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14 दिन में गन्ना भुगतान नहीं मिला? किसानों को देरी पर 15% ब्याज का कानूनी हक — पैसा कैसे मिलेगा, पूरी प्रक्रिया जानिए

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 4, 2026 • 6 min read
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14 दिन में गन्ना भुगतान नहीं मिला? किसानों को देरी पर 15% ब्याज का कानूनी हक — पैसा कैसे मिलेगा, पूरी प्रक्रिया जानिए
अंतिम अपडेट: October 4, 2026 11:52 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने में अब गिनती के दिन बचे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के कई गन्ना किसानों के खातों में अभी पिछले सत्र का पूरा पैसा नहीं पहुंचा है। ज्यादातर किसान सिर्फ इंतजार करते रहते हैं, जबकि कानून उन्हें इससे कहीं ज्यादा मजबूत हक देता है — गन्ना मिलने के 14 दिन के भीतर भुगतान न होने पर देरी की अवधि के लिए 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पाने का अधिकार। यह कोई घोषणा या वादा नहीं, बल्कि गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के तहत बना कानूनी प्रावधान है। आइए समझते हैं कि यह नियम कैसे काम करता है, बकाया भुगतान की ताजा स्थिति क्या है और अपना पैसा पाने के लिए आपको क्या करना चाहिए।

2025-26 में कितना भुगतान हुआ — ताजा आंकड़े

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना मूल्य का 94.86 प्रतिशत भुगतान किसानों को किया जा चुका है। प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से 102 मिलों ने अपना शत-प्रतिशत बकाया चुका दिया है। सरकार का दावा है कि अब तक गन्ना मूल्य के रूप में 3.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है।

23 सहकारी चीनी मिलों ने कुल 2,820.89 करोड़ रुपये का भुगतान किया है, जबकि राज्य चीनी निगम की तीनों मिलों ने 543.51 करोड़ रुपये चुकाए हैं। सरकार के अनुसार इन उपायों से प्रदेश में गन्ना किसानों की औसत आय में प्रति हेक्टेयर 40,720 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।

लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है — लगभग 5 प्रतिशत भुगतान अभी भी लंबित है, और कुछ मिलों पर बकाया काफी बड़ा है। शामली की थानाभवन चीनी मिल पर ही पिछले सत्र का 81.37 करोड़ रुपये बकाया है। सितंबर के आखिरी हफ्ते में जिलाधिकारी शामली आलोक यादव ने मिल अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए बकाया का शत-प्रतिशत भुगतान तुरंत करने और 15 अक्टूबर 2026 तक नया पेराई सत्र हर हाल में शुरू करने के निर्देश दिए थे।

14 दिन का नियम और 15 प्रतिशत ब्याज का हक

गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के प्रावधानों के तहत चीनी मिलों के लिए यह अनिवार्य है कि वे किसान से गन्ना लेने के 14 दिन के भीतर गन्ना मूल्य का भुगतान कर दें। यदि मिल इस समय सीमा में भुगतान नहीं करती, तो देरी की पूरी अवधि के लिए बकाया राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देना होता है।

यह नियम सिर्फ कागज पर नहीं है — चीनी आयुक्त स्तर पर इसका पालन कराने के लिए मिलों को नियमित चेतावनी और नोटिस जारी होते रहे हैं। महाराष्ट्र में शुगर कमिश्नर ने इस प्रावधान का हवाला देकर साफ कहा था कि 14 दिन में एफआरपी न चुकाने वाली मिलों को बकाया बिल के साथ 15 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा। यही केंद्रीय कानून उत्तर प्रदेश की मिलों पर भी समान रूप से लागू होता है।

ब्याज का हिसाब कैसे लगता है

मान लीजिए किसी किसान का 1 लाख रुपये का गन्ना मूल्य 30 दिन देरी से मिला। 15 प्रतिशत वार्षिक दर से 30 दिन का ब्याज लगभग 1,233 रुपये बनेगा। यह रकम मिल को अलग से देनी होती है, मूल भुगतान के ऊपर। देरी जितनी लंबी, ब्याज उतना ही ज्यादा — यही वजह है कि बकाया मिलें देरी को हल्के में नहीं ले सकतीं।

भुगतान की स्थिति ऑनलाइन कैसे चेक करें

अपने गन्ना भुगतान की स्थिति जानने के लिए सबसे भरोसेमंद तरीका caneup पोर्टल है। caneup पोर्टल पर भुगतान की स्थिति ऑनलाइन देखने की पूरी प्रक्रिया इस गाइड में विस्तार से दी गई है। संक्षेप में:

