पेराई से 20 दिन पहले सिंचाई बंद कर दीजिए: गन्ने में चीनी बढ़ाने का वैज्ञानिक नियम, हर किसान को जानना चाहिए

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें इस बार करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं — द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर के पहले हफ्ते तक बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल पूरे हो जाएंगे, और मौसम साथ रहा तो 20 अक्टूबर के आसपास बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलें चलने लगेंगी। यानी पेराई में अब मुश्किल से 12 दिन बचे हैं।
ऐसे में हर गन्ना किसान के मन में एक सवाल है — खेत को आखिरी पानी कब दें और सिंचाई कब पूरी तरह बंद कर दें? जवाब सीधा है: पेराई शुरू होने से 15 से 30 दिन पहले सिंचाई रोक देनी चाहिए, और आज 8 अक्टूबर है — मतलब जिन किसानों की पर्ची 20 अक्टूबर के आसपास की है, उनके लिए आखिरी सिंचाई का समय अब निकल चुका है या बस खत्म होने वाला है। यह गन्ना विज्ञान का पक्का नियम है — समय पर अपनाने से गन्ने में चीनी बढ़ती है।
आखिरी सिंचाई रोकने के पीछे का विज्ञान क्या है
गन्ने की जिंदगी में आखिरी चरण पकाव (राइपनिंग) का होता है। इस दौरान पौधा बढ़ना बंद करके अपनी सारी ऊर्जा तने में चीनी (सुक्रोज) जमा करने में लगाता है। अगर इस समय खेत में लगातार पानी मिलता रहे, तो पौधा फिर से हरी बढ़वार की तरफ लौट जाता है — नई पत्तियां निकलती हैं, तना पानीदार होता है और रस पतला हो जाता है। नतीजा: वजन तो दिखता है, लेकिन चीनी कम निकलती है।
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ और गन्ना प्रजनन संस्थान कोयंबटूर के पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज में साफ लिखा है कि पकाव के समय सिंचाई रोक देने से गन्ने में शर्करा का संचय बेहतर होता है। हल्का जल-तनाव पौधे को संकेत देता है कि अब बढ़वार नहीं, भंडारण का समय है।
कितने दिन पहले रोकें — मिट्टी के हिसाब से फैसला लीजिए
सिंचाई रोकने का कोई एक जादुई आंकड़ा नहीं है; यह आपकी मिट्टी पर निर्भर करता है। कृषि वैज्ञानिकों की सामान्य सिफारिश इस प्रकार है:
भारी मिट्टी (चिकनी/दोमट): ऐसी मिट्टी पानी को लंबे समय तक पकड़कर रखती है, इसलिए कटाई से 3 से 4 सप्ताह (20 से 30 दिन) पहले सिंचाई बंद कर दें। यहां देर से दिया गया पानी सबसे ज्यादा नुकसान करता है।
हल्की मिट्टी (बलुई/रेतीली): पानी जल्दी निकल जाता है, इसलिए कटाई से 2 से 3 सप्ताह (15 से 20 दिन) पहले रोकना काफी है। बहुत जल्दी रोकने पर गन्ना सूखने लगता है और वजन घटता है — संतुलन जरूरी है।
साधारण नियम: अगर आपकी पर्ची 20 अक्टूबर के आसपास की है, तो भारी मिट्टी में सिंचाई अब तक बंद हो जानी चाहिए थी; हल्की मिट्टी वालों के पास बस कुछ दिन हैं।
इस साल खास सावधानी: देर से बारिश और जलभराव वाले खेत
इस साल मानसून की विदाई में देरी और बीच-बीच में हुई तेज बारिश ने कई इलाकों में गन्ने के खेतों में पानी खड़ा कर दिया है। अमर उजाला की 2 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक सहारनपुर मंडल में कई जगह गन्ने की फसल में जलभराव हुआ है और फसल गिरने की भी आशंका जताई गई है।
जिन खेतों में पानी खड़ा है, वहां पहले निकासी कीजिए — खेत की नालियां खोलकर पानी बाहर निकालें, क्योंकि खड़ा पानी पकाव को रोकता है और जड़ों में सड़न का खतरा बढ़ाता है। गिरे हुए गन्ने की बंधाई सावधानी से करें ताकि तना जमीन से उठ जाए और हवा लगे।
सिंचाई रोकने के बाद के 5 जरूरी काम
सिंचाई बंद करना अकेला कदम नहीं है; इसके साथ ये पांच काम कर लीजिए तो पेराई का पूरा फायदा मिलेगा:
