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कटाई के बाद खेत खाली मत छोड़िए: पेडी गन्ने से मुख्य फसल जैसी पैदावार, 15 दिन में करें ये 7 काम, बुआई का खर्च बचेगा

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 6, 2026 • 6 min read
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कटाई के बाद खेत खाली मत छोड़िए: पेडी गन्ने से मुख्य फसल जैसी पैदावार, 15 दिन में करें ये 7 काम, बुआई का खर्च बचेगा
अंतिम अपडेट: October 6, 2026 7:30 AM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने वाला है और खेतों से गन्ना कटकर मिलों की ओर जाएगा। लेकिन जिस खेत से गन्ना कटता है, उसी की जड़ से अगली फसल भी मिल सकती है — इसे पेडी या रैटून कहते हैं। सही प्रबंधन से पेडी की पैदावार मुख्य फसल के बराबर या उससे 10 से 15 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकती है, और बुआई का पूरा खर्च बच जाता है।

उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारी डॉ. संजीव कुमार पाठक कहते हैं कि ठूंठ प्रबंधन, खाद का सही इस्तेमाल और समय पर सिंचाई ही पेडी की कामयाबी की कुंजी है। फिर भी ज्यादातर किसान पेडी पर कम ध्यान देते हैं, जिससे कल्ले कमजोर निकलते हैं। इस गाइड में जानिए कटाई के बाद पहले 15 दिनों में करने वाले 7 जरूरी काम।

पेडी फसल क्यों रखें?

गन्ने की एक फसल काटने के बाद उसी की जड़ से जो दूसरी फसल उगती है, उसे रैटून या पेडी कहते हैं। एक बार गन्ना लगाने के बाद किसान 2 से 3 साल तक उपज ले सकते हैं, बशर्ते प्रबंधन सही हो।

तीन बड़े फायदे हैं: खेत की तैयारी और बुआई का पूरा खर्च बच जाता है, जड़ तंत्र पहले से विकसित होने से फुटाव तेजी से होता है, और सही देखभाल से उपज 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। कम लागत में बराबर या ज्यादा पैदावार — यही वजह है कि वैज्ञानिक पेडी को “मुफ्त की दूसरी फसल” कहते हैं। याद रखिए, पेडी की कामयाबी कटाई के तुरंत बाद के 15 दिनों में तय होती है।

काम 1: ठूंठ की कटाई जमीन से सटाकर करें

गन्ने की कटाई हमेशा जमीन की सतह से सटाकर करनी चाहिए। अगर कटाई ऊपर से हुई है तो धारदार गंडासे से ठूंठों को जमीन के बराबर छांट दें। ऊंचे ठूंठ छोड़ने से कल्ले मिट्टी के ऊपर से निकलते हैं, जो कमजोर होते हैं और जल्दी सूख जाते हैं। वहीं जमीन के बराबर छंटे ठूंठों से मिट्टी के नीचे से मजबूत कल्ले निकलते हैं। कटाई के समय मजदूरों को साफ निर्देश दें कि ठूंठ ऊंचा न छोड़ें।

काम 2: कटे ठूंठों पर फफूंद का इलाज तुरंत करें

कटे ठूंठों में मिट्टी के रोगाणु घुसकर नए कल्लों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। डॉ. संजीव कुमार पाठक सलाह देते हैं कि कटाई के तुरंत बाद ठूंठों पर कार्बेंडाजिम के घोल का छिड़काव करें। इससे मिट्टी की बीमारियां नए कल्लों को नुकसान नहीं पहुंचातीं और पौधों की संख्या बनी रहती है। कटाई के 2-3 दिन के अंदर यह काम पूरा कर लें।

काम 3: सूखी पत्तियों को जलाएं नहीं, खेत में बिछाएं

कटाई के बाद खेत में बची सूखी पत्तियों को किसान अक्सर जला देते हैं। इससे प्रदूषण फैलता है और मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। सही तरीका यह है: पत्तियों को कतारों के बीच फैला दें या ट्रैश मल्चर मशीन से काटकर मिट्टी में मिला दें। ये कटी पत्तियां सड़कर जैविक खाद बन जाती हैं, नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं।

काम 4: पहली खुराक — पेडी को 25% ज्यादा नाइट्रोजन चाहिए

पेडी फसल को मुख्य फसल की तुलना में 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत होती है, क्योंकि पुरानी जड़ें पोषक तत्व तेजी से खींचती हैं। कृषि विभाग की सलाह के अनुसार नई पेडी के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 200 किलो यूरिया, 130 किलो डीएपी और 100 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश गन्ना पंक्तियों के करीब दें। खाद को ऊपर से फेंकने के बजाय जड़ों के पास मिट्टी में दबाकर दें। जिंक सल्फेट और फेरस सल्फेट का छिड़काव पीलापन दूर करने में बहुत प्रभावी होता है।

