होम › FRP vs SAP समझिए: 1 अक्टूबर से गन्ने का …

FRP vs SAP समझिए: 1 अक्टूबर से गन्ने का केंद्रीय भाव ₹365 लागू, यूपी के SAP पर सस्पेंस — किसानों को क्या मिलेगा

Aamir Raza Aamir Raza • Sep 30, 2026 • 6 min read
शेयर करें:
FRP vs SAP समझिए: 1 अक्टूबर से गन्ने का केंद्रीय भाव ₹365 लागू, यूपी के SAP पर सस्पेंस — किसानों को क्या मिलेगा
अंतिम अपडेट: September 30, 2026 6:45 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ना बेचने के समय हर किसान के मन में एक ही सवाल उठता है — आखिर उसे प्रति क्विंटल कितने रुपये मिलेंगे? और इसी सवाल के जवाब में दो नाम बार-बार सुनाई देते हैं — एफआरपी (FRP) और एसएपी (SAP)। कई किसानों के लिए ये दोनों एक जैसे लगते हैं, जबकि हकीकत में दोनों के तय होने का तरीका, तय करने वाला और लागू होने का दायरा बिल्कुल अलग है।

कल से नया चीनी सत्र 2026-27 शुरू हो रहा है। केंद्र सरकार ने इस सत्र का FRP — 365 रुपये प्रति क्विंटल — पहले ही तय कर दिया है, पर उत्तर प्रदेश का SAP अभी घोषित नहीं हुआ। आइए समझते हैं दोनों भावों का फर्क और यूपी के किसानों को आखिर क्या मिलेगा।

FRP क्या है — केंद्र सरकार तय करती है

FRP का पूरा नाम है Fair and Remunerative Price, यानी उचित और लाभकारी मूल्य। यह गन्ने का वह न्यूनतम भाव है जिससे कम दाम पर कोई भी चीनी मिल किसान से गन्ना नहीं खरीद सकती। FRP की सिफारिश कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) करता है, और आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति इसे मंजूरी देती है।

FRP पूरे देश में लागू होता है — यानी चाहे किसान उत्तर प्रदेश का हो या महाराष्ट्र का, मिल को कम से कम FRP के भाव पर गन्ना खरीदना ही होगा। यही वजह है कि FRP को गन्ने का “फ्लोर प्राइस” यानी न्यूनतम गारंटी भाव कहा जाता है। केंद्र सरकार ने 5 मई 2026 को 2026-27 चीनी सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, जो पिछले सत्र के 355 रुपये से 10 रुपये अधिक है।

SAP क्या है — राज्य सरकार का अपना भाव

SAP यानी State Advised Price, राज्य परामर्शित मूल्य। यह राज्य सरकार द्वारा तय किया जाने वाला गन्ने का भाव है और यह उसी राज्य की मिलों पर लागू होता है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्य हर साल अपना SAP घोषित करते हैं, और यह आमतौर पर केंद्र के FRP से अधिक होता है।

यहां एक बात साफ समझ लीजिए — SAP, FRP का विकल्प नहीं, बल्कि उसके ऊपर का अतिरिक्त भाव है। यूपी में किसान को मिलने वाला वास्तविक भाव वही होता है जो राज्य सरकार SAP के रूप में घोषित करती है। 2025-26 सत्र में यूपी सरकार ने अगेती (जल्दी पकने वाली) किस्म के गन्ने का SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था — ध्यान रहे, यह पुराने सत्र का भाव है। 2026-27 सत्र के लिए यूपी का SAP 30 सितंबर 2026 तक घोषित नहीं हुआ है।

2026-27 सीजन में दोनों भावों की ताजा स्थिति

नए सत्र के शुरू होने से ठीक पहले दोनों भावों की स्थिति इस प्रकार है:

FRP — तय हो चुका है: केंद्र सरकार ने 5 मई 2026 को 2026-27 सत्र के लिए FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर) घोषित कर दिया था। यह भाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

SAP — यूपी में अभी बाकी: उत्तर प्रदेश सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए SAP की घोषणा अभी तक नहीं की है। पिछले सत्र (2025-26) में अगेती गन्ने का SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठनों की नजर अब राज्य सरकार की घोषणा पर टिकी है — 22 सितंबर को बिजनौर में किसान मजदूर संगठन की महापंचायत में गन्ने का भाव बढ़ाने की मांग प्रमुख रही थी, और कई संगठनों ने 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की मांग रखी है।

