पेराई 20 अक्टूबर से पहले जान लें: गन्ना किसानों के 7 कानूनी अधिकार — 14 दिन में भुगतान, 15% ब्याज और शिकायत का रास्ता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें 2026-27 पेराई सत्र की तैयारी में जुटी हैं और बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली व मुरादाबाद की मिलों में 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की उम्मीद है। ऐसे समय में किसान का सबसे बड़ा हथियार उसकी कानूनी जानकारी है। गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति और खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 के तहत कई अधिकार मिले हैं, लेकिन जानकारी न होने से ज्यादातर किसान इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते।
6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कर दिया है कि गन्ना भुगतान में देरी पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज किसानों का कानूनी हक है। इस फैसले के बाद अधिकारों को जानना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।
अधिकार 1: 14 दिन में भुगतान पाने का अधिकार
कानून कहता है कि मिल गन्ना लेने के 14 दिन के भीतर किसान को पूरा भुगतान करे। यह उप्र गन्ना अधिनियम, 1953 की धारा 17 के तहत मिला संरक्षण है। अगर 14 दिन बीत जाएं और पैसा खाते में न आए, तो अगला दिन विलंब की गिनती में आता है और उस पर ब्याज शुरू होता है। गन्ना आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में भी यही समय सीमा दोहराई गई है।
अधिकार 2: विलंब पर 15% वार्षिक ब्याज
सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मिलों पर 15 प्रतिशत ब्याज के बोझ से राहत मांगी गई थी। कोर्ट ने कहा कि 14 दिन की अवधि और 15 प्रतिशत ब्याज किसानों को कर्ज के जाल से बचाने के लिए अनिवार्य सुरक्षा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 अगस्त को दर्ज किया था कि रिकवरी प्रमाणपत्रों के तहत मिलों से 1,936 करोड़ रुपये वसूली बाकी है — इसमें 1,087 करोड़ मूल बकाया और 849.5 करोड़ ब्याज है। अदालत ने कहा था कि ब्याज के रूप में “एक पैसा भी वसूल नहीं किया गया” और 15 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत पर आरसी जारी करने पर अधिकारियों को फटकारा था।
अधिकार 3: एफआरपी से कम पर गन्ना नहीं बिकेगा
चीनी मिलें किसानों से गन्ना सरकार द्वारा तय उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) से कम पर नहीं खरीद सकतीं। 2026-27 सीजन के लिए कैबिनेट ने एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर लागू है। रिकवरी 9.5 प्रतिशत से नीचे रहने वाली मिलों में भी किसानों को 338.3 रुपये प्रति क्विंटल से कम नहीं मिलेगा। यह भाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो चुका है।
उत्तर प्रदेश में मिलें आमतौर पर राज्य सरकार के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) पर गन्ना खरीदती हैं। स्पष्ट कर दें: 2026-27 के लिए यूपी एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सीजन 2025-26 में अगेती गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल था। घोषणा होते ही किसान CaneUP पोर्टल और इस साइट पर भाव देख सकते हैं।
अधिकार 4: सही तौल का अधिकार
पर्ची पर छपे वजन और असली वजन में अंतर हो तो किसान को शिकायत का अधिकार है। हर सत्र शुरू होने से पहले क्रय केंद्रों के डिजिटल कांटों की जांच अनिवार्य की जाती है। घटतौली रोकने के लिए इस सीजन भी बाह्य क्रय केंद्रों के इलेक्ट्रॉनिक कांटों की जांच कराई गई है। तौल के समय कांटे का शून्य वजन, प्रिंटेड रसीद और वाहन संख्या — तीनों मिलाकर देखें।
