गन्ने की पत्तियां जलाने पर ₹2500/हेक्टेयर जुर्माना, सरकार दे रही 80% अनुदान — CRM योजना से पत्तियां बनेंगी कमाई

गन्ना कटते ही खेत में बची सूखी पत्तियों को आग के हवाले कर देना यूपी के किसान की पुरानी आदत रही है। पत्तियां जलीं, खेत साफ, अगली फसल की तैयारी शुरू — यह सिलसिला सालों से चल रहा है। लेकिन इस बार तस्वीर बदल गई है। एक तरफ पत्तियां या फसल अवशेष जलाने पर प्रति हेक्टेयर 2500 रुपये जुर्माने का प्रावधान सख्ती से लागू हो रहा है, तो दूसरी तरफ सरकार इन्हीं पत्तियों के प्रबंधन के लिए कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।
यानी अब सवाल यह नहीं कि पत्तियां जलाएं या नहीं — सवाल यह है कि सरकार की मदद से उन्हें खेत में ही मिलाकर मिट्टी की ताकत बढ़ाएं, या जुर्माना भरें।
पत्तियां जलाना अब महंगा सौदा
उप कृषि निदेशक रवि कांत के अनुसार, धान के साथ-साथ गन्ने के खेतों में भी फसल अवशेष जलाने की समस्या सामने आती है। पत्तियां जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है और मिट्टी की उर्वरक क्षमता भी घटती है। आग की लपटों में मिट्टी के भीतर मौजूद लाभकारी जीवाणु भी नष्ट हो जाते हैं, जो फसल की सेहत के लिए जरूरी होते हैं।
नियमों के मुताबिक, अगर कोई किसान फसल अवशेष जलाते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जा सकता है। मौजूदा प्रावधान के तहत 2500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से जुर्माना वसूला जा सकता है। विभाग का कहना है कि इस कार्रवाई का मकसद किसानों पर बोझ डालना नहीं, बल्कि उन्हें अवशेषों के सही इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करना है।
गांव-गांव में जागरूकता अभियान भी चल रहा है — दीवारों पर पेंटिंग, होर्डिंग और प्रगतिशील किसानों के माध्यम से पत्तियां न जलाने की अपील की जा रही है।
CRM योजना क्या है — गन्ना किसानों के लिए क्यों जरूरी
फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना का मकसद किसानों को पराली और फसल के दूसरे अवशेष जलाने से रोकना है। किसान पत्तियों को खेत में ही मिला सकते हैं या जैविक खाद बनाने समेत दूसरे कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं।
गन्ना किसानों के लिए यह योजना इसलिए खास है, क्योंकि गन्ना कटाई के बाद खेत में भारी मात्रा में सूखी पत्तियां बचती हैं। इन्हें खेत में मिलाने से जैव-भार बढ़ता है और मिट्टी की दशा सुधरती है — लंबे समय में रासायनिक खाद की जरूरत भी घटती है।
कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान
योजना की सबसे बड़ी ताकत अनुदान है। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जरूरी कृषि यंत्रों पर किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इन मशीनों की मदद से किसान पत्तियों और अवशेषों को खेत में ही मिला सकते हैं, जिससे पत्तियां जलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि यंत्रीकरण की कई उप-योजनाओं के तहत चयन प्रक्रिया पूरी कर ली है। इनमें शामिल हैं:
कस्टम हायरिंग सेंटर: फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए 218 कस्टम हायरिंग सेंटरों के लिए 218 किसानों का चयन किया गया है। 30 लाख रुपये की इस परियोजना पर 80 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। जिन किसानों के पास अपनी मशीन नहीं है, वे इन केंद्रों से किराए पर यंत्र लेकर अपने खेत का काम करा सकते हैं।
एकल यंत्र योजना: 6,826 यंत्रों के लक्ष्य के सापेक्ष 6,228 किसानों का चयन हुआ है। महिला और अनुसूचित जाति-जनजाति के किसानों को 50 प्रतिशत, जबकि अन्य श्रेणी के किसानों को 40 प्रतिशत अनुदान मिलेगा।