काम 5: रैटून मैनेजर मशीन से पुरानी जड़ों की छंटाई कराएं

पेडी फसल में मिट्टी का हल्का होना और जड़ों को हवा मिलना जरूरी है। इसके लिए रैटून मैनेजर मशीन सबसे बेहतर है — यह भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित है और पुरानी जड़ों की छंटाई, गहरी जुताई, मिट्टी चढ़ाना और उर्वरक डालने के काम एक साथ करती है। मशीन पुराने ठूंठों के किनारों को काटती है और खाद को जड़ों के पास गहराई में डालती है, जिससे नई जड़ों का विकास तेज होता है। एक साथ कई काम होने से श्रम और लागत दोनों की बचत होती है।

काम 6: शुरुआती 60 दिनों में खरपतवार पर कड़ी नजर

पेडी में खरपतवार तेजी से उगते हैं क्योंकि खेत पहले से खुला होता है। इन्हें रोकने के लिए शुरुआती 30 से 60 दिनों में कम से कम 2 बार निराई-गुड़ाई जरूर करें। साथ ही, जिन ठूंठों से कल्ले नहीं निकले हैं, उन्हें हटाकर खाली जगहों पर नए गन्ने लगाएं — इसे गैप फिलिंग कहते हैं। पूरी पंक्ति में एक समान पौध संख्या ही अच्छी उपज की गारंटी देती है।

काम 7: मिट्टी की सेहत के लिए जैविक खुराक

कृषि विभाग संवर्धित ट्राइकोडर्मा मिलाकर 10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से प्रेस्ड केक डालने का सुझाव देता है। प्रेस्ड केक चीनी मिलों से सस्ता मिल जाता है और मिट्टी की संरचना सुधारता है।

सर्दियों में पाले से बचाव के लिए ठूंठों पर इथरेल (12 मिली प्रति 100 लीटर पानी) का छिड़काव करें। इससे ठंड का प्रभाव कम होता है और फुटाव जल्दी होता है। ध्यान रहे, घोल बनाने के एक घंटे के भीतर छिड़काव कर दें, वरना असर कम हो जाता है।

पेडी न रखनी हो तो गेहूं की बुआई जल्दी करें

जिस खेत से गन्ना काटकर पेडी नहीं रखनी है, वहां गेहूं की बुआई जल्द से जल्द कर देनी चाहिए। विभाग की सलाह है कि दूसरी पेडी की कटाई के बाद जीरो टिल सीड ड्रिल से गेहूं की बुआई को प्राथमिकता दी जाए। खेत खाली छोड़ना दोनों तरफ से नुकसान है — कटाई के बाद 10-15 दिन के अंदर फैसला कर लें कि पेडी रखनी है या गेहूं बोना है।

आपके सवाल

प्रश्न: पेडी फसल कितने साल तक रख सकते हैं? उत्तर: एक बार गन्ना लगाने के बाद 2 से 3 साल तक पेडी से उपज ली जा सकती है, बशर्ते ठूंठ प्रबंधन, खाद और सिंचाई सही हो। तीसरे साल के बाद उपज घटने लगती है, तब नई बुआई बेहतर रहती है।

प्रश्न: पेडी में खाद मुख्य फसल से कितनी ज्यादा देनी चाहिए? उत्तर: पेडी को लगभग 25 प्रतिशत ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत होती है। विभागीय सलाह के अनुसार प्रति हेक्टेयर करीब 200 किलो यूरिया, 130 किलो डीएपी और 100 किलो पोटाश पंक्तियों के पास दबाकर दें।

प्रश्न: क्या पेडी की उपज वाकई मुख्य फसल जैसी होती है? उत्तर: हां, सही प्रबंधन से पेडी की पैदावार मुख्य फसल के बराबर या 10 से 15 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकती है। इसके लिए कटाई के बाद पहले 15 दिनों के 7 काम समय पर करना जरूरी है — खासकर ठूंठ छंटाई, फफूंद से बचाव और पहली खाद।

प्रश्न: रैटून मैनेजर मशीन कहां से मिलेगी? उत्तर: यह मशीन भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित है। अपने जिले के गन्ना विभाग कार्यालय या सहकारी गन्ना विकास समिति से संपर्क करें — कई जगहों पर यह मशीन किराए पर भी उपलब्ध होती है।

प्रश्न: कटाई के बाद सूखी पत्तियां जलाना क्यों गलत है? उत्तर: पत्तियां जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट होते हैं और प्रदूषण फैलता है। इन्हें ट्रैश मल्चर से काटकर खेत में बिछाने से मुफ्त जैविक खाद मिलती है, नमी बनी रहती है और खरपतवार कम उगते हैं।

स्रोत: न्यूज़18 हिंदी (उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान), ज़ी बिज़नेस (कृषि विभाग सलाह), किसान तक

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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