गन्ना भाव ₹600 की मांग: 7 अक्टूबर को लखनऊ बैठक में किसानों का प्रस्ताव, 2026-27 का नया रेट कब घोषित होगा

लखनऊ (CaneUp ब्यूरो — 11 अक्टूबर 2026): उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए एक अहम खबर लखनऊ से आई है। पेराई सत्र 2026-27 के लिए राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) तय करने को लेकर 7 अक्टूबर को गन्ना आयुक्त कार्यालय, लखनऊ में गठित उप समिति की बैठक हुई, जिसमें गन्ने का मूल्य बढ़ाकर ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग प्रमुखता से रखी गई। बैठक में इस मांग पर सकारात्मक चर्चा भी हुई, हालांकि नए भाव की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
बैठक में सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड, बलरामपुर के अध्यक्ष प्रतिनिधि रणवीर सिंह रन्नू ने सदस्य के रूप में हिस्सा लिया और किसानों की ओर से यह मांग उठाई कि बढ़ती खेती की लागत और महंगाई को देखते हुए 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल तय किया जाना चाहिए।
बैठक में कौन-कौन मौजूद रहा
उप समिति की इस बैठक में गन्ना विभाग के शीर्ष अधिकारी और चीनी उद्योग के प्रतिनिधि दोनों मौजूद थे। अपर गन्ना आयुक्त (प्रशासन), अपर गन्ना आयुक्त (समितियां) और अपर गन्ना आयुक्त (क्रय) सहित गन्ना मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न चीनी मिलों के प्रतिनिधि और मिल मालिक बैठक में शामिल हुए। गन्ना मूल्य के साथ-साथ किसानों से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
“₹600 का रेट भी किसानों के लिए कम है”
बैठक में रणवीर सिंह रन्नू ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है और महंगाई का दबाव किसान पर है, इसलिए गन्ना मूल्य में उचित वृद्धि बहुत जरूरी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि सही मूल्यांकन किया जाए तो ₹600 प्रति क्विंटल का रेट भी किसानों के लिए कम ही है। उनका कहना था, “किसान हित सर्वोपरि है” और किसानों की आय बढ़ाने तथा गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए इस मांग को मजबूती से उठाना उनका निरंतर प्रयास है।
सकारात्मक चर्चा, लेकिन घोषणा अभी बाकी
बैठक के बारे में सामने आई जानकारी के अनुसार ₹600 प्रति क्विंटल की मांग पर सकारात्मक चर्चा और विचार-विमर्श हुआ। चीनी मिलों के प्रतिनिधियों की ओर से भी इस विषय पर चर्चा में भाग लिया गया। लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह उप समिति की बैठक थी — राज्य परामर्शित मूल्य की अंतिम घोषणा उत्तर प्रदेश सरकार करती है और 2026-27 सत्र के लिए नए गन्ना भाव की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
मौजूदा भाव क्या है और कितनी बढ़ोतरी की मांग है
पिछले पेराई सत्र 2025-26 के लिए सरकार ने गन्ने के भाव में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद अगेती किस्म का भाव ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का भाव ₹390 प्रति क्विंटल तय हुआ था। इस आधार पर देखें तो किसानों की ₹600 की मांग का मतलब मौजूदा भाव से करीब ₹200 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होगा, जो ऐतिहासिक होगा।
यही वजह है कि यह मांग सिर्फ एक संख्या नहीं है — यह किसानों की उस गणना को दिखाती है जिसमें खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी की बढ़ती लागत को जोड़ा गया है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई किसान संगठनों ने पहले भी मिलें चलने से पहले ही भाव घोषित करने की मांग रखी है।
अक्टूबर में तेज हुआ ₹600 का दबाव
