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गन्ने के दो भाव: केंद्र का ₹365 एफआरपी और यूपी का ₹400 एसएपी — 2026-27 में आपको कौन सा भाव मिलेगा, जानिए पूरा हिसाब

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 6, 2026 • 6 min read
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गन्ने के दो भाव: केंद्र का ₹365 एफआरपी और यूपी का ₹400 एसएपी — 2026-27 में आपको कौन सा भाव मिलेगा, जानिए पूरा हिसाब
अंतिम अपडेट: October 6, 2026 9:17 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

अक्टूबर आते ही यूपी के गन्ना किसानों के मन में एक ही सवाल उठता है — इस पेराई सत्र में गन्ना किस भाव बिकेगा? केंद्र सरकार ने 2026-27 के लिए एफआरपी तय कर दिया है — ₹365 प्रति क्विंटल। लेकिन यूपी के किसान की नजर दरअसल उस एसएपी पर है, जो राज्य सरकार हर साल तय करती है। पिछले सत्र में यह अगेती गन्ने के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था। दोनों भावों का पूरा हिसाब यहां समझिए, ताकि मिल की भाव-स्लिप देखकर कोई भ्रम न रहे।

एफआरपी क्या है — केंद्र का न्यूनतम भाव

एफआरपी यानी फेयर एंड रेम्यूनरेटिव प्राइस — केंद्र सरकार का तय न्यूनतम भाव, जिसे देश की हर चीनी मिल को अपने किसानों को देना ही होता है। यह कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिश पर आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) तय करती है।

शुगर सीजन 2026-27 (अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027) के लिए सीसीईए ने 5 मई 2026 को एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। यह 2025-26 के ₹355 से ₹10 अधिक है — यानी 2.81 प्रतिशत की बढ़ोतरी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया था कि इस फैसले से देश के करीब एक करोड़ गन्ना किसानों को फायदा होगा। सरकार के मुताबिक गन्ने की उत्पादन लागत (ए2+एफएल) 2026-27 में ₹182 प्रति क्विंटल है, और ₹365 का एफआरपी लागत से 100.5 प्रतिशत अधिक है।

एफआरपी चीनी की रिकवरी से जुड़ा है। ₹365 का भाव 10.25 प्रतिशत की बेसिक रिकवरी पर तय हुआ है। रिकवरी इससे हर 0.1 प्रतिशत अधिक होने पर ₹3.56 प्रति क्विंटल प्रीमियम मिलेगा, और हर 0.1 प्रतिशत कम होने पर ₹3.56 की कटौती होगी। लेकिन किसानों की सुरक्षा के लिए सरकार ने यह भी तय किया है कि जिन मिलों की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम है, वहां कोई कटौती नहीं होगी — ऐसे किसानों को 2026-27 में भी न्यूनतम ₹338.30 प्रति क्विंटल मिलेगा।

एसएपी क्या है — यूपी सरकार का भाव

एसएपी यानी स्टेट एडवाइज्ड प्राइस — राज्य सरकार का तय गन्ना भाव। जिन राज्यों में एसएपी घोषित होता है — जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा — वहां चीनी मिलों को किसानों को एसएपी देना अनिवार्य होता है, क्योंकि एसएपी हमेशा एफआरपी से अधिक रहता है। यानी यूपी के किसान के लिए असली भाव एसएपी ही है, एफआरपी सिर्फ न्यूनतम सुरक्षा जाल है।

उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी — यह योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य बढ़ा था। इसके बाद अगेती (जल्दी पकने वाली) प्रजातियों के लिए एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजातियों के लिए ₹390 प्रति क्विंटल तय हुआ था।

यहां एक बात साफ समझ लीजिए: पेराई सत्र 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश में एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। यानी फिलहाल कानूनी रूप से जो भाव निश्चित है, वह केंद्र का ₹365 एफआरपी है। जैसे ही राज्य सरकार नया एसएपी घोषित करेगी, प्रदेश की 122 चीनी मिलों को वही भाव देना होगा।

आपके खाते में कौन सा भाव आएगा — सीधा हिसाब

यूपी में जब एसएपी घोषित हो जाता है, तो मिल किसान को एसएपी ही देती है। एफआरपी का काम सिर्फ इतना है कि भाव कभी भी उससे नीचे न जाए। जिन राज्यों में एसएपी घोषित नहीं होता, वहां किसानों को रिकवरी-लिंक्ड एफआरपी मिलता है।

