गन्ना कटाई के बाद ये 7 काम करना न भूलें, वरना पेड़ी की पैदावार आधी रह जाएगी: एक्सपर्ट गाइड

आज 1 अक्टूबर से नया चीनी सत्र 2026-27 शुरू हो गया है, और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। यानी अब से कुछ ही दिनों में गन्ने की कटाई का सिलसिला शुरू हो जाएगा। लेकिन कटाई के साथ ही एक दूसरा खेल भी शुरू होता है, जिस पर ज्यादातर किसान ध्यान नहीं देते — पेड़ी यानी रटून फसल की तैयारी।
गन्ने की असली कहानी कटाई पर खत्म नहीं होती। जिस खेत से गन्ना काटा गया है, वहीं ठूंठों से अगली फसल फूटती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही प्रबंधन पर पेड़ी मुख्य फसल के बराबर पैदावार दे सकती है — आधी लागत में। वहीं लापरवाही पर यही फसल आधी उपज पर सिमट जाती है।
आइए समझते हैं वे 7 काम, जो हर किसान को कटाई के बाद जरूर करने चाहिए।
पेड़ी क्या है: अगली फसल की नींव कटाई के दिन ही पड़ जाती है
पेड़ी (रटून) वह फसल है जो गन्ना काटने के बाद जमीन में बचे ठूंठों से उगती है। इसमें दोबारा बुआई का खर्च नहीं होता, न बीज गन्ना खरीदना पड़ता है। लेकिन एक बात याद रखें — पेड़ी में जड़ें पुरानी होती हैं, इसलिए इसे मुख्य फसल से करीब 25 प्रतिशत अधिक नाइट्रोजन चाहिए। न्यूज़18 (लोकल18) से बातचीत में शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार पाठक कहते हैं कि वैज्ञानिक तरीके अपनाने पर पेड़ी की पैदावार मुख्य फसल के बराबर या उससे ज्यादा हो सकती है।
काम 1: कटाई जमीन की सतह से सटाकर, धारदार औजार से करें
गन्ने की कटाई हमेशा जमीन की सतह से सटाकर करें। ऊपर से कटाई करने पर ठूंठों से निकलने वाले कल्ले कमजोर होंगे। औजार धारदार हो ताकि ठूंठ फटने न पाएं — फटे ठूंठों में सड़न और रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे कल्लों का फुटाव कमजोर होता है।
काम 2: ठूंठ छंटाई और सूखी पत्तियों की सफाई
कटाई के तुरंत बाद खेत से सूखी पत्तियां हटा दें, या उन्हें कतारों के बीच बिछा दें ताकि वे मल्च का काम करें। अगर कुछ ठूंठ जमीन से ऊपर रह गए हैं, तो उनकी छंटाई जरूर करें — इससे जमीन के नीचे की सुप्त कलियों को फूटने का मौका मिलता है।
इसके साथ ही खेत की मेड़ों की सफाई और खरपतवार हटाना भी जरूरी है, ताकि कीटों और रोगों का प्रभाव कम हो सके। साफ-सुथरा खेत ही स्वस्थ पेड़ी की नींव है।
काम 3: 45 सेमी का गैप-फिलिंग नियम न भूलें
पेड़ी में अक्सर कुछ जगहों पर जमाव नहीं होता, जिससे पैदावार घट जाती है। जहां भी 45 सेंटीमीटर से अधिक खाली स्थान दिखे, वहां “गैप फिलिंग” जरूर करें — एसटीपी विधि से तैयार पौध या अंकुरित टुकड़े लगाएं। खाली जगह भरने से खेत का पूर्ण उपयोग होता है। यह काम कटाई के तुरंत बाद कर दें, ताकि नए पौधे बाकी फसल के साथ तालमेल बैठा सकें।
काम 4: इथरेल का छिड़काव — ठंड से बचाव और जल्दी फुटाव
अक्टूबर-नवंबर में कटने वाली पेड़ी को सर्दी का सामना करना पड़ता है, जिससे फुटाव देर से होता है। बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग की सलाह के मुताबिक, गन्ने के ठूंठों पर इथरेल का छिड़काव करें — 100 लीटर पानी में 12 मिली इथरेल। इससे ठंड का प्रभाव कम होता है और कल्लों का फुटाव जल्दी होता है।
एक अहम सावधानी: घोल बनाने के एक घंटे के भीतर ही इसका छिड़काव कर देना चाहिए। देर से छिड़का गया घोल असर नहीं दिखाता।
काम 5: पेड़ी को मुख्य फसल से 25% अधिक नाइट्रोजन दें
चूंकि पेड़ी में जड़ें पुरानी होती हैं, इसलिए उर्वरकों को सीधे ठूंठों के पास डालें। विभाग की एडवाइजरी के अनुसार प्रति हेक्टेयर 200 किलो यूरिया, 130 किलो डीएपी और 100 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश गन्ना पंक्तियों के करीब डालें।