लखनऊ की यह बैठक किसी अकेली मांग का नतीजा नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में गन्ना मूल्य को लेकर किसान संगठनों का दबाव लगातार बढ़ा है। अमरोहा में भारतीय किसान यूनियन के एक धड़े ने महापंचायत करके 2026-27 सत्र के लिए ₹600 प्रति क्विंटल की मांग रखी थी और चेतावनी दी थी कि यदि 20 अक्टूबर तक भाव की घोषणा नहीं हुई तो 25 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन होगा। उससे पहले 22 सितंबर को बिजनौर की महापंचायत में किसान मजदूर संगठन के नेता सरदार वीएम सिंह के नेतृत्व में हजारों किसानों ने ऊंचा गन्ना मूल्य, समय पर पेराई और विलंबित बकाया पर ब्याज की मांग उठाई थी।
उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं और पेराई सत्र की शुरुआत के करीब आते ही भाव का सवाल हर साल राजनीतिक रंग ले लेता है। सरकार के लिए चुनौती यह है कि किसानों की मांग, मिलों की आर्थिक स्थिति और चीनी के बाजार भाव के बीच संतुलन बनाए। पिछले साल ₹30 की बढ़ोतरी हुई थी — इस बार किसानों की अपेक्षा उससे कहीं ज्यादा है।
सरकार के पास विकल्प क्या हैं
केंद्र सरकार ने 2025-26 सत्र के लिए एफआरपी (FRP) का भाव तय कर रखा है, लेकिन उत्तर प्रदेश में राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) हमेशा एफआरपी से ऊपर रहा है। किसान संगठनों का तर्क है कि गन्ना किसानों की लागत में जो बढ़ोतरी हुई है, वह पिछले भाव संशोधनों से पूरी नहीं हुई। दूसरी ओर, चीनी उद्योग का कहना है कि चीनी के थोक भाव पर नियंत्रण और स्टॉक सीमाओं के चलते मिलों का मार्जिन पहले से दबा है। उप समिति की सिफारिश अब शासन के पास जाएगी और अंतिम फैसला कैबिनेट स्तर पर होगा। किसानों को इस पर नजर रखनी चाहिए कि घोषणा कब और कितने की होती है।
किसान के लिए आगे क्या मायने रखता है
पेराई सत्र 2026-27 की शुरुआत अब निकट है और अक्टूबर के अंत तक कई मिलों में पेराई शुरू होने की तैयारी चल रही है। ऐसे समय में गन्ना भाव का ऐलान किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल है। किसानों को सलाह है कि:
- गन्ना आपूर्ति के लिए अपने सर्वे रिकॉर्ड, रकबा और किस्म का विवरण सही रखे रखें
- बैंक खाते सक्रिय और आधार से लिंक्ड रखें ताकि भुगतान में देरी न हो
- पर्ची कैलेंडर और खरीद केंद्रों की जानकारी ई-गन्ना पोर्टल से समय पर जांचते रहें
- भाव की आधिकारिक घोषणा तक किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें
पूछे जाने वाले प्रश्न
7 अक्टूबर को लखनऊ में हुई बैठक में क्या हुआ?
गन्ना आयुक्त कार्यालय, लखनऊ में 2026-27 सत्र के गन्ना मूल्य निर्धारण पर गठित उप समिति की बैठक हुई, जिसमें बलरामपुर गन्ना समिति के अध्यक्ष प्रतिनिधि रणवीर सिंह रन्नू ने गन्ना मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग रखी। मांग पर सकारात्मक चर्चा हुई।
क्या ₹600 का भाव घोषित हो गया है?
नहीं। यह बैठक उप समिति की थी। 2026-27 सत्र के लिए गन्ना भाव (SAP) की आधिकारिक घोषणा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की जाएगी और अभी बाकी है।
2025-26 सत्र में गन्ने का भाव कितना था?
2025-26 सत्र में अगेती किस्म का भाव ₹400 प्रति क्विंटल और सामान्य किस्म का भाव ₹390 प्रति क्विंटल तय हुआ था, जिसमें ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी शामिल थी।
बैठक में गन्ना विभाग के कौन से अधिकारी मौजूद थे?
अपर गन्ना आयुक्त (प्रशासन), अपर गन्ना आयुक्त (समितियां) और अपर गन्ना आयुक्त (क्रय) सहित गन्ना मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न चीनी मिलों के प्रतिनिधि और मिल मालिक मौजूद रहे।
किसानों की लागत बढ़ने का मुख्य कारण क्या बताया गया?
खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी की बढ़ती कीमतें। इसी आधार पर किसान प्रतिनिधियों का कहना है कि उचित और लाभकारी मूल्य तय किया जाना जरूरी है।
स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (बलरामपुर संस्करण), चिनीमंडी (हिंदुस्तान के हवाले से), कपिलवस्तु पोस्ट
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