पेराई से पहले गन्ना पर्ची नहीं आई? घबराएं नहीं — नाम छूटने पर ये 5 काम करें, आपूर्ति नहीं रुकेगी

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चीनी मिलें इस बार पिछले साल से करीब 10 दिन पहले, लगभग 20 अक्टूबर से पेराई शुरू करने की तैयारी में हैं। ऐसे में गन्ना पर्ची को लेकर किसानों की चिंता भी बढ़ गई है — अगर पर्ची समय पर नहीं आई या कैलेंडर में नाम छूट गया तो गन्ना मिल तक कैसे पहुंचेगा?
अच्छी खबर यह है कि पर्ची न आना कोई ऐसी समस्या नहीं जिसका समाधान न हो। गन्ना विभाग की व्यवस्था में पर्ची से जुड़ी हर दिक्कत के लिए तय प्रक्रिया मौजूद है। पेराई शुरू होने से पहले ये 5 काम कर लीजिए, तो पर्ची की दिक्कत आपकी आपूर्ति नहीं रोक पाएगी।
पर्ची क्यों नहीं आती: 4 आम वजहें समझ लीजिए
पर्ची न आने के पीछे आमतौर पर चार कारण होते हैं। पहला — किसान गन्ना समिति का सदस्य ही नहीं बना है। दूसरा — सट्टा या सर्वे रिकॉर्ड में गड़बड़ी, जैसे रकबा या किस्म गलत दर्ज होना। तीसरा — बैंक खाता या मोबाइल नंबर पुराना या गलत होना। चौथा — इंडेंट या कैलेंडर बनते समय नाम छूट जाना।
इनमें से पहली तीन वजहें किसान खुद ठीक कर सकता है। चौथी वजह के लिए भी विभाग में सुनवाई की व्यवस्था है। इसलिए सबसे पहले यह पता लगाइए कि आपकी दिक्कत इनमें से कौन सी है।
पहला काम: 10 अक्टूबर से पहले समिति की सदस्यता ले लें
अगर आपने अभी तक गन्ना समिति की सदस्यता नहीं ली है, तो यही सबसे पहली और सबसे जरूरी चीज है। आयुक्त, गन्ना एवं चीनी (उत्तर प्रदेश) के ताजा आदेश के मुताबिक पेराई सत्र 2026-27 के लिए समिति सदस्यता और उपज बढ़ोतरी के आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अक्टूबर 2026 कर दी गई है। पहले यह सीमा 30 सितंबर थी। बारिश और बाढ़ से फसल को हुए नुकसान को देखते हुए किसानों की मांग पर यह राहत दी गई है।
इस फैसले की खबर लाइव हिंदुस्तान और किसान इंडिया दोनों ने दी है। खास बात यह है कि यह मौका उन किसानों के लिए सबसे ज्यादा काम का है जिन्होंने पहली बार गन्ना बोया है या कई साल बाद दोबारा गन्ने की खेती शुरू की है — ऐसे किसानों को सरकारी भाव पर मिल को गन्ना बेचने के लिए समिति का सदस्य होना ही होगा। सदस्यता के लिए अपने क्षेत्र की गन्ना विकास समिति में जाकर आवेदन करें और 10 अक्टूबर का इंतजार न करें, क्योंकि अंतिम दिनों में भीड़ बढ़ जाती है।
दूसरा काम: सट्टा और सर्वे रिकॉर्ड में गलती है तो सुधार कराएं
पर्ची जारी होने का आधार आपका सट्टा और गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड होता है। अगर इसमें रकबा या किस्म गलत दर्ज है, तो पर्ची गलत बनेगी या बनेगी ही नहीं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि पेराई से पहले अपने सर्वे रिकॉर्ड की जांच जरूर कर लें — रकबा और किस्म दोनों।
अपने क्षेत्र के गन्ना पर्यवेक्षक या समिति कार्यालय से संपर्क करके रिकॉर्ड मिलान कराएं और त्रुटि हो तो सुधार का अनुरोध करें। यह काम जितनी जल्दी होगा, कैलेंडर बनते समय आपका नाम सही दर्ज होगा।
तीसरा काम: बैंक खाता और मोबाइल नंबर दुरुस्त रखें
पर्ची से जुड़ी सूचनाएं और भुगतान दोनों सीधे किसान तक पहुंचते हैं — इसलिए बैंक खाता और मोबाइल नंबर का सही होना बहुत जरूरी है। विभाग की सलाह है कि किसान यह सुनिश्चित करें कि उनका बैंक खाता सक्रिय हो और जरूरी पहचान दस्तावेजों से जुड़ा हो, वरना भुगतान में देरी हो सकती है।
अगर आपने हाल में खाता बदला है, मोबाइल नंबर बदला है या खाता निष्क्रिय पड़ा है, तो समिति में जाकर रिकॉर्ड अपडेट करा लें। पर्ची कैलेंडर और भुगतान — दोनों की सूचना सही नंबर पर पहुंचेगी, तभी आप समय पर कार्रवाई कर पाएंगे। पेराई से पहले की पूरी तैयारी की सूची में भी यह बात विस्तार से बताई गई है।
