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गन्ने में जैविक कीट नियंत्रण अभियान शुरू, 1.5 लाख किसानों को फ्री बांटे जा रहे ट्राइकोग्रामा कार्ड और ट्राइकोडर्मा

Aamir Raza Aamir Raza • Aug 31, 2026 • 2 min read
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गन्ने में जैविक कीट नियंत्रण अभियान शुरू, 1.5 लाख किसानों को फ्री बांटे जा रहे ट्राइकोग्रामा कार्ड और ट्राइकोडर्मा
अंतिम अपडेट: August 31, 2026 11:30 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ने में जैविक कीट नियंत्रण अभियान शुरू, 1.5 लाख किसानों को फ्री बांटे जा रहे ट्राइकोग्रामा कार्ड और ट्राइकोडर्मा

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Aamir Raza - 2026-08-31

शाहजहांपुर/मेरठ (विशेष संवाददाता)। उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को महंगे और जहरीले रासायनिक कीटनाशकों के भारी खर्च से बचाने और गन्ने की फसल को लाल सड़न (रेड रॉट) तथा चोटी बेधक (टॉप बोरर) कीट से सुरक्षित रखने के लिए गन्ना विकास विभाग और यूपी गन्ना शोध परिषद ने राज्यव्यापी ‘जैविक कीट नियंत्रण अभियान’ (Biological Pest Control Campaign 2026) शुरू किया है।

इस अभियान के तहत पश्चिमी और मध्य उत्तर प्रदेश के 1.5 लाख से अधिक गन्ना किसानों को जैविक फफूंदनाशक ‘ट्राइकोडर्मा हरजिएनम’ (Trichoderma) और मित्र कीट परजीवी ‘ट्राइकोग्रामा कार्ड’ (Trichogramma Cards) का निःशुल्क वितरण किया जा रहा है।

मित्र कीट कैसे करते हैं टॉप बोरर और कंसुआ का खात्मा?

यूपी गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर के कीट वैज्ञानिक डॉ. के.पी. सिंह ने बताया कि ट्राइकोग्रामा एक अति सूक्ष्म मित्र कीट (Parasitoid Wasp) है, जो गन्ने को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि हानिकारक कीटों के अंडों को खाकर अपनी वंशवृद्धि करता है।

वैज्ञानिक ने कहा, “जब किसान अपने 1 एकड़ गन्ने के खेत में 5 से 6 ट्राइकोग्रामा कार्ड (लगभग 50,000 मित्र कीट अंडे) पत्तियों के निचले हिस्से में स्टेपल करते हैं, तो 24 घंटे के भीतर निकलने वाले मित्र कीट खेत में घूम-घूमकर टॉप बोरर और तना छेदक कीट के अंडों को खोजकर नष्ट कर देते हैं। इससे कीट का लार्वा बन ही नहीं पाता और फसल बिना किसी जहरीले स्प्रे के पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।”

जैविक नियंत्रण उत्पादलक्षित बीमारी / कीटउपयोग की विधिप्रति एकड़ मात्राबाजार मूल्य (किसानों को निःशुल्क)
ट्राइकोग्रामा कार्ड (Trichogramma)टॉप बोरर, कंसुआ, तना छेदकपत्तियों पर स्टेपल करें5 से 6 कार्ड प्रति एकड़₹300 (समितियों पर फ्री)
ट्राइकोडर्मा कल्चर (Trichoderma)लाल सड़न (Red Rot), उकठा रोगगोबर की खाद में मिलाकर जड़ों में दें2 से 2.5 किग्रा प्रति एकड़₹250 (समितियों पर फ्री)
कोरसिरा अंडे (Corcyra Cephalonica)जैविक प्रयोगशाला संवर्धनप्रयोगशाला उपयोगमानक बैचविभागीय आपूर्ति

रासायनिक दवाओं पर प्रति एकड़ ₹3,000 की बचत

मुजफ्फरनगर के कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों के अनुसार, किसान आमतौर पर कोराजन, फिपरोनिल और महंगी कीटनाशकों पर प्रति एकड़ 2,500 से 3,500 रुपये खर्च करते हैं। जैविक बायो-एजेंट्स के प्रयोग से यह खर्च शून्य हो जाता है और जमीन में पाए जाने वाले केंचुए और मित्र जीवाणु भी सुरक्षित रहते हैं।

अमरोहा, बिजनौर, मुरादाबाद और मेरठ की सहकारी गन्ना विकास समितियों में विशेष वितरण काउंटर खोले गए हैं, जहां किसान अपनी पर्ची सट्टा पासबुक दिखाकर जैविक किट प्राप्त कर सकते हैं।

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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