  1. enquiry.caneup.in या upcane.gov.in पर जाएं।
  2. अपना जिला, चीनी मिल और गांव चुनें।
  3. किसान कोड या नाम से अपनी सट्टा/पर्ची डिटेल खोलें।
  4. भुगतान कॉलम में देखें कि कौन-सी पर्ची का पैसा आया और कौन-सा लंबित है।

ई-गन्ना ऐप पर भी यही जानकारी मोबाइल से देखी जा सकती है। ई-गन्ना ऐप डाउनलोड और इस्तेमाल की पूरी गाइड पहले से उपलब्ध है।

भुगतान न मिले तो शिकायत कहां करें

अगर 14 दिन बीतने के बाद भी भुगतान नहीं आया है, तो चुपचाप इंतजार करने के बजाय इन कदमों को अपनाएं:

  1. तौल रसीद संभालकर रखें — पर्ची पर तौल, किस्म और दर दर्ज होनी चाहिए। यही आपका सबसे बड़ा सबूत है।
  2. जिला गन्ना अधिकारी (डीसीओ) कार्यालय में लिखित शिकायत दें — तौल रसीद की कॉपी के साथ।
  3. गन्ना टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर पर शिकायत दर्ज कराएं — 1800-121-3203 या 1800-180-5129। एसएमएस के लिए सरकारी शॉर्टकोड 51969 भी उपलब्ध है।
  4. enquiry.caneup.in पर ऑनलाइन शिकायत (ग्रीवेंस) दर्ज करके टोकन नंबर से उसका स्टेटस ट्रैक करें।
  5. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायत की जा सकती है।

शिकायत में 14 दिन के नियम और 15 प्रतिशत ब्याज के प्रावधान का जिक्र जरूर करें — इससे आपकी शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है।

मिलों पर दबाव क्यों जरूरी है

बकाया भुगतान सिर्फ किसानों की जेब का सवाल नहीं, यह पूरे गन्ना क्षेत्र की सेहत का सवाल है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ने का रकबा 47,000 हेक्टेयर घटकर 28.87 लाख हेक्टेयर से 28.4 लाख हेक्टेयर रह गया है। किसान इसकी वजह बढ़ती लागत, मजदूरी और सिंचाई खर्च के साथ मिलों की देरी से होने वाली भुगतान प्रक्रिया को भी बताते हैं। समय पर भुगतान होगा, तो किसान का भरोसा बना रहेगा और रकबा भी बचेगा।

जवाब जानिए

प्रश्न: 14 दिन की गिनती कब से शुरू होती है? उत्तर: मिल द्वारा गन्ना लेने (तौल) की तारीख से 14 दिन की गिनती शुरू होती है। इसके बाद की हर देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का हक बनता है।

प्रश्न: क्या ब्याज अपने आप मिलता है या मांगना पड़ता है? उत्तर: कानून में ब्याज का प्रावधान स्वतः लागू है, लेकिन व्यवहार में किसानों को जिला गन्ना अधिकारी के पास लिखित शिकायत करके इसकी मांग करनी पड़ती है। तौल रसीद और पर्ची की कॉपी साथ रखें।

प्रश्न: भुगतान की स्थिति ऑनलाइन कहां देख सकते हैं? उत्तर: enquiry.caneup.in या upcane.gov.in पोर्टल पर जिला, मिल और गांव चुनकर, और ई-गन्ना ऐप पर मोबाइल से।

प्रश्न: शिकायत के लिए कौन-से नंबर काम के हैं? उत्तर: गन्ना टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129, एसएमएस शॉर्टकोड 51969, और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076।

प्रश्न: 2025-26 का कितना भुगतान बाकी है? उत्तर: सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 94.86 प्रतिशत भुगतान हो चुका है और 102 मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान किया है। बाकी बकाया मुख्य रूप से कुछ डिफाल्टर मिलों पर केंद्रित है।

स्रोत: फ्री प्रेस जर्नल (17 सितंबर 2026), द स्टेट्समैन (17 सितंबर 2026), एग्रीइनसाइट (17 सितंबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया (28 सितंबर 2026), रॉयल बुलेटिन (29 सितंबर 2026), लाइव हिंदुस्तान (29 सितंबर 2026), चीनीमंडी।

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1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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