20 अक्टूबर से पेराई शुरू होने वाली है: गन्ना पका है या कच्चा? 6 वैज्ञानिक निशानों से जांचें, चीनी और वजन दोनों बढ़ेगी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें इस बार करीब 10 दिन पहले पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं — अक्टूबर के पहले हफ्ते तक बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल पूरे हो जाएंगे, और मौसम साथ रहा तो 20 अक्टूबर के आसपास मिलें चलने लगेंगी। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में मरम्मत का काम तेज गति से चल रहा है।
लेकिन मिल चलने से पहले हर किसान के सामने एक ही सवाल है — मेरा गन्ना कटा जाए या अभी इंतजार किया जाए? जल्दी काटने पर चीनी कम निकलती है, और ज्यादा देर खेत में खड़ा रखने पर भी नुकसान होता है। कृषि विज्ञान के मुताबिक गलत समय पर कटाई से चीनी की मात्रा घटती है और रेशे की मात्रा बढ़ जाती है — यानी गलत टाइमिंग का खामियाजा सीधे किसान की जेब और मिल की रिकवरी दोनों पर पड़ता है।
तो गन्ना पका है या नहीं, इसकी पहचान के 6 वैज्ञानिक निशान जान लीजिए — ताकि पेराई शुरू होते ही आप सही फैसला ले सकें।
निशान 1: उम्र का हिसाब — 10 से 12 महीने का नियम
परिपक्वता का सबसे पहला और आसान पैमाना है फसल की उम्र। गन्ने की अगेती किस्में आमतौर पर 10 महीने में और पछेती किस्में 12 महीने में पकती हैं। कोयंबटूर स्थित शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट के पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज में कटाई की उम्र 10 महीने बताई गई है। हालांकि मौसम, खाद-पानी और किस्म के हिसाब से यह थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है — ठंड ज्यादा पड़ी हो या बारिश देर से हुई हो, तो पकाव में देरी भी हो सकती है। इसलिए उम्र को सिर्फ पहला संकेत मानें, आखिरी फैसला बाकी निशानों के साथ मिलाकर करें।
निशान 2: निचली पत्तियों का पीला पड़ना और सूखना
पका गन्ना पहचानने का सबसे साफ दृश्य संकेत है पत्तियों का रंग। जैसे-जैसे गन्ना पकता है, निचली पत्तियां धीरे-धीरे पीली पड़कर सूखने लगती हैं और ऊपर हरी पत्तियों की संख्या कम होती जाती है। शुगर रिसर्च ऑस्ट्रेलिया की गाइड के मुताबिक पूरे खेत में पत्तियों का एक जैसा पीलापन पकाव का अच्छा संकेत है।
निशान 3: गन्ने के तने का रंग और गांठों का आकार
पके गन्ने के निचले हिस्से का तना हल्का पीला-भूरा दिखने लगता है, जबकि कच्चे गन्ने में हरापन ज्यादा होता है। एक और बारीक निशान है — तने के ऊपरी हिस्से में गांठों (इंटरनोड्स) का छोटा होना। खेत में 4-5 गन्नों को ध्यान से देखकर यह अंतर आसानी से पहचाना जा सकता है।
निशान 4: कटकर देखने का देसी परीक्षण
गन्ने को तेज चाकू से काटकर धूप की रोशनी में देखें। पका गन्ना कटने पर हल्की चमक दिखाता है, जबकि कच्चे गन्ने का कटाव ज्यादा पानीदार और गीला दिखता है। यह सदियों पुराना खेत-स्तरीय परीक्षण आज भी काम करता है — चमकदार कटाव मतलब चीनी भर चुकी है, गीला कटाव मतलब अभी इंतजार कीजिए।
निशान 5: हैंड रिफ्रैक्टोमीटर — ब्रिक्स 18 से 20 तक
अगर आपके पास हैंड रिफ्रैक्टोमीटर है, तो यह सबसे पक्का तरीका है। कृषि ई-कोर्स (ई-एग्री, एग्रो301) के मुताबिक 18 से 25 प्रतिशत ब्रिक्स रीडिंग परिपक्वता का अच्छा स्तर दर्शाती है। एक शोध अध्ययन में पाया गया कि ब्रिक्स 18 प्रतिशत से ऊपर, चीनी 16 प्रतिशत से ऊपर और शुद्धता 85 प्रतिशत से ऊपर हो, तो गन्ना परिपक्व माना जाता है।
निशान 6: ऊपर-नीचे का अनुपात 1:1
शुगर रिसर्च ऑस्ट्रेलिया की गाइड का सबसे अहम नियम: गन्ने के ऊपरी, बीच वाले और निचले हिस्से का रस निकालकर अलग-अलग ब्रिक्स जांचें। कच्चे गन्ने में नीचे का ब्रिक्स ज्यादा और ऊपर का कम होता है; ज्यादा पके गन्ने में उल्टा। जब ऊपर और नीचे की रीडिंग का अनुपात लगभग 1:1 हो जाए, तो वही कटाई का सही समय है।
