गन्ने की पत्ती न जलाने वाले किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान, मल्चिंग से जैविक खाद बनाने का अभियान

गन्ने की पत्ती न जलाने वाले किसानों को 1000 रुपये प्रति एकड़ अनुदान, मल्चिंग से जैविक खाद बनाने का अभियान
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Aamir Raza - 2026-08-31
मेरठ/बुलंदशहर/अमरोहा (विशेष संवाददाता)। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सर्दी के मौसम में वायु प्रदूषण (स्मॉग) पर नियंत्रण पाने और मिट्टी की उर्वरा शक्ति को नष्ट होने से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यावरण एवं कृषि विभाग ने ‘गन्ना पत्ती अवशेष प्रबंधन प्रोत्साहन योजना’ (Sugarcane Trash In-situ Management Scheme 2026) लागू की है।
इस योजना के तहत जो किसान गन्ने की कटाई के बाद खेत में सूखी पत्ती (अगौला व सूखी खोई) को आग लगाने के बजाय ‘ट्रैश कटर’ या ‘मल्चर’ चलाकर खेत में ही मिलाएंगे, उन्हें सरकार की ओर से ₹1,000 प्रति एकड़ की सीधी प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से बैंक खाते में दी जाएगी।
पत्ती जलाने से खेत को होता है प्रति एकड़ ₹4,000 का नुकसान
भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार, गन्ने की एक एकड़ फसल से लगभग 3 से 4 टन सूखी पत्ती निकलती है। जब किसान इसमें आग लगाते हैं, तो खेत की ऊपरी 5 सेंटीमीटर मिट्टी का तापमान 60 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि आग लगाने से मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और मित्र सूक्ष्म जीवाणु (जैसे राइजोबियम, ट्राइकोडर्मा) जलकर राख हो जाते हैं। इसके विपरीत, जब इस पत्ती को मल्चर से काटकर कतारों के बीच बिछा दिया जाता है, तो यह 45 दिनों में सड़कर 1.5 टन उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (ह्यूमस) में बदल जाती है।
| प्रबंधन का तरीका | मिट्टी के जैविक कार्बन पर प्रभाव | नमी संरक्षण | लागत / प्रोत्साहन |
|---|---|---|---|
| खेत में आग लगाना | जैविक कार्बन 50% नष्ट, मित्र कीट खत्म | नमी 100% खत्म, बार-बार सिंचाई | ₹0 (NGT द्वारा ₹5,000 जुर्माना संभव) |
| ट्रैश कटर से मल्चिंग | जैविक कार्बन 0.8% तक बढ़ा | 50% नमी सुरक्षित, खरपतवार नहीं | ₹1,000 प्रति एकड़ सरकारी प्रोत्साहन |
| वेस्ट डीकंपोजर का छिड़काव | 30 दिन में पूर्ण खाद में परिवर्तन | मिट्टी में केंचुओं की संख्या 3 गुना | ₹150 प्रति एकड़ मामूली खर्च |
सैटेलाइट निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट के जरिए खेतों में आग लगने की घटनाओं पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।
जो किसान अपने हल्का लेखपाल और गन्ना पर्यवेक्षक से खेत का भौतिक सत्यापन कराकर मल्चिंग का प्रमाण पत्र प्राप्त करेंगे, उनके बैंक खातों में 15 दिनों के भीतर ₹1,000 प्रति एकड़ की अनुदान राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी।
कस्टम हायरिंग सेंटरों पर उपलब्ध हैं आधुनिक मल्चर
जिन किसानों के पास अपने ट्रैक्टर या मल्चर मशीनें नहीं हैं, उनके लिए कृषि विभाग ने प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) स्थापित किए हैं।
किसान मात्र 200 से 250 रुपये प्रति एकड़ के नाममात्र किराये पर समिति से ट्रैश कटर बुक कर सकते हैं। मल्चिंग के बाद खेत में डीकंपोजर का छिड़काव करने से 30 से 40 दिनों के भीतर पूरी पत्ती प्राकृतिक जैविक खाद में तब्दील हो जाती है।
पश्चिमी यूपी के अमरोहा जिले की चीनी मिलों जैसे चंदनपुर चीनी मिल, असमौली चीनी मिल और अगवानपुर चीनी मिल ने किसानों को निःशुल्क वेस्ट डीकंपोजर की बोतलें बांटना शुरू किया है।
किसान भाई अपने सट्टे और पर्ची का विवरण enquiry.caneup.in पोर्टल पर देख सकते हैं। आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026-27 देखें और ई-गन्ना ऐप डाउनलोड करें।
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