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मिलें एथेनॉल से करोड़ों कमा रही हैं — किसान को क्यों नहीं मिलता हिस्सा? जानें नई माँग

Randhir Patil Randhir Patil Aug 24, 2026 2 min read
मिलें एथेनॉल से करोड़ों कमा रही हैं — किसान को क्यों नहीं मिलता हिस्सा? जानें नई माँग
अंतिम अपडेट: August 24, 2026 7:00 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

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नई माँग: किसान संगठनों ने सरकार से कहा है कि चीनी मिलें एथेनॉल, बायो-पोटाश और DDGS (Distillers Dried Grains) जैसे by-products से ₹1,200 करोड़ से ज्यादा कमा रही हैं — लेकिन इसका एक भी पैसा किसानों को नहीं मिलता।

मिलें क्या-क्या कमा रही हैं गन्ने से?

Productकीमतकिसान को हिस्सा
चीनी₹55-65/kg✅ SAP के रूप में
एथेनॉल₹65-72/लीटर❌ कुछ नहीं
बायो-पोटाश₹8-12/kg❌ कुछ नहीं
DDGS (पशु आहार)₹18-22/kg❌ कुछ नहीं
बगास (बिजली)₹4-5/unit❌ कुछ नहीं
प्रेसमड (खाद)₹500-800/टन❌ कुछ नहीं

किसानों की माँग क्या है?

राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन की 3 प्रमुख माँगें:

  1. Revenue Sharing Formula — एथेनॉल और by-products की कमाई का 10-15% किसान को मिले
  2. SAP ₹600/क्विंटल — बढ़ती लागत और मिलों की बढ़ी कमाई देखते हुए
  3. गुड़ इकाइयों को भी एथेनॉल बनाने की इजाज़त — सिर्फ बड़ी मिलों को monopoly क्यों?

कर्नाटक का उदाहरण

कर्नाटक के गन्ना किसान संगठनों ने माँग की है कि स्थानीय गुड़ (jaggery) इकाइयों को भी एथेनॉल उत्पादन की अनुमति दी जाए। उनका तर्क है कि एथेनॉल कार्यक्रम का लाभ सिर्फ बड़ी चीनी फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

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Randhir Patil
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Randhir Patil

गन्ना उद्योग विशेषज्ञ — ChiniMandi पर 425+ लेख। गन्ना खेती, शुगर मिल, MSP रेट, सरकारी योजनाओं पर विश्वसनीय जानकारी।

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