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24 घंटे में मिल पहुंचेगा गन्ना: यूपी में गन्ना ढुलाई वाहनों पर GPS ट्रैकिंग शुरू, 48 लाख किसान परिवारों को फायदा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 7, 2026 • 5 min read
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24 घंटे में मिल पहुंचेगा गन्ना: यूपी में गन्ना ढुलाई वाहनों पर GPS ट्रैकिंग शुरू, 48 लाख किसान परिवारों को फायदा
अंतिम अपडेट: October 7, 2026 3:10 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ना खेत से कटने के बाद अक्सर घंटों या कभी-कभी दिनों तक रास्ते में ही धूप-हवा में सूखता रहता है। इसी सूखने के दौरान गन्ने का वजन घटता है और वजन के साथ घटती है किसान की जेब। अब इस पुरानी मुसीबत से छुटकारा दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश का गन्ना विकास विभाग बड़ी तैयारी में है। इसी पेराई सत्र से प्रदेश में गन्ना क्रय केंद्र से चीनी मिल गेट तक चलने वाले हर ढुलाई वाहन की GPS से लाइव ट्रैकिंग होगी। लक्ष्य एकदम साफ है — कटाई के 24 घंटे के भीतर गन्ना चीनी मिल पहुंचे और वजन घटने से किसानों का नुकसान बचे।

उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गन्ना एवं चीनी आयुक्त की मंशा है कि चीनी उद्योग की कार्यप्रणाली आधुनिक बने और किसान खुशहाल हो। इसी सोच के साथ गन्ना आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल तकनीक से जोड़ते हुए व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) लागू करने की तैयारी की जा रही है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार यह व्यवस्था प्रदेश भर में पहली बार इस पैमाने पर लागू हो रही है।

कंट्रोल रूम से होगी 24 घंटे नजर

नई व्यवस्था के तहत गन्ने से लदे वाहनों की आवाजाही की वास्तविक समय में निगरानी के लिए एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) स्थापित किया जाएगा। कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी चौबीसों घंटे यह देख सकेंगे कि गन्ने से लदा वाहन किस रास्ते पर चल रहा है, कितनी देर से चल रहा है और कहीं अनावश्यक रूप से रुका तो नहीं है।

गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस के अनुसार इस डिजिटल व्यवस्था से वाहन निर्धारित मार्ग पर चल रहा है या नहीं, ढुलाई में कहीं अनावश्यक देरी तो नहीं हो रही और कोई अनधिकृत ठहराव या संभावित हेराफेरी तो नहीं हो रही — इन सभी पर नजर रखी जा सकेगी। रियल-टाइम ट्रैकिंग से गन्ना आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ेगी और ढुलाई प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी।

सूखने से वजन घटने का नुकसान रुकेगा

गन्ना आयुक्त ने बताया कि कई बार खेत से गन्ने की कटाई के बाद उसे चीनी मिल तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। इस दौरान धूप और हवा के संपर्क में रहने से गन्ना सूखने लगता है, जिसका सीधा असर उसके वजन पर पड़ता है। चीनी मिल में भुगतान वजन के हिसाब से होता है, इसलिए वजन घटना किसान के लिए सीधा नुकसान है।

व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लागू होने के बाद कटाई के 24 घंटे के भीतर गन्ने की चीनी मिल तक आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। समय पर परिवहन होने से गन्ने की ताजगी और प्राकृतिक वजन को बनाए रखने में मदद मिलेगी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार भी कटाई के बाद जितनी जल्दी गन्ना मिल पहुंचे, चीनी रिकवरी और किसान का भुगतान उतना ही बेहतर रहता है।

48 लाख किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

विभाग का अनुमान है कि समय पर गन्ना मिल तक पहुंचने से प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। ट्रैक्टर जंक्शन की रिपोर्ट के अनुसार गन्ना ढुलाई के दौरान होने वाली अनावश्यक देरी, रास्ते में वाहनों के अनधिकृत ठहराव और संभावित हेराफेरी पर रोक लगाने से पूरी आपूर्ति व्यवस्था अधिक व्यवस्थित हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें संचालित हैं और प्रदेश गन्ना उत्पादन के साथ-साथ शीरा और एथेनॉल उत्पादन में भी देश में शीर्ष स्थान पर है। इतने बड़े पैमाने पर हर ढुलाई वाहन को ट्रैकिंग सिस्टम से जोड़ना अपने आप में एक बड़ा डिजिटल कदम माना जा रहा है।

