मिलें एथेनॉल से करोड़ों कमा रही हैं — किसान को क्यों नहीं मिलता हिस्सा? जानें नई माँग

नई माँग: किसान संगठनों ने सरकार से कहा है कि चीनी मिलें एथेनॉल, बायो-पोटाश और DDGS (Distillers Dried Grains) जैसे by-products से ₹1,200 करोड़ से ज्यादा कमा रही हैं — लेकिन इसका एक भी पैसा किसानों को नहीं मिलता।
मिलें क्या-क्या कमा रही हैं गन्ने से?
| Product | कीमत | किसान को हिस्सा |
|---|---|---|
| चीनी | ₹55-65/kg | ✅ SAP के रूप में |
| एथेनॉल | ₹65-72/लीटर | ❌ कुछ नहीं |
| बायो-पोटाश | ₹8-12/kg | ❌ कुछ नहीं |
| DDGS (पशु आहार) | ₹18-22/kg | ❌ कुछ नहीं |
| बगास (बिजली) | ₹4-5/unit | ❌ कुछ नहीं |
| प्रेसमड (खाद) | ₹500-800/टन | ❌ कुछ नहीं |
किसानों की माँग क्या है?
राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन की 3 प्रमुख माँगें:
- Revenue Sharing Formula — एथेनॉल और by-products की कमाई का 10-15% किसान को मिले
- SAP ₹600/क्विंटल — बढ़ती लागत और मिलों की बढ़ी कमाई देखते हुए
- गुड़ इकाइयों को भी एथेनॉल बनाने की इजाज़त — सिर्फ बड़ी मिलों को monopoly क्यों?
कर्नाटक का उदाहरण
कर्नाटक के गन्ना किसान संगठनों ने माँग की है कि स्थानीय गुड़ (jaggery) इकाइयों को भी एथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी जाए। उनका तर्क है कि एथेनॉल कार्यक्रम का लाभ सिर्फ बड़ी चीनी फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
YouTube पर क्या चर्चा है?
- “किसानों की असली आय” videos viral हो रहे हैं
- Experts बता रहे हैं कि मिलों का profit margin पिछले 3 साल में 3 गुना बढ़ा
- किसानों का SAP उतना नहीं बढ़ा — gap बढ़ रहा है
क्या हो सकता है आगे?
- सरकार SAP review committee बना सकती है
- FRP revision की चर्चा CACP (Commission for Agricultural Costs) में चल रही है
- पेराई सत्र 2026-27 से पहले SAP घोषणा संभव
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