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गन्ना कटते ही 24 घंटे में मिल भेजें: देरी से वजन और चीनी घटती है, कटाई की ये 7 गलतियां भारी पड़ेंगी

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 22, 2026 • 5 min read
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गन्ना कटते ही 24 घंटे में मिल भेजें: देरी से वजन और चीनी घटती है, कटाई की ये 7 गलतियां भारी पड़ेंगी
अंतिम अपडेट: October 22, 2026 12:10 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पेराई सत्र 2026-27 अब बस दिनों की दूरी पर है। सहारनपुर में देवबंद चीनी मिल 28 अक्टूबर से गन्ना पेराई शुरू करने जा रही है, और नवंबर के पहले सप्ताह तक ज्यादातर मिलें चल जाएंगी। लेकिन इस समय एक सवाल हर किसान के सामने है — गन्ना कब काटें और कैसे मिल तक पहुंचाएं, ताकि वजन भी न घटे और चीनी की मात्रा भी न कम हो?

अक्सर किसान गन्ना काटकर खेत में ढेर लगा देते हैं और दो-तीन दिन बाद मिल या क्रय केंद्र ले जाते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। चीनी उद्योग के विशेषज्ञों के मुताबिक गन्ने की कटाई के 24 घंटे के भीतर उसे पेरा जाना चाहिए, क्योंकि कटाई के बाद गन्ने में मौजूद सुक्रोज (चीनी) तेजी से घटने लगता है।

कटाई के बाद गन्ना “बासी” क्यों हो जाता है

गन्ना गेहूं या धान जैसी फसल नहीं है, जिसे काटकर हफ्तों रखा जा सकता है। कटते ही गन्ने के भीतर रासायनिक प्रक्रिया शुरू हो जाती है — सुक्रोज टूटने लगता है। जितनी देर गन्ना खेत, ट्रैक्टर-ट्रॉली या ट्रक में पड़ा रहता है, उतनी ही उसकी चीनी कम होती जाती है। साथ ही धूप और हवा में गन्ना सूखता भी है, जिससे वजन घटता है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि पेराई में देरी से खेत में खड़े पके गन्ने का वजन और चीनी की मात्रा दोनों घटते हैं। किसानों को हर दिन की देरी का नुकसान उठाना पड़ता है। यही बात उत्तर प्रदेश के किसानों पर भी लागू होती है।

यहां एक और बात समझनी जरूरी है — गन्ने की कीमत वजन के हिसाब से मिलती है। भाव चाहे जो भी घोषित हो, अगर गन्ना सूखकर हल्का हो गया तो कुल भुगतान अपने आप घट जाएगा। यानी कटाई में की गई एक छोटी सी लापरवाही सीधे जेब पर असर डालती है। पेराई सत्र शुरू होते ही मिलों में भीड़ बढ़ेगी, इसलिए जिन किसानों ने कटाई की योजना पहले से बना ली है, वे बिना देरी के अपना गन्ना तौला पाएंगे।

कटाई की 7 गलतियां, जो किसानों को भारी पड़ती हैं

1. पर्ची-इंडेंट के बिना गन्ना काट लेना सबसे बड़ी गलती — गन्ना काट तो लिया, लेकिन मिल से इंडेंट या पर्ची नहीं आई। फिर कटा गन्ना खेत में पड़ा रहता है। हमेशा मिल के कैलेंडर और पर्ची की तारीख देखकर ही कटाई करें। ई-गन्ना ऐप पर अपना कैलेंडर पहले चेक करें।

2. कटा गन्ना खेत में दो-तीन दिन तक रखे रहना कटाई के बाद गन्ना जितना देर खेत में रहेगा, सुक्रोज उतना ही घटेगा। कोशिश करें कि सुबह काटा गन्ना उसी दिन या अगले दिन मिल/क्रय केंद्र पहुंच जाए।

3. तेज धूप में कटा गन्ना खुला छोड़ना अक्टूबर-नवंबर की धूप में कटा गन्ना जल्दी सूखता है। अगर तुरंत सप्लाई न हो सके तो गन्ने को पत्ती से ढककर छांव वाली जगह रखें। सूखा गन्ना वजन में हल्का होता है।

4. मिल का कैलेंडर न देखना कई किसान बिना कैलेंडर देखे गन्ना काट लेते हैं और फिर क्रय केंद्र पर लंबी कतार में फंसते हैं। पेराई सत्र शुरू होने पर अपना सट्टा कैलेंडर जरूर देखें — उसी के हिसाब से कटाई की योजना बनाएं।

5. कटाई में ऊपर का नरम हिस्सा ज्यादा रखना गन्ने के ऊपर का नरम शीर्ष (टॉप) हिस्सा चीनी में कम होता है, लेकिन वजन बढ़ाता है। साफ-सुथरा, सही ऊंचाई से काटा गन्ना मिल में बिना कटौती के तौला जाता है।

6. लंबी दूरी का परिवहन बिना योजना के ट्रैक्टर-ट्रॉली में गन्ना घंटों धूप में रहता है। नजदीकी क्रय केंद्र चुनें और सुबह जल्दी निकलें, ताकि गन्ना जल्दी तौले।

7. बूढ़ा या झुका गन्ना सबसे आखिर में भेजना जो गन्ना पहले से झुका हुआ या ज्यादा पका है, उसे सबसे पहले सप्लाई करें। देर करने पर उसका वजन और चीनी सबसे ज्यादा घटती है।

पेराई सत्र 2026-27: मिलों का शेड्यूल

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक सहारनपुर जिले में देवबंद चीनी मिल 28 अक्टूबर को सबसे पहले पेराई शुरू करेगी। नानौता, सरसावा और शेरमऊ मिलों में एक नवंबर, गांगनौली में दो नवंबर और बिडवी में आठ नवंबर से पेराई की संभावना है। गागलहेड़ी (दया शुगर) मिल के संचालन को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है — लीज पर लेने वाले ने 15 नवंबर की संभावित तारीख बताई है। बाकी जिलों की मिलें भी अक्टूबर के आखिर और नवंबर के पहले सप्ताह में चालू होंगी।

भाव की स्थिति: 2026-27 का भाव अभी घोषित नहीं

पेराई सत्र 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश में राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) अगेती गन्ने के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य गन्ने के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था। लेकिन 2026-27 सत्र के गन्ने के भाव की घोषणा अभी बाकी है — 9 अक्टूबर की कैबिनेट बैठक में भी भाव बढ़ाने का कोई एलान नहीं हुआ। किसान संगठनों की मांग 600 रुपये प्रति क्विंटल की है। यानी इस सत्र में गन्ना भेजते समय भाव को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करें, लेकिन कटाई की योजना में देरी न करें।

कटाई की सही योजना: 5 आसान कदम

  1. कैलेंडर देखें: ई-गन्ना ऐप या caneup.in पर अपना पर्ची कैलेंडर चेक करें।
  2. पर्ची के हिसाब से काटें: इंडेंट/पर्ची मिलने की तारीख से एक दिन पहले ही कटाई करें।
  3. सुबह काटें, जल्दी भेजें: सुबह काटा गन्ना धूप से कम सूखता है।
  4. साफ गन्ना भेजें: पत्ती और मिट्टी हटाकर भेजें, ताकि तौल में कटौती न हो।
  5. पहले पका गन्ना: सबसे पहले झुके और ज्यादा पके गन्ने की सप्लाई करें।

पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कटा गन्ना 2-3 दिन बाद भी मिल को दे सकते हैं? दे तो सकते हैं, लेकिन हर दिन की देरी से गन्ने का वजन और चीनी की मात्रा घटती है। विशेषज्ञों के मुताबिक कटाई के 24 घंटे के भीतर पेराई होनी चाहिए।

क्या सूखे गन्ने का भुगतान कम मिलता है? भुगतान वजन और भाव के हिसाब से होता है। सूखा गन्ना हल्का होता है, इसलिए उतने ही गन्ने से कम वजन तौलेगा और भुगतान भी कम मिलेगा।

गन्ना काटने का सबसे अच्छा समय कौन सा है? सुबह का समय सबसे अच्छा है। धूप तेज होने से पहले काटा गन्ना कम सूखता है और जल्दी मिल पहुंचाया जा सकता है।

इस साल पेराई कब शुरू हो रही है? सहारनपुर में देवबंद मिल 28 अक्टूबर से शुरू हो रही है। अन्य मिलें नवंबर के पहले-दूसरे सप्ताह में चालू होंगी। अपने जिले की मिल का शेड्यूल ई-गन्ना ऐप पर देखें।

स्रोत: इंडियन शुगर (चीनी उद्योग संघ), बिजनेस स्टैंडर्ड (15 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (16 अक्टूबर 2026), किसान इंडिया, गांव जंक्शन

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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