इंटरनेशनल ट्रेड शो में गन्ने की 4 नई किस्मों का धमाका: 100 टन तक उपज, लाल सड़न रोग से भी सुरक्षित

🚨 ब्रेकिंग: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए आज ग्रेटर नोएडा से बड़ी खबर सामने आई है। इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर गन्ने की चार नई उन्नत किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। इन किस्मों की उपज क्षमता करीब 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर बताई जा रही है, और सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये गन्ने के सबसे खतरनाक रोग — लाल सड़न (रेड रॉट) — के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति रखती हैं। लाल सड़न से तबाह हो रही पुरानी किस्मों से जूझ रहे लाखों किसानों के लिए यह खबर किसी राहत से कम नहीं है।
ट्रेड शो में क्या हुआ
ग्रेटर नोएडा में चल रहे इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने अपने स्टॉल पर उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR) द्वारा विकसित गन्ने की नवीन उन्नत चार किस्मों को प्रदर्शित किया। विभाग के अनुसार, इन किस्मों का मकसद प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता और चीनी परता बढ़ाने के साथ किसानों की आय में इजाफा करना और लाल सड़न रोग के प्रभाव को कम करना है।
यह प्रदर्शन ऐसे समय पर हुआ है, जब प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। हाल के वर्षों में लाल सड़न रोग ने प्रदेश की प्रमुख गन्ना किस्मों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे चीनी उत्पादन में भी गिरावट आई है। ऐसे में नई रोगरोधी किस्मों का सार्वजनिक प्रदर्शन किसानों के बीच एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
ये हैं गन्ने की 4 नई उन्नत किस्में
ट्रेड शो में जिन चार किस्मों को प्रदर्शित किया गया है, उनके नाम हैं — को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231। ये सभी किस्में उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR) ने विकसित की हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ये किस्में प्रदेश की मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल विकसित की गई हैं, ताकि किसान इन्हें आसानी से अपनाकर ज्यादा पैदावार ले सकें।
गौरतलब है कि गन्ने की किस्मों के नाम में “को.शा.” का मतलब है कि ये कोयंबटूर-शाहजहांपुर शोध श्रृंखला से जुड़ी हैं, और यही पहचान इन किस्मों के वैज्ञानिक चयन और परीक्षण का प्रमाण मानी जाती है।
क्यों खास हैं ये किस्में — 5 बड़ी खूबियां
विभाग की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इन चारों नई किस्मों में कई ऐसी खूबियां हैं, जो इन्हें पुरानी किस्मों से अलग बनाती हैं:
1. 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर उपज: इन किस्मों की उपज क्षमता लगभग 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर बताई गई है। यह प्रदेश की औसत गन्ना उपज से काफी ज्यादा है। मतलब, एक ही खेत से ज्यादा गन्ना, ज्यादा चीनी मिल को आपूर्ति और ज्यादा आमदनी।
2. लाल सड़न रोग से सुरक्षा: इन उन्नत किस्मों में गन्ने के प्रमुख रोग लाल सड़न के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति पाई गई है। यह सबसे अहम खूबी है, क्योंकि लाल सड़न ने ही पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की सबसे लोकप्रिय किस्म को. 0238 को लगभग बर्बाद कर दिया है।
3. अच्छा अंकुरण और शुरुआती बढ़वार: इन किस्मों में अंकुरण अच्छा होता है और फसल की शुरुआती बढ़वार भी तेज रहती है। अच्छी शुरुआत का मतलब है कि फसल जल्दी स्थापित होती है और खरपतवार से भी बेहतर मुकाबला करती है।
4. ज्यादा पेराई योग्य गन्ने: मिल में पेराई योग्य गन्नों की संख्या अधिक होने से गन्ने की उत्पादकता और चीनी उत्पादन दोनों बढ़ने की संभावना रहती है। यानी खेत से मिल तक गन्ना कम बर्बाद होगा।
