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12 अक्टूबर से पहले कराएं फसल का डिजिटल सर्वे: बारिश-बाढ़ में डूबे गन्ने की भरपाई का आदेश, ये कागजात तैयार रखें

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 8, 2026 • 6 min read
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12 अक्टूबर से पहले कराएं फसल का डिजिटल सर्वे: बारिश-बाढ़ में डूबे गन्ने की भरपाई का आदेश, ये कागजात तैयार रखें
अंतिम अपडेट: October 8, 2026 8:38 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

बारिश और बाढ़ से जिन गन्ना किसानों की फसल गिर गई या खेतों में पानी भर गया, उनके लिए योगी सरकार ने बड़ी राहत की व्यवस्था कराई है। राहत आयुक्त ने निर्देश दिए हैं कि फसल क्षति का डिजिटल सर्वे 12 अक्टूबर तक पूरा करके राहत पोर्टल पर फीडिंग कर दी जाए, ताकि पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता राशि समय पर मिल सके। यह आदेश खास तौर पर इसलिए अहम है क्योंकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कई जगह गन्ना खेत में गिर गया है और पेराई सीजन दरवाजे पर है।

लखनऊ में 6 अक्टूबर को राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। स्पष्ट कहा गया कि क्षति का आकलन केवल लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट के आधार पर नहीं होगा — जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं क्षेत्र में जाकर सर्वे की गुणवत्ता व पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।

12 अक्टूबर की डेडलाइन और डिजिटल सर्वे की व्यवस्था

आदेश के अनुसार हर स्थिति में 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल क्षति की फीडिंग पूरी कर ली जाए। जिलों में सर्वे की प्रगति रोजाना गूगल शीट और पोर्टल पर दर्ज करनी होगी, और बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक आंकड़ों के आधार पर ही की जाएगी। यानी कोई जिला सर्वे में देरी या अनुमानित आंकड़ों के भरोसे नहीं रह सकता।

उप जिलाधिकारी और तहसीलदार डिजिटल क्रॉप सर्वे का क्रॉस-वेरिफिकेशन भी करेंगे। आईएमडी और एडब्ल्यूएस-एआरजी के वास्तविक वर्षा आंकड़ों से पता चलेगा कि क्षेत्र में कितनी बारिश हुई — वर्षा के वास्तविक आंकड़ों और डिजिटल सर्वे को मिलाकर ही नुकसान का निर्धारण होगा।

गन्ना किसानों के लिए क्यों अहम है यह आदेश

गन्ना धान जितनी नाजुक फसल नहीं है, लेकिन तेज आंधी के साथ बारिश में गन्ना जमीन पकड़ लेता है तो उसकी बढ़वार और चीनी परता दोनों पर असर पड़ता है। जानजवार की रिपोर्ट के अनुसार आजमगढ़ में दो दिनों से जारी तूफानी बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि ने खेतों को बुरी तरह प्रभावित किया है — गन्ना खेत में गिर गया है, जिससे उसकी बढ़वार और चीनी परता प्रभावित होगी। किसान संगठनों ने मांग उठाई है कि गन्ना किसानों के लिए गिरे हुए गन्ने की तौल में छूट दी जाए, क्योंकि जमीन पकड़े गन्ने को मिलों में घटतौली का सामना करना पड़ता है। यह मांग सोशलिस्ट किसान सभा और पूर्वांचल किसान यूनियन ने संयुक्त सर्वे और मुआवजे की मांग के साथ उठाई है।

लल्लूराम की 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 33 जिलों में बारिश का अलर्ट था और 11 जिले बाढ़ की चपेट में थे। बाराबंकी, प्रतापगढ़, देवरिया और सुल्तानपुर में ओले गिरे और किसानों के अनुसार धान और गन्ने की फसलों को नुकसान हुआ है।

फर्रुखाबाद के शमसाबाद के गांव रजलामई में लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट बताती है कि राजस्व निरीक्षक खुद खेत में भरे पानी में घुसकर फसल की स्थिति देख रहे हैं — यही प्रक्रिया अब 12 अक्टूबर तक डिजिटल सर्वे के दायरे में पूरी की जानी है।

गन्ना किसान अब क्या करें: 5 जरूरी काम

पहला — सर्वे टीम के आने पर खेत पर मौजूद रहें। सर्वे की तारीख का पता होते ही खेत में रहें और उस हिस्से को दिखाएं जहां नुकसान ज्यादा है।

दूसरा — नुकसान की फोटो-वीडियो अपने मोबाइल में रखें और तारीख नोट कर लें। यह रिकॉर्ड सर्वे विवाद या फसल बीमा के दावे में काम आएगा।

तीसरा — खसरा-खतौनी, आधार और बैंक खाते के कागजात तैयार रखें। बैंक खाता सक्रिय और आधार से जुड़ा हो — सहायता राशि डीबीटी से आएगी। गन्ना समिति की सदस्यता लेने वाले दोनों काम एक साथ निपटा लें — अंतिम तारीख 10 अक्टूबर है।