1. खेत की नालियां साफ करें: बारिश या आखिरी सिंचाई का बचा पानी निकल जाए, इसके लिए मेड़ों के किनारे की नालियां खोल दें। सूखा खेत कटाई के लिए तैयार खेत है।
2. सूखी पत्तियां हटाएं और बंधाई जांचें: सूखी पत्तियों की सफाई (डी-ट्रैशिंग) से खेत में हवा का संचार बढ़ता है और पकाव तेज होता है। गिरे गन्ने की बंधाई दोबारा कस लें।
3. कटाई की योजना पर्ची से मिलाएं: पर्ची/इंडेंट की तारीख देखकर कटाई का दिन तय करें — कटा गन्ना खेत में ज्यादा दिन न पड़ा रहे।
4. बैंक खाता और मोबाइल नंबर जांच लें: भुगतान सीधे खाते में आता है, इसलिए खाता सक्रिय और आधार-मोबाइल से जुड़ा होना चाहिए। यह काम पेराई शुरू होने से पहले निपटा लें।
5. गेहूं बुवाई की तैयारी: जल्दी पेराई का सबसे बड़ा फायदा यही है कि खेत समय पर खाली होकर गेहूं की बुवाई के लिए मिल जाएगा। बीज और खाद का इंतजाम पहले से कर लें।
ये 3 गलतियां चीनी घटा देती हैं — इनसे बचें
गलती 1: कटाई से 2-3 दिन पहले भारी सिंचाई। कुछ किसान वजन बढ़ाने के लालच में कटाई से ठीक पहले खेत में पानी भर देते हैं। वजन थोड़ा बढ़ता जरूर है, लेकिन रस पतला हो जाता है और चीनी की मात्रा घटती है। मिल की रिकवरी गिरने से लंबे समय में भाव पर भी असर पड़ता है। यह सौदा घाटे का है।
गलती 2: खेत में पानी खड़ा रहने देना। खासकर तराई और निचले खेतों में अक्टूबर की बारिश का पानी निकालना भूल जाना पकाव को रोक देता है। पानी खड़ा है तो गन्ना पकने की बजाय सड़ने की तरफ बढ़ता है।
गलती 3: हल्की मिट्टी में बहुत जल्दी पानी रोकना। बलुई मिट्टी में एक महीने पहले सिंचाई बंद करने पर गन्ना मुरझाने लगता है और वजन में भारी गिरावट आती है। मिट्टी के हिसाब से 15 से 20 दिन का नियम ही सही है — न ज्यादा, न कम।
पूछे जाने वाले प्रश्न
सवाल: पेराई 20 अक्टूबर से शुरू हो रही है, तो आखिरी सिंचाई की अंतिम तारीख क्या है? जवाब: भारी मिट्टी में 20 सितंबर से 25 सितंबर के बीच और हल्की मिट्टी में 30 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच सिंचाई बंद कर देनी चाहिए थी। अगर अभी तक पानी दिया है, तो अब तुरंत रोक दीजिए।
सवाल: क्या सिंचाई रोकने से गन्ने का वजन घट जाएगा? जवाब: सही समय पर रोकने से वजन में कोई खास कमी नहीं आती, बल्कि चीनी की मात्रा बढ़ती है। वजन तभी घटता है जब हल्की मिट्टी में बहुत जल्दी पानी रोक दिया जाए या गन्ना सूखने लगे।
सवाल: बारिश हो गई तो क्या दोबारा सिंचाई की जरूरत है? जवाब: नहीं। अक्टूबर की हल्की बारिश पकाव के लिए काफी है। बारिश के बाद खेत का पानी निकालने पर ध्यान दें, सिंचाई दोबारा शुरू न करें।
सवाल: गिरे हुए गन्ने में सिंचाई का नियम अलग है? जवाब: हां। गिरे गन्ने में पहले जल निकासी और बंधाई करें। ऐसे खेत में सिंचाई पहले ही बंद कर देनी चाहिए, क्योंकि नमी ज्यादा रहने से सड़न का खतरा बढ़ जाता है।
सवाल: नवंबर में पर्ची है तो अभी सिंचाई दे सकते हैं? जवाब: हां, नवंबर की पर्ची वालों के पास अभी 10 से 15 दिन हैं। एक हल्की सिंचाई देकर फिर मिट्टी के हिसाब से 15 से 30 दिन पहले बंद कर दें।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया/चिनीमंडी (पश्चिमी यूपी में 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की तैयारी), अमर उजाला सहारनपुर (2 अक्टूबर — गन्ना फसल में जलभराव), भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ व गन्ना प्रजनन संस्थान कोयंबटूर के पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज (पकाव अवधि में सिंचाई प्रबंधन संबंधी सिफारिशें)।
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