रिकवरी से जुड़ा भाव का गणित

FRP का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यह चीनी की रिकवरी से जुड़ा होता है। रिकवरी का मतलब है — गन्ने से कितने प्रतिशत चीनी निकली। FRP 365 रुपये 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर तय होता है। इसके बाद हर 0.1 प्रतिशत रिकवरी बढ़ने पर 3.56 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलता है, और इतनी ही कमी पर उतनी ही कटौती होती है।

लेकिन किसानों की सुरक्षा के लिए एक नियम और है — अगर किसी मिल की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम भी रहती है, तो भी किसान को न्यूनतम 338.3 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं मिलेगा। सरकार के अनुसार नया FRP उत्पादन लागत (करीब 182 रुपये प्रति क्विंटल) से 100.5 प्रतिशत अधिक है।

यूपी के किसानों को आखिर कौन सा भाव मिलेगा?

उत्तर प्रदेश में चीनी मिलें राज्य सरकार के घोषित SAP पर गन्ना खरीदती हैं, बशर्ते SAP, FRP से कम न हो। व्यवहार में यूपी का SAP हमेशा FRP से ऊपर रहा है, इसलिए यूपी के किसान को मिलने वाला भाव SAP ही होता है। केंद्र का FRP उस स्थिति में काम आता है जब किसी वजह से राज्य SAP घोषित न करे।

मतलब साफ है — 1 अक्टूबर से यूपी के किसानों को कम से कम FRP 365 रुपये प्रति क्विंटल की गारंटी मिली हुई है। अब असली सवाल यह है कि यूपी सरकार SAP कितना घोषित करती है — 400 रुपये से आगे बढ़ता है या नहीं।

एथनॉल के दाम पर भी असर

गन्ने के भाव का असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहता। CACP ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि FRP बढ़ने के मद्देनजर गन्ना-आधारित एथनॉल के दाम में भी संशोधन होना चाहिए। अगर एथनॉल के दाम बढ़ते हैं, तो मिलों की आय बढ़ेगी और इसका फायदा किसानों के समय पर भुगतान में भी दिख सकता है।

किसानों के काम की चार जरूरी बातें

1. पुराना भाव नए सत्र में लागू नहीं होता: 2025-26 का 400 रुपये वाला SAP उसी सत्र का भाव था। 2026-27 के लिए नई घोषणा का इंतजार करें।

2. पर्ची पर भाव जांचें: मिल से मिलने वाली पर्ची पर भाव जरूर देखें और उसे घोषित SAP से मिलाएं।

3. रिकवरी का मतलब समझें: गन्ना जितना परिपक्व होगा, रिकवरी उतनी बेहतर रहेगी। जल्दी कटाई से रिकवरी घट सकती है।

4. शिकायत कहां करें: भाव या भुगतान में गड़बड़ी पर जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें, या गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

FRP और SAP में मुख्य अंतर क्या है? FRP केंद्र सरकार तय करती है और पूरे देश में गन्ने का न्यूनतम भाव होता है। SAP राज्य सरकार तय करती है, उसी राज्य में लागू होता है और आमतौर पर FRP से अधिक होता है।

2026-27 सत्र के लिए FRP कितना तय हुआ है? 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर)। यह 5 मई 2026 को केंद्र सरकार ने घोषित किया था और 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा।

क्या यूपी का SAP 2026-27 घोषित हो गया है? नहीं। 30 सितंबर 2026 तक यूपी सरकार ने नए सत्र का SAP घोषित नहीं किया है। 2025-26 सत्र में अगेती गन्ने का SAP 400 रुपये प्रति क्विंटल था।

अगर मिल FRP से कम भाव दे तो क्या करें? यह नियमों का उल्लंघन है। जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें, या टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर शिकायत दर्ज कराएं।

रिकवरी कम होने पर क्या भाव घटेगा? हर 0.1 प्रतिशत रिकवरी घटने पर 3.56 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती होती है, लेकिन 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी पर भी न्यूनतम 338.3 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं मिलेगा।

स्रोत: रेडिफ मनी (PTI), इंडिफूडबेव, एशियानेट न्यूजेबल (ANI), द हिंदू बिजनेसलाइन, द टाइम्स ऑफ इंडिया, चीनीमंडी — 2026 की रिपोर्टें। SAP संबंधी जानकारी राज्य सरकार की घोषणाओं पर आधारित है।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में