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1 सप्ताह में उच्चस्तरीय समिति: गन्ना किसानों की शिकायतों पर केंद्र का बड़ा फैसला — जानिए क्या होगा, यूपी के 48 लाख किसानों पर असर

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 13, 2026 • 6 min read
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1 सप्ताह में उच्चस्तरीय समिति: गन्ना किसानों की शिकायतों पर केंद्र का बड़ा फैसला — जानिए क्या होगा, यूपी के 48 लाख किसानों पर असर
अंतिम अपडेट: October 13, 2026 7:40 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

नई दिल्ली में 12 अक्टूबर (सोमवार) की देर शाम गन्ना किसानों के लिए बड़ी खबर आई — केंद्र सरकार ने फैसला किया है कि महाराष्ट्र और कर्नाटक के गन्ना किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए एक सप्ताह के भीतर उच्चस्तरीय संयुक्त समिति गठित की जाएगी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद यह ऐलान किया।

समिति का काम चीनी मिलों के रिकवरी आंकड़ों में विसंगतियां, गन्ने की तौल में कटौती, लैब जांच की पारदर्शिता और फसल बीमा जैसे जमीनी मुद्दों की वैज्ञानिक जांच करके स्थायी समाधान सुझाना होगा। चौहान ने साफ कहा कि अन्नदाता किसानों का किसी भी परिस्थिति में शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि एफआरपी, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य और रिकवरी-तौल की पारदर्शिता पर समिति के सुझाव सीधे यूपी के करीब 48 लाख गन्ना किसान परिवारों पर असर डालेंगे। किसानों ने चीनी का एमएसपी 31 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग भी रखी है — मांग मानी गई तो मिलों की आमदनी बढ़ेगी और भुगतान की रफ्तार पर सीधा असर पड़ेगा।

12 अक्टूबर की बैठक: 3 घंटे की चर्चा के बाद फैसला

भाषा (पीटीआई) के मुताबिक बैठक नई दिल्ली के पूसा परिसर में हुई, जिसमें कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने महाराष्ट्र-कर्नाटक के किसानों के प्रतिनिधिमंडल से विस्तार से चर्चा की। करीब 80 से 90 किसान और दोनों राज्यों के मंत्री शामिल हुए।

पृष्ठभूमि यह है कि 1 अक्टूबर से चीनी सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है। कर्नाटक में किसानों ने 5,500 रुपये प्रति टन भाव की मांग को लेकर 13 अक्टूबर से हाईवे जाम की चेतावनी दी थी, महाराष्ट्र में भी पेराई की तारीख और भाव पर आंदोलन चल रहा है। बढ़ते दबाव के बीच केंद्र ने दोनों राज्यों के किसानों को दिल्ली बुलाकर बातचीत की।

समिति में कौन-कौन होगा: केंद्र, राज्य, किसान और मिलें

सरकारी बयान के मुताबिक समिति में पांच तरह के सदस्य होंगे — केंद्र सरकार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की राज्य सरकारें, किसान संगठन, चीनी मिलें और विषय विशेषज्ञ व वैज्ञानिक।

भास्कर हिंदी (आईएएनएस) के मुताबिक समिति गन्ने की कटाई के तकनीकी पहलुओं, रिकवरी मापने के वैज्ञानिक मानकों, लैब टेस्टिंग प्रणालियों और तौल व्यवस्था की सटीकता की जांच करेगी — साथ ही यह भी कि कुछ मिलें असल रिकवरी कम दिखाकर किसानों के भुगतान में कटौती तो नहीं कर रहीं। बैठक में कर्नाटक के मंत्री लक्ष्मण सावदी, नरेंद्र स्वामी और रुद्रप्पा मनप्पा लमानी के साथ पूर्व सांसद राजू शेट्टी भी मौजूद थे।

किसानों की 5 बड़ी मांगें जिन पर फैसला होगा

बैठक में किसानों ने जो मांगें रखीं, समिति इन्हीं की जांच करेगी:

1. एफआरपी में बढ़ोतरी: खेती की लागत बढ़ने के हवाले से केंद्र का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बढ़ाने की मांग। जोशी ने एफआरपी तय करने की वैज्ञानिक प्रक्रिया भी समझाई।

2. चीनी का एमएसपी 50 रुपये हो: चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को 31 से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग — चीनी का भाव बढ़ा तो मिलों की कमाई बढ़ेगी और बकाया भुगतान आसान होगा।

3. रिकवरी आंकड़ों की विसंगतियां: किसानों का आरोप — मिलें जो रिकवरी दर बताती हैं और असल रिकवरी में अंतर होता है। चौहान ने इसे बेहद संवेदनशील मुद्दा कहा।

4. तौल में कटौती और लैब जांच: तौल के समय वजन कटौती और लैब टेस्टिंग की प्रक्रिया पर भरोसे की कमी — समिति तौल व्यवस्था और लैब जांच की सटीकता जांचेगी।

5. बर्बादी और फसल बीमा: कटाई-ढुलाई में बर्बादी, फसल बीमा और एथेनॉल के दाम पर भी चर्चा हुई।

