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20 अक्टूबर से पेराई का काउंटडाउन: गन्ना किसानों की 7 तैयारी — भाव से बैंक खाते तक पूरी चेकलिस्ट जानिए

Aamir Raza Aamir Raza • Oct 13, 2026 • 6 min read
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20 अक्टूबर से पेराई का काउंटडाउन: गन्ना किसानों की 7 तैयारी — भाव से बैंक खाते तक पूरी चेकलिस्ट जानिए
अंतिम अपडेट: October 13, 2026 4:19 PM IST — यह आर्टिकल नियमित रूप से अपडेट किया जाता है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों में पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने में अब बस कुछ दिन बचे हैं, और संभावना है कि 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू हो जाए। लेकिन किसानों के मन में दो बड़े सवाल हैं — इस सत्र का भाव क्या होगा और पेराई से पहले क्या-क्या तैयार रखना चाहिए।

तस्वीर अभी आधी साफ है। केंद्र सरकार ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दिया है, लेकिन उत्तर प्रदेश के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। इसलिए हर किसान को अपनी 7 जरूरी तैयारी अभी से पूरी कर लेनी चाहिए।

पेराई कब शुरू होगी — 20 अक्टूबर का काउंटडाउन

बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली और मुरादाबाद की मिलों में मरम्मत-रखरखाव तेज है। बॉयलर पूजा और स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले हफ्ते तक पूरे हो गए हैं और मौसम अनुकूल रहने पर 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू हो सकती है — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले।

गन्ना आयुक्त ने अमरोहा, मुरादाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर की मिलों को 15 से 25 अक्टूबर के बीच पेराई शुरू करने का निर्देश दिया है। प्रदेश की 122 मिलों में से 71 से ज्यादा पश्चिमी यूपी में हैं। जल्दी पेराई से खेत समय से खाली होंगे और गेहूं की बुआई सही समय पर हो सकेगी।

भाव की तस्वीर साफ जानें — एफआरपी तय, एसएपी का इंतजार

पहली और सबसे जरूरी तैयारी है भाव की सही जानकारी। केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक के चीनी सत्र के लिए एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है — यह दर 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर लागू है। रिकवरी ज्यादा होने पर हर 0.1 प्रतिशत की बढ़त पर 3.56 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे, और रिकवरी 9.5 प्रतिशत से नीचे जाने पर भी 338.30 रुपये का न्यूनतम मूल्य मिलेगा।

उत्तर प्रदेश के एसएपी की घोषणा अभी नहीं हुई है। 2025-26 में एसएपी 400 रुपये (अगेती) और 390 रुपये (सामान्य) था। किसान संगठन 600 रुपये की मांग कर रहे हैं, लेकिन जब तक नया निर्णय नहीं होता, अफवाहों पर भरोसा न करें — सिर्फ आधिकारिक घोषणा को अंतिम मानें। एफआरपी और एसएपी के फर्क की पूरी गणित यहां समझें

तैयारी 1: गन्ना सर्वे रिकॉर्ड की जांच कर लें

मिल अधिकारियों की सलाह है कि किसान अपने गन्ने के सर्वे रिकॉर्ड की जांच जरूर कर लें — रकबा, किस्म और अन्य ब्योरे सही दर्ज हैं या नहीं। सर्वे में गलती पर पर्ची जारी होने में दिक्कत आ सकती है, इसलिए गन्ना पर्यवेक्षक से रिकॉर्ड की पुष्टि करा लें।

तैयारी 2: बैंक खाता सक्रिय और आधार से जुड़ा रखें

गन्ने का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में जाता है, इसलिए खाता सक्रिय होना बेहद जरूरी है। खाता चालू है, केवाईसी पूरी है और पहचान दस्तावेजों से लिंक है — यह सुनिश्चित कर लें। खाता निष्क्रिय होने या ब्योरे में गड़बड़ी पर भुगतान अटक सकता है, इसलिए पेराई से पहले बैंक जाकर स्थिति जांच लें।

तैयारी 3: पर्ची, कैलेंडर और तौल पर नजर रखें

पेराई सत्र में पर्ची ही किसान की असली ताकत है। आपूर्ति कैलेंडर जारी होते ही अपनी पर्ची की तारीख नोट कर लें। तौल केंद्र पर कांटे की रीडिंग खुद देखें और पर्ची के वजन से मिलान करें — गड़बड़ी पर किसान सतर्कता समितियों और जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क किया जा सकता है। पर्ची-कैलेंडर का तरीका यहां जानें और तौल निगरानी के नियम यहां पढ़ें

तैयारी 4: पुराने बकाये की स्थिति साफ कर लें

नया सत्र शुरू होने से पहले पिछले सत्र के बकाये की स्थिति भी जांच लें। नियमानुसार मिलों को गन्ना खरीद के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है, देरी पर ब्याज का प्रावधान है। बकाया लंबित हो तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से जानकारी लें — वसूली के लिए प्रशासन आरसी तक जारी कर सकता है।

तैयारी 5: नई किस्मों और बीज की योजना बनाएं

गन्ना शोध परिषद की ओर से नई अगेती किस्मों के बीज की सरकारी दरें जारी हो चुकी हैं। अगले सत्र में नई किस्म लगाना चाहते हैं, तो गन्ना पर्यवेक्षक से बीज की बुकिंग और उपलब्धता की जानकारी ले लें। प्रमाणित बीज से जमाव बेहतर होता है और पैदावार में सीधा इजाफा होता है — पुरानी किस्म लगातार लगाने से पैदावार घटती है।

तैयारी 6: ई-गन्ना ऐप और समिति से जुड़े रहें

उत्तर प्रदेश के गन्ना किसान ई-गन्ना ऐप और caneup.in पोर्टल से पर्ची, तौल, भुगतान और सर्वे की जानकारी घर बैठे देख सकते हैं — पेराई से पहले पंजीकरण करा लें। सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठकों से जुड़े रहें — पर्ची वितरण, बीज और भुगतान की सूचनाएं समिति के माध्यम से ही मिलती हैं।

तैयारी 7: गेहूं की बुआई का हिसाब पहले से लगाएं

जल्दी पेराई का सबसे बड़ा फायदा रबी की फसल को मिलेगा — खेत समय से खाली होने पर गेहूं की बुआई सही समय पर हो सकेगी। अभी से तय कर लें कि गन्ना कटने के बाद कौन-सी किस्म, कब और कैसे बोई जाएगी। खाद-बीज की व्यवस्था पहले से कर लें, ताकि बाद में भागदौड़ न करनी पड़े।

रकबा 47 हजार हेक्टेयर घटा — इसका मतलब क्या है

गन्ना विभाग के ताजा सर्वे के मुताबिक, प्रदेश में गन्ने का रकबा 28.87 लाख हेक्टेयर से घटकर 28.40 लाख हेक्टेयर रह गया है — करीब 47 हजार हेक्टेयर की कमी। बिजनौर, लखीमपुर खीरी और पीलीभीत जैसे बड़े गन्ना जिलों में भी रकबा घटा है; बढ़ती लागत, भुगतान में देरी और लंबी फसल अवधि इसके मुख्य कारण बताए गए हैं।

रकबा घटने से चीनी उत्पादन पर असर पड़ सकता है — इसीलिए मिलें इस बार जल्दी पेराई शुरू कर ज्यादा से ज्यादा गन्ना पेरना चाहती हैं। समय पर सही तरीके से गन्ना आपूर्ति करने वालों को मिलों से बेहतर सहयोग मिलने की संभावना रहेगी।

पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: पेराई सत्र 2026-27 में गन्ने का भाव क्या मिलेगा? उत्तर: एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय है। उत्तर प्रदेश के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है — 2025-26 में एसएपी 400 रुपये (अगेती) और 390 रुपये (सामान्य) था।

प्रश्न: पश्चिमी यूपी में पेराई कब शुरू होगी? उत्तर: 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की संभावना है — पिछले साल से करीब 10 दिन पहले। गन्ना आयुक्त ने अमरोहा, मुरादाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर की मिलों को 15 से 25 अक्टूबर के बीच पेराई शुरू करने का निर्देश दिया है।

प्रश्न: भुगतान में देरी हो तो किसान क्या करे? उत्तर: मिलों को 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी पर गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें।

प्रश्न: सर्वे रिकॉर्ड में गलती हो तो क्या होगा? उत्तर: पर्ची जारी होने में दिक्कत आ सकती है। पेराई से पहले गन्ना पर्यवेक्षक से रिकॉर्ड की पुष्टि जरूर करा लें।

प्रश्न: बैंक खाता निष्क्रिय होने पर भुगतान अटकेगा? उत्तर: हां, भुगतान सीधे बैंक खाते में जाता है। खाता निष्क्रिय या केवाईसी अधूरी होने पर भुगतान अटक सकता है।

प्रश्न: जल्दी पेराई से किसानों को क्या फायदा? उत्तर: खेत समय से खाली होंगे और गेहूं की बुआई सही समय पर हो सकेगी, जिससे रबी की पैदावार पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, चीनीमंडी, एग्रीइंसाइट, किसान तक, लाइव हिंदुस्तान

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Aamir Raza
लेखक एवं मुख्य संपादक

Aamir Raza

संस्थापक एवं प्रधान संपादक — CaneUp.xyz। उत्तर प्रदेश गन्ना उद्योग, पर्ची कैलेंडर, SAP/MSP मूल्य नीति, ई-गन्ना पोर्टल और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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