5. अच्छी पेड़ी क्षमता: इन किस्मों की एक अन्य खासियत अच्छी पेड़ी (राटून) क्षमता है। पेड़ी फसल का बेहतर उत्पादन होने से किसानों को अगली फसल तैयार करने में लागत कम लगेगी और अच्छा उत्पादन भी मिलेगा। पेड़ी में दोबारा बुवाई का खर्च बचता है, जो किसान की जेब के लिए सीधा फायदा है।
लाल सड़न से परेशान किसानों को बड़ी राहत की उम्मीद
प्रदेश के गन्ना किसान पिछले कुछ वर्षों से लाल सड़न रोग से जूझ रहे हैं। यह रोग गन्ने के तने को अंदर से सड़ा देता है, जिससे उपज और चीनी परता दोनों घट जाते हैं। प्रदेश में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली किस्म को. 0238 इस रोग से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई, और इसका सीधा असर प्रदेश के चीनी उत्पादन पर पड़ा।
ऐसे में लाल सड़न के प्रति रोगरोधी नई किस्मों का आना किसानों के लिए बेहद अहम है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रोगरोधी किस्मों को अपनाने से किसानों को दवा और उपचार पर होने वाला खर्च भी घटेगा और फसल का जोखिम भी कम होगा। गौरतलब है कि इससे पहले ICAR की नई किस्म करण-20 (को. 20016) को भी लाल सड़न के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। अब UPCSR की ये चार नई किस्में इस दिशा में एक और मजबूत कदम मानी जा रही हैं।
किसानों के लिए अभी क्या करें
नई किस्मों के बारे में जानकारी मिलने के बाद किसानों के मन में सबसे पहला सवाल यही होगा कि इनका बीज कब और कहां से मिलेगा। ट्रेड शो में फिलहाल किस्मों का प्रदर्शन किया गया है, यानी इन्हें किसानों के बीच पहुंचाने की प्रक्रिया अब गति पकड़ सकती है। किसानों को सलाह दी जाती है कि:
- अपने क्षेत्र के गन्ना विकास विभाग के अधिकारियों या गन्ना समिति से इन नई किस्मों के बीज वितरण कार्यक्रम के बारे में जानकारी लेते रहें।
- बीज लेते समय अधिकृत स्रोत से ही बीज लें, ताकि किस्म की शुद्धता बनी रहे।
- बुवाई से पहले गन्ना समिति में अपने सट्टे और रकबे का रिकॉर्ड दुरुस्त करा लें, ताकि नई किस्म का गन्ना मिल को आपूर्ति करने में कोई दिक्कत न आए।
किसान भाइयों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी नई किस्म अपनाने से पहले अपने क्षेत्र की मिट्टी और पानी की स्थिति के हिसाब से स्थानीय कृषि अधिकारियों से सलाह जरूर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: ट्रेड शो में प्रदर्शित गन्ने की 4 नई किस्में कौन-कौन सी हैं? उत्तर: को.शा. 19231, को.शा. 18231, को.शा. 13235 और को.शा. 17231। ये चारों किस्में उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद (UPCSR) द्वारा विकसित की गई हैं और इन्हें ग्रेटर नोएडा के इंटरनेशनल ट्रेड शो में चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के स्टॉल पर प्रदर्शित किया गया।
प्रश्न: इन नई किस्मों की उपज क्षमता कितनी है? उत्तर: विभाग के अनुसार, इन किस्मों की उपज क्षमता लगभग 90 से 100 टन प्रति हेक्टेयर है, जो प्रदेश की औसत उपज से काफी अधिक है।
प्रश्न: क्या ये किस्में लाल सड़न रोग से सुरक्षित हैं? उत्तर: हां, इन उन्नत किस्मों में गन्ने के प्रमुख रोग लाल सड़न के प्रति रोगरोधी या प्रतिरोधी प्रवृत्ति पाई गई है। इसके अलावा इनमें अच्छा अंकुरण, तेज शुरुआती बढ़वार और अच्छी पेड़ी क्षमता भी है।
प्रश्न: किसानों को इन किस्मों का बीज कहां से मिलेगा? उत्तर: फिलहाल ट्रेड शो में इन किस्मों का प्रदर्शन किया गया है। बीज वितरण के लिए किसान अपने क्षेत्र के गन्ना विकास विभाग के अधिकारियों या गन्ना समिति से संपर्क करके जानकारी ले सकते हैं।
प्रश्न: पेड़ी क्षमता अच्छी होने से किसान को क्या फायदा होगा? उत्तर: अच्छी पेड़ी क्षमता का मतलब है कि पहली फसल के बाद पेड़ी (राटून) फसल से भी अच्छा उत्पादन मिलेगा। इससे अगली फसल की बुवाई पर होने वाली लागत बचेगी और किसान को कम खर्च में ज्यादा उत्पादन मिलेगा।
स्रोत: नईदुनिया (29 सितंबर 2026), दैनिक संवाद (29 सितंबर 2026)
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