एक उदाहरण से समझिए: पिछले सत्र (2025-26) में अगर किसी किसान ने 100 क्विंटल अगेती गन्ना मिल को दिया, तो उसे 100 × ₹400 = ₹40,000 का भुगतान बना। लेकिन 2026-27 सत्र के लिए जब तक नया एसएपी घोषित नहीं होता, तब तक किसान को यह नहीं मान लेना चाहिए कि ₹400 ही मिलेगा। नया एसएपी पिछले से अधिक भी हो सकता है — इसलिए घोषणा का इंतजार करें और मिल की भाव-स्लिप पर रेट जरूर जांचें।

भुगतान का नियम भी याद रखिए: चीनी मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी होने पर किसान को 15 प्रतिशत सालाना ब्याज पाने का कानूनी हक है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 सत्र में यूपी की मिलों ने 94.86 प्रतिशत से अधिक बकाया चुका दिया है और 102 निजी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान पूरा किया है।

रिकवरी का हिसाब — भाव कैसे बदलता है

एफआरपी रिकवरी से जुड़ा है। बेसिक भाव ₹365 (10.25% रिकवरी) से हिसाब लगाइए:

  • अगर मिल की रिकवरी 10.5 प्रतिशत है, तो भाव = ₹365 + (2.5 × ₹3.56) = ₹373.90 प्रति क्विंटल।
  • अगर रिकवरी 9.8 प्रतिशत है, तो भाव = ₹365 − (4.5 × ₹3.56) = ₹348.98 प्रति क्विंटल।
  • अगर रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम है, तो कोई कटौती नहीं — भाव ₹338.30 प्रति क्विंटल।

यूपी के किसानों के लिए राहत की बात यह है कि एसएपी एक समान भाव होता है — मिल की रिकवरी घटने-बढ़ने से नहीं बदलता। इसीलिए यूपी में एसएपी की मांग हमेशा बनी रहती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी यूपी के किसान पेराई शुरू होने से पहले एसएपी में बढ़ोतरी और बकाया भुगतान की मांग कर रहे हैं।

2026-27 में किसान क्या उम्मीद रखें

तस्वीर इस समय ऐसी है: केंद्र का एफआरपी ₹365 तय हो चुका है, जो 1 अक्टूबर 2026 से शुरू शुगर सीजन के लिए लागू है। यूपी का एसएपी आना बाकी है। पश्चिमी यूपी की कई मिलें अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं, ऐसे में किसान एसएपी की जल्द घोषणा की उम्मीद कर रहे हैं।

किसान के तौर पर तीन काम कीजिए: पहला, मिल की भाव-स्लिप और पर्ची पर रेट जरूर जांचें — नया एसएपी घोषित होते ही मिलों को वही भाव देना होगा। दूसरा, अपना सर्वे रिकॉर्ड, सट्टा और बैंक खाते की जानकारी eGanna ऐप या CaneUp पोर्टल (enquiry.caneup.in) पर अपडेट रखें, ताकि भुगतान में देरी न हो। तीसरा, भुगतान में देरी हो तो 14 दिन का नियम और 15 प्रतिशत ब्याज का हक याद रखें — शिकायत टोल-फ्री 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर, या 51969 पर एसएमएस से करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. 2026-27 में यूपी के किसान को कितना भाव मिलेगा? केंद्र का एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय है। यूपी का नया एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है — घोषणा होते ही मिलों को वही भाव देना होगा। पिछले सत्र का एसएपी अगेती के लिए ₹400 और सामान्य के लिए ₹390 था।

2. एफआरपी और एसएपी में क्या अंतर है? एफआरपी केंद्र का न्यूनतम भाव है, जो रिकवरी से जुड़ा होता है। एसएपी राज्य का तय भाव है, जो एफआरपी से अधिक होता है और यूपी में मिलों के लिए अनिवार्य है।

3. क्या चीनी मिल एसएपी से कम भाव दे सकती है? नहीं। एसएपी घोषित होने के बाद मिल को कम से कम एसएपी देना ही होता है। एफआरपी न्यूनतम सुरक्षा है।

4. भुगतान में देरी हो तो किसान क्या करे? मिल को 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज का हक है। शिकायत टोल-फ्री 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर, 51969 पर एसएमएस से, या enquiry.caneup.in पर दर्ज कराएं।

5. रिकवरी कम होने पर क्या मेरा भाव घट जाएगा? यूपी में नहीं — एसएपी एक समान भाव है। जिन राज्यों में सिर्फ एफआरपी लागू है, वहां भी 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी पर न्यूनतम ₹338.30 प्रति क्विंटल की सुरक्षा है।

स्रोत: IANS/PTI (यसपंजाब, न्यूजड्रम, यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया), दैनिक जागरण, चिनीमंडी, एग्रीइनसाइट/टाइम्स ऑफ इंडिया।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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