गन्ना मूल्य पर तीन जगह हंगामा: 22, 23 और 30 अक्टूबर को बड़े प्रदर्शन, ₹600 भाव और बकाया भुगतान की मांग

पेराई सत्र शुरू होने से ठीक पहले उत्तर प्रदेश का गन्ना किसान सड़कों पर उतरने की तैयारी में है। गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने और बकाया भुगतान की मांग पर किसान संगठनों ने अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में लगातार तीन बड़े प्रदर्शनों का ऐलान किया है। 22 अक्टूबर को सहारनपुर में जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय का घेराव होगा, 23 अक्टूबर को लखनऊ में किसान-मजदूर महापंचायत और पूरे प्रदेश में जिलाधिकारी कार्यालयों पर धरने होंगे, और 30 अक्टूबर को लखनऊ के डोली बाग में बड़ी पंचायत बुलाने की घोषणा की गई है।
23 अक्टूबर: लखनऊ में किसान-मजदूर महापंचायत
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय कार्यालय से जारी कार्यक्रम सूचना लेटर में किसानों और मजदूरों को 23 अक्टूबर को लखनऊ स्थित गन्ना संस्थान में जुटने का आह्वान किया गया है। यूनियन का कहना है कि गन्ना किसानों की समस्याओं, गन्ना मूल्य भुगतान, बकाया गन्ना मूल्य, गन्ना मूल्य में वृद्धि और अन्य ज्वलंत मुद्दों को लेकर महापंचायत आयोजित की जा रही है। इसमें संगठन के सभी पदाधिकारियों को पहुंचने को कहा गया है ताकि किसानों के हक में आवाज मजबूत की जा सके।
महापंचायत में उत्तर प्रदेश के समस्त गन्ना उत्पादक जनपदों के किसान-मजदूर साथी भाग लेंगे और अपनी समस्याओं को मजबूती से उठाएंगे। महापंचायत के जरिए सरकार का ध्यान गन्ना किसानों की समस्याओं की ओर खींचा जाएगा और उचित मूल्य दिलाने की मांग की जाएगी। यूनियन ने बताया है कि गन्ना फसल में टॉप बोरर कीट से किसानों को भारी नुकसान हुआ है, और रात में 6 से 12 बजे तक बिजली सप्लाई देने की मांग कुछ इलाकों में अब तक पूरी नहीं हुई है।
उसी दिन: पूरे प्रदेश में जिलाधिकारी कार्यालयों पर धरना
संयुक्त किसान मोर्चा ने भी 23 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में जिलाधिकारी कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। मोर्चा की मांग है कि गन्ना मूल्य बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए, और किसानों का कई चीनी मिलों पर बकाया भुगतान नए पेराई सत्र की शुरुआत से पहले किया जाए। धरने के बाद जिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा।
किसानों का कहना है कि बढ़ती महंगाई में मौजूदा मूल्य उत्पादन लागत को भी पूरा नहीं करता। बीज, उर्वरक, पानी और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ी है, इसलिए गन्ने का मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उठ रही है। राज्य सरकार ने इस मांग पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, हालांकि कृषि विभाग का कहना है कि कीमतों का पुनरावलोकन किया जाएगा।
22 अक्टूबर: सहारनपुर में गन्ना जिला अधिकारी कार्यालय का घेराव
सहारनपुर जिले के गागलहेड़ी में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की पंचायत में किसानों ने 22 अक्टूबर को अग्रसेन चौक गागलहेड़ी पर एकत्र होकर पैदल मार्च निकालते हुए जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय का घेराव और धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। पंचायत की अध्यक्षता मास्टर रघुवीर ने की और संचालन नरेंद्र यादव ने किया।
पंचायत में क्षेत्र की दया शुगर मिल को चालू कराने और किसानों की समस्याओं पर चर्चा हुई। मंडल सचिव डॉ. नरेश यादव ने आरोप लगाया कि मिल प्रबंधन लगातार किसानों और मिल कर्मचारियों को गुमराह कर रहा है और शासन की ओर से भी अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे क्षेत्र के किसानों में भारी रोष है। मिल कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल ने पंचायत में बताया कि प्रबंधन की ओर से अब तक आवश्यक सामान उपलब्ध नहीं कराया गया है और न ही मरम्मत का कोई कार्य शुरू हुआ है। किसान नेता राहुल त्यागी ने क्षेत्रीय किसानों से 22 अक्टूबर के धरना-प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील की है।
30 अक्टूबर: लखनऊ के डोली बाग में बड़ी पंचायत
