गन्ने से बनेगा प्लास्टिक: लखीमपुर खीरी में ₹3,080 करोड़ का बायोप्लास्टिक प्लांट अक्टूबर में शुरू — किसानों को 3 बड़े फायदे

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए अक्टूबर 2026 का महीना सिर्फ पेराई सत्र की शुरुआत नहीं, एक नए औद्योगिक दौर की आहट भी लेकर आया है। लखीमपुर खीरी जिले के गोला गोकर्णनाथ स्थित कुंभी चीनी मिल परिसर में देश का पहला बड़े पैमाने का बायोपॉलिमर प्लांट चालू होने की तैयारी में है। बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड का यह ₹3,080 करोड़ का प्लांट स्थानीय गन्ने से चीनी बनाएगा और फिर उसी चीनी से PLA — ऐसा प्लास्टिक जो प्रकृति में गल जाता है। कंपनी के कार्यक्रम के अनुसार अक्टूबर 2026 में कमिशनिंग का लक्ष्य है और नवंबर से व्यावसायिक उत्पादन की उम्मीद जताई गई है।
यह सिर्फ एक कंपनी के निवेश की खबर नहीं है। गन्ने से अब तक चीनी और एथेनॉल बनता था; अब उसी सूची में बायोप्लास्टिक जुड़ने जा रहा है। मांग का एक नया बड़ा स्रोत खुलने का सीधा मतलब है — मिलों की आय बढ़ेगी और किसानों के भुगतान की सुरक्षा मजबूत होगी।
अक्टूबर में शुरू होगा देश का पहला बायोपॉलिमर प्लांट
कुंभी में बन रहा यह प्लांट भारत का पहला औद्योगिक स्तर का PLA बायोपॉलिमर प्लांट होगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत है एकीकृत परिसर — गन्ने की पेराई, चीनी निर्माण और PLA उत्पादन, तीनों एक ही कैंपस में होंगे। कच्चा माल बाहर से नहीं आएगा; लखीमपुर खीरी के खेतों का गन्ना ही इसकी जड़ होगा।
परियोजना की शुरुआत 22 फरवरी 2025 को हुई थी, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास किया था। शुरुआती अनुमान ₹2,850 करोड़ था, जो अब संशोधित होकर करीब ₹3,080 करोड़ पहुंच गया है। कंपनी की निवेशक प्रस्तुति के अनुसार करीब ₹1,650 करोड़ कर्ज और ₹1,430 करोड़ इक्विटी व आंतरिक स्रोतों से जुटाए जा रहे हैं; बढ़ी लागत के लिए ₹450 करोड़ इक्विटी शेयरों से भी जुटाए गए हैं।
तैयारियों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाइए कि जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने 20 अगस्त 2026 को निर्माणाधीन प्लांट का निरीक्षण किया था। जिला प्रशासन परियोजना की तैयारियों पर लगातार नजर रखे हुए है।
PLA क्या है — गन्ने से प्लास्टिक कैसे बनेगा
PLA यानी पॉलीलैक्टिक एसिड, एक बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक है जो गन्ने जैसी नवीकरणीय फसलों से बनता है। प्रक्रिया सीधी है: गन्ने से चीनी निकाली जाती है, चीनी के किण्वन से लैक्टिक एसिड बनता है, और फिर उसे PLA में बदला जाता है।
यह दिखने में बिल्कुल आम प्लास्टिक जैसा लगता है, पर 3-6 महीने में प्राकृतिक रूप से गल जाता है — जबकि आम प्लास्टिक को सैकड़ों साल लगते हैं। सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध के बाद देश में ऐसे विकल्प की मांग तेजी से बढ़ रही है।
प्लांट की 5 खासियतें जो इसे खास बनाती हैं
1. 80,000 टन सालाना क्षमता: शुरुआती योजना 75,000 टन की थी, जिसे बढ़ाकर 80,000 टन कर दिया गया।
2. 100% नवीकरणीय ऊर्जा: कंपनी का दावा है कि पूरे उत्पादन में शत-प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा इस्तेमाल होगी — गन्ने से PLA तक की पूरी श्रृंखला एक ही जगह, हरित ऊर्जा से चलेगी।
3. जीरो लिक्विड डिस्चार्ज: कोई तरल कचरा नदी-नालों में नहीं छोड़ा जाएगा। चीनी मिलों के प्रदूषण को लेकर किसानों की चिंता के बीच यह बड़ी बात है।
4. ₹2,000 करोड़ का सालाना राजस्व लक्ष्य: पूर्ण क्षमता पर कंपनी को PLA कारोबार से सालाना करीब ₹2,000 करोड़ राजस्व की उम्मीद है।
5. वैश्विक तकनीक: स्विट्जरलैंड की सुल्ज़र, ऑस्ट्रिया की अल्पाइन इंजीनियरिंग और अमेरिका की जैकब्स सॉल्यूशंस की तकनीक इस्तेमाल हो रही है। कंपनी ने इस कारोबार के लिए “बलरामपुर बायोयुग” ब्रांड भी लॉन्च किया है।
किसानों को मिलेंगे 3 बड़े फायदे
