होम › गन्ना कटते ही 15 नवंबर से पहले निपटा लें …

गन्ना कटते ही 15 नवंबर से पहले निपटा लें गेहूं की बुवाई: बीज दर, किस्म और सिंचाई के 9 काम, उपज 60 कुंतल तक

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 24, 2026 • 6 min read
Google पर हमें फ़ॉलो करें
शेयर करें:
गन्ना कटते ही 15 नवंबर से पहले निपटा लें गेहूं की बुवाई: बीज दर, किस्म और सिंचाई के 9 काम, उपज 60 कुंतल तक
अंतिम अपडेट: October 24, 2026 6:22 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो रहा है। मुजफ्फरनगर में मंसूरपुर की मिल 24 अक्टूबर से और बुढ़ाना की मिल 25 अक्टूबर से गन्ना पेराई शुरू कर रही है, और इसके बाद बाकी मिलें भी चालू हो जाएंगी। इसका मतलब है कि अगले दो-तीन हफ्तों में हजारों किसानों के खेत गन्ने से खाली होने लगेंगे — और वही खेत रबी सीजन में गेहूं की बुवाई के लिए सबसे कीमती समय है।

कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञों की सलाह साफ है: गेहूं की बुवाई का सही समय नवंबर का महीना है, और समय से बुवाई करने पर 55 से 60 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है। नीचे बुवाई से लेकर पहली सिंचाई तक के 9 काम दिए गए हैं।

1. बुवाई का सही समय: 15 से 30 नवंबर

गेहूं की बुवाई के लिए अनुकूल तापमान 21 से 25 डिग्री सेल्सियस माना जाता है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि विज्ञान केंद्र, सोहांव (बलिया) के विशेषज्ञों के अनुसार समय से बुवाई की खिड़की 15 नवंबर से 30 नवंबर तक है।

एक दिसंबर के बाद की बुवाई पछेती मानी जाती है। पछेती बुवाई में बीज की मात्रा बढ़ानी पड़ती है और उपज घटकर 45 से 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर रह जाती है।

2. किस्म का चुनाव: समय से बुवाई के लिए अलग, पछेती के लिए अलग

किस्म चुनते समय सबसे बड़ी गलती यह होती है कि जो बीज पिछले साल अच्छा चला, वही हर हाल में बो दिया जाता है। बुवाई के समय के हिसाब से किस्म चुनें।

समय से बुवाई (15 से 30 नवंबर) के लिए एचडी-2967, नरेंद्र गेहूं-1012, नरेंद्र गेहूं-5054, के-402 और डीबीडब्ल्यू-17 जैसी किस्में संस्तुत हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए नई किस्मों में डीबीडब्ल्यू-187 (करण वंदना), डीबीडब्ल्यू-222 (करण नरेंद्र), डीबीडब्ल्यू-303 (करण वैष्णवी) और एचडी-3086 का नाम भी विशेषज्ञ लेते हैं।

पछेती बुवाई (दिसंबर) के लिए नरेंद्र गेहूं-1014, नरेंद्र गेहूं-1076 और एचडी-2985 (पूसा बसंत) चुनें।

3. खेत की तैयारी: गन्ने की पत्ती और ठूंठ का सही निपटान

गन्ना कटने के बाद खेत में पत्ती और ठूंठ रह जाते हैं। पहली जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से करें, फिर डिस्क हैरो या कल्टीवेटर से 2 से 3 जुताई करके खेत को समतल और भुरभुरा बना लें। फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाने के लिए रोटावेटर का उपयोग करना फायदेमंद रहता है।

बुवाई से पहले खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है। अगर खेत सूखा है तो हल्की सिंचाई करके ओट आने पर बुवाई करें।

4. बीज दर: समय से बुवाई में 100 किलो प्रति हेक्टेयर

सामान्य दशा में गेहूं के लिए 100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार पछेती बुवाई में बीज की मात्रा 20 से 25 प्रतिशत बढ़ा देनी चाहिए, क्योंकि देर से बुवाई में कल्ले कम निकलते हैं।

बुवाई पंक्तियों में करें। पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेंटीमीटर, पौधे से पौधे की दूरी 5 सेंटीमीटर और बुवाई की गहराई 4 से 5 सेंटीमीटर रखें। लक्ष्य यह होना चाहिए कि प्रति वर्ग मीटर में 400 से 500 बालियां देने वाले पौधे खड़े हों। सीड ड्रिल से बुवाई करने पर बीज की गहराई और दूरी एकसार रहती है।

5. बीज उपचार: बुवाई से पहले यह छोटा काम बड़े नुकसान से बचाता है

बुवाई से पहले बीज को उपचारित करना सस्ता लेकिन बहुत असरदार उपाय है। कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार गेहूं के बीज को बैविस्टिन 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज, वीटावैक्स 2.5 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज अथवा रैक्सिल 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। उपचारित बीज को छाया में सुखाकर ही बोएं।

6. खाद: मिट्टी जांच के आधार पर संतुलित उर्वरक

अधिक उपज के लिए विशेषज्ञ मिट्टी परीक्षण के आधार पर संतुलित उर्वरकों और सूक्ष्म पोषक तत्वों के प्रयोग की सलाह देते हैं। बिना जांच के अंदाजे से खाद डालने पर कभी नाइट्रोजन ज्यादा हो जाती है, जिससे पौधे लंबे होकर गिर जाते हैं, तो कभी फास्फोरस और पोटाश की कमी से बालियां कमजोर रह जाती हैं।