कटाई से पहले के 4 जरूरी काम
सही समय पहचानने के बाद कटाई की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। पहला काम — कटाई से 4 से 6 हफ्ते पहले सिंचाई बंद कर दें, क्योंकि नमी कम होने से पकाव तेज होता है और चीनी की मात्रा बढ़ती है। ठंडी-सूखी हवा पकाव के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है।
दूसरा काम — खेत से सूखी पत्तियां और खरपतवार साफ कर दें। तीसरा काम — ई-गन्ना ऐप या caneup पोर्टल पर अपना प्री-कैलेंडर और पर्ची का शेड्यूल जांच लें, ताकि कटाई पर्ची मिलने के समय से मेल खाए। चौथा काम — सट्टा-सर्वे रिकॉर्ड (रकबा, किस्म) सत्यापित करा लें और बैंक खाता सक्रिय व आधार से जुड़ा रखें, ताकि भुगतान में देरी न हो।
कटा गन्ना बासी न होने दें — 24 से 72 घंटे का नियम
कटाई का सही समय चुनना आधी जंग है; बाकी आधी जंग है कटे गन्ने को जल्दी मिल तक पहुंचाना। न्यूज़18 की कृषि रिपोर्ट के मुताबिक कटा गन्ना धूप में रखने से नमी और वजन घटता है, जिसका सीधा असर भुगतान पर पड़ता है। इसलिए कटे गन्ने को ढककर रखें और समय पर मिल या क्रय केंद्र पहुंचाएं।
एक वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया कि कटाई के 24 से 72 घंटे के भीतर पेराई हो जाए तो ब्रिक्स मानक के भीतर रहता है, लेकिन 72 घंटे से ज्यादा देरी पर ब्रिक्स में भारी गिरावट आती है — यह किसान और मिल दोनों का आर्थिक नुकसान है। कटाई हमेशा जमीन की सतह से सटाकर, धारदार औजार से करें।
इस सीजन का बड़ा सवाल — गन्ने का भाव अभी तय नहीं
यहां एक जरूरी बात साफ कर दें: पेराई सत्र 2026-27 के गन्ना मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में एसएपी अगेती किस्म के लिए 400 रुपये और सामान्य किस्म के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल था — लेकिन इसे इस सीजन का भाव समझने की गलती न करें। किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
याद रखें, नियम कहता है कि आपूर्ति के 14 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए, और देरी पर किसानों को 15 प्रतिशत ब्याज का हक है। पर्ची मिलते ही कटाई का सही समय चुनें, ताजा गन्ना समय पर पहुंचाएं — यही इस सीजन की सबसे बड़ी समझदारी है।
जवाब जानिए
सवाल: मेरी फसल 9 महीने की है, क्या काट दूं? जवाब: 9 महीने में गन्ना आमतौर पर पूरी तरह नहीं पकता। अगेती किस्में 10 महीने और पछेती 12 महीने में पकती हैं। ब्रिक्स जांच कराएं — 18 से ऊपर हो तो ही काटें, वरना चीनी कम निकलेगी।
सवाल: हैंड रिफ्रैक्टोमीटर कहां मिलेगा? जवाब: यह छोटा यंत्र कृषि उपकरण की दुकानों पर मिलता है। आपकी गन्ना समिति या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र पर भी जांच की सुविधा हो सकती है।
सवाल: कटाई के कितने दिन पहले पानी बंद करें? जवाब: कृषि गाइडों के मुताबिक कटाई से 4 से 6 हफ्ते पहले सिंचाई बंद कर देने से पकाव तेज होता है और चीनी की मात्रा बढ़ती है।
सवाल: कटा गन्ना कितने समय में मिल पहुंचना चाहिए? जवाब: कटाई के 24 से 72 घंटे के भीतर। 72 घंटे से ज्यादा देरी पर ब्रिक्स और वजन दोनों में भारी गिरावट होती है।
सवाल: पेराई कब से शुरू होगी? जवाब: पश्चिमी यूपी में मौसम साथ रहा तो 20 अक्टूबर के आसपास। 122 मिलों में से 71 पश्चिमी यूपी में हैं। अपनी मिल का शेड्यूल ई-गन्ना ऐप पर जांचते रहें।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया (मेरठ संस्करण), एग्रीइनसाइट, ई-एग्री कृषि ई-कोर्स, न्यूज़18, चीनीमंडी, ज़ीबिज़ (यूपी बजट 2026-27)।
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