पहला — मांग का तीसरा बड़ा स्तंभ: अब तक गन्ने की खपत मुख्यतः चीनी और एथेनॉल में होती थी। PLA तीसरा बड़ा उपयोग जुड़ेगा। मिलों के पास कमाई के तीन स्रोत होंगे तो उनकी आर्थिक सेहत सुधरेगी — और मजबूत मिलें ही समय पर भुगतान दे सकती हैं। बकाया भुगतान से जूझते किसानों के लिए यही सबसे अहम खबर है।
दूसरा — लखीमपुर बेल्ट में स्थानीय मांग: प्लांट का कच्चा माल आसपास के खेतों से आएगा। गन्ने के बड़े उत्पादक जिले लखीमपुर खीरी के किसानों को एक और बड़ा खरीदार मिलेगा। स्थानीय मांग बढ़ने से परिवहन लागत घटेगी और मिलों के बीच गन्ने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी — किसान की मोलभाव की स्थिति मजबूत होगी।
तीसरा — टिकाऊ और बढ़ती मांग: सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध और सख्त पर्यावरण नियमों से बायोडिग्रेडेबल उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। यह मांग अस्थायी नहीं, संरचनात्मक है — आने वाले सालों में गन्ने पर आधारित यह उद्योग और फैलेगा, जिससे किसानों की आय का आधार चौड़ा होगा।
पहला ऑर्डर मिल चुका — लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड से शुरुआत
उत्पादन शुरू होने से पहले ही पहला संस्थागत ऑर्डर मिल चुका है। कंपनी की नियामक फाइलिंग के अनुसार लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड ने PLA उत्पादों का ऑर्डर दिया है — दो आकार के कचरा बैग, 300 मिलीलीटर की PLA बोतलें, 3D-प्रिंटेड कंपोस्टेबल पेन और PLA फोल्डर। ये सभी उत्पाद हानिकारक माइक्रोप्लास्टिक छोड़े बिना गल जाते हैं।
समय पर शुरूआत ही असली परीक्षा
एक ईमानदार बात भी जान लीजिए। कंपनी के पुराने आधिकारिक कार्यक्रम में अक्टूबर 2026 में कमिशनिंग और नवंबर से व्यावसायिक उत्पादन की बात है, पर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही की निवेशक प्रस्तुति में वित्त वर्ष के दूसरे अर्धवार्षिक में संचालन शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। अक्टूबर इसी अर्धवार्षिक में पड़ता है, पर बड़े प्लांटों में कुछ हफ्तों की देरी आम है। राहत की बात यह है कि निर्माण कार्यक्रम के मुताबिक काफी हद तक चल रहा है और जिला प्रशासन तैयारियों पर नजर रखे हुए है।
किसानों के लिए काम की बातें
- कुंभी प्लांट से लखीमपुर खीरी और आसपास के जिलों में गन्ने की मांग बढ़ेगी — इस बेल्ट के किसान उपज और अनुबंध की स्थिति पर नजर रखें।
- PLA से मिलों की आय बढ़ेगी, जिससे बकाया भुगतान की समस्या कम होने की उम्मीद है।
- 2026-27 सत्र का FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय है (10.25% रिकवरी पर); यूपी के SAP की घोषणा अभी बाकी है — उस पर नजर बनाए रखें।
- गन्ने की खेती का भविष्य अब सिर्फ चीनी तक सीमित नहीं रहा — यह दीर्घकालिक सकारात्मक संकेत है।
पूछे जाने वाले प्रश्न
गन्ने से प्लास्टिक कैसे बनेगा? गन्ने से पहले चीनी निकाली जाएगी, फिर चीनी के किण्वन से बने लैक्टिक एसिड को PLA में बदला जाएगा। यह बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक 3-6 महीने में प्राकृतिक रूप से गल जाता है।
यह प्लांट कहां बन रहा है और कितना निवेश हुआ है? लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ स्थित कुंभी चीनी मिल परिसर में बलरामपुर चीनी मिल्स का प्लांट बन रहा है। संशोधित अनुमान के अनुसार कुल निवेश करीब ₹3,080 करोड़ है।
प्लांट कब चालू होगा? कंपनी के कार्यक्रम के अनुसार अक्टूबर 2026 में कमिशनिंग और नवंबर 2026 से व्यावसायिक उत्पादन का लक्ष्य है। निवेशक प्रस्तुति में वित्त वर्ष 2026-27 के दूसरे अर्धवार्षिक में संचालन की उम्मीद जताई गई है।
गन्ना किसानों को क्या फायदा होगा? गन्ने की मांग का नया बड़ा स्रोत खुलेगा — चीनी और एथेनॉल के बाद अब PLA। मिलों की आय बढ़ने से समय पर भुगतान की संभावना बढ़ेगी, और लखीमपुर बेल्ट के किसानों को स्थानीय स्तर पर एक और बड़ा खरीदार मिलेगा।
PLA उत्पादों का पहला ऑर्डर किसे मिला? लखनऊ कैंटोनमेंट बोर्ड ने पहला संस्थागत ऑर्डर दिया है — PLA कचरा बैग, 300 मिली की बोतलें, 3D-प्रिंटेड पेन और फोल्डर।
स्रोत: GKToday, PropNewsTime (PTI), FNB News, The Hindu, Dharmakshethra
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