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9 अक्टूबर सुबह 10 बजे से गन्ने की नई किस्म के बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू, ₹200 में मिलेगा को.शा. 23232 का मिनी सीड किट

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 8, 2026 • 6 min read
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9 अक्टूबर सुबह 10 बजे से गन्ने की नई किस्म के बीज की ऑनलाइन बुकिंग शुरू, ₹200 में मिलेगा को.शा. 23232 का मिनी सीड किट
अंतिम अपडेट: October 8, 2026 1:48 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

कल सुबह 10 बजे से आपके खेत का भविष्य बदल सकता है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने गन्ने की नई उन्नत किस्मों के सिंगल बड मिनी सीड किट की ऑनलाइन बुकिंग शुरू करने की तारीख घोषित कर दी है। 9 अक्टूबर सुबह 10 बजे से किसान गन्ना विभाग की वेबसाइट enquiry.caneup.in पर जाकर इन किटों की बुकिंग करा सकेंगे। सबसे खास बात यह है कि इस बार ऑफलाइन बुकिंग स्वीकार नहीं की जाएगी — यानी बीज के लिए शोध परिषद या विभागों के चक्कर काटने की पुरानी व्यवस्था खत्म हो गई है। घर बैठे, मोबाइल से ही बुकिंग पूरी होगी।

यह योजना उन किसानों के लिए बड़ा मौका है जो लाल सड़न रोग से जूझ रही पुरानी किस्म को.0238 का विकल्प ढूंढ रहे हैं। परिषद इस बार को.शा. 23232 के दो लाख और को.शा. 19231 के एक लाख सिंगल बड बांटेगी। को.शा. 23232 को सितंबर 2026 में ही प्रदेश में खेती के लिए अवमुक्त किया गया है, और शोध परिषद का दावा है कि इन किस्मों से बेहतर उत्पादकता, ज्यादा शर्करा प्रतिशत और रोग-कीटों के प्रति मजबूत प्रतिरोध मिलेगा।

बुकिंग कब और कैसे होगी: पूरी प्रक्रिया

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के निदेशक अभिषेक आनंद के अनुसार, 9 अक्टूबर सुबह 10 बजे से enquiry.caneup.in पोर्टल पर बुकिंग खुलेगी। किसानों को अपना किसान कोड दर्ज करके ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी। एक किट की कीमत 200 रुपये रखी गई है, जिसका भुगतान यूपीआई या कार्ड के जरिए ऑनलाइन ही होगा। बुकिंग पूरी होने के बाद किसान को एक पंजीकरण नंबर मिलेगा, जिसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होगा — क्योंकि बीज लेते समय इसी नंबर की जरूरत पड़ेगी।

एक अहम नियम ध्यान रखें: एक किसान अपने कृषक कोड से केवल एक बार ही बुकिंग करा सकेगा, और अधिकतम एक ही किट मिलेगा। ऑफलाइन बुकिंग किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। इसका मकसद पारदर्शिता है — पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर बीज का बंटवारा होगा, और बिचौलियों या डाक-बंगले की भीड़ का कोई खेल नहीं चलेगा।

कितनी किट मिलेगी और कितने किसानों को फायदा होगा

आंकड़े दिलचस्प हैं। परिषद इस बार को.शा. 23232 के दो लाख सिंगल बड उपलब्ध करा रही है। को.शा. 19231 के लिए करीब 1,000 किट तैयार की गई हैं, और एक किट में 100 बड होंगे। एक किसान को अधिकतम एक किट दी जाएगी, यानी इस योजना से करीब 3,000 किसान सीधे लाभान्वित होंगे।

यहां एक चीज समझनी जरूरी है। नई किस्म का बीज सीमित मात्रा में है, इसलिए परिषद का लक्ष्य हर किसान को थोड़ा-थोड़ा बीज देना है — ताकि अधिक से अधिक किसान अपने खेत में इन किस्मों का परीक्षण कर सकें। जिन किसानों को इस बार बुकिंग का मौका नहीं मिल पाएगा, उनके लिए फरवरी में दोबारा बीज वितरण का अवसर दिया जाएगा। यानी निराश होने की जरूरत नहीं है, लेकिन जो पहले बुकिंग करा लेंगे, उन्हें पहले मौका मिलेगा।

बीज लेते समय क्या-क्या करना होगा

बीज वितरण अक्टूबर में प्रस्तावित मिठास मेला-2026 में किया जाएगा। बुकिंग कराने वाले किसानों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर बीज वितरण की तारीख की जानकारी एसएमएस से भेजी जाएगी। तय तारीख पर किसान को संबंधित संस्थान पहुंचकर अपना मिनी सीड किट लेना होगा।

बीज लेने के दिन तीन चीजें साथ ले जाना अनिवार्य है: पंजीकरण नंबर, आधार कार्ड की मूल प्रति और खुद किसान की उपस्थिति। आधार कार्ड से पहचान की पुष्टि के बाद किसान को टोकन दिया जाएगा, फिर टोकन दिखाकर निर्धारित काउंटर से किट प्राप्त की जा सकेगी।