न्यूज़18 से बातचीत में कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कटाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई के साथ यूरिया, डीएपी और पोटाश का संतुलित मिश्रण दें। मिट्टी की जांच के आधार पर जिंक सल्फेट और सल्फर का प्रयोग भी काफी लाभदायक होता है। मिट्टी की जांच न कराई हो तो इस बार करा लें — अंधाधुंध खाद डालना पैसा बर्बाद करना है।
काम 6: ट्राइकोडर्मा और प्रेस्ड केक से मिट्टी की सेहत सुधारें
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए संवर्धित ट्राइकोडर्मा मिलाकर 10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से प्रेस्ड केक (चीनी मिल का सह-उत्पाद) डालने की सलाह दी गई है। यह जैविक खाद न केवल मिट्टी की संरचना सुधारती है, बल्कि रोगजनक फफूंद से भी बचाव करती है।
ट्राइकोडर्मा एक लाभदायक फफूंद है जो जड़ सड़न जैसे रोगों को रोकता है — पेड़ी की पुरानी जड़ों के लिए यह खास तौर पर उपयोगी है।
काम 7: खरपतवार पर समय पर वार और पहली सिंचाई न टालें
कटाई के बाद खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं और नए कल्लों का खाना छीन लेते हैं। खुरपी या कल्टीवेटर से गुड़ाई करें; मजदूर न मिलें तो एट्राजिन शाकनाशी का 2.0 किलो सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर की दर से 800 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव की सलाह दी गई है।
कटाई के बाद पहली सिंचाई में देरी न करें — नए कल्लों को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत शुरुआत में ही होती है। और एक बात और: कटा हुआ गन्ना मिल या क्रय केंद्र तक पहुंचाने में देरी न करें। अगर खेत में गन्ना छोड़ना पड़े, तो उसे सूखी पत्तियों से ढक दें और जरूरत के अनुसार पानी का छिड़काव करें, ताकि गन्ना सूखकर वजन न खोए।
आईआईएसआर की पेड़ी प्रबंधन मशीन: एक साथ चार काम
भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर) ने पेड़ी के लिए एक विशेष मशीन विकसित की है — एक ही बार में पुरानी जड़ों की छंटाई, गहरी जुताई, मिट्टी चढ़ाना और उर्वरक छिड़काव। इससे श्रम और लागत दोनों बचते हैं। अगर आपके क्षेत्र में यह मशीन किराए पर मिलती है, तो जरूर इस्तेमाल करें।
पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: पेड़ी फसल क्या होती है?
उत्तर: गन्ना काटने के बाद जमीन में बचे ठूंठों से उगने वाली अगली फसल को पेड़ी (रटून) कहते हैं। इसमें दोबारा बुआई का खर्च नहीं होता।
प्रश्न: पेड़ी में कितनी अतिरिक्त खाद देनी चाहिए?
उत्तर: कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पेड़ी को मुख्य फसल से करीब 25 प्रतिशत अधिक नाइट्रोजन की जरूरत होती है। विभाग की सलाह के मुताबिक प्रति हेक्टेयर 200 किलो यूरिया, 130 किलो डीएपी और 100 किलो एमओपी गन्ना पंक्तियों के करीब डालें।
प्रश्न: इथरेल का छिड़काव कब और कैसे करें?
उत्तर: कटाई के बाद ठूंठों पर 100 लीटर पानी में 12 मिली इथरेल का छिड़काव करें। घोल बनाने के एक घंटे के भीतर छिड़काव पूरा कर लें, वरना असर कम हो जाता है।
प्रश्न: खेत में खाली जगह दिखे तो क्या करें?
उत्तर: जहां 45 सेंटीमीटर से अधिक खाली स्थान हो, वहां गैप फिलिंग करें — एसटीपी विधि से तैयार पौध या अंकुरित टुकड़े लगाएं।
प्रश्न: पेड़ी न रखनी हो तो खेत में क्या करें?
उत्तर: जिस खेत से गन्ना काटकर पेड़ी नहीं रखनी है, वहां गेहूं की बुआई जल्द से जल्द कर दें। दूसरी पेड़ी की कटाई के बाद जीरो टिल सीड ड्रिल से गेहूं की बुआई को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
स्रोत: न्यूज़18 हिंदी (लोकल18, शाहजहांपुर कृषि विशेषज्ञ डॉ. संजीव कुमार पाठक), ज़ी बिज़नेस (बिहार गन्ना उद्योग विभाग की आधिकारिक एडवाइजरी)।
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