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केंद्र से मिल गेट तक ₹12 प्रति क्विंटल भाड़ा: गन्ना ढुलाई का पूरा हिसाब, खर्च घटाने के 7 उपाय जानें

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 7, 2026 • 6 min read
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केंद्र से मिल गेट तक ₹12 प्रति क्विंटल भाड़ा: गन्ना ढुलाई का पूरा हिसाब, खर्च घटाने के 7 उपाय जानें
अंतिम अपडेट: October 7, 2026 4:50 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पर्ची कट गई, गन्ना कट गया — लेकिन खेत से मिल गेट तक पहुंचने से पहले किसान की जेब से कितना पैसा निकलेगा, इसका हिसाब बहुत कम लोग लगाते हैं। हकीकत यह है कि गन्ने के भाव के साथ-साथ ढुलाई का भाड़ा भी किसान की कमाई पर सीधा असर डालता है। उत्तर प्रदेश में 2025-26 पेराई सत्र के दौरान यह भाड़ा ₹8.65 से बढ़कर ₹12 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से ठीक पहले समझ लीजिए कि यह भाड़ा कैसे तय होता है, ज्यादा वसूली हो तो कहां शिकायत करें और ढुलाई का खर्च घटाने के कौन से 7 उपाय आपके काम आ सकते हैं।

₹12 प्रति क्विंटल तक भाड़ा: दरें कैसे तय होती हैं

लाइव हिंदुस्तान की हरदोई से प्रकाशित रिपोर्ट (दिसंबर 2025) के मुताबिक प्रदेश सरकार ने 2025-26 सत्र में गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी — अगेती किस्म का भाव ₹400 और सामान्य किस्म का ₹390 प्रति क्विंटल हुआ था। लेकिन उसी सत्र में गन्ना ढुलाई भाड़ा भी बढ़ा दिया गया: पहले किसानों से अधिकतम ₹8.65 प्रति क्विंटल भाड़ा लिया जाता था, जो बढ़कर ₹12 प्रति क्विंटल हो गया। यानी भाव बढ़ने का एक हिस्सा ढुलाई की बढ़ी लागत में ही निकल गया।

सबसे अहम बात यह है कि यह भाड़ा मनमाना नहीं है। जिला गन्ना अधिकारी निधि गुप्ता ने उस समय बताया था कि बढ़ी हुई ढुलाई दरें शासन से अनुमन्य हैं और विभाग गन्ना केंद्र से चीनी मिल गेट तक की दूरी के आधार पर तय सूची के अनुसार भाड़े की निगरानी करता है। अगर किसी केंद्र पर अनुमन्य दर से अधिक भाड़ा वसूले जाने की जानकारी मिलती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। साफ शब्दों में — हर क्रय केंद्र के लिए दूरी के हिसाब से भाड़े की एक अधिकृत दर होती है, और उससे ज्यादा वसूलना नियम-विरुद्ध है।

ध्यान दें: ₹12 प्रति क्विंटल की यह दर 2025-26 सत्र की है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए नई दरें समिति और गन्ना विभाग से जारी होंगी। पर्ची कटने से पहले अपनी समिति से इस सीजन की अनुमन्य दरों की सूची जरूर मांग लें, ताकि कोई आपसे ज्यादा न वसूल सके।

भाड़ा किसकी जेब से जाता है और कहां कटता है

ढुलाई का भाड़ा आमतौर पर किसान के गन्ना मूल्य में से ही समायोजित होता है — यानी मिल गेट पर गन्ना पहुंचने पर जो भुगतान बनता है, उसमें से भाड़ा काट लिया जाता है। इसलिए कई किसानों को यह खर्च “दिखता” नहीं, लेकिन यह उनकी शुद्ध आमदनी सीधे घटाता है। 100 क्विंटल गन्ने पर ₹12 की दर से ₹1,200 भाड़ा निकल जाता है — यह रकम बीज, खाद या डीजल के काम आ सकती थी।

जिस किसान का खेत क्रय केंद्र या मिल से जितना दूर है, उसका भाड़ा उतना ज्यादा बनता है। इसीलिए दूर-दराज के गांवों के किसानों के लिए ढुलाई का खर्च सबसे बड़ी चुनौती होती है।

कटाई-छिलाई-लोडिंग: ढुलाई से पहले का दूसरा बड़ा खर्च

भाड़े से पहले गन्ने को खेत से काटकर, छीलकर और वाहन में लादने का खर्च भी जुड़ता है। कटाई के समय मजदूरों की कमी हो जाती है और मजदूरी बढ़ जाती है — तमिलनाडु के धर्मपुरी जिले में किसानों ने शिकायत की थी कि कटाई के दौरान प्रति टन लगभग ₹1,200 से ₹1,400 मजदूरी खर्च हो रहा है, और सीजन के अंत में यह ₹2,000 प्रति टन तक पहुंच जाता है (चिनीमंडी की रिपोर्ट)। यह आंकड़ा तमिलनाडु का है, लेकिन संदेश यूपी के किसानों के लिए भी उतना ही अहम है — कटाई का खर्च सीजन के आखिर में सबसे ज्यादा होता है, इसलिए शुरुआती पर्चियों पर गन्ना देना हमेशा सस्ता पड़ता है।