चौथा काम: पर्ची कैलेंडर ऑनलाइन जांचते रहें
पर्ची जारी होने के बाद उसे ऑनलाइन भी देखा जा सकता है। caneup.in पोर्टल और ई-गन्ना ऐप पर किसान अपना सट्टा, कैलेंडर और पर्ची से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। कच्चा कैलेंडर ऑनलाइन चेक करने की पूरी विधि हमने पहले विस्तार से बताई थी — उसी तरह पक्का कैलेंडर आने पर भी अपना नाम और आपूर्ति की तारीख जरूर जांचें।
अगर कैलेंडर में आपका नाम है लेकिन पर्ची नहीं मिली, या नाम ही नहीं दिख रहा, तो इसका स्क्रीनशॉट या प्रिंट लेकर समिति कार्यालय जाएं। लिखित रिकॉर्ड के साथ शिकायत करने पर समाधान जल्दी होता है।
पांचवां काम: टोल-फ्री नंबर पर मदद लें
अगर ऊपर के सारे कदम उठाने के बाद भी समस्या बनी रहती है — पर्ची नहीं मिली, नाम छूटा है, या समिति स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही — तो गन्ना विकास विभाग के किसान कॉल सेंटर से संपर्क करें। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक गन्ना आयुक्त ने बताया है कि किसानों की समस्याओं के 24 घंटे समाधान के लिए मुख्यालय स्तर पर टोल-फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 स्थापित किया गया है।
इस नंबर पर अपनी समस्या दर्ज कराएं — पर्ची न मिलना, रिकॉर्ड में गलती या समिति से जुड़ी कोई भी दिक्कत। कॉल करते समय अपना नाम, गांव, समिति का नाम और सट्टा संख्या तैयार रखें।
याद रखने वाली 3 बातें
पहली — पर्ची की दिक्कत को आखिरी समय तक न टालें। मिलें 20 अक्टूबर के आसपास चलने वाली हैं, और कैलेंडर उससे पहले बनता है। दूसरी — हर कदम का लिखित या ऑनलाइन रिकॉर्ड रखें: आवेदन की रसीद, शिकायत संख्या। तीसरी — भुगतान में देरी होती है तो किसानों को ब्याज का भी हक है, जिसकी पूरी जानकारी हमने पहले दी थी।
पर्ची गन्ना किसान का सबसे बड़ा हथियार है — यह तय करती है कि आपका गन्ना कब, किस सेंटर पर और किस भाव पर तुलेंगा। थोड़ी सी समय पर की गई मेहनत पूरे सत्र की परेशानी बचा सकती है।
किसानों के सवाल, जवाब सहित
गन्ना पर्ची क्या होती है? पर्ची वह दस्तावेज है जिसके आधार पर किसान अपना गन्ना तय तारीख को तय क्रय केंद्र या मिल पर आपूर्ति करता है। बिना पर्ची के मिल गन्ना स्वीकार नहीं करती।
पर्ची पाने के लिए समिति की सदस्यता क्यों जरूरी है? नियम के मुताबिक सरकारी भाव पर चीनी मिलों को गन्ना बेचने के लिए किसान का गन्ना समिति का सदस्य होना अनिवार्य है। सदस्यता की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर 2026 है।
पर्ची कैलेंडर में नाम न हो तो क्या करें? पहले अपना सट्टा और सर्वे रिकॉर्ड जांचें, फिर समिति कार्यालय में लिखित शिकायत दें। समाधान न हो तो टोल-फ्री 1800-121-3203 पर संपर्क करें।
पहली बार गन्ना बोने वाले किसान पर्ची कैसे पाएं? 10 अक्टूबर 2026 से पहले गन्ना समिति की सदस्यता लें। सदस्य बनने के बाद ही पेराई सत्र 2026-27 में मिल को आपूर्ति का लाभ मिलेगा।
पर्ची ऑनलाइन कहां चेक कर सकते हैं? caneup.in पोर्टल और ई-गन्ना ऐप पर किसान अपना सट्टा, कैलेंडर और पर्ची से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।
पर्ची मिलने के बाद भुगतान कब तक आता है? भुगतान सीधे बैंक खाते में आता है। खाता सक्रिय और पहचान दस्तावेजों से जुड़ा होना चाहिए, वरना देरी हो सकती है। देरी पर ब्याज का प्रावधान भी है।
स्रोत: लाइव हिंदुस्तान (अक्टूबर 2026), किसान इंडिया (अक्टूबर 2026), टाइम्स ऑफ इंडिया (सितंबर 2026)।
अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।
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