जिन किसानों ने हाल में मिट्टी जांच नहीं कराई है, वे नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या मिट्टी जांच प्रयोगशाला से सैंपल जांच करा लें — रिपोर्ट आने में कुछ दिन लगते हैं, इसलिए यह काम बुवाई से पहले ही निपटा लें।

7. सिंचाई का कैलेंडर: पहली सिंचाई 20 से 25 दिन पर

गेहूं में आमतौर पर 4 से 6 सिंचाई की जरूरत होती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पहली सिंचाई है। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद क्राउन रूट इनिशिएशन (सीआरआई) अवस्था में पहली सिंचाई करनी चाहिए। इसी समय पौधों में द्वितीयक जड़ों का विकास शुरू होता है।

पहली सिंचाई के बाद खेत में नमी रहने पर प्रति एकड़ 40 से 50 किलोग्राम यूरिया डालना लाभदायक माना जाता है। इसके बाद दूसरी सिंचाई 40 से 45 दिन पर फुटाव के समय, तीसरी 60 से 65 दिन पर गांठ बनने की अवस्था में और आगे बालियां निकलने से पहले तथा दूध अवस्था में सिंचाई करनी चाहिए।

8. गन्ना किसान के लिए खास तालमेल: पर्ची और बुवाई दोनों का हिसाब

गन्ना किसानों के लिए नवंबर दोहरी व्यस्तता का महीना है — एक तरफ मिल को गन्ना आपूर्ति चल रही होती है, दूसरी तरफ गेहूं की बुवाई की खिड़की खुली होती है। समझदारी इसमें है कि जिस खेत का गन्ना पहले कट जाए, उसी में पहले गेहूं बो दिया जाए।

मिल से मिलने वाली पर्ची और इंडेंट की तारीखों का ध्यान रखते हुए कटाई का क्रम पहले से तय कर लें, ताकि बुवाई के लिए खेत समय पर खाली मिल जाए।

9. पछेती बुवाई से बचने का सीधा फायदा

आंकड़े खुद कहानी कहते हैं। समय से बुवाई पर 55 से 60 कुंतल प्रति हेक्टेयर उपज मिल सकती है, जबकि दिसंबर की पछेती बुवाई में यह घटकर 45 से 50 कुंतल रह जाती है। गन्ने के खेत खाली होते ही बुवाई निपटाना इसीलिए सिर्फ कृषि सलाह नहीं, बल्कि सीधा आर्थिक फैसला है।

जवाब जानिए

गन्ना कटने के बाद गेहूं की बुवाई का सबसे अच्छा समय कौन सा है? 15 नवंबर से 30 नवंबर के बीच की बुवाई समय से मानी जाती है। इसी दौरान तापमान 21 से 25 डिग्री के आसपास रहता है, जिससे जमाव सही होता है।

समय से बुवाई के लिए कौन सी किस्में अच्छी हैं? एचडी-2967, नरेंद्र गेहूं-1012, नरेंद्र गेहूं-5054, डीबीडब्ल्यू-17, डीबीडब्ल्यू-187 (करण वंदना), डीबीडब्ल्यू-222 (करण नरेंद्र) और एचडी-3086 संस्तुत किस्में हैं।

गेहूं के लिए प्रति हेक्टेयर कितना बीज लगता है? सामान्य दशा में 100 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त है। पछेती बुवाई में बीज की मात्रा 20 से 25 प्रतिशत बढ़ा देनी चाहिए।

गेहूं की पहली सिंचाई कब करनी चाहिए? बुवाई के 20 से 25 दिन बाद क्राउन रूट इनिशिएशन अवस्था में पहली सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद प्रति एकड़ 40 से 50 किलोग्राम यूरिया डालना लाभदायक है।

दिसंबर में बुवाई करने पर क्या नुकसान है? दिसंबर की पछेती बुवाई में उपज घटकर 45 से 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर रह जाती है, जबकि समय से बुवाई पर 55 से 60 कुंतल तक उपज मिल सकती है।

स्रोत: निष्पक्ष प्रतिनिधि (कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव, बलिया / आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय), दैनिक ट्रिब्यून (रबी फसलों की बिजाई पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह), न्यूज़18 (लखीमपुर कृषि विशेषज्ञों की सिंचाई सलाह), रॉयल बुलेटिन (मुजफ्फरनगर पेराई शेड्यूल)।

🌾 CaneUp किसान सहायता पोर्टल

अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें

गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।

1 जिला व मिल चुनें
2 गांव व नाम डालें
3 समस्या लिखकर भेजें
उत्तर प्रदेश का अपना जनपद चुनें
आपके जिले से संबंधित चीनी मिलें
इस नंबर पर आपको पर्ची और भुगतान के व्हाट्सएप अपडेट्स मिलेंगे
जितना स्पष्ट लिखेंगे, उतनी जल्दी सटीक समाधान मिलेगा

🔒 आपकी निजी जानकारी 100% सुरक्षित है। हम कोई स्पैम नहीं भेजते। केवल आपकी मिल से जुड़े आधिकारिक अपडेट्स शेयर किए जाते हैं।

✓
Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

यह आर्टिकल कैसा लगा?

📬 गन्ना अपडेट पाएं

MSP रेट, पर्ची कैलेंडर, सरकारी योजनाएं — सीधे आपके इनबॉक्स में