सीबीजी एग्रीगेटर योजना: प्रदेश में 15 एग्रीगेटर तैयार किए जाएंगे। एक करोड़ रुपये की परियोजना लागत में 60 हॉर्स पावर से बड़ा एक ट्रैक्टर, दो अतिरिक्त ट्रैक्टर-ट्रॉली, बेलर, स्ट्रॉ रेक और अन्य मशीनें खरीदनी होंगी, जिस पर 65 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। इसके तहत किसानों के खेत से ही पराली और पुआल खरीदा जाएगा और सीधे प्लांट तक पहुंचाया जाएगा, जहां हरित गैस और जैविक खाद तैयार होगी।
फार्म मशीनरी बैंक (एफपीओ): 150 के लक्ष्य के मुकाबले 150 एफपीओ चुने गए हैं। दस लाख रुपये की परियोजना पर 80 प्रतिशत तक राज्य सहायता मिलेगी।
कौन-कौन सी मशीनें काम आएंगी
इनमें से सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, श्रेडर, मल्चर, बेलर, स्ट्रॉ रैक, क्रॉप रीपर और जीरो टिल ड्रिल जैसी मशीनें शामिल हैं।
गन्ना किसानों के लिए इनमें से मल्चर, श्रेडर और बेलर सबसे ज्यादा काम के हैं — श्रेडर पत्तियों को बारीक काटकर खेत में मिला देता है और बेलर पत्तियों की गांठें बनाकर उन्हें बेचने लायक बना देता है।
पत्तियां जलाने बनाम खेत में मिलाने — फर्क साफ है
पत्तियां जलाने पर खेत तुरंत साफ दिखता है, लेकिन मिट्टी के भीतर का नुकसान लंबे समय तक रहता है — लाभकारी जीवाणु नष्ट होते हैं और अगले सीजन में ज्यादा खाद डालनी पड़ती है। वहीं पत्तियों को खेत में मिलाने से जैव-भार बढ़ता है, नमी बनी रहती है और गन्ने की पेड़ी फसल को सीधा फायदा मिलता है, क्योंकि उसकी जड़ें पहले से खेत में होती हैं।
लाभ कैसे लें — क्या करें किसान
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करना चाहिए। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जरूरी कृषि यंत्रों की बुकिंग कराई जा रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की कई उप-योजनाओं में ई-लॉटरी के माध्यम से किसानों का चयन किया गया है — हर विकासखंड में केंद्र खोलने के लक्ष्य के तहत 826 किसानों को चुना गया है।
अगर आपका चयन इस बार नहीं हुआ है, तो भी निराश न हों — कस्टम हायरिंग सेंटरों से किराए पर मशीन लेकर अपने खेत की पत्तियों का प्रबंधन करा सकते हैं। अगले चरण की जानकारी के लिए कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क बनाए रखें।
ध्यान रहे — पत्तियां जलाने पर जुर्माना तय है, पर सही रास्ता अपनाने पर सरकार 80 प्रतिशत तक साथ खड़ी है। कटाई का सीजन शुरू होने से पहले ही अपनी योजना बना लें, ताकि पत्तियां बोझ नहीं, खेत की ताकत बनें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: गन्ने की पत्तियां जलाने पर कितना जुर्माना लग सकता है? जवाब: मौजूदा प्रावधान के तहत फसल अवशेष जलाते हुए पकड़े जाने पर 2500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से जुर्माना वसूला जा सकता है।
सवाल: CRM योजना में कितना अनुदान मिलता है? जवाब: फसल अवशेष प्रबंधन के कृषि यंत्रों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर (30 लाख की परियोजना) और एफपीओ मशीनरी बैंक (10 लाख की परियोजना) पर भी 80 प्रतिशत तक सहायता है। एकल यंत्र पर महिला और एससी-एसटी किसानों को 50 प्रतिशत, अन्य को 40 प्रतिशत अनुदान मिलता है।
सवाल: क्या यह योजना गन्ना किसानों पर भी लागू होती है? जवाब: हां। उप कृषि निदेशक के अनुसार धान के साथ-साथ गन्ने के खेतों में भी फसल अवशेष जलाने की समस्या है, और यह योजना सभी फसलों के अवशेष प्रबंधन के लिए है। मल्चर, श्रेडर और बेलर जैसी मशीनें गन्ने की पत्तियों के लिए सीधे काम की हैं।
सवाल: जिनके पास अपनी मशीन नहीं है, वे क्या करें? जवाब: वे कस्टम हायरिंग सेंटरों से किराए पर यंत्र लेकर अपने खेत का काम करा सकते हैं। 2026-27 में 218 कस्टम हायरिंग सेंटरों के लिए किसानों का चयन किया गया है।
सवाल: पत्तियां खेत में मिलाने से क्या फायदा? जवाब: जैव-भार बढ़ता है, मिट्टी की उर्वरक क्षमता और नमी बनी रहती है, लाभकारी जीवाणु सुरक्षित रहते हैं और लंबे समय में रासायनिक खाद की जरूरत घटती है।
स्रोत: न्यूज18 हिंदी (1 सितंबर 2026), ईटीवी भारत (अगस्त 2026)
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