चौथा — गिरे हुए गन्ने की तुरंत बंधाई कराएं। जलभराव कम होते ही फफूंदीनाशक का छिड़काव फायदेमंद रहता है, ताकि पानी से आई फंगस न फैले।

पांचवां — अगर फसल का बीमा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत है, तो क्षति की सूचना समय पर बीमा कंपनी या बैंक को दें। डिजिटल सर्वे राहत राशि के लिए है, बीमा का दावा अलग प्रक्रिया से होगा — दोनों में देर न करें।

मुआवजा कैसे और कब मिलेगा

सर्वे पूरा होने के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। राहत आयुक्त ने कहा है कि किसान हित सर्वोपरि है और किसी भी प्रभावित किसान का अहित नहीं होना चाहिए। बजट की मांग पोर्टल पर दर्ज वास्तविक आंकड़ों पर आधारित होगी — जितना नुकसान दर्ज होगा, उसी के हिसाब से बजट आएगा।

एक बात का ध्यान रखें: नुकसान का निर्धारण वैज्ञानिक होगा — आईएमडी और मौसम स्टेशनों के वास्तविक वर्षा आंकड़ों के साथ डिजिटल सर्वे को मिलाया जाएगा। यानी जहां वास्तव में भारी बारिश या बाढ़ हुई, वहीं का नुकसान मान्य होगा, ताकि असली प्रभावित किसान को ही राहत मिले।

पेराई सीजन से पहले का समय क्यों महत्वपूर्ण है

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई सत्र 2026-27 शुरू करने की तैयारी में हैं। गिरे या डूबे गन्ने को जितनी जल्दी मिल पहुंचेगा, उतना ही नुकसान कम होगा — खेत में पड़े गन्ने में शर्करा घटती जाती है। इसलिए सर्वे के साथ-साथ आपूर्ति की तैयारी रखें: सर्वे रिकॉर्ड, बैंक खाता और पर्ची कैलेंडर के काम पहले से निपटा लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: फसल क्षति का डिजिटल सर्वे कब तक पूरा होना है? जवाब: राहत आयुक्त के निर्देश के अनुसार 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे के अनुसार फसल क्षति की फीडिंग पूरी कर ली जानी है। जिलों में प्रगति रोजाना पोर्टल पर दर्ज होगी।

सवाल: सर्वे में मेरा नुकसान दर्ज होगा या नहीं, कैसे पता चलेगा? जवाब: सर्वे टीम खेत पर आकर नुकसान का आकलन करेगी। आप सर्वे के समय खेत में मौजूद रहें, नुकसान की फोटो-वीडियो रखें और अपने खसरा-खतौनी के कागजात तैयार रखें। DM और ADM स्वयं सर्वे की गुणवत्ता जांचेंगे।

सवाल: गिरा हुआ गन्ना खेत में ही छोड़ दें या उठाकर बंधाई करें? जवाब: गन्ना विभाग की सलाह के अनुसार गिरे गन्ने को जल्द उठाकर बंधाई करें। खेत में पड़े रहने से चीनी परता घटती है और मिल में घटतौली का सामना करना पड़ सकता है। पानी उतरने पर फफूंदीनाशक का छिड़काव भी करें।

सवाल: मुआवजे की राशि कैसे मिलेगी? जवाब: सर्वे के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता राशि दी जाएगी। भुगतान बैंक खाते में डीबीटी से होगा, इसलिए खाता सक्रिय और आधार से जुड़ा होना जरूरी है। राहत से जुड़ी शिकायत हो तो गन्ना एवं चीनी उत्तर प्रदेश के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।

सवाल: क्या यह सर्वे फसल बीमा का विकल्प है? जवाब: नहीं। यह राहत विभाग का सर्वे है, जिससे नियमानुसार सहायता मिलेगी। फसल बीमा का दावा बीमा कंपनी या बैंक के जरिए अलग से करना होगा — बीमित किसान क्षति की सूचना समय पर अवश्य दें।

स्रोत: दैनिक संवाद (6 अक्टूबर 2026) — 12 अक्टूबर तक डिजिटल सर्वे और राहत पोर्टल पर फीडिंग के निर्देश, राहत आयुक्त की समीक्षा बैठक; वेबअखबार (6 अक्टूबर 2026) और न्यूजट्रैक (6 अक्टूबर 2026) — सर्वे आदेश की पुष्टि; लाइव हिंदुस्तान (6 अक्टूबर 2026) — फर्रुखाबाद में राजस्व टीम द्वारा नुकसान का आकलन; लल्लूराम (6 अक्टूबर 2026) — 33 जिलों में बारिश अलर्ट, 11 जिले बाढ़ की चपेट में, गन्ने को नुकसान; जानजवार (6 अक्टूबर 2026) — आजमगढ़ में आंधी-ओलावृष्टि से गन्ना गिरा, किसान संगठनों की संयुक्त सर्वे और मुआवजे की मांग।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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