GPS ट्रैकिंग: अब हर ढुलाई वाहन पर नजर

इस सीजन में गन्ना ढुलाई से जुड़ी एक और बड़ी खबर आई है — उत्तर प्रदेश में गन्ना ढुलाई वाहनों पर GPS ट्रैकिंग शुरू हो गई है, जिससे करीब 48 लाख किसान परिवारों को फायदा मिलने की उम्मीद है। कंट्रोल रूम से वाहनों की 24 घंटे निगरानी होगी, यानी गन्ना कहां से चला और मिल गेट तक कितने समय में पहुंचा, इसका पूरा रिकॉर्ड रहेगा।

किसानों के लिए इसका सीधा फायदा यह है कि ढुलाई में होने वाली गड़बड़ी — जैसे रास्ते में गन्ना उतारना या देरी से पहुंचना — अब पकड़ में आएगी। पर्ची पर लिखी तारीख और GPS रिकॉर्ड का मिलान करके शिकायत करना पहले से कहीं आसान हो जाएगा।

ढुलाई का खर्च घटाने के 7 उपाय

1. शुरुआती पर्ची पर गन्ना दें: सीजन के आखिर में कटाई मजदूरी और ढुलाई दोनों महंगे हो जाते हैं। पहली पर्चियों पर गन्ना देने से खर्च कम और भुगतान जल्दी मिलता है।

2. समूह में वाहन करें: आसपास के किसानों के साथ मिलकर एक ही ट्रैक्टर-ट्रॉली या ट्रक में गन्ना भेजें। भाड़ा बंट जाएगा और प्रति क्विंटल लागत घटेगी।

3. नजदीकी क्रय केंद्र चुनें: भाड़ा दूरी के हिसाब से तय होता है। जहां संभव हो, नजदीकी क्रय केंद्र से आपूर्ति करें — हर किलोमीटर की दूरी आपकी जेब पर पड़ती है।

4. समिति से दर सूची लें: अपने केंद्र की शासन-अनुमन्य भाड़ा दर लिखित में मांगें। अनुमन्य दर से एक रुपया भी ज्यादा मांगा जाए तो जिला गन्ना अधिकारी या टोल-फ्री नंबर पर शिकायत करें।

5. लोडिंग में वजन का ध्यान रखें: सूखा या अधपका गन्ना हल्का होता है — वजन घटने का मतलब प्रति क्विंटल भाड़े का बोझ बढ़ना है। पका हुआ, साफ गन्ना ही लादें।

6. रात की ढुलाई से बचें: देर रात कटाई-ढुलाई में मजदूरी ज्यादा लगती है और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ता है। दिन में सुनियोजित ढुलाई सस्ती और सुरक्षित रहती है।

7. पर्ची का SMS संभालकर रखें: गन्ना पर्ची का SMS (सरकारी शॉर्टकोड 51969 से आता है) और तौल पर्ची की फोटो फोन में सहेज लें। भाड़े या वजन पर विवाद हो तो यही आपके सबूत हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: गन्ना ढुलाई का भाड़ा कौन तय करता है? जवाब: प्रदेश सरकार (शासन) गन्ना केंद्र से चीनी मिल गेट तक की दूरी के आधार पर भाड़े की दरें अनुमन्य करती है। गन्ना विभाग इन दरों की निगरानी करता है।

सवाल: अगर मुझसे तय दर से ज्यादा भाड़ा मांगा जाए तो क्या करूं? जवाब: पहले अपनी समिति से उस केंद्र की अनुमन्य दर की सूची मांगें। ज्यादा वसूली की शिकायत जिला गन्ना अधिकारी को दें या गन्ना विकास विभाग के टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 पर संपर्क करें।

सवाल: क्या 2026-27 सत्र में भी भाड़ा ₹12 प्रति क्विंटल ही रहेगा? जवाब: ₹12 की दर 2025-26 सत्र की थी। 2026-27 सत्र की दरें पेराई शुरू होने से पहले जारी होंगी — अपनी समिति से ताजा दर सूची जरूर लें।

सवाल: GPS ट्रैकिंग से किसान को क्या फायदा होगा? जवाब: ढुलाई वाहन की 24 घंटे निगरानी से गन्ने की चोरी, रास्ते में उतारना या देरी से पहुंचना जैसे मामलों में किसान के पास पक्का सबूत रहेगा।

सवाल: कटाई का खर्च कम करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? जवाब: शुरुआती पर्चियों पर गन्ना दें, पड़ोसी किसानों के साथ समूह में वाहन करें और बड़े रकबे पर अनुदान वाली हार्वेस्टर मशीन का इस्तेमाल करें।

स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (हरदोई, दिसंबर 2025) — ढुलाई भाड़ा ₹8.65 से ₹12/क्विंटल; चिनीमंडी — तमिलनाडु में कटाई मजदूरी आंकड़े; टाइम्स ऑफ इंडिया (सितंबर 2026) — यूपी में 122 चीनी मिलें; दिप्रिंट/भाषा (मई 2026) — एफआरपी 2026-27 ₹365/क्विंटल; केनअप.एक्सवाईजेड (7 अक्टूबर 2026) — गन्ना ढुलाई वाहनों पर GPS ट्रैकिंग।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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