गन्ना मूल्य में वृद्धि की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने आगे की रणनीति भी घोषित की है। संगठन के अनुसार, 30 अक्टूबर को लखनऊ के डोली बाग स्थित गन्ना अनुसंधान केंद्र में किसानों की बड़ी पंचायत आयोजित की जाएगी। इस पंचायत में गन्ने के मूल्य सहित किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी। यूनियन का कहना है कि गन्ने का मूल्य घोषित नहीं होने से किसानों में असंतोष है, और इसी मुद्दे को लेकर संगठन आगे भी आंदोलन और पंचायतों के माध्यम से अपनी मांग उठाता रहेगा।
गन्ना मूल्य की मौजूदा स्थिति
किसानों की चिंता का मुख्य कारण यह है कि पेराई सत्र दरवाजे पर है, लेकिन मूल्य की घोषणा नहीं हुई है। यूपी में गन्ना पेराई आमतौर पर 1 नवंबर से शुरू होती है, और इस बार 20 अक्टूबर से ही पेराई सत्र शुरू होने की संभावना जताई जा रही है — हालांकि सरकार की ओर से अभी तारीख का ऐलान नहीं किया गया है।
2025-26 सीजन का घोषित राज्य सलाह मूल्य (एसएपी) अगेती गन्ने के लिए 400 रुपये प्रति क्विंटल था। 2026-27 सीजन के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — किसान उम्मीद लगाए हैं कि पेराई शुरू होने से पहले सरकार मूल्य बढ़ाने का फैसला करेगी। किसान संगठनों का कहना है कि पुराना मूल्य बढ़ती लागत को पूरा नहीं करता, इसलिए 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग उचित है।
प्रदेश की 122 चीनी मिलों में से अधिकतर पर किसानों का बकाया भुगतान एक और बड़ा मुद्दा है। किसान संगठन चाहते हैं कि नया पेराई सत्र शुरू होने से पहले पिछले सत्र का बकाया पूरी तरह चुकता हो, ताकि किसानों को अगली फसल की तैयारी में आर्थिक परेशानी न झेलनी पड़े।
किसानों के लिए क्या मतलब है
आने वाले दिनों में होने वाले इन प्रदर्शनों से गन्ना मूल्य की घोषणा पर सरकार पर दबाव बनेगा। किसान जो उम्मीद कर सकते हैं:
- पेराई सत्र से पहले मूल्य घोषणा की संभावना
- बकाया भुगतान पर प्रशासनिक सख्ती
- नए सीजन की पर्ची और कैलेंडर की तैयारी
प्रदर्शनों में शामिल होने वाले किसानों को अपने जिले की जानकारी जिला गन्ना कार्यालय या किसान संगठन के पदाधिकारियों से लेनी चाहिए। शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में भाग लेना सभी का कर्तव्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
23 अक्टूबर को क्या-क्या हो रहा है?
23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना संस्थान में भारतीय किसान यूनियन की किसान-मजदूर महापंचायत होगी, और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर पूरे उत्तर प्रदेश में जिलाधिकारी कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन होगा। दोनों की मांग है — गन्ना मूल्य 600 रुपये प्रति क्विंटल और बकाया भुगतान।
22 अक्टूबर को सहारनपुर में क्या तय है?
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के किसानों ने गागलहेड़ी के अग्रसेन चौक से पैदल मार्च निकालकर जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय का घेराव और धरना करने का निर्णय लिया है। मुख्य मुद्दा दया शुगर मिल को चालू कराने और किसानों की समस्याओं का समाधान है।
30 अक्टूबर की पंचायत कहां होगी?
30 अक्टूबर को लखनऊ के डोली बाग स्थित गन्ना अनुसंधान केंद्र में किसानों की बड़ी पंचायत आयोजित की जाएगी, जिसमें गन्ने के मूल्य और किसानों के अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी।
2026-27 का गन्ना मूल्य (एसएपी) कितना है?
2026-27 सीजन के एसएपी की घोषणा अभी नहीं हुई है। 2025-26 सीजन में अगेती गन्ने का एसएपी 400 रुपये प्रति क्विंटल था। किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
बकाया भुगतान की मांग क्यों उठ रही है?
कई चीनी मिलों पर पिछले सत्र का करोड़ों रुपये का भुगतान अभी भी बकाया है। किसान संगठनों की मांग है कि नए पेराई सत्र की शुरुआत से पहले सारा बकाया चुकता किया जाए।
स्रोत: किसान इंडिया (18 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (20 अक्टूबर 2026), धारा लक्ष्य समाचार (20 अक्टूबर 2026)
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
यह आर्टिकल कैसा लगा?