क्या होगा कंट्रोल रूम में

केंद्रीय नियंत्रण कक्ष में बैठे अधिकारी वाहन की लोकेशन लगातार ट्रैक करेंगे। वाहन निर्धारित मार्ग से भटका या रास्ते में बिना वजह रुका तो सिस्टम में यह जानकारी तुरंत दर्ज हो जाएगी। इससे चालकों की लापरवाही का भी भेद खुलेगा और किसानों के गन्ने के सूखने से होने वाले नुकसान को रोका जा सकेगा। विभाग का मानना है कि लाइव ट्रैकिंग से गन्ना ढुलाई की प्रक्रिया पूरी तरह सुव्यवस्थित होगी।

किसान को क्या करना होगा

यह व्यवस्था पूरी तरह विभाग और मिल प्रशासन के स्तर पर लागू होगी। किसान को अलग से कोई पंजीकरण या शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन किसान यह जरूर ध्यान रखें कि अपनी पर्ची और इंडेंट के हिसाब से समय पर गन्ना काटकर क्रय केंद्र पहुंचाएं, ताकि ट्रैकिंग व्यवस्था का पूरा लाभ मिल सके। ई-गन्ना ऐप और caneup पोर्टल पर अपनी पर्ची की स्थिति की जांच करते रहें और किसी तरह की देरी या अनियमितता दिखे तो संबंधित गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी को शिकायत दर्ज कराएं।

डिजिटल निगरानी का दायरा आगे भी बढ़ेगा

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वाहन ट्रैकिंग सिस्टम गन्ना आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की बड़ी योजना का पहला कदम है। इसके बाद पर्ची वितरण, तौल केंद्रों की निगरानी और भुगतान की रियल-टाइम जानकारी जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। किसान यदि ढुलाई में देरी या तौल में गड़बड़ी महसूस करें तो caneup पोर्टल और ई-गन्ना ऐप के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। डिजिटल व्यवस्था का मकसद सिर्फ वाहनों को ट्रैक करना नहीं, बल्कि पूरी खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है ताकि किसान का एक भी रुपया वजन या देरी की वजह से न डूबे।

स्रोत: लाइव हिंदुस्तान, ट्रैक्टर जंक्शन

जवाब जानिए

प्रश्न: वाहन ट्रैकिंग सिस्टम (VTS) क्या है? उत्तर: यह गन्ना विकास विभाग की नई व्यवस्था है जिसमें गन्ना क्रय केंद्र से चीनी मिल तक चलने वाले हर ढुलाई वाहन की GPS से लाइव ट्रैकिंग होगी। केंद्रीय कंट्रोल रूम से अधिकारियों को वाहन की लोकेशन, रास्ता और ठहराव की जानकारी रियल टाइम में मिलेगी।

प्रश्न: इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा क्या है? उत्तर: कटाई के 24 घंटे के भीतर गन्ना मिल पहुंचेगा, जिससे धूप-हवा में गन्ना सूखने से वजन घटने का नुकसान रुकेगा। मिल में भुगतान वजन पर होता है, इसलिए वजन बचना किसान की सीधी आमदनी है।

प्रश्न: क्या किसान को इसके लिए कोई शुल्क या पंजीकरण कराना होगा? उत्तर: नहीं। यह व्यवस्था विभाग और मिल स्तर पर लागू होगी। किसान को अलग से कुछ नहीं करना होगा — बस समय पर गन्ना क्रय केंद्र पहुंचाएं और अपनी पर्ची की स्थिति ई-गन्ना ऐप पर देखते रहें।

प्रश्न: कंट्रोल रूम कब काम करेगा? उत्तर: गन्ना आयुक्त के अनुसार केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से अधिकारी गन्ने से लदे वाहनों की आवाजाही पर 24 घंटे निगरानी रख सकेंगे।

प्रश्न: कितने किसानों को इसका लाभ मिलेगा? उत्तर: विभाग के अनुसार प्रदेश के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों को समय पर गन्ना आपूर्ति का सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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