क्यों खास हैं ये नई किस्में: आंकड़े बोलते हैं

को.शा. 23232 को सितंबर 2026 में ही उत्तर प्रदेश में खेती के लिए अवमुक्त किया गया है। शाहजहांपुर गन्ना शोध परिषद के परीक्षणों में इस किस्म ने प्रभावित किया है: पौधा गन्ने की औसत उपज 85.56 टन प्रति हेक्टेयर मिली, जो को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। पेड़ी फसल में भी यह 80.57 टन प्रति हेक्टेयर पर पहुंची, यानी को.0238 से 3.16 प्रतिशत ज्यादा। नवंबर, जनवरी और मार्च — तीनों समय बिंदुओं पर इसकी शर्करा मात्रा मानक किस्म से अधिक मिली। सबसे बड़ी बात: यह किस्म लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है और इसकी पेड़ी क्षमता भी अच्छी है।

इसी के साथ अवमुक्त हुई चार नई किस्मों में से मध्य-देर से पकने वाली को.शा. 18232 ने भी 92.38 टन प्रति हेक्टेयर की औसत उपज दिखाई है। नई किस्मों को गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर और भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ के वैज्ञानिकों के साथ प्रगतिशील किसानों और चीनी मिल प्रतिनिधियों की समिति ने मंजूरी दी है। वर्षों से को.0238 पर निर्भरता के बाद यह पहला मौका है जब किसानों के पास बेहतर उपज और रोग प्रतिरोध का संयुक्त विकल्प मौजूद है।

एक किसान, एक किट — नियम के पीछे की सोच

हो सकता है आपके मन में सवाल आए कि सिर्फ एक किट क्यों? दरअसल सिंगल बड तकनीक का पूरा फायदा ही इसी में है। 100 बड की एक किट से किसान अपने खेत में नई किस्म की नर्सरी तैयार कर सकता है, और फिर उस नर्सरी से निकले बीज से धीरे-धीरे पूरे खेत में किस्म का विस्तार कर सकता है। यानी एक बार का 200 रुपये का निवेश आने वाले कई सालों तक काम आएगा। परिषद का उद्देश्य साफ है — कम मात्रा में ही सही, नई किस्मों का बीज ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचे।

एक और व्यावहारिक सलाह: बुकिंग 9 अक्टूबर सुबह 10 बजे खुलते ही पोर्टल पर भीड़ बढ़ सकती है। अपना किसान कोड, मोबाइल नंबर और भुगतान का माध्यम पहले से तैयार रखें। जैसे ही बुकिंग पूरी हो, मिला हुआ पंजीकरण नंबर नोट करके सुरक्षित रखें।

शीतकालीन बुवाई का सही समय

यह बीज वितरण शीतकालीन बुवाई के हिसाब से तय किया गया है। विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार शीतकाल में गन्ने की बुवाई का समय 20 दिसंबर तक है। इसलिए अक्टूबर में बीज मिलने के बाद किसान के पास बुवाई की तैयारी का पर्याप्त समय रहेगा। जो किसान इस बार किट नहीं ले पाएंगे, उन्हें फरवरी में दूसरे चरण में मौका मिलेगा, जो बसंतकालीन बुवाई (1 फरवरी से 15 मई) के लिए उपयोगी होगा।

जवाब जानिए

ऑनलाइन बुकिंग कब शुरू होगी? 9 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजे से। बुकिंग सिर्फ enquiry.caneup.in पोर्टल पर होगी, ऑफलाइन बुकिंग स्वीकार नहीं की जाएगी।

एक किट की कीमत क्या है और कितनी किट मिलेंगी? एक किट में 100 सिंगल बड होंगे और कीमत 200 रुपये है। एक किसान को अधिकतम एक किट मिलेगी, और एक कृषक कोड से सिर्फ एक बार बुकिंग हो सकेगी।

भुगतान कैसे होगा? 200 रुपये का भुगतान ऑनलाइन ही करना होगा — यूपीआई या डेबिट/क्रेडिट कार्ड के जरिए। कैश में भुगतान का कोई विकल्प नहीं है।

बीज कहां और कब मिलेगा? बीज का वितरण अक्टूबर में प्रस्तावित मिठास मेला-2026 में होगा। वितरण की तारीख आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस से बताई जाएगी।

बीज लेने के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए? बुकिंग का पंजीकरण नंबर, आधार कार्ड की मूल प्रति और किसान की खुद की उपस्थिति अनिवार्य है। सत्यापन के बाद टोकन मिलेगा, उसी से किट प्राप्त होगी।

अगर इस बार बुकिंग नहीं हो पाई तो? जिन किसानों को इस बार मौका नहीं मिलेगा, उन्हें फरवरी में दोबारा बीज वितरण का अवसर दिया जाएगा।

स्रोत: हिंदुस्तान, गांव जंक्शन, जागरण

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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