चौहान का सख्त संदेश: शोषण बर्दाश्त नहीं होगा

चौहान ने कहा कि चर्चा में जमीनी मुद्दों पर विचार हुआ — मिलों के रिकवरी आंकड़ों में विसंगतियां, वजन में कटौती, बर्बादी, लैब जांच और फसल बीमा। उन्होंने मिलों की ओर से रिकवरी दर में विसंगतियों, वजन में कटौती और असल रिकवरी के आंकड़े छिपाने को बेहद संवेदनशील मुद्दा बताया। चौहान के मुताबिक तत्काल या टुकड़ों में समाधान की बजाय एक पारदर्शी और वैज्ञानिक व्यवस्था जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी मिल किसानों के अधिकारों का उल्लंघन न कर सके।

जोशी ने समझाया: एफआरपी कैसे तय होता है

प्रह्लाद जोशी ने बैठक में गन्ने के लिए एफआरपी तय करने के केंद्र के तरीके को विस्तार से समझाया — इसमें शामिल वैज्ञानिक प्रक्रियाएं और लागत-आकलन के तरीके भी शामिल थे। उन्होंने किसानों के सामने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और एफआरपी के बीच का अंतर भी स्पष्ट किया, और राज्य द्वारा तय कीमत (एसएपी) व एथेनॉल उत्पादन पर भी चर्चा हुई। मंत्रियों ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने, चीनी सेक्टर में पारदर्शिता लाने और किसानों की आय की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाने की बात कही — और सुधारों को समय पर लागू करने के लिए राज्य सरकारों के सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।

यूपी के 48 लाख किसान परिवारों पर क्या असर पड़ेगा

यह फैसला महाराष्ट्र और कर्नाटक के नाम पर हुआ है, लेकिन इसका असर यूपी तक पहुंचेगा — ऐसे:

एफआरपी बढ़ा तो यूपी को सीधा फायदा: यूपी में किसानों को एसएपी मिलता है, जो केंद्र के एफआरपी के ऊपर राज्य तय करता है। 2025-26 में एसएपी जल्दी पकने वाली किस्मों के लिए 400 रुपये और सामान्य के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल रहा था। (नोट: 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।) केंद्र ने एफआरपी बढ़ाया तो यूपी पर भी एसएपी बढ़ाने का दबाव बनेगा।

चीनी का भाव बढ़ा तो बकाया घटेगा: चीनी का एमएसपी 31 से 50 रुपये होने पर मिलों की कमाई बढ़ेगी। यूपी में बकाया भुगतान की समस्या — किनौनी, मोहिउद्दीनपुर जैसी मिलों पर करोड़ों का बकाया — सुलझाने में इससे मदद मिलेगी। मिलों की वित्तीय सेहत सुधरेगी तो 14 दिन में भुगतान का नियम लागू करना आसान होगा।

तौल और रिकवरी की पारदर्शिता: यूपी के किसानों की भी आम शिकायत रहती है कि खरीद केंद्रों पर तौल में कटौती होती है और रिकवरी के आंकड़े पारदर्शी नहीं हैं। समिति अगर तौल और लैब टेस्टिंग के लिए राष्ट्रीय मानक सुझाती है तो यूपी की 122 चीनी मिलों से जुड़े किसानों को भी फायदा मिलेगा।

कुल मिलाकर समिति के सुझाव राष्ट्रीय स्तर के होंगे — और देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य के रूप में यूपी इसका सबसे बड़ा लाभार्थी होगा।

जवाब जानिए

क्या यह समिति यूपी के किसानों के लिए भी काम करेगी? हां, समिति के सुझाव राष्ट्रीय स्तर पर लागू होंगे। एफआरपी, चीनी के एमएसपी और रिकवरी-तौल की पारदर्शिता पर जो भी फैसला होगा, उसका असर यूपी की 122 मिलों से जुड़े करीब 48 लाख किसान परिवारों पर भी पड़ेगा।

समिति कब तक बनेगी? सरकारी बयान के मुताबिक एक सप्ताह के भीतर — यानी 19 अक्टूबर 2026 तक समिति गठित कर दी जाएगी। इसके बाद समिति मुद्दों की जांच करेगी और स्थायी समाधान के सुझाव देगी।

क्या गन्ने का भाव अभी बढ़ गया है? नहीं, अभी भाव नहीं बढ़ा है। किसानों ने एफआरपी बढ़ाने और चीनी का एमएसपी 31 से 50 रुपये करने की मांग रखी है। समिति इन्हीं की जांच करके सुझाव देगी, फिर केंद्र फैसला लेगा।

शिकायत कहां दर्ज कराएं? गन्ना विभाग की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-121-3203 पर बकाया और भुगतान संबंधी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। एसएमएस सेवा के लिए 51969 नंबर भी उपलब्ध है।

क्या यह खबर पक्की है? हां, द प्रिंट (भाषा/पीटीआई) और भास्कर हिंदी (आईएएनएस) — दोनों की 12 अक्टूबर 2026 की रिपोर्टों में समिति गठन के फैसले की पुष्टि है।

स्रोत: द प्रिंट हिंदी (भाषा/पीटीआई, 12 अक्टूबर 2026); भास्कर हिंदी (आईएएनएस, 12 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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