अधिकार 5: पर्ची, सट्टा और एसएमएस अलर्ट
गन्ना सप्लाई के लिए किसान का सट्टा और पर्ची CaneUP पोर्टल पर दर्ज होता है। किसान को ई-गन्ना ऐप पर अपना सट्टा, पर्ची कैलेंडर और भुगतान की स्थिति खुद देखने का अधिकार है। भुगतान की जानकारी सीधे बैंक खाते के एसएमएस से भी मिलती है। मिलों की ओर से भेजे जाने वाले एसएमएस अलर्ट में तौल, भाव और भुगतान का विवरण रहता है।
अधिकार 6: शिकायत दर्ज करने का हक — हेल्पलाइन और एसएमएस
भुगतान अटके या मिल जवाब न दे तो किसान के पास शिकायत के सीधे रास्ते हैं। उप्र गन्ना विभाग के सत्यापित टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 हैं। एसएमएस शॉर्टकोड 51969 पर भी संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा जिला गन्ना कार्यालय और गन्ना आयुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दी जा सकती है। वसूली के लिए तहसील प्रशासन मिलों के खिलाफ रिकवरी प्रमाणपत्र (आरसी) जारी करता है — कासगंज की न्यौली मिल पर 18.54 करोड़ बकाया में हाल ही में यही कार्रवाई हुई है।
अधिकार 7: ब्याज सहित पूरा बकाया वसूले जाने का अधिकार
कानून सिर्फ बकाया दिलाने का रास्ता नहीं देता, विलंब पर ब्याज सहित वसूली का अधिकार भी देता है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की निगरानी में ही पता चला कि दशकों पुराने — 1990 के दशक के — बकाये पर भी ब्याज की वसूली शुरू नहीं हुई थी। सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इन पुराने बकायों पर 15 प्रतिशत ब्याज की वसूली की उम्मीद जगी है।
पेराई से पहले तुरंत करें ये 5 काम
1. सट्टा और सर्वे रिकॉर्ड जांचें: CaneUP पोर्टल या ई-गन्ना ऐप पर रकबा और किस्म की एंट्री मिलान कर लें। गलती हो तो पेराई से पहले सुधार कराना आसान है।
2. बैंक खाता सक्रिय रखें: खाता आधार से जुड़ा और सक्रिय हो, वरना भुगतान अटकता है। पश्चिमी यूपी के किसानों को उप गन्ना आयुक्त ने खुद यही सलाह दी है।
3. डिजिटल फार्मर आईडी बनवाएं: एग्रीस्टैक फार्मर आईडी सट्टे और पीएम-किसान जैसी योजनाओं से जुड़ रही है। नजदीकी सीएससी केंद्र से पंजीकरण करा लें।
4. एफआरपी और एसएपी नोट करें: इस सीजन एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल है। एसएपी की घोषणा होते ही उस हिसाब से अपने खाते की जांच करें।
5. पर्ची और तौल रसीद संभालकर रखें: हर पर्ची की फोटो फोन में रखें। भुगतान विवाद में यही सबसे मजबूत सबूत होता है।
आपके सवाल
सवाल: क्या 14 दिन की समय सीमा हर मिल पर लागू होती है? जवाब: हां, उप्र गन्ना अधिनियम, 1953 की धारा 17 के तहत प्रदेश की सभी 122 चीनी मिलों पर यह लागू है।
सवाल: ब्याज की दर 12% है या 15%? जवाब: विलंबित भुगतान पर 15% वार्षिक ब्याज देय है। सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 के आदेश में इसे अनिवार्य बताया है।
सवाल: इस सीजन में गन्ने का भाव क्या है? जवाब: केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। यूपी एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
सवाल: शिकायत के लिए कौन से नंबर सही हैं? जवाब: टोल-फ्री 1800-121-3203, 1800-180-5129 और एसएमएस शॉर्टकोड 51969 सत्यापित नंबर हैं।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया (मीरठ व दिल्ली संस्करण), इकोनॉमिक टाइम्स, बिजनेस स्टैंडर्ड, ईटीवी भारत, पीआईबी प्रेस विज्ञप्ति (5 मई 2026)
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