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गन्ना कहां बेचें: मिल, कोल्हू या गुड़ भट्टी? ₹380 से ₹400 के भाव में किसान को सबसे ज्यादा फायदा कहां मिलेगा, जानिए पूरा गणित

Aamir Raza Aamir Raza • Nov 2, 2026 • 6 min read
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गन्ना कहां बेचें: मिल, कोल्हू या गुड़ भट्टी? ₹380 से ₹400 के भाव में किसान को सबसे ज्यादा फायदा कहां मिलेगा, जानिए पूरा गणित
अंतिम अपडेट: November 2, 2026 3:55 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

गन्ना कट गया है और ट्रॉली तैयार खड़ी है, लेकिन उत्तर प्रदेश के लाखों गन्ना किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि गन्ना कहां बेचा जाए। चीनी मिल में पर्ची पर दें, पास के कोल्हू पर बेच दें, या गुड़-खंडसारी भट्टी को दे दें? तीनों के भाव, भुगतान का तरीका और जोखिम अलग हैं, इसलिए फैसला पूरा गणित समझकर करना चाहिए।

फैसला इस समय और भी मुश्किल है, क्योंकि कोल्हू पर भाव गिर गया है और 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।

तीन रास्ते, तीन अलग भाव

पिछले पेराई सत्र में अगेती प्रजाति का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। नए सत्र 2026-27 के लिए एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए मिल में गन्ना देने पर किसान को फिलहाल पिछले सत्र के भाव को ही आधार मानना पड़ रहा है। किसान संगठनों की मांग 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की है, लेकिन यह मांग है, घोषणा नहीं।

दूसरा रास्ता कोल्हू का है। सीजन की शुरुआत में यहां 430 से 450 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव था, लेकिन रूरल वॉयस की रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरनगर के किसानों को अब कोल्हू पर 380 से 400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास भाव मिल रहा है। यानी भाव 50 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे आ गया है।

विकल्पमौजूदा भाव (प्रति क्विंटल)भुगतानसबसे बड़ा फायदासबसे बड़ा जोखिम
चीनी मिलपिछले सत्र का एसएपी: अगेती 400 रुपये, पछेती 390 रुपये (2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं)बैंक खाते में, 14 दिन के भीतरतय भाव और कानूनी सुरक्षापर्ची का इंतजार, भुगतान में देरी का खतरा
कोल्हू380 से 400 रुपये (शुरुआत में 430-450 रुपये था)ज्यादातर नकद, तुरंततुरंत पैसा, पर्ची का झंझट नहींभाव में उतार-चढ़ाव, कोई सरकारी गारंटी नहीं
गुड़-खंडसारी भट्टीबाजार भाव के अनुसार, रोज बदलता हैनकदतुरंत नकद भुगतानभाव और तौल की कोई पक्की गारंटी नहीं

चीनी मिल: पर्ची, तय भाव और 14 दिन का भुगतान नियम

चीनी मिल में गन्ना बेचने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां भाव सरकार तय करती है और पूरा लेन-देन पर्ची व तौल के कागज पर दर्ज होता है। किसान को पता होता है कि उसका गन्ना किस तारीख को और किस केंद्र पर तौला जाएगा।

भुगतान के मामले में नियम साफ है। गन्ना खरीद की तारीख से 14 दिन के भीतर मिल को किसान के खाते में भुगतान करना होता है। देरी होने पर किसान ब्याज के भी हकदार हैं। यही वजह है कि मिल में गन्ना देना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

लेकिन मिल का रास्ता हर किसान के लिए आसान नहीं है। पर्ची का इंतजार करना पड़ता है, और बारिश के कारण इस बार कटाई पहले ही करीब एक सप्ताह पिछड़ गई है। कुछ मिलों पर पिछले सत्र का बकाया भी बाकी है, जैसे शामली की थानाभवन मिल पर करीब 71 करोड़ रुपये का बकाया बताया जा रहा है।

कोल्हू पर भाव क्यों गिरा: 430-450 से 380-400 रुपये तक

कोल्हू का भाव गिरने की सबसे बड़ी वजह बारिश और पेराई में देरी है। अक्टूबर के आखिर में हुई लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया और गन्ने की कटाई कम से कम एक सप्ताह पिछड़ गई। जब मिलों में पेराई शुरू नहीं हुई तो किसानों के पास गन्ना बेचने का तुरंत विकल्प सिर्फ कोल्हू बचा, और कोल्हू संचालकों ने भाव नीचे कर दिया।

रूरल वॉयस से बातचीत में मुजफ्फरनगर के किसान संजय चौधरी ने बताया कि पेराई शुरू नहीं हो पाने के कारण अब कोल्हू पर 380 से 400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास भाव मिल रहा है, जबकि सीजन की शुरुआत में यह 430 से 450 रुपये था। बारिश से गन्ने में नमी बढ़ने और रिकवरी कम होने की आशंका ने भी भाव पर दबाव बनाया है।

कोल्हू का फायदा तुरंत नकद पैसा है और पर्ची का इंतजार नहीं करना पड़ता। लेकिन यहां भाव की कोई सरकारी गारंटी नहीं होती, और तौल की पारदर्शिता भी मिल जितनी पक्की नहीं होती। इसलिए भाव पहले पक्का करें और तौल अपनी आंखों के सामने कराएं।

गुड़-खंडसारी भट्टी: नकद का फायदा, जोखिम भी

वेस्ट यूपी में गुड़ और खंडसारी की भट्टियां पेराई सत्र के साथ ही चल पड़ती हैं। इनका सबसे बड़ा आकर्षण तुरंत नकद भुगतान है। कई छोटे किसान, जिनका गन्ना मिल के सट्टे में नहीं आता, वे भट्टी को गन्ना दे देते हैं। लेकिन यहां दो बड़े जोखिम हैं: भाव रोज बदलता है, और तौल-भुगतान का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं होता। भट्टी को गन्ना देते समय भी तौल की पर्ची या लिखित हिसाब जरूर लें।

किस किसान के लिए कौन सा रास्ता सही

अगर आपका गन्ना मिल के सट्टे में है और तुरंत पैसे की मजबूरी नहीं है, तो मिल सबसे सुरक्षित विकल्प है। तय भाव, पर्ची का रिकॉर्ड और 14 दिन के भुगतान नियम की सुरक्षा किसी और विकल्प में नहीं मिलती। अगर तुरंत नकद की सख्त जरूरत है और पर्ची में हफ्तों की देरी है, तो थोड़ा गन्ना कोल्हू या भट्टी पर बेचकर जरूरत पूरी करें, लेकिन पूरा गन्ना कोल्हू पर देना समझदारी नहीं है। जरूरत भर का गन्ना नकद में बेचें और बाकी मिल की पर्ची पर रखें।

गन्ना बेचने से पहले ये 5 बातें जरूर जांचें

पहला, पर्ची की तारीख और केंद्र का नाम ई-गन्ना ऐप या गन्ना समिति से देख लें। दूसरा, गन्ना साफ-सुथरा लेकर जाएं, क्योंकि सूखी पत्ती और मिट्टी पर कटौती हो सकती है। तीसरा, तौल की पर्ची अपने पास रखें, यही भुगतान और शिकायत का सबसे बड़ा सबूत है। चौथा, भुगतान की तारीख नोट करें, और 14 दिन में पैसा न आए तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें। पांचवां, गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 तथा एसएमएस शॉर्टकोड 51969 पर भी शिकायत की जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2026-27 के लिए गन्ने का एसएपी कब घोषित होगा? अभी तक घोषणा नहीं हुई है। पिछले सत्र में अगेती का भाव 400 रुपये और पछेती का भाव 390 रुपये प्रति क्विंटल था।

कोल्हू पर भाव मिल से कम क्यों है? कोल्हू पर भाव बाजार के हिसाब से रोज बदलता है। इस समय बारिश और पेराई में देरी के कारण कोल्हू पर भाव 380 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गया है, जबकि सीजन की शुरुआत में यह 430 से 450 रुपये था।

मिल में भुगतान कितने दिन में मिलना चाहिए? नियमानुसार गन्ना खरीद की तारीख से 14 दिन के भीतर भुगतान किसान के खाते में आना चाहिए। देरी होने पर किसान ब्याज के हकदार हैं।

क्या पूरा गन्ना कोल्हू पर बेचना सही है? तुरंत पैसे की जरूरत हो तो थोड़ा गन्ना कोल्हू पर बेचना ठीक है, लेकिन पूरा गन्ना कोल्हू पर देने से तय भाव और कानूनी सुरक्षा का फायदा छूट जाता है। बेहतर है कि जरूरत भर का गन्ना नकद में बेचें और बाकी मिल की पर्ची पर रखें।

गन्ना बेचने में गड़बड़ी की शिकायत कहां करें? गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें, या टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर शिकायत दर्ज कराएं। तौल की पर्ची संभालकर रखना सबसे ज्यादा काम आता है।

स्रोत: रूरल वॉयस, नवभारत टाइम्स, चीनीमंडी, दैनिक जागरण

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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