्रोतों के इथेनॉल का भाव तय तक नहीं किया गया। डिस्टिलरी कंपनियां नाराज हैं, वहीं चीनी उद्योग ने इसका स्वागत किया है।
16 अक्टूबर की निविदा में क्या तय हुआ
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी और नुमालीगढ़ रिफाइनरी — ये पांच सरकारी तेल कंपनियां नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 के बीच कुल 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदेंगी। खरीद चार तिमाहियों में बंटी है — पहली और दूसरी तिमाही में 300-300 करोड़ लीटर, तीसरी और चौथी में 250-250 करोड़ लीटर। एक शर्त यह भी है कि एफसीआई के सरप्लस चावल से बने इथेनॉल के ऑफर चौथी तिमाही में स्वीकार नहीं होंगे। इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल कार्यक्रम शुरू होने के बाद यह पहला मौका है, जब तेल कंपनियों ने मक्के से बनने वाले इथेनॉल की कीमत घटाई है।
किस कच्चे माल का क्या भाव तय हुआ
हर कच्चे माल के लिए अलग बेसिक खरीद भाव तय हुआ है (जीएसटी और परिवहन शुल्क अलग से मिलेगा):
- सी-हैवी शीरे से बना इथेनॉल: ₹57.97 प्रति लीटर (कोई बदलाव नहीं)
- टूटे अनाज से बना इथेनॉल: ₹64 प्रति लीटर (कोई बदलाव नहीं)
- एफसीआई के सरप्लस चावल से बना इथेनॉल: ₹60.32 प्रति लीटर (₹1.82 की बढ़ोतरी)
- मक्के से बना इथेनॉल: ₹66.07 प्रति लीटर + ₹2.79 प्रति लीटर इंसेंटिव
मक्के पर अतिरिक्त इंसेंटिव पहले ₹5.79 प्रति लीटर था, जो घटकर ₹2.79 रह गया। इससे असरकारी भाव ₹71.86 से घटकर ₹68.86 प्रति लीटर हो गया — यानी करीब ₹3 प्रति लीटर की कटौती। गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल के लिए कोई भाव घोषित नहीं हुआ, क्योंकि इन स्रोतों से खरीद ही नहीं होगी।
मक्के के इथेनॉल पर कटौती क्यों
सबसे बड़ी वजह मक्के के बाजार भाव में गिरावट है। जानकारों के मुताबिक, मक्के से बनने वाले इथेनॉल की कीमत बाजार के मौजूदा भाव और उससे बनने वाले इथेनॉल की औसत मात्रा के आधार पर तय होती है। जब मक्का सस्ता हुआ, तो इथेनॉल के भाव में कटौती स्वाभाविक मानी गई।
दूसरी वजह डिस्टिलरी कंपनियों का अपना रुख भी रहा। खबरों के मुताबिक, ये कंपनियां नेफेड के जरिए मक्के के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के पक्ष में नहीं थीं, क्योंकि बाजार में मक्का सस्ता मिलने पर ये समर्थन मूल्य पर खरीदने को तैयार नहीं होती थीं। यानी जो कंपनियां सस्ता मक्का खरीद रही थीं, उन्हें अब उसी हिसाब से कम भाव पर इथेनॉल बेचना होगा।
यहां 2022-23 की घटना याद रखना जरूरी है। तब मक्के के भाव बढ़ने से नुकसान का हवाला देकर डिस्टिलरी कंपनियों ने उत्पादन ही बंद कर दिया था, और सरकार को उसी सीजन में दो बार इथेनॉल की खरीद कीमत बढ़ानी पड़ी थी। यानी भाव तय करने में सरकार को बाजार और उद्योग, दोनों का संतुलन देखना होता है — और इस बार पलड़ा कटौती की ओर झुका है।
गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की खरीद पर पूरी रोक
सरकार ने साफ कर दिया है कि इथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में चीनी को इथेनॉल बनाने में लगाने की मात्रा शून्य रहेगी। देश में चीनी की उपलब्धता और बढ़ती खुदरा कीमतों की चिंता के बीच सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति को इथेनॉल खरीद से ज्यादा अहमियत दी है। यह पहला मौका नहीं है — 2023-24 में भी गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक के दौरान इन स्रोतों की कीमतें नहीं बढ़ाई गई थीं।
कृषि लागत एवं मूल्य आयोग ने मई 2026 में सिफारिश की थी कि गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य बढ़ने के मद्देनजर गन्ने से बनने वाले इथेनॉल की कीमत में संशोधन होना चाहिए। गन्ने का एफआरपी 2026-27 सीजन के लिए ₹365 प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर) तय है, जो पिछले सीजन के ₹355 से ₹10 ज्यादा है — लेकिन इथेनॉल के भाव में इसका कोई फायदा चीनी मिलों को नहीं मिलेगा।
चीनी उद्योग खुश, डिस्टिलरी नाराज
चीनी उद्योग ने मक्के के इथेनॉल की कीमत घटाए जाने का स्वागत किया है, हालांकि इथेनॉल बनाने वाली विशेष इकाइयों को प्राथमिकता देने से बचने की सलाह भी दी है। दूसरी ओर, अनाज आधारित डिस्टिलरी कंपनियां नाराज हैं। ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके जैन का कहना है कि नीति ऐसी होनी चाहिए जिससे मक्का और चावल, दोनों से इथेनॉल बनाने वाली इकाइयों को फायदा हो — दोनों की लागत अलग है, इसलिए खरीद कीमत भी लागत के हिसाब से तय होनी चाहिए, और उत्पादन की योजना के लिए कंपनियों को खरीद का भरोसा मिलना चाहिए।
मिलों को किसानों को सरकार का तय एफआरपी देना अनिवार्य है, और यह हर साल बढ़ता है। ऐसे में उनकी लागत बढ़ती रहती है, जबकि मक्का आधारित इथेनॉल की कीमत बाजार के हिसाब से घट-बढ़ सकती है। गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल का रास्ता बंद होने से मिलों का एक बड़ा आय स्रोत भी छिन गया है।
यूपी के गन्ना किसान पर क्या असर पड़ेगा
यूपी देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है, इसलिए यह फैसला यहां के लाखों किसानों को छूता है। पहली बात: किसानों को मिलने वाला गन्ने का भाव इस निविदा से सीधे नहीं बदलता — एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल कानूनी रूप से तय न्यूनतम मूल्य है, जो मिलों को देना ही होगा। लेकिन परोक्ष असर जरूर पड़ेगा।
गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल पर रोक का मतलब है कि मिलों की इथेनॉल से होने वाली कमाई घटेगी — और इथेनॉल बीते वर्षों में गन्ना भुगतान में मदद करने वाला अहम स्रोत था। अब मिलों को मुख्यतः चीनी की बिक्री पर निर्भर रहना होगा, ऐसे में जिन मिलों की स्थिति पहले से कमजोर है, वहां भुगतान में देरी का खतरा बढ़ सकता है।
दूसरी ओर, मक्के के इथेनॉल पर कटौती से सी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने वाली मिलों की प्रतिस्पर्धी स्थिति सुधरेगी। लेकिन किसानों के लिए सबसे अहम सवाल यही है — मिल समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान करेगी या नहीं। सलाह यही है कि इस पेराई सत्र में अपनी तौल पर्ची, भुगतान की स्थिति और मिल के इंडेंट की जानकारी ई-गन्ना ऐप या गन्ना विभाग की वेबसाइट पर नियमित जांचते रहें। देरी या कटौती दिखे, तो तुरंत जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: इथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 कब से कब तक है? उत्तर: 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 तक। इसी अवधि के लिए तेल कंपनियों ने 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने की निविदा जारी की है।
प्रश्न: मक्के के इथेनॉल में कितनी कटौती हुई है? उत्तर: अतिरिक्त इंसेंटिव ₹5.79 से घटकर ₹2.79 प्रति लीटर हो गया है। असरकारी भाव ₹71.86 से घटकर ₹68.86 प्रति लीटर — यानी करीब ₹3 प्रति लीटर की कटौती। बेसिक भाव ₹66.07 पहले जैसा ही है।
प्रश्न: क्या गन्ने के रस से इथेनॉल बनेगा? उत्तर: इस सप्लाई ईयर में नहीं। गन्ने के रस, चीनी, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद पर पूरी रोक है। चीनी को इथेनॉल में लगाने की मात्रा शून्य रखी गई है।
प्रश्न: क्या इससे गन्ने के एफआरपी पर असर पड़ेगा? उत्तर: नहीं। एफआरपी 2026-27 के लिए ₹365 प्रति क्विंटल कानूनी रूप से तय है। इथेनॉल के भाव से एफआरपी सीधे नहीं बदलता, लेकिन मिलों की कमाई पर असर से भुगतान की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।
स्रोत: किसान इंडिया (21 अक्टूबर 2026), सीएनबीसी टीवी18 (17 अक्टूबर 2026), ईटी एनर्जी वर्ल्ड (18 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिजनेसलाइन। फोटो: ruralvoice.in (प्रतीकात